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हिंदी (सुलभभारती) Hindi (Sulabhbharati)

५ वी · ३७ पाठ · ३७ पाठांच्या नोट्स तयार

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पाठ

  1. 1आओ खेलेंनोट्स
  2. 2नंदनवननोट्स
  3. 3बूँदेंनोट्स
  4. 4योग्य चुनावनोट्स
  5. 5कश्मीरानोट्स
  6. 6पहचान हमारी - भाग (१)नोट्स
  7. 7पेटूरामनोट्स
  8. 8बधाई कार्डनोट्स
  9. 9करो और जानोनोट्स
  10. 10नीमनोट्स
  11. 11गड़ा धननोट्स
  12. 12मित्रतानोट्स
  13. 13बचतनोट्स
  14. 14पहचान हमारी - भाग (२)नोट्स
  15. 15मैं सड़क हूँनोट्स
  16. 16व्यायामनोट्स
  17. 17बोलो और जानोनोट्स
  18. 18गाँव और शहरनोट्स
  19. 19जीवननोट्स
  20. 20भाई-भाई का प्रेमनोट्स
  21. 21बालिका दिवसनोट्स
  22. 22रोबोटनोट्स
  23. 23जुड़ें हमनोट्स
  24. 24(अ) बोधनोट्स
  25. 25(ब) समान - विरुद्धनोट्स
  26. 26बीजनोट्स
  27. 27मुझे पहचानोनोट्स
  28. 28मुझे जानोनोट्स
  29. 29वीरों को प्रणामनोट्स
  30. 30सपूतनोट्स
  31. 31राष्ट्रीय त्योहारनोट्स
  32. 32(अ) हम अलग - रूप एकनोट्स
  33. 33(ब) छुक-छुक गाड़ीनोट्स
  34. 34ज्ञानीनोट्स
  35. 35बचावनोट्स
  36. 36निरीक्षणनोट्स
  37. 37चलो-चलेंनोट्स

५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 1

आओ खेलें

संक्षिप्त सार

"आओ खेलें" एक चित्र-पाठ है। चित्रों में बच्चे गाँव के मैदान में तरह-तरह के खेल खेल रहे हैं – गेंद से खेल, गिल्ली-डंडा, कबड्डी, क्रिकेट और खो-खो जैसे खेल। पाठ बच्चों से चित्र देखकर खेलों के नाम बताने और अपने पसंदीदा खेल के बारे में बोलने को कहता है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्रवाचन (पहचानो और बताओ)।
  • पहले चित्र में बच्चे पत्थरों का ढेर (सितोलिया/पिट्ठू) और गेंद से खेल रहे हैं।
  • दूसरे चित्र में बच्चे गिल्ली-डंडा खेल रहे हैं।
  • तीसरे चित्र में दो टोलियाँ आमने-सामने हैं – कबड्डी जैसा खेल।
  • चौथे चित्र में लड़कियाँ बल्ला-गेंद से क्रिकेट खेल रही हैं।
  • एक चित्र में बच्चे कतार में बैठे/खड़े हैं – खो-खो जैसा खेल।
  • खेल मिल-जुलकर खेले जाते हैं; इनसे शरीर स्वस्थ रहता है और दोस्ती बढ़ती है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • खेल – मनोरंजन और व्यायाम के लिए की जाने वाली क्रिया।
  • टोली – समूह, टीम।
  • मैदान – खुली जगह जहाँ खेलते हैं।

भाषा अध्ययन

  • खेलों के नाम: कबड्डी, खो-खो, गिल्ली-डंडा, क्रिकेट, लंगड़ी, पिट्ठू।
  • वाक्य बनाओ: "मुझे कबड्डी खेलना पसंद है।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. चित्र में बच्चे कौन-कौन से खेल खेल रहे हैं?

गिल्ली-डंडा, कबड्डी, क्रिकेट, खो-खो और गेंद-पत्थर वाला खेल।

Q2. तुम्हारा प्रिय खेल कौन-सा है?

मेरा प्रिय खेल कबड्डी है (अपना उत्तर लिखो)।

Q3. खेलने से क्या लाभ होते हैं?

शरीर मजबूत होता है, मन खुश रहता है और दोस्त बनते हैं।

Q4. कोई दो खेल लिखो जो टोली में खेले जाते हैं।

कबड्डी और खो-खो।

Q5. घर के अंदर खेले जाने वाले दो खेल लिखो।

कैरम और शतरंज।

परीक्षा टिप

चित्र देखकर पूरे वाक्य में बोलो, जैसे – "बच्चे मैदान में क्रिकेट खेल रहे हैं।"

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 2

नंदनवन

संक्षिप्त सार

"नंदनवन" एक चित्र-पाठ है। इसमें एक सुंदर वन दिखाया गया है, जहाँ तोता, हाथी, खरगोश, सियार, तितली और कई पशु-पक्षी रहते हैं। जानवर एक-दूसरे से "नमस्ते", "स्वागत है", "प्रणाम" कहते हैं। पाठ पेड़ लगाने, पानी बचाने और सब प्राणियों के साथ मिलकर रहने का संदेश देता है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्रवाचन (देखो, बताओ और कृति करो)।
  • घोषवाक्य: "पौधे लगाओ, पेड़ बचाओ।" "हरियाली में खुशहाली।" "जल ही जीवन है।"
  • तोता कहता है – "नमस्ते!" खरगोश – "स्वागत है।"
  • जानवर कहते हैं – "नाचो-गाओ।", "कतार में चलो।" (हाथी), "हम सब साथ हैं।" (सियार)
  • अगले चित्र में भी कई प्राणी हैं; वहाँ "प्रणाम!", "नमस्कार!", "आओ खेलें!" लिखा है।
  • पेड़, पानी और जानवर – सब मिलकर पर्यावरण का संतुलन बनाते हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • नंदनवन – सुंदर, आनंद देने वाला वन।
  • हरियाली – पेड़-पौधों का हरा रंग, हरे-भरे पौधे।
  • पर्यावरण – हमारे आसपास की प्रकृति।

भाषा अध्ययन

  • अभिवादन के शब्द: नमस्ते, नमस्कार, प्रणाम, स्वागत है।
  • प्राणियों के नाम: हाथी, खरगोश, सियार, तोता, तितली, हिरन, मोर।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. चित्र में कौन-कौन से प्राणी दिखाई देते हैं?

तोता, हाथी, खरगोश, सियार, तितली आदि।

Q2. तोता क्या कहता है?

"नमस्ते!"

Q3. पेड़ क्यों बचाने चाहिए?

पेड़ हमें छाया, फल, शुद्ध हवा देते हैं और पशु-पक्षियों का घर हैं।

Q4. "जल ही जीवन है" का अर्थ बताओ।

पानी के बिना कोई जीव नहीं जी सकता, इसलिए पानी बचाना चाहिए।

Q5. अभिवादन के चार शब्द लिखो।

नमस्ते, नमस्कार, प्रणाम, स्वागत है।

परीक्षा टिप

घोषवाक्य ("पौधे लगाओ, पेड़ बचाओ", "जल ही जीवन है") याद रखो; ये छोटे प्रश्नों में पूछे जाते हैं।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 3

बूँदें

संक्षिप्त सार

"बूँदें" रोहिताश्व अस्थाना की बाल कविता है। इसमें बारिश की बूँदों का सुंदर वर्णन है। बूँदें रिमझिम गाती हुई धरती पर आती हैं, हरियाली फैलाती हैं, नदियों-सागर में मिल जाती हैं, गरमी से तपे लोगों को ठंडक देती हैं और सबका मन खुश कर देती हैं।

मुख्य बिंदु

  • कवि: रोहिताश्व अस्थाना।
  • विधा: कविता (सुनो और गाओ)।
  • बूँदें रिमझिम-रिमझिम गाती हुई धरती पर आती हैं।
  • खेतों, बागों और मैदानों में हरियाली फैलाती हैं।
  • धरती से नालों, नदियों में और फिर सागर में मिल जाती हैं।
  • गरमी से तपते लोगों को शीतलता (ठंडक) पहुँचाती हैं।
  • मेंढक, मोर, पपीहा, कोयल – सबका मन हर्षाती (खुश करती) हैं।
  • बूँदें पुरवाई (पूर्व की हवा) के रथ पर चढ़कर इठलाती, मुसकाती आती हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • रिमझिम – हल्की-हल्की बारिश की आवाज।
  • शीतलता – ठंडक।
  • पपीहा – एक पक्षी (चातक)।
  • पुरवाई – पूर्व दिशा से आने वाली हवा।
  • इठलाना – इतराना, नखरे से चलना।

भाषा अध्ययन

  • लयात्मक शब्द: रिमझिम-रिमझिम, गातीं, आतीं, फैलातीं, जातीं, मुसकातीं।
  • विलोम: गरमी × सर्दी, धरती × आकाश।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. बूँदें धरती पर कैसे आती हैं?

रिमझिम-रिमझिम गाती हुई।

Q2. बूँदें कहाँ-कहाँ हरियाली फैलाती हैं?

खेतों, बागों और मैदानों में।

Q3. बूँदें किन-किन का मन हर्षाती हैं?

मेंढक, मोर, पपीहा और कोयल का।

Q4. बूँदें क्या-क्या करती हैं?

हरियाली फैलाती हैं, नदियों-सागर में मिलती हैं, लोगों को ठंडक देती हैं और सबको खुश करती हैं।

Q5. कविता में आए चार लयात्मक शब्द लिखो।

गातीं, आतीं, फैलातीं, मुसकातीं।

परीक्षा टिप

कविता की पंक्तियाँ लय के साथ गाकर याद करो; "बूँदें क्या करती हैं" प्रश्न जरूर आता है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 4

योग्य चुनाव

संक्षिप्त सार

"योग्य चुनाव" सुधा शर्मा की कहानी है। राजा मंगलसेन के बूढ़े मंत्री जगतराम को नया मंत्री चुनना था। रास्ते में एक बूढ़े की बैलगाड़ी का पहिया कीचड़ में फँसा था; सब उम्मीदवार अनदेखा करके चले गए, पर गरीब युवक कर्मवीर ने कीचड़ में उतरकर पहिया निकाला। वह बूढ़ा स्वयं मंत्री जगतराम थे, इसलिए कर्मवीर को नया मंत्री चुना गया।

मुख्य बिंदु

  • लेखिका: सुधा शर्मा। विधा: कहानी।
  • मंत्री जगतराम बूढ़े हो चुके थे; उन्होंने राजा से सेवामुक्त करने की विनती की।
  • राजा ने कहा – पहले अपने जैसा सेवाभावी, परोपकारी और ईमानदार मंत्री चुनो।
  • ढिंढोरा पिटवाया गया: अगले गुरुवार को ग्यारह बजे राजदरबार में नए मंत्री का चयन होगा।
  • चयन के दिन रास्ते में एक वृद्ध की बैलगाड़ी का पहिया कीचड़ में फँसा था; किसी उम्मीदवार ने मदद नहीं की।
  • निर्धन परिवार का प्रतिभाशाली युवक कर्मवीर कीचड़ में उतरा और जोर लगाकर पहिया निकाला।
  • वृद्ध ने इनाम देना चाहा, पर कर्मवीर ने विनम्रता से मना किया।
  • कीचड़ से सने कपड़ों में देर से पहुँचे कर्मवीर पर सब हँसे; तभी वह वृद्ध आया – वह स्वयं मंत्री जगतराम थे।
  • राजा ने कहा – जो सामान्य आदमी की पीड़ा से दुखी होता है, वही ऊँचे पद का अधिकारी है। कर्मवीर नए मंत्री बने।

महत्वपूर्ण शब्द

  • चुनाव / चयन – सही व्यक्ति को चुनना।
  • सेवामुक्त – काम से छुट्टी (रिटायर) होना।
  • ढिंढोरा पीटना – ढोल बजाकर घोषणा करना।
  • परोपकारी – दूसरों की भलाई करने वाला।
  • उम्मीदवार – पद पाने की इच्छा रखने वाला।

भाषा अध्ययन

  • विलोम: योग्य × अयोग्य, निर्धन × धनी, ईमानदार × बेईमान, वृद्ध × युवा।
  • मुहावरा: ढिंढोरा पीटना = सबको बताना। वाक्य: उसने अपनी जीत का ढिंढोरा पीट दिया।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. राजा मंगलसेन ने जगतराम से क्या कहा?

आप पहले अपने जैसे सेवाभावी, परोपकारी और ईमानदार मंत्री का चुनाव कर लीजिए, तभी सेवामुक्त किया जाएगा।

Q2. वृद्ध की बैलगाड़ी का पहिया किसने निकाला?

कर्मवीर ने।

Q3. कर्मवीर देर से क्यों पहुँचा?

वह वृद्ध की मदद के लिए कीचड़ में उतरा और बैलगाड़ी का पहिया निकाला।

Q4. कर्मवीर को मंत्री क्यों चुना गया?

क्योंकि उसमें सेवाभाव, परोपकार और ईमानदारी थी; वह दूसरों की पीड़ा से दुखी होता था।

Q5. इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

दूसरों की मदद करनी चाहिए; अच्छे गुण ही व्यक्ति को ऊँचा पद दिलाते हैं।

परीक्षा टिप

कहानी में "वृद्ध ही मंत्री जगतराम थे" – यह मोड़ जरूर लिखो; यही कहानी का सार है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 5

कश्मीरा

संक्षिप्त सार

"कश्मीरा" एक चित्र-पाठ है (अंतर बताओ)। इसमें जम्मू-कश्मीर की एक लड़की, कश्मीरा, के दो एक जैसे दिखने वाले चित्र हैं। वह कश्मीरी पोशाक और गहने पहनकर, हाथ में चप्पू लेकर नाव (शिकारा) में बैठी है; पीछे पहाड़ और पेड़ हैं, पास में फूलों की टोकरी और घड़ा है। बच्चों को दोनों चित्र ध्यान से देखकर उनमें दस अंतर ढूँढ़ने हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्र – अंतर बताओ (ध्यान से देखने का अभ्यास)।
  • कश्मीरा जम्मू-कश्मीर की बेटी है।
  • वह झील में नाव पर बैठी है और चप्पू चला रही है।
  • पीछे बर्फीले पहाड़ और चीड़ जैसे पेड़ दिखते हैं।
  • उसके सामने फूलों से भरी टोकरी और एक सुंदर घड़ा रखा है।
  • दोनों चित्र लगभग एक जैसे हैं, पर पोशाक के डिजाइन, गहने, फूल, घड़े की सजावट जैसी छोटी बातों में अंतर है।
  • इस पाठ से निरीक्षण (ध्यान से देखने) की आदत बढ़ती है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • शिकारा – कश्मीर की डल झील में चलने वाली नाव।
  • चप्पू – नाव चलाने का डंडा।
  • निरीक्षण – ध्यान से देखना।
  • अंतर – फर्क।

भाषा अध्ययन

  • वाक्य बनाओ: "पहले चित्र में फूल ज्यादा हैं, दूसरे में कम हैं।"
  • विलोम: एक × अनेक, पास × दूर, ऊपर × नीचे।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. कश्मीरा कहाँ बैठी है?

नाव (शिकारे) में।

Q2. कश्मीरा के हाथ में क्या है?

चप्पू।

Q3. कश्मीरा किस राज्य की बेटी है?

जम्मू-कश्मीर की।

Q4. चित्र में कौन-कौन सी चीजें दिखाई देती हैं?

पहाड़, पेड़, झील, नाव, चप्पू, फूलों की टोकरी और घड़ा।

Q5. दो चित्रों में अंतर ढूँढ़ने से क्या लाभ होता है?

ध्यान से देखने की आदत और एकाग्रता बढ़ती है।

परीक्षा टिप

अंतर बताते समय "पहले चित्र में... है, पर दूसरे चित्र में... नहीं है" – इस तरह पूरे वाक्य में लिखो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 6

पहचान हमारी - भाग (१)

संक्षिप्त सार

"पहचान हमारी – भाग (१)" वर्णमाला की पहचान का पाठ है। इसमें चित्रों और शब्दों की मदद से कुछ वर्ण (जैसे छ, ह, ड, फ) और स्वर अ, आ, इ, ई, उ, ऊ तथा उनकी मात्राएँ सिखाई गई हैं। बच्चे चित्र देखकर शब्द पढ़ते हैं और बिना मात्रा व आ की मात्रा वाले शब्द पढ़ना-लिखना सीखते हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: देखो और सुनो (वर्ण-पहचान)।
  • इस पाठ में स्वर अ और आ तथा वर्ण छ, ह, ड, फ आदि पर ध्यान दिया गया है।
  • चित्र-शब्द: बछड़ा, हथेली, डमरू, फल, अदरक, अनार, दमकल, जलचर, कटहल।
  • आ की मात्रा (ा) वाले चित्र-शब्द: आकाश, घट, हाथ, कछुआ, शलगम, घड़ी, टमाटर, थपकी।
  • बिना मात्रा के शब्द पढ़ो: डर, फर, घर, रथ, शक, शरद, शहद, दशक, आदर, अरहर, अटककर।
  • आ की मात्रा वाले शब्द: आह, डाक, छाछ, थका, कथा, हरा, आशा, आका, काका, दादा, आहार, शारदा, शाकाहार, फटकार।
  • अगले पृष्ठ पर स्वर इ, ई, उ, ऊ हैं: इलायची, ईद, उड़नखटोला, ऊन, उल्लू, जुगनू, चमगादड़, ढलान, गठरी, चटाई, मकड़ी, लड़की, ढाल, ठप्पा।
  • पढ़ो: यह, नख, उर, आम, गठन, शपथ, ऊपर, चमचम, आई, माई, इरा, दादी, चूरा, कुरु, चिड़िया, शिकारी, जामुन, नूपुर, पिचकारी।
  • शेष वर्णमाला "पहचान हमारी – भाग (२)" में दी गई है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • वर्ण – भाषा की सबसे छोटी ध्वनि का चिह्न (क, ख, अ, आ)।
  • स्वर – अ, आ, इ, ई आदि; जो बिना दूसरे वर्ण की मदद के बोले जाते हैं।
  • व्यंजन – क, ख, ग आदि; जो स्वर की मदद से बोले जाते हैं।
  • मात्रा – स्वर का चिह्न जो व्यंजन के साथ लगता है (ा, ि, ी)।

भाषा अध्ययन

  • क + आ = का; घ + आ = घा; द + आ = दा।
  • शब्द बनाओ: घर, रथ (बिना मात्रा); काका, दादा, आशा (आ की मात्रा)।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. चित्र देखकर बताओ: "बछड़ा" किस वर्ण से शुरू होता है?

"ब" से।

Q2. आ की मात्रा वाले चार शब्द लिखो।

काका, दादा, आशा, हाथ।

Q3. बिना मात्रा वाले चार शब्द लिखो।

घर, रथ, शहद, डर।

Q4. स्वर और व्यंजन में क्या अंतर है?

स्वर अकेले बोले जाते हैं; व्यंजन स्वर की मदद से बोले जाते हैं।

Q5. इ, ई, उ, ऊ की मात्रा वाला एक-एक शब्द लिखो।

इ (ि) – चिड़िया; ई (ी) – दीदी; उ (ु) – जुगनू; ऊ (ू) – चूरा।

परीक्षा टिप

शब्दों को जोर से पढ़कर और कॉपी में लिखकर अभ्यास करो; मात्रा ठीक लगाना सबसे जरूरी है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 7

पेटूराम

संक्षिप्त सार

"पेटूराम" डॉ. त्रिलोकीनाथ व्रजवाल की एक हास्य संवाद-कविता है। एक मेहमान कहता है कि आज उसका उपवास है, इसलिए वह भोजन नहीं करेगा। पर मेजबान के पूछने पर वह अंगूर, केले, सेब, मेवा, मिठाई, दूध और रबड़ी – सब कुछ मँगवा लेता है और अंत में कहता है कि व्रत के दिन वह ज्यादा नहीं खाता! इसी से उसका नाम "पेटूराम" पड़ा।

मुख्य बिंदु

  • कवि: डॉ. त्रिलोकीनाथ व्रजवाल। विधा: हास्य कविता (संवाद रूप में)।
  • मेजबान कहती है – "चलिए, भोजन तैयार है।"
  • पेटूराम कहता है – "आज मेरा उपवास है।"
  • "उपवास में कुछ तो लेते होंगे?" – "हाँ, थोड़ा बहुत खा लेता हूँ।"
  • वह माँगता है: आधा किलो अंगूर, आधा दर्जन केले, एक किलो सेब, एक पाव मेवा, सवा पाव मिठाई, आधा लीटर दूध और रबड़ी।
  • अंत में: "नहीं – नहीं; आज मेरा उपवास है। व्रत के दिन मैं अधिक नहीं खाता।" – यही हास्य है।
  • सीख: दिखावा नहीं करना चाहिए; जितनी भूख हो उतना ही खाना चाहिए।

महत्वपूर्ण शब्द

  • पेटू – बहुत खाने वाला।
  • उपवास / व्रत – धार्मिक कारण से भोजन न करना या कम करना।
  • संकोच – झिझक।
  • दर्जन – बारह; पाव – किलो का चौथाई भाग।

भाषा अध्ययन

विरामचिह्न:

  • पूर्णविराम (।): आधा दर्जन केले, एक किलो सेब।
  • अल्पविराम (,): "हाँ, थोड़ा बहुत खा लेता हूँ।"
  • प्रश्नवाचक (?): अंगूर मिलते हैं?
  • विस्मयादिबोधक (!): मैं.....!
  • अर्धविराम (;): नहीं – नहीं; आज मेरा उपवास है।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. पेटूराम ने भोजन के लिए क्यों मना किया?

क्योंकि उसका उस दिन उपवास था।

Q2. पेटूराम ने कौन-कौन सी चीजें मँगवाईं?

अंगूर, केले, सेब, मेवा, मिठाई, दूध और रबड़ी।

Q3. "दर्जन" में कितनी चीजें होती हैं?

बारह; आधा दर्जन यानी छह।

Q4. कविता में हास्य कहाँ है?

उपवास के नाम पर वह बहुत-सी चीजें मँगवाता है और फिर भी कहता है कि व्रत के दिन वह अधिक नहीं खाता।

Q5. "अंगूर मिलते हैं?" – इस वाक्य में कौन-सा विरामचिह्न है?

प्रश्नवाचक चिह्न (?)।

परीक्षा टिप

विरामचिह्नों के नाम और चिह्न (। , ? ! ;) याद करो; हर चिह्न का एक उदाहरण इसी कविता से दो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 8

बधाई कार्ड

संक्षिप्त सार

"बधाई कार्ड" एक कृति-पाठ है। इसमें बताया गया है कि घर में मिलने वाली चीजों से अपने हाथ से सुंदर बधाई कार्ड कैसे बनाएँ। नमूने के कार्ड में पोती/पोता अपने दादा जी को जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: देखो, सुनो और बनाओ (हस्तकला)।
  • सामग्री: कागज, पुरानी साड़ी की लेस, टिकलियाँ, रंगीन काँच के छोटे-छोटे टुकड़े, कैंची, गोंद।
  • आवश्यक आकार में कागज काटो।
  • पुरानी साड़ी की लेस काटकर कार्ड के चारों किनारों पर चिपकाओ।
  • टिकलियाँ और काँच के टुकड़े उचित जगहों पर चिपकाओ।
  • स्केच पेन से रंगों की सजावट करो।
  • बधाई का संदेश लिखो।
  • कृति (विधि):
  • नमूना संदेश: "पूज्य दादा जी, सादर प्रणाम। जन्मदिन की बधाई! आपकी/आपका प्रिय पोती/पोता, स्वप्निल/मेघा।"
  • बड़ों के लिए प्रणाम, नमस्कार, नमस्ते; छोटों के लिए आशीष, स्नेह, प्यार जैसे शब्द लिखते हैं।
  • पुरानी चीजों का दोबारा उपयोग करना अच्छी आदत है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • बधाई – शुभकामना, मुबारकबाद।
  • सामग्री – काम के लिए जरूरी चीजें।
  • कृति – काम करने का तरीका।
  • पूज्य – आदरणीय।

भाषा अध्ययन

  • बड़ों के लिए संबोधन: पूज्य, आदरणीय; अभिवादन: सादर प्रणाम।
  • छोटों के लिए: प्रिय; शुभाशीष, स्नेह।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. बधाई कार्ड बनाने के लिए कौन-सी सामग्री चाहिए?

कागज, पुरानी साड़ी की लेस, टिकलियाँ, रंगीन काँच के टुकड़े, कैंची और गोंद।

Q2. कार्ड के किनारों पर क्या चिपकाते हैं?

पुरानी साड़ी की लेस।

Q3. नमूने का कार्ड किसके लिए बनाया गया है?

दादा जी के जन्मदिन के लिए।

Q4. बड़ों को कार्ड लिखते समय कौन-से शब्द लिखते हैं?

पूज्य, आदरणीय, सादर प्रणाम, नमस्कार।

Q5. अपने मित्र के जन्मदिन के लिए एक छोटा संदेश लिखो।

"प्रिय मित्र, जन्मदिन की ढेर सारी बधाई! तुम हमेशा खुश रहो। – तुम्हारा मित्र।"

परीक्षा टिप

कृति के चरण क्रम से (काटो → चिपकाओ → सजाओ → संदेश लिखो) लिखो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 9

करो और जानो

संक्षिप्त सार

"करो और जानो" एक चित्र-पाठ है। ऊपर के चित्रों में बच्चे तरह-तरह की क्रियाएँ कर रहे हैं – फुगड़ी खेलना, हँसना, नाचना, पगड़ी बाँधना, रस्सी कूदना, गाना, रोटी बेलना, झाड़ू लगाना, कपड़े धोना। नीचे के चित्रों में कुम्हार, पंसारी, फूलवाली और फलवाला अपना-अपना काम करते दिखाए गए हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: देखो और समझो (क्रियाओं और व्यवसायों की पहचान)।
  • क्रियाएँ: फुगड़ी खेलो, हँसो, नाचो, पगड़ी बाँधो, रस्सी कूदो, गाओ, रोटी बेलो, झाड़ू लगाओ, कपड़े धोओ।
  • कुम्हार – चाक पर मिट्टी के बर्तन (घड़े) बनाता है।
  • पंसारी – किराने का सामान (अनाज, दालें, मसाले) तौलकर बेचता है।
  • फूलवाली – गेंदा, गुलाब, कनेर, बेला, मोगरा, गुड़हल, कमल, सेवंती, मौलश्री जैसे फूल बेचती है।
  • फलवाला – अंगूर, केला, अनार, सेब, संतरा, सीताफल, अनन्नास जैसे फल बेचता है।
  • हर व्यवसाय समाज के लिए उपयोगी है; हमें सबके काम का आदर करना चाहिए।

महत्वपूर्ण शब्द

  • क्रिया – काम बताने वाला शब्द (हँसना, नाचना)।
  • कुम्हार – मिट्टी के बर्तन बनाने वाला।
  • पंसारी – किराने की दुकान वाला।
  • चाक – कुम्हार का घूमने वाला पहिया।

भाषा अध्ययन

  • क्रियाओं के आज्ञार्थक रूप: नाचना → नाचो; हँसना → हँसो; गाना → गाओ; धोना → धोओ।
  • वाक्य: "लड़की कपड़े धो रही है।" "बच्चा रस्सी कूद रहा है।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. चित्र में बच्चे कौन-कौन सी क्रियाएँ कर रहे हैं? (चार लिखो)

नाचना, गाना, रस्सी कूदना, झाड़ू लगाना।

Q2. कुम्हार क्या करता है?

चाक पर मिट्टी के घड़े और बर्तन बनाता है।

Q3. फूलवाली कौन-कौन से फूल बेचती है?

गेंदा, गुलाब, कनेर, बेला, मोगरा, गुड़हल, कमल आदि।

Q4. फलवाले की दुकान पर कौन-से फल हैं?

अंगूर, केला, अनार, सेब, संतरा, सीताफल, अनन्नास।

Q5. तुम घर पर कौन-से काम करते हो?

मैं झाड़ू लगाने और कपड़े तह करने में मदद करता/करती हूँ (अपना उत्तर लिखो)।

परीक्षा टिप

चित्र में दिखे काम को "...रहा है / रही है" वाले वाक्य में बोलो, जैसे – "कुम्हार घड़ा बना रहा है।"

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 10

नीम

संक्षिप्त सार

"नीम" लता पंत की कविता है, जिसमें नीम का पेड़ स्वयं अपने बारे में बताता है। वह कहता है कि मैं डॉक्टर, ओझा या वैद्य-हकीम नहीं, केवल एक पेड़ हूँ, फिर भी सबके काम आता हूँ – सूखी पत्तियाँ कपड़ों और अनाज को बचाती हैं, धुआँ मक्खी-मच्छर भगाता है, घनी छाया थकान मिटाती है और मैं हवा शुद्ध करता हूँ। इसलिए मुझे मत काटो।

मुख्य बिंदु

  • कवयित्री: लता पंत। विधा: कविता (अभिनय करते हुए गाओ)।
  • नीम कहता है: "ना मैं डॉक्टर, ना मैं ओझा" – मैं तो केवल एक पेड़ हूँ।
  • मेरी सूखी पत्तियाँ ऊनी कपड़ों और अनाज में डालो, तो वे कीड़ों से बचते हैं।
  • सूखी पत्तियों के धुएँ से मक्खी-मच्छर दूर भागते हैं।
  • घनी पत्तियों के कारण मेरी छाया शीतल है; नीचे आने वाले की गरमी और थकान मिट जाती है।
  • मुझे मत काटो, मैं इतने सुख देता हूँ।
  • सूरज की किरणों से मिलकर मैं हवा शुद्ध करता हूँ।
  • जब तक सूरज, तारे, धरती, चाँद रहेंगे, सबको सुख देने की मैंने मन में ठानी है।
  • पाठ अंधविश्वास (भूत-प्रेत, ओझा) से दूर रहने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सीख भी देता है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • ओझा – झाड़-फूँक करने वाला।
  • वैद्य-हकीम – जड़ी-बूटी से इलाज करने वाले।
  • शीतल – ठंडी।
  • शुद्ध – साफ।
  • ठानना – पक्का निश्चय करना।

भाषा अध्ययन

  • विलोम: शीतल × गरम, सूखी × गीली, सुख × दुख, घनी × विरल।
  • मुहावरा: मन में ठानना = पक्का निश्चय करना। वाक्य: उसने रोज व्यायाम करने की मन में ठानी।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. नीम की सूखी पत्तियों का क्या उपयोग है?

ऊनी कपड़ों और अनाज को कीड़ों से बचाना, और धुएँ से मक्खी-मच्छर भगाना।

Q2. नीम की छाया कैसी है?

घनी पत्तियों के कारण शीतल; उससे गरमी और थकान मिट जाती है।

Q3. नीम हवा को कैसे शुद्ध करता है?

सूरज की किरणों से मिलकर।

Q4. नीम क्यों कहता है "नहीं काटना मुझको तुम"?

क्योंकि वह छाया, शुद्ध हवा और कई उपयोगी चीजें देकर सबको सुख देता है।

Q5. नीम के दो और उपयोग बताओ।

नीम की टहनी से दातुन करते हैं; नीम की पत्तियाँ नहाने के पानी में डालते हैं।

परीक्षा टिप

नीम के उपयोगों की सूची (कपड़े-अनाज, धुआँ, छाया, शुद्ध हवा) याद रखो; यही कविता का सार है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 11

गड़ा धन

संक्षिप्त सार

"गड़ा धन" एक कहानी है। सुंदरपुर गाँव का किसान रामदीन बहुत परिश्रमी था, पर उसके चारों बेटे आलसी थे। पत्नी के सुझाए उपाय से रामदीन ने बेटों से कहा कि उसने खेत में धन गाड़ रखा है और वह तीर्थयात्रा पर चला गया। बेटों ने धन के लालच में पूरा खेत खोद डाला; धन नहीं मिला, पर मित्र हरिनाथ की सलाह से बीज बोए और बहुत अच्छी फसल हुई। उन्हें समझ आया कि परिश्रम ही असली धन है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: कहानी (सुनो, दोहराओ और बताओ)।
  • रामदीन परिश्रमी किसान था; उसके चारों बेटे आलसी थे और गप्पें मारते रहते थे।
  • रामदीन को बेटों के भविष्य की चिंता थी; पत्नी ने झिझकते हुए एक उपाय सुझाया।
  • रामदीन ने कहा – "हम तीर्थयात्रा पर जा रहे हैं; मैंने खेत में धन गाड़कर छिपा रखा है, जरूरत हो तो निकाल लेना।"
  • घर का धन और अनाज खत्म होने पर बेटों ने रात में दो-तीन रातें खेत खोदा, पर धन नहीं मिला।
  • पिता के परम मित्र हरिनाथ ने सलाह दी – "खेत खोद ही लिया है, अब उसमें बीज बो दो।"
  • अंकुर निकले, बेटों ने निराई-गुड़ाई की, फसल बहुत अच्छी हुई।
  • माता-पिता लौटे; रामदीन ने अनाज के बोरे दिखाकर पूछा – गड़े धन का राज समझे?
  • बेटों ने माना – "जीवन में परिश्रम के बिना कुछ भी संभव नहीं; परिश्रम से ही धन कमाया जा सकता है।"

महत्वपूर्ण शब्द

  • गड़ा धन – जमीन में छिपाकर रखा धन।
  • अल्हड़पन – लापरवाही।
  • तीर्थयात्रा – पवित्र स्थानों की यात्रा।
  • हताश – बहुत निराश।
  • निराई-गुड़ाई – खेत से घास निकालना और मिट्टी ढीली करना।

भाषा अध्ययन

  • विलोम: परिश्रमी × आलसी, निराश × आशावान, बूढ़ा × जवान।
  • विरामचिह्न: उद्धरण चिह्न (" ") किसी की कही बात के लिए – "अब तुम्हें गड़े धन का राज समझ में आ गया होगा।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. रामदीन परेशान क्यों था?

उसके चारों बेटे आलसी थे; उसे उनके भविष्य की चिंता थी।

Q2. तीर्थयात्रा पर जाते समय रामदीन ने बेटों से क्या कहा?

कि उसने खेत में धन गाड़कर छिपा रखा है; जरूरत पड़ने पर निकालकर उपयोग कर लेना।

Q3. चारों भाइयों को पिता की कौन-सी बात याद आई?

जरूरत पड़ने पर खेत में गड़ा धन निकाल लेना।

Q4. चारों भाइयों के मन में उत्साह कब जागा?

जब खेत में नन्हे-नन्हे अंकुर निकल आए।

Q5. कहानी से क्या सीख मिलती है?

परिश्रम ही सच्चा धन है; मेहनत के बिना कुछ नहीं मिलता।

परीक्षा टिप

"गड़ा धन" का असली अर्थ लिखना न भूलो – खेत की मेहनत से मिली फसल ही गड़ा धन थी।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 12

मित्रता

संक्षिप्त सार

"मित्रता" एक संवाद-पाठ है। खेल के मैदान में चार बच्चे – अर्नाल्ड, तबस्सुम, क्षमा और विहंग – एक-दूसरे को अपना परिचय देते हैं: वे कहाँ रहते हैं, घर में कौन-कौन है और माता-पिता क्या काम करते हैं। अंत में सब अच्छे मित्र बन जाते हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: संवाद (सुनो, समझो और बोलो)।
  • अर्नाल्ड – छतरी तालाब के सामने रहता है; घर में दादा जी, माता जी, पिता जी और छोटी बहन; माता जी सरकारी अस्पताल में नर्स हैं।
  • तबस्सुम – पाठशाला के समीप रहती है; घर में माता जी, पिता जी और बुआ जी; बुआ जी ज्ञान-विज्ञान की रोचक कहानियाँ सुनाती हैं।
  • क्षमा – बाजार के पास रहती है; उसकी माता जी सरपंच हैं; कल उसकी बहन का जन्मदिन है, सबको बुलाती है।
  • विहंग – बस स्टैंड के पीछे रहता है; उसके पिता जी वकील हैं, न्यायालय के किस्से सुनाते हैं।
  • तबस्सुम मदद के लिए जन्मदिन पर आने का वादा करती है।
  • विहंग कहता है – "आज से हम सब अच्छे मित्र हैं।"
  • बड़ों के लिए आदरसूचक शब्द: आप, जी, हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • मित्रता – दोस्ती।
  • परिचय – अपने बारे में बताना।
  • सरपंच – ग्राम पंचायत का प्रमुख।
  • वकील – अदालत में मुकदमा लड़ने वाला।
  • नर्स – अस्पताल में रोगियों की देखभाल करने वाली।

भाषा अध्ययन

  • आदरसूचक प्रयोग: "मेरे पिता जी वकील हैं।" "माता जी क्या करती हैं?"
  • परिचय का नमूना: "नमस्ते! मेरा नाम ... है। मैं ... में रहता/रहती हूँ।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. उचित जोड़ियाँ मिलाओ।

छतरी तालाब के सामने रहता हूँ – अर्नाल्ड; रोचक कहानियाँ सुनाती हैं (बुआ जी) – तबस्सुम; मेरे पिता जी वकील हैं – विहंग; मेरी माता जी सरपंच हैं – क्षमा।

Q2. अर्नाल्ड की माता जी क्या करती हैं?

सरकारी अस्पताल में नर्स हैं।

Q3. क्षमा ने सबको कहाँ बुलाया?

अपनी बहन के जन्मदिन पर।

Q4. विहंग कहाँ रहता है?

बस स्टैंड के पीछे।

Q5. अपना परिचय तीन वाक्यों में दो।

नमस्ते! मेरा नाम ... है। मैं ... में रहता/रहती हूँ। मेरे घर में ... हैं।

परीक्षा टिप

बड़ों के बारे में बोलते समय "जी" और "हैं" लगाना जरूरी है – यही इस पाठ का भाषा-बिंदु है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 13

बचत

संक्षिप्त सार

"बचत" एक चित्र-पाठ है। इसमें पाँच चित्रों द्वारा अन्न, पानी, पैसा, कागज-पेंसिल और बिजली की बचत करना सिखाया गया है। घोषवाक्य है – "अन्न, जंगल, बिजली, पानी – है सभी बचाना। पैसों की बचत करो – जीवन को अब है सजाना।"

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्र-पाठ (सोच-समझकर दैनिक उपयोग करो)।
  • अन्न: थाली में उतना ही लो जितना खा सको; जूठा न छोड़ो।
  • पानी: पौधों को जरूरत भर पानी दो; नल खुला न छोड़ो।
  • पैसा: गुल्लक में पैसे डालकर बचत करो।
  • कागज-पेंसिल: कागज के दोनों तरफ लिखो, पेंसिल पूरी इस्तेमाल करो।
  • बिजली: कमरे से बाहर जाते समय पंखा और बत्ती बंद करो; दिन में सूरज की रोशनी का उपयोग करो।
  • जंगल बचाना भी जरूरी है, क्योंकि कागज पेड़ों से बनता है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • बचत – जरूरत से ज्यादा खर्च न करके चीजें बचाना।
  • गुल्लक – पैसे जमा करने का बर्तन।
  • अपव्यय – फिजूलखर्ची।

भाषा अध्ययन

  • घोषवाक्य बनाओ: "बूँद-बूँद पानी बचाओ, जीवन को सुखी बनाओ।"
  • विलोम: बचत × खर्च, जरूरत × फिजूल।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. पाठ में किन-किन चीजों की बचत करने को कहा गया है?

अन्न, पानी, पैसा, कागज-पेंसिल और बिजली (तथा जंगल)।

Q2. बिजली की बचत कैसे करोगे?

काम न हो तो पंखा-बत्ती बंद करूँगा और दिन में खिड़की खोलकर रोशनी लूँगा।

Q3. पानी न हो तो क्या होगा?

न पीने को पानी होगा, न खेती होगी, न पेड़-पौधे और जीव बचेंगे।

Q4. पैसों की बचत कैसे कर सकते हैं?

गुल्लक में पैसे डालकर और बेकार चीजें न खरीदकर।

Q5. कागज की बचत क्यों जरूरी है?

कागज पेड़ों से बनता है; कागज बचाने से पेड़ बचते हैं।

परीक्षा टिप

हर चीज की बचत का एक-एक उपाय याद रखो और पाठ का घोषवाक्य लिखना सीखो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 14

पहचान हमारी - भाग (२)

संक्षिप्त सार

"पहचान हमारी – भाग (२)" वर्णमाला पहचान का दूसरा भाग है। इसमें स्वर ए, ऐ, ओ, औ और उनकी मात्राएँ तथा कुछ विशेष वर्ण (ज्ञ, ढ़, ड़) चित्रों और शब्दों से सिखाए गए हैं। आगे के पृष्ठ पर ऋ, क्ष, त्र, श्र, अं (अनुस्वार) और अँ (अनुनासिक) भी हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: देखो और सुनो (वर्ण-पहचान)।
  • ए / े: एड़ी, एकता, ऐनक, मेज, बैल।
  • ऐ / ै: ऐरावत, ऐनक, विज्ञापन, बैल।
  • ओ / ो: ओढ़नी, ओखली, झरोखा।
  • औ / ौ: औरत, औजार, सरौता।
  • ज्ञ: यज्ञ, विज्ञापन; ढ़: गढ़, ओढ़नी; ड़: एड़ी।
  • अन्य चित्र-शब्द: वन, तराजू, गाजर, गुड़हल, झरना, सहिजन।
  • पढ़ो: जल, एक, गढ़, कमल, अनपढ़, जगमग, आजकल, ऐसा, लीची, चातक, अज्ञात, पपीता, शहतूत, कुतूहल, जैतून, टोपी, तौलो, कचौड़ी, कैकेयी, नौरोजी, चौकोन।
  • अगले पृष्ठ पर: ऋ (ऋषि, वृक्ष), क्ष (षटकोण), भ, ढ, ठ; अनुस्वार (अंबर) और अनुनासिक (अँगूठी)।

महत्वपूर्ण शब्द

  • स्वर – अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।
  • संयुक्त वर्ण – दो व्यंजनों से बने वर्ण: क्ष (क्+ष), त्र (त्+र), ज्ञ (ज्+ञ), श्र (श्+र)।
  • अनुस्वार (ं) – नाक से बोली जाने वाली ध्वनि, जैसे: अंबर, गंगा।
  • अनुनासिक (ँ) – चंद्रबिंदु, जैसे: अँगूठी, चाँद।

भाषा अध्ययन

  • मात्राएँ: ए – े (मेज), ऐ – ै (बैल), ओ – ो (मोर), औ – ौ (चौकोन)।
  • ड़ और ढ़ के नीचे बिंदु लगता है: पेड़, गढ़।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. ए, ऐ, ओ, औ की मात्रा वाला एक-एक शब्द लिखो।

मेज, बैल, मोर, चौकोन।

Q2. "यज्ञ" में कौन-सा संयुक्त वर्ण है?

ज्ञ (ज् + ञ)।

Q3. चार संयुक्त वर्ण लिखो।

क्ष, त्र, ज्ञ, श्र।

Q4. अनुस्वार और अनुनासिक का एक-एक उदाहरण दो।

अनुस्वार – अंबर; अनुनासिक – अँगूठी।

Q5. "ओ" से शुरू होने वाले दो शब्द लिखो।

ओखली, ओढ़नी।

परीक्षा टिप

ए-ऐ और ओ-औ की मात्राओं में अक्सर गलती होती है; शब्द बोलकर सुनो और फिर मात्रा लगाओ।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 15

मैं सड़क हूँ

संक्षिप्त सार

"मैं सड़क हूँ" एक आत्मकथा-पाठ है, जिसमें सड़क स्वयं अपनी कहानी सुनाती है। सब लोग और वाहन उस पर चलते हैं, वह घर और विद्यालय के बीच सेतु है। पहले वह कच्ची थी, फिर कोलतार और अब सीमेंट से पक्की बनती है। लोग गंदगी करते हैं, थूकते हैं और गड्ढे खोदते हैं तो उसे दुख होता है। वह साफ-सुथरी रहकर गाँवों को जोड़ना और देश में खुशहाली लाना चाहती है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: आत्मकथा (पढ़ो और समझो)।
  • आदमी, रिक्शा, बस, साइकिल – सब सड़क पर इधर से उधर आते-जाते हैं; वह बालक, जवान, बूढ़े सबके काम आती है।
  • वह घर और विद्यालय के बीच सेतु है; लोग किनारे मकान और दुकानें बनाते हैं।
  • चौराहे पर वर्दी पहने पुलिस का सिपाही यातायात को अनुशासित रखता है।
  • सड़क सदा सीधी चलना चाहती है; लोग जरूरत से उसे टेढ़ी, नीची, ऊँची बना देते हैं।
  • पहले कच्ची थी – बैलगाड़ी, ताँगा, ऊँटगाड़ी चलते थे; फिर कोलतार से पक्की बनी; अब नई तकनीक से सीमेंट की बनती है।
  • दुख: लोग गंदा करते हैं, पान खाकर थूकते हैं, जगह-जगह गड्ढे खोदते हैं; गड्ढों से दुर्घटनाएँ होती हैं।
  • सड़क के कारण दूर-दूर के लोग आसानी से मिल पाते हैं और परिसर का विकास होता है।
  • उसकी इच्छा: हर गाँव को जोड़ना, लोगों में मेल-जोल बढ़ाना और पूरे देश में खुशहाली लाना।
  • चित्रों में महामार्ग और द्रुतगति मार्ग दिखाए गए हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • सेतु – पुल, जोड़ने वाला।
  • यातायात – वाहनों और लोगों का आना-जाना।
  • कोलतार – डामर, सड़क बनाने का काला पदार्थ।
  • दुर्घटना – अचानक होने वाली बुरी घटना (हादसा)।
  • द्रुतगति मार्ग – तेज रफ्तार वाहनों का मार्ग (एक्सप्रेस-वे)।

भाषा अध्ययन

  • अंत्याक्षरी (शब्द-शृंखला): सड़क → किनारे → रास्ता → तकनीक → काम → मकान → निकिता → ताँगा → गाजर → रश्मि। (पिछले शब्द के अंतिम अक्षर से नया शब्द)
  • विलोम: कच्ची × पक्की, सीधी × टेढ़ी, ऊँची × नीची, दुख × सुख, साफ × गंदा।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. सड़क पर कौन-कौन चलते हैं?

आदमी, रिक्शा, बस, साइकिल; बालक, जवान और बूढ़े सभी।

Q2. पहले सड़क कैसी थी और उस पर कौन-से वाहन चलते थे?

पहले सड़क कच्ची थी; उस पर बैलगाड़ी, ताँगा, ऊँटगाड़ी चलते थे।

Q3. सड़क को किन बातों से दुख होता है?

  • लोग गंदगी करते हैं।
  • पान खाकर थूकते हैं।
  • जगह-जगह गड्ढे खोदते हैं, जिनसे दुर्घटनाएँ होती हैं।

Q4. सड़क की क्या इच्छा है?

हर गाँव को एक-दूसरे से जोड़ना, लोगों में मेल-जोल बढ़ाना और देश में खुशहाली लाना।

Q5. सड़क को साफ-सुथरा कैसे रख सकते हैं?

कचरा कूड़ेदान में डालें, सड़क पर न थूकें, गड्ढे न खोदें और यातायात के नियम मानें।

परीक्षा टिप

आत्मकथा में "मैं" वाले वाक्य लिखो – जैसे "मैं सबको रास्ता दिखाना चाहती हूँ।" – इससे उत्तर पाठ जैसा लगता है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 16

व्यायाम

संक्षिप्त सार

"व्यायाम" एक कृति-पाठ है। चित्रों के साथ बारह सरल व्यायाम बताए गए हैं – विश्राम और सावधान की मुद्रा, एक पैर पर खड़े होना, आगे-पीछे झुकना, पैरों के अँगूठे छूना, पंजों पर खड़े होना, अँगूठे का नाखून देखना और बैठकर पैरों की उँगलियाँ पकड़ना। रोज व्यायाम करने से शरीर स्वस्थ और लचीला रहता है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: कृति करो (करके सीखो)।
  • विश्राम की मुद्रा में खड़े रहो; सावधान की मुद्रा में खड़े रहो।
  • एक पैर पर खड़े हो जाओ (संतुलन)।
  • हाथ पीठ के पीछे पकड़कर आगे झुको; दोनों हाथ फैलाकर पीछे झुको।
  • झुककर दाहिना हाथ बाएँ पैर के अँगूठे पर और बायाँ हाथ ऊपर करो।
  • अपने दोनों पैरों के अँगूठे छुओ।
  • दोनों हाथ ऊपर करके पैरों के पंजों पर खड़े हो जाओ।
  • बायाँ/दायाँ हाथ सामने रखकर धीरे-धीरे बगल में ले जाते हुए अँगूठे का नाखून देखो (आँखों का व्यायाम)।
  • घुटनों पर बैठकर दोनों हाथों से पैरों की उँगलियाँ पकड़ो; बैठकर पैर सीधे करो और हाथों से पैर की उँगलियाँ पकड़ो।
  • ये व्यायाम समूह, गुट या अकेले – तीनों तरह से किए जा सकते हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • व्यायाम – शरीर को स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली कसरत।
  • मुद्रा – शरीर की स्थिति (पोज़)।
  • सावधान – सीधे, चौकन्ने खड़े रहना।
  • विश्राम – आराम की स्थिति।
  • पंजे – पैर का अगला भाग।

भाषा अध्ययन

  • दिशा-शब्द: दायाँ – बायाँ, आगे – पीछे, ऊपर – नीचे।
  • आज्ञार्थक क्रियाएँ: खड़े रहो, झुको, छुओ, देखो, पकड़ो।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. व्यायाम की कोई चार कृतियाँ लिखो।

सावधान की मुद्रा में खड़े रहना, एक पैर पर खड़े होना, दोनों पैरों के अँगूठे छूना, पंजों पर खड़े होना।

Q2. संतुलन के लिए कौन-सा व्यायाम है?

एक पैर पर खड़े होना।

Q3. आँखों के लिए कौन-सा व्यायाम बताया गया है?

हाथ सामने से धीरे-धीरे बगल में ले जाते हुए अँगूठे का नाखून देखना।

Q4. व्यायाम करने से क्या लाभ होते हैं?

शरीर स्वस्थ, फुर्तीला और लचीला रहता है; मन प्रसन्न रहता है।

Q5. व्यायाम कब करना चाहिए?

सुबह खाली पेट, खुली हवा में।

परीक्षा टिप

व्यायाम की कृतियाँ आज्ञार्थक वाक्यों में लिखो – "दोनों हाथ ऊपर करो।"

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 17

बोलो और जानो

संक्षिप्त सार

"बोलो और जानो" एक चित्र-पाठ है। इसमें रोज की चीजों के चित्र और उनके हिंदी नाम दिए गए हैं – अमरूद, गुब्बारा, घर, बस्ता, बेला, पानी, गुड़िया, कुत्ता, पुस्तक, हवाई जहाज, कलम, उड़नतश्तरी, मूँछ, विद्यालय और तिलचट्टा। बच्चे इनके नाम अपनी मातृभाषा में भी बताते हैं और पास-दूर की चीजों के लिए "यह" और "वह" का प्रयोग सीखते हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: देखो, समझो और मातृभाषा में बताओ।
  • चित्र-शब्द: अमरूद, गुब्बारा, घर, बस्ता, बेला (फूल), पानी, गुड़िया, कुत्ता, पुस्तक, हवाई जहाज, कलम, उड़नतश्तरी, मूँछ, विद्यालय, तिलचट्टा।
  • पास की चीज के लिए यह: "यह कुत्ता है।"
  • दूर की चीज के लिए वह: "वह पुस्तक है।"
  • हिंदी और मराठी में कई शब्द एक जैसे हैं (घर, पानी, पुस्तक, विद्यालय), कुछ अलग हैं (अमरूद = पेरू, तिलचट्टा = झुरळ)।

महत्वपूर्ण शब्द

  • मातृभाषा – माँ की भाषा, घर में बोली जाने वाली भाषा।
  • उड़नतश्तरी – आकाश में उड़ने वाली तश्तरी जैसी कल्पित वस्तु।
  • तिलचट्टा – कॉकरोच।

भाषा अध्ययन

  • यह मेरा बस्ता है। वह विद्यालय है। ये गुब्बारे हैं। वे हवाई जहाज हैं।
  • निकटवाचक – दूरवाचक सर्वनाम: यह (पास), वह (दूर); बहुवचन: ये, वे।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. पास की चीज बताने के लिए कौन-सा शब्द आता है?

यह।

Q2. "वह" का प्रयोग करके दो वाक्य बनाओ।

वह पुस्तक है। वह हवाई जहाज है।

Q3. चित्र में आए किन्हीं पाँच चीजों के नाम लिखो।

अमरूद, गुब्बारा, बस्ता, कलम, गुड़िया।

Q4. "अमरूद" और "तिलचट्टा" को मराठी में क्या कहते हैं?

अमरूद = पेरू; तिलचट्टा = झुरळ।

Q5. "यह" का बहुवचन क्या है?

ये।

परीक्षा टिप

"यह-वह" वाले वाक्य बोलते समय उँगली से पास या दूर की चीज दिखाओ – इससे अंतर अच्छी तरह याद रहेगा।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 18

गाँव और शहर

संक्षिप्त सार

"गाँव और शहर" दूसरी इकाई का पहला चित्र-पाठ है। एक चित्र में गाँव का जीवन है – समता विद्यालय, शौचालय, कूड़ादान, खेत में ट्रैक्टर, बैलगाड़ी, कुआँ, पशु और काम करते लोग। दूसरे चित्र में शहर है – ऊँची इमारतें, डबल-डेकर बस, कारें, फव्वारा, सिग्नल और ज़ेबरा क्रॉसिंग। दोनों चित्र स्वच्छता और अनुशासन से गाँव-शहर की प्रगति और देश की उन्नति का संदेश देते हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्र-पाठ (देखो और बताओ)।
  • घोषवाक्य: "गाँव-शहर की प्रगति, देश की उन्नति।"
  • गाँव के चित्र में: समता विद्यालय, शौचालय, कूड़ादान, खेलते बच्चे, कुआँ, खेत में ट्रैक्टर, बैलगाड़ी, गाय-बैल, मुर्गियाँ, साइकिल, बिजली का खंभा।
  • गाँव का संदेश: "स्वच्छ ग्राम, स्वस्थ ग्राम।"
  • शहर के चित्र में: ऊँची इमारतें, डबल-डेकर बस, कार, ऑटो रिक्शा, फव्वारा, सिग्नल, ज़ेबरा क्रॉसिंग, फुटपाथ पर चलते लोग।
  • शहर का संदेश: "स्वच्छ नगर, सुंदर नगर।" और "अनुशासन के साथ, देश का विकास।"
  • दूसरी इकाई का घोषवाक्य: "शुद्ध हवा-पानी का तंत्र, स्वस्थ जीवन का मंत्र।"
  • गाँव में खेती और प्रकृति के बीच शांत जीवन है; शहर में भीड़, वाहन और सुविधाएँ अधिक हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • प्रगति / उन्नति – आगे बढ़ना, विकास।
  • स्वच्छ – साफ।
  • अनुशासन – नियमों का पालन।
  • ज़ेबरा क्रॉसिंग – सड़क पार करने की सफेद धारियों वाली जगह।

भाषा अध्ययन

  • विलोम: गाँव × शहर, स्वच्छ × गंदा, शांत × भीड़भाड़ वाला, स्वस्थ × अस्वस्थ।
  • वाक्य बनाओ: "किसान ट्रैक्टर से खेत जोत रहा है।" "लोग ज़ेबरा क्रॉसिंग से सड़क पार कर रहे हैं।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. गाँव के चित्र में कौन-कौन सी चीजें दिखाई देती हैं?

विद्यालय, शौचालय, कूड़ादान, कुआँ, खेत, ट्रैक्टर, बैलगाड़ी और पशु।

Q2. शहर के चित्र में कौन-से वाहन हैं?

डबल-डेकर बस, कार, ऑटो रिक्शा, मोटरसाइकिल।

Q3. गाँव और शहर के लिए दिए घोषवाक्य लिखो।

"स्वच्छ ग्राम, स्वस्थ ग्राम।" और "स्वच्छ नगर, सुंदर नगर।"

Q4. गाँव और शहर में दो अंतर बताओ।

गाँव में खेत और पशु अधिक हैं, शहर में इमारतें और वाहन; गाँव शांत है, शहर में भीड़ है।

Q5. सड़क पार करते समय कौन-से नियम मानने चाहिए?

सिग्नल देखें और ज़ेबरा क्रॉसिंग से ही सड़क पार करें।

परीक्षा टिप

गाँव और शहर की तुलना दो कॉलम बनाकर लिखो और अंत में घोषवाक्य जोड़ो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 19

जीवन

संक्षिप्त सार

"जीवन" डॉ. कुलभूषणलाल मखीजा की प्रेरक कविता है। कवि कहते हैं कि जीवन चलते रहने का नाम है, इसमें कभी रुकना नहीं चाहिए। घड़ी की तरह लगातार आगे बढ़ो, सूरज की तरह ऊपर उठो, सागर की लहरों से उत्साह, आकाश से बड़ा हृदय और धरती से सहनशीलता सीखो। मीठी बोली, अच्छे विचार और सेवा से जीवन सुंदर बनता है।

मुख्य बिंदु

  • कवि: डॉ. कुलभूषणलाल मखीजा। विधा: कविता (पढ़ो और गाओ)।
  • मुख्य संदेश: जीवन चलने का नाम है, कभी विश्राम (आलस) नहीं करना।
  • घड़ी सदा टिक-टिक करती है, कभी नहीं रुकती – हमें भी घड़ी की तरह आगे बढ़ना है।
  • सूरज की तरह रोज ऊपर उठना (उन्नति करना) है।
  • हर कण में अपनापन देखकर सबको दिल से प्रणाम करना चाहिए।
  • लहराते सागर से सीखो (उत्साह), आसमान जैसा विशाल हृदय रखो।
  • धरती जैसे सहनशील बनो और मिल-जुलकर काम करो।
  • जो चलता है वही आगे बढ़ता है; मेहनत से ही पद और नाम मिलता है।
  • माँ जैसी मीठी बोली, सच्चे और ऊँचे विचार, सबको अपने जैसा मानना और सेवा का भाव रखना चाहिए।

महत्वपूर्ण शब्द

  • विश्राम – आराम, रुकना।
  • नित – रोज।
  • कण-कण – हर छोटा हिस्सा।
  • विशाल – बहुत बड़ा।
  • सहनशील – सहन करने वाला।
  • सुविचार – अच्छे विचार।

भाषा अध्ययन

  • तुलना वाले शब्द (-सा/-जैसा): सूरज-सा, आसमान-सा, धरती जैसे, माँ जैसी।
  • विलोम: आगे × पीछे, मीठी × कड़वी, सच्चे × झूठे, ऊपर × नीचे।
  • लयात्मक शब्द: टिक-टिक, मिलजुल, कण-कण।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. कवि के अनुसार जीवन किसका नाम है?

चलने का नाम है; कभी विश्राम नहीं करना चाहिए।

Q2. घड़ी से हमें क्या सीख मिलती है?

घड़ी सदा टिक-टिक करती है, कभी नहीं रुकती; हमें भी लगातार आगे बढ़ना चाहिए।

Q3. कविता के अनुसार किससे क्या सीखें?

  • सागर से – लहराना (उत्साह)।
  • आसमान से – विशाल हृदय।
  • धरती से – सहनशीलता।
  • सूरज से – नित ऊपर उठना।

Q4. "मेहनत कर पाता पद नाम" – इसका अर्थ बताओ।

जो मेहनत करता है, उसे ही ऊँचा पद और प्रसिद्धि मिलती है।

Q5. अपनी दिनचर्या लिखो।

सुबह 6 बजे उठना, व्यायाम, नहाना, नाश्ता, विद्यालय, गृहपाठ, खेल, रात का भोजन और 9 बजे सोना (अपनी दिनचर्या लिखो)।

परीक्षा टिप

"किससे क्या सीखें" वाला कृति-प्रश्न (सागर, आसमान, धरती, सूरज, घड़ी) तालिका बनाकर याद करो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 20

भाई-भाई का प्रेम

संक्षिप्त सार

"भाई-भाई का प्रेम" एक कहानी है। मनोहरपुर गाँव में दो किसान भाई अलग-अलग घरों में रहते थे, पर उनमें बहुत प्रेम था। अच्छी फसल के बाद एक रात बड़ा भाई सोचता है कि छोटे भाई को अकेले सारा काम करना पड़ता है, और छोटा भाई सोचता है कि बड़े भाई का परिवार बड़ा है, खर्च अधिक है। दोनों चुपके से अपने अनाज की गठरी दूसरे के ढेर में डालने चलते हैं और अँधेरे में टकरा जाते हैं। सच जानकर दोनों रोते हुए गले लग जाते हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: कहानी (पढ़ो और समझो)।
  • मनोहरपुर की मिट्टी बहुत उपजाऊ थी; अधिकांश लोग खेती करते थे।
  • दोनों भाई किसान थे, घर अलग-अलग थे, पर हमेशा एक-दूसरे की भलाई सोचते थे।
  • उस वर्ष पूरे गाँव में फसल अच्छी हुई; खलिहान में सबके अनाज के ढेर लगे थे।
  • बड़े भाई ने सोचा: मेरे दो बच्चे मेरी मदद करते हैं; छोटे भाई के बाल-बच्चे नहीं, उसे सारा काम अकेले सँभालना पड़ता है – इसलिए उसकी सहायता करनी चाहिए।
  • छोटे भाई ने सोचा: मैं जवान हूँ, कहीं भी काम कर सकता हूँ, मेरा खर्च कम है; बड़े भैया बाल-बच्चेवाले हैं, उनका खर्च अधिक है।
  • दोनों ने अपने ढेर से दस गठरी अनाज बाँधा और एक-एक गठरी सिर पर रखकर दूसरे के ढेर की ओर चल पड़े।
  • अँधेरी रात में दोनों टकरा गए – "कौन है?"; सिर पर गठरियाँ देखकर सब समझ गए।
  • अपनी बात कहते-सुनते दोनों की आँखें भर आईं, वे रोते हुए गले लग गए।
  • यह कहानी आज भी लोग भाव-विभोर होकर सुनते-सुनाते हैं। सीख: त्याग और "दूसरों को देने" की खुशी।

महत्वपूर्ण शब्द

  • उपजाऊ – जिसमें अच्छी फसल हो।
  • खलिहान – फसल रखने और अनाज निकालने की जगह।
  • गठरी – कपड़े में बँधा सामान।
  • गृहस्थी – घर-परिवार।
  • भाव-विभोर – भावना में डूबा हुआ।

भाषा अध्ययन

उपसर्ग और प्रत्यय (शब्द के आगे/पीछे जुड़ने वाले अंश):

  • स + प्रेम = सप्रेम; प्रेम + भरा = प्रेमभरा।
  • प्रति + दिन = प्रतिदिन; दिन + इक = दैनिक।
  • वि + ज्ञान = विज्ञान; ज्ञान + ई = ज्ञानी।
  • अ + दृश्य = अदृश्य; दृश्य + मान = दृश्यमान।
  • मुहावरा: हाथ को हाथ न सुझाई देना = बहुत अँधेरा होना; आँखें भर आना = भावुक होकर आँसू आना।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. दोनों भाई क्या करते थे?

दोनों किसान थे और खेती करते थे।

Q2. बड़े भाई ने छोटे भाई की मदद करने का निर्णय क्यों लिया?

छोटे भाई के बाल-बच्चे नहीं थे; उसे खेती का सारा काम अकेले सँभालना पड़ता था।

Q3. छोटे भाई ने बड़े भाई के ढेर में अनाज डालने का निर्णय क्यों लिया?

बड़े भैया बाल-बच्चेवाले थे, उनकी गृहस्थी का खर्च अधिक था; छोटे भाई का खर्च कम था।

Q4. दोनों भाई एक-दूसरे से कैसे मिले और फिर क्या हुआ?

अँधेरी रात में अनाज की गठरी लेकर जाते हुए टकरा गए; सच जानकर आँखें भर आईं और गले लग गए।

Q5. उपसर्ग/प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाओ: प्रेम, ज्ञान।

सप्रेम, प्रेमभरा; विज्ञान, ज्ञानी।

परीक्षा टिप

दोनों भाइयों के "सोचने के कारण" अलग-अलग लिखो – यही कहानी का सबसे जरूरी भाग है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 21

बालिका दिवस

संक्षिप्त सार

"बालिका दिवस" एक संवाद-पाठ है। सब बच्चे दूर्वा के घर खेलने इकट्ठा होते हैं, वहाँ चाची जी और बड़े भैया भी हैं। आज 3 जनवरी है – सावित्रीबाई फुले का जन्मदिन, जिसे "बालिका दिवस" के रूप में मनाते हैं। बातचीत में बच्चे सावित्रीबाई के योगदान और लड़कियों की शिक्षा का महत्त्व समझते हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: संवाद (पढ़ो, समझो और लिखो)।
  • पात्र: दूर्वा, सृष्टि, प्राची, जिशान, मंत्र, चाची जी, भैया।
  • 3 जनवरी – सावित्रीबाई फुले का जन्मदिन – बालिका दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • सावित्रीबाई फुले भारत की प्रथम शिक्षिका मानी जाती हैं।
  • अपने पति महात्मा जोतीबा फुले के साथ मिलकर उन्होंने लड़कियों के लिए पुणे में पहली पाठशाला शुरू की।
  • आज लगभग सभी लड़कियाँ पाठशाला जाती हैं।
  • समाजसेवा, शिक्षा, विज्ञान, संगीत, प्रशासन, शोधकार्य, खेलकूद – हर क्षेत्र में लड़कियाँ आगे बढ़ रही हैं।
  • शिक्षा हमें स्वावलंबी और सजग बनाती है।
  • "एक लड़की शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है।"
  • सबका संकल्प: "खूब पढ़ेंगे – खूब बढ़ेंगे।"

महत्वपूर्ण शब्द

  • बालिका – लड़की।
  • शिक्षिका – पढ़ाने वाली (अध्यापिका)।
  • स्वावलंबी – अपने पैरों पर खड़ा, आत्मनिर्भर।
  • सजग – जागरूक, सावधान।
  • प्रशासन – शासन चलाने का काम।

भाषा अध्ययन

  • संवाद लेखन में बोलने वाले का नाम, फिर डैश (–) और उसकी बात लिखते हैं।
  • मुहावरा: बन-ठनकर आना = सज-धजकर आना।
  • विलोम: शिक्षित × अशिक्षित, प्रथम × अंतिम।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. बालिका दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?

3 जनवरी को, सावित्रीबाई फुले के जन्मदिन पर।

Q2. सावित्रीबाई फुले कौन थीं?

भारत की प्रथम शिक्षिका; उन्होंने जोतीबा फुले के साथ पुणे में लड़कियों की पहली पाठशाला शुरू की।

Q3. आज लड़कियाँ किन-किन क्षेत्रों में आगे हैं?

समाजसेवा, शिक्षा, विज्ञान, संगीत, प्रशासन, शोधकार्य और खेलकूद।

Q4. सृष्टि की माँ शिक्षा के बारे में क्या कहती हैं?

शिक्षा हमें स्वावलंबी और सजग बनाती है।

Q5. लड़कियों की शिक्षा क्यों जरूरी है?

एक लड़की शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है; वह आत्मनिर्भर बनती है।

परीक्षा टिप

तारीख (3 जनवरी), नाम (सावित्रीबाई फुले, जोतीबा फुले) और जगह (पुणे) – ये तीन तथ्य जरूर याद रखो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 22

रोबोट

संक्षिप्त सार

"रोबोट" एक अनुलेखन (देखकर लिखने) का पाठ है। चित्र में बना एक रोबोट बिंदुओं वाले वर्णों से भरा है। उसके सिर, आँखें, शरीर, हाथ और पैरों में हिंदी के स्वर, व्यंजन और वर्णों के अवयव (हिस्से) छपे हैं। बच्चों को बिंदुओं पर पेंसिल चलाकर वर्णों को सही आकार में लिखने का अभ्यास करना है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: अनुरेखन / अनुलेखन (बिंदुओं पर लिखना)।
  • रोबोट के अलग-अलग हिस्सों में वर्ण दिए गए हैं – जैसे अ, आ, ओ, औ, अं, अः।
  • वर्ण के अवयव (खड़ी पाई, शिरोरेखा, घुमाव) अलग-अलग दिखाए गए हैं, ताकि बच्चे वर्ण बनाने का क्रम समझें।
  • सब वर्ण शिरोरेखा (ऊपर की रेखा) के नीचे लिखे जाते हैं।
  • सुंदर और साफ लिखावट के लिए वर्ण का सही आकार और क्रम जरूरी है।
  • रोबोट के चारों ओर तारे और बिंदुओं वाली रेखाएँ भी हैं, जिन पर हाथ साधने का अभ्यास होता है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • रोबोट – मशीन-मानव, जो आदेश के अनुसार काम करता है।
  • अनुलेखन – देखकर वैसा ही लिखना।
  • शिरोरेखा – हिंदी शब्दों के ऊपर खींची जाने वाली रेखा।
  • अवयव – हिस्सा, अंग।

भाषा अध्ययन

  • स्वर: अ आ इ ई उ ऊ ऋ ए ऐ ओ औ; अं (अनुस्वार), अः (विसर्ग)।
  • लिखते समय पहले वर्ण का आकार, फिर पाई और अंत में शिरोरेखा।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. रोबोट के चित्र में क्या दिया गया है?

बिंदुओं वाले हिंदी वर्ण और वर्णों के अवयव।

Q2. शिरोरेखा किसे कहते हैं?

शब्द के ऊपर खींची जाने वाली सीधी रेखा।

Q3. अनुलेखन का अर्थ क्या है?

देखकर वैसा ही लिखना।

Q4. रोबोट क्या काम कर सकता है?

दिए गए आदेश के अनुसार कारखानों, घरों और अस्पतालों में काम कर सकता है।

Q5. सुंदर लेखन के लिए कोई दो बातें लिखो।

वर्ण का सही आकार बनाओ; शिरोरेखा सीधी और पूरी खींचो।

परीक्षा टिप

हर दिन एक पृष्ठ सुलेख (सुंदर लेखन) करो; परीक्षा में साफ लिखावट से अच्छे अंक मिलते हैं।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 23

जुड़ें हम

संक्षिप्त सार

"जुड़ें हम" संयुक्ताक्षरों (जुड़े हुए वर्णों) की पहचान का पाठ है। इसमें बताया गया है कि वर्ण अलग-अलग तरीकों से जुड़ते हैं – पाई हटाकर, हल लगाकर, आधे होकर और अलग रूप लेकर। साथ में सब्जियों वाली एक छोटी कविता और अच्छे सुविचार (नारे) भी हैं, जिनका अनुलेखन और श्रुतलेखन करना है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: पहचानो और बताओ (संयुक्ताक्षर)।
  • सुनो और दोहराओ: "मुख्य लक्ष्य पर ध्यान लगाओ।" "प्रह्लाद, विद्या चिह्न बनाओ।" "अक्खड़, फक्कड़, गफ्फार, उत्तम।" "अग्रसर महाराष्ट्र सर्वोत्तम।"
  • पाई हटाकर जुड़ें: ग्वाला, गुच्छा, चप्पल, पुष्प, डिब्बा, पत्थर।
  • हल लगाकर जुड़ें: सिद्धू, लड्डू, बाह्य, द्वार, खट्टा, वाङ्मय।
  • आधे होकर जुड़ें: मक्खी, सिक्का, रफ्तार, डॉक्टर, शगुफ्ता, मुजफ्फर।
  • विभिन्नता से जुड़ें ("र" के रूप): दर्जी, गंधर्व, इंद्रधनुष, चंद्रमा, मेट्रो रेल, महाराष्ट्र।
  • सब्जियों की कविता: सोआ, मेथी, पालक, चौलाई, बैंगन, कुम्हड़ा, लहसुन, प्याज, गाजर, मूली, ककड़ी, मटर, आलू, टमाटर, चुकंदर, भुट्टा, कद्दू – हरी सब्जियाँ खाओ, बीमारी दूर भगाओ।
  • सुविचार: "सेवा डॉक्टर का कर्तव्य है।" "पौधे लगाओ, प्रदूषण हटाओ।" "राष्ट्रीय संपदा, स्वच्छ रखें सर्वदा।" "मक्खी, मच्छर भगाओ, रोग मिटाओ।" "रक्तदान-जीवनदान, नेत्रदान-श्रेष्ठ दान।" "विश्वास रखो, अंधविश्वास नहीं।" "बेईमानी ठुकराओ, ईमानदारी अपनाओ।" "इंद्रधनुष के रंगों की तरह मिलकर रहो।"

महत्वपूर्ण शब्द

  • संयुक्ताक्षर – दो या अधिक व्यंजनों के मेल से बना अक्षर।
  • पाई – वर्ण की खड़ी रेखा (।)।
  • हल – वर्ण के नीचे लगने वाला चिह्न (्), जो उसे आधा बनाता है।
  • श्रुतलेखन – सुनकर लिखना।

भाषा अध्ययन

  • "र" के तीन रूप: र्‍ (रेफ, ऊपर) – दर्जी; ्र (पदेन, नीचे) – चंद्रमा; ट्र/ड्र – महाराष्ट्र।
  • संयुक्ताक्षर तोड़ो: पत्थर = प + त् + थ + र; लड्डू = ल + ड् + डू।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. पाई हटाकर जुड़ने वाले तीन शब्द लिखो।

ग्वाला, चप्पल, डिब्बा।

Q2. हल लगाकर जुड़ने वाले दो शब्द लिखो।

लड्डू, द्वार।

Q3. "र" के अलग-अलग रूपों वाले तीन शब्द लिखो।

दर्जी, चंद्रमा, महाराष्ट्र।

Q4. कविता में आई पाँच सब्जियों के नाम लिखो।

मेथी, पालक, बैंगन, गाजर, टमाटर।

Q5. कोई दो सुविचार लिखो।

"पौधे लगाओ, प्रदूषण हटाओ।" "विश्वास रखो, अंधविश्वास नहीं।"

परीक्षा टिप

संयुक्ताक्षर वाले शब्द पहले बोलकर तोड़ो, फिर लिखो – इससे वर्तनी की गलती नहीं होती।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 24

(अ) बोध

संक्षिप्त सार

"बोध" एक चित्र-पाठ है, जिसमें चित्रों की जोड़ियों से वचन (एकवचन-बहुवचन) और लिंग (पुल्लिंग-स्त्रीलिंग) समझाए गए हैं। जैसे – आँख-आँखें, पेटी-पेटियाँ, माला-मालाएँ; बंदर-बंदरिया, सिंह-सिंहनी, गाय-बैल, नाग-नागिन।

मुख्य बिंदु

  • विधा: पढ़ो, समझो और बताओ (वचन और लिंग)।
  • आँख – आँखें; पेटी – पेटियाँ; औषधि – औषधियाँ; पपीता – पपीते; आम – आम।
  • माला – मालाएँ; सिक्का – सिक्के; तौलिया – तौलिये।
  • वचन – एक चीज (एकवचन), अनेक चीजें (बहुवचन):
  • बंदर – बंदरिया; बिलाव – बिल्ली; सिंह – सिंहनी; बैल – गाय; हिरन – हिरनी; नाग – नागिन; चूहा – चुहिया।
  • लिंग – नर (पुल्लिंग) और मादा (स्त्रीलिंग):
  • कुछ शब्द दोनों वचनों में एक जैसे रहते हैं: आम – आम।
  • कुछ जोड़ियों में शब्द ही बदल जाता है: बैल – गाय।

महत्वपूर्ण शब्द

  • वचन – शब्द का वह रूप जिससे संख्या (एक या अनेक) का पता चले।
  • एकवचन – एक चीज का बोध।
  • बहुवचन – एक से अधिक चीजों का बोध।
  • लिंग – शब्द का वह रूप जिससे नर या मादा का पता चले।

भाषा अध्ययन

  • -आ से -ए: पपीता – पपीते, सिक्का – सिक्के।
  • -ई/-इ से -इयाँ: पेटी – पेटियाँ, औषधि – औषधियाँ।
  • स्त्रीलिंग बनाने के प्रत्यय: -इया (बंदरिया, चुहिया), -नी (सिंहनी), -ई (हिरनी), -इन (नागिन)।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. बहुवचन लिखो: आँख, माला, सिक्का।

आँखें, मालाएँ, सिक्के।

Q2. स्त्रीलिंग लिखो: बंदर, सिंह, नाग।

बंदरिया, सिंहनी, नागिन।

Q3. पुल्लिंग लिखो: गाय, बिल्ली, चुहिया।

बैल, बिलाव, चूहा।

Q4. ऐसा शब्द बताओ जो एकवचन और बहुवचन में एक जैसा रहता है।

आम।

Q5. वचन किसे कहते हैं?

शब्द का वह रूप जिससे एक या अनेक होने का पता चले।

परीक्षा टिप

वचन और लिंग की जोड़ियाँ दो कॉलम में लिखकर याद करो; परीक्षा में "उचित जोड़ियाँ मिलाओ" प्रश्न आता है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 25

(ब) समान - विरुद्ध

संक्षिप्त सार

"समान – विरुद्ध" चित्रों से समानार्थी (एक जैसे अर्थ वाले) और विरुद्धार्थी (उलटे अर्थ वाले) शब्द सिखाने वाला पाठ है। जैसे – आँख = नेत्र, वृक्ष = पेड़; दिन × रात, ऊपर × नीचे, गरम × ठंडा।

मुख्य बिंदु

  • विधा: पढ़ो और समझो (शब्द-भंडार)।
  • आँख = नेत्र; वृक्ष = पेड़; पंछी = पक्षी; पुष्प = फूल।
  • द्वार = दरवाजा; चारपाई = खटिया; सवेरा = सुबह; केश = बाल।
  • समानार्थी शब्द:
  • दिन × रात; ऊपर × नीचे; कम × अधिक; छोटा × बड़ा।
  • गरम × ठंडा; सुखी × दुखी; बंद × खुला; आगे × पीछे।
  • विरुद्धार्थी शब्द:
  • चित्रों से अर्थ समझना आसान होता है – एक जैसी चीज के दो नाम, या दो उलटी स्थितियाँ।

महत्वपूर्ण शब्द

  • समानार्थी (पर्यायवाची) – समान अर्थ वाले शब्द।
  • विरुद्धार्थी (विलोम) – उलटे अर्थ वाले शब्द।

भाषा अध्ययन

  • और समानार्थी: पानी = जल, सूरज = सूर्य, घर = गृह, माँ = माता।
  • और विलोम: अंदर × बाहर, सच × झूठ, अमीर × गरीब, नया × पुराना।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. समानार्थी शब्द लिखो: आँख, पुष्प, केश।

नेत्र, फूल, बाल।

Q2. विरुद्धार्थी शब्द लिखो: दिन, गरम, बंद।

रात, ठंडा, खुला।

Q3. "चारपाई" का समानार्थी शब्द क्या है?

खटिया।

Q4. उचित जोड़ी मिलाओ: सुखी, आगे, छोटा।

सुखी × दुखी; आगे × पीछे; छोटा × बड़ा।

Q5. विलोम शब्द से एक वाक्य बनाओ।

दिन में सूरज निकलता है और रात में चाँद।

परीक्षा टिप

समानार्थी के लिए "=" और विलोम के लिए "×" चिह्न लगाकर लिखो; शब्दों की सूची रोज दोहराओ।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 26

बीज

संक्षिप्त सार

"बीज" रामेश्वरदयाल दुबे की कविता-कहानी है। नदी किनारे पड़े एक छोटे बीज को चिड़िया, बकरी और गाय खाना चाहते हैं, पर बीज, कोंपल और पौधा हर बार कहता है – "रुकी रहो, मुझे बढ़ने दो, तब मुझे खाना।" अंत में वह बड़ा पेड़ बनकर सबके काम आता है और सब खुश हो जाते हैं।

मुख्य बिंदु

  • रचनाकार: रामेश्वरदयाल दुबे। विधा: कविता-कहानी (पढ़ो और गाओ)।
  • नदी किनारे एक छोटा बीज पड़ा था; चिड़िया चोंच मारकर खाने लगी।
  • बीज बोला – रुको, मुझे जमीन में गड़ने दो, डाल-पात होने दो; चिड़िया चीं-चीं करती उड़ गई।
  • पानी और धूप पाकर बीज में अंकुर फूटा; बकरी कोंपलें खाने आई।
  • कोंपल बोली – रुको, जड़ गहरी जाने दो, पानी-खाद खाने दो; बकरी में-में करती चली गई।
  • बीज छोटा-सा पौधा बना; गाय खाने आई – पौधे ने भी डाल-पात होने तक रुकने को कहा; गाय रँभाती चली गई।
  • बहुत दिन बाद डालें बड़ी हो गईं; चिड़िया, बकरी, गाय फिर आईं और पूछा – "वह छोटा पौधा कहाँ गया?"
  • पेड़ बोला – "मैं ही बीज हूँ, मैं ही अंकुर, मैं ही पौधा और मैं ही पेड़; अब मैं तुम सबके काम आ सकता हूँ।" सब खुश हो गए।
  • सीख: धैर्य रखो; छोटा बीज समय पाकर बड़ा, उपयोगी पेड़ बनता है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • अंकुर – बीज से निकला नन्हा भाग।
  • कोंपल – नई कोमल पत्ती।
  • डाल-पात – डालियाँ और पत्ते।
  • रँभाना – गाय का बोलना।

भाषा अध्ययन

  • पशु-पक्षियों की बोली: चिड़िया – चीं-चीं; बकरी – में-में; गाय – रँभाना।
  • क्रम: बीज → अंकुर → कोंपल → पौधा → पेड़।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. वाक्यों को क्रम से लिखो।

(1) किसी नदी किनारे एक बीज पड़ा था। (2) पानी और धूप पाकर बीज में अंकुर फूटा। (3) उसकी डालें बड़ी-बड़ी हो गईं। (4) अब मैं तुम सबके काम आ सकता हूँ।

Q2. बीज को खाने कौन-कौन आए?

चिड़िया, बकरी और गाय।

Q3. कोंपल ने बकरी से क्या कहा?

रुकी रहो, जड़ गहरी जाने दो; पानी-खाद खाने दो, तब मुझे खाना।

Q4. पेड़ ने अंत में क्या कहा?

मैं ही बीज, अंकुर, पौधा और पेड़ हूँ; अब तुम सबके काम आ सकता हूँ।

Q5. पेड़ हमारे किस-किस काम आते हैं?

छाया, फल, लकड़ी, शुद्ध हवा और पक्षियों को घर देते हैं।

परीक्षा टिप

चने का बीज गीली मिट्टी में बोकर रोज देखो और "बीज से पौधा" बनने के चरण अपनी कॉपी में लिखो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 27

मुझे पहचानो

संक्षिप्त सार

"मुझे पहचानो" गणितीय आकारों की पहचान का चित्र-पाठ है। चित्रों में रोज की चीजें हैं – श्यामपट, घड़ी, लिफाफा, रूमाल, बेलन, डिब्बा, कंपास पेटी, कैरम, टोपी, साइकिल का पहिया, लड्डू, गेंद, आइसक्रीम कोन, कंदील, बाट, सैंडविच, पेंसिल आदि। बच्चों को हर चीज का आकार – वर्ग, आयत, त्रिकोण, षटकोण, शंकु, वृत्त या बेलन – बताना है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: आकारों के नाम बताओ (चित्र-पाठ)।
  • आयत: श्यामपट (ब्लैकबोर्ड), लिफाफा, कंपास पेटी।
  • वर्ग: घड़ी (चौकोर), रूमाल, कैरम बोर्ड।
  • वृत्त / गोल: साइकिल का पहिया, गेंद, लड्डू, प्लेट।
  • बेलन (बेलनाकार): बेलन, डिब्बा, पेंसिल।
  • शंकु: जोकर/जन्मदिन की टोपी, आइसक्रीम कोन।
  • त्रिकोण: सैंडविच, सड़क का चेतावनी चिह्न, समोसे जैसा आकार।
  • षटकोण: 5 किलो का बाट, लटकन के हिस्से।
  • हमारे आसपास की हर चीज किसी न किसी आकार की होती है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • आकार – किसी चीज का रूप (शेप)।
  • वर्ग – चारों भुजाएँ बराबर।
  • आयत – आमने-सामने की भुजाएँ बराबर।
  • त्रिकोण – तीन भुजाओं वाला आकार।
  • षटकोण – छह भुजाओं वाला आकार।
  • शंकु – नीचे गोल और ऊपर नुकीला आकार।

भाषा अध्ययन

  • वाक्य: "गेंद गोल है।" "लिफाफा आयताकार है।" "टोपी शंकु के आकार की है।"
  • प्रत्यय "-आकार": गोलाकार, आयताकार, बेलनाकार।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. गोल आकार की तीन चीजें लिखो।

गेंद, पहिया, लड्डू।

Q2. शंकु आकार की दो चीजें लिखो।

जन्मदिन की टोपी, आइसक्रीम कोन।

Q3. बेलनाकार चीजें कौन-सी हैं?

बेलन, डिब्बा, पेंसिल।

Q4. श्यामपट किस आकार का है?

आयताकार।

Q5. 5 किलो का बाट किस आकार का है?

षटकोण।

परीक्षा टिप

अपनी कक्षा की चीजें देखकर उनका आकार बताने का अभ्यास करो – गणित में भी काम आएगा।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 28

मुझे जानो

संक्षिप्त सार

"मुझे जानो" एक चित्र-पाठ है। इसमें सिक्का, कलम, सीडी, जहाज, कप, रेडियो, कूँची, मोबाइल, तश्तरी, सूटकेस, बैल, ट्रैक्टर, कमीज, ऑटो रिक्शा, गाय, डायरी, बस और ट्रक के चित्र हैं। बच्चों को इनके नाम देवनागरी लिपि (हिंदी) और रोमन लिपि (अंग्रेजी अक्षरों) में लिखने हैं, जैसे – जहाज = jahaj। इससे लिप्यंतरण और अनुवाद का अंतर समझ आता है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: समझो और लिखो (लिपि का ज्ञान)।
  • चित्र: सिक्का, कलम, सीडी, जहाज, कप, रेडियो, कूँची (ब्रश), मोबाइल, तश्तरी, सूटकेस, बैल, ट्रैक्टर, कमीज, ऑटो रिक्शा, गाय, डायरी, बस, ट्रक।
  • बस पर लिखा है – "धूम्रपान मना है।"
  • लिप्यंतरण – शब्द वही रहता है, केवल लिपि बदलती है: जहाज → jahaj, गाय → gaay।
  • अनुवाद – शब्द दूसरी भाषा में बदल जाता है: जहाज → ship, गाय → cow।
  • हिंदी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है; अंग्रेजी रोमन लिपि में।
  • कई शब्द अंग्रेजी से हिंदी में आए हैं – रेडियो, मोबाइल, बस, ट्रक, ट्रैक्टर, डायरी।

महत्वपूर्ण शब्द

  • लिपि – भाषा लिखने का तरीका (अक्षरों का रूप)।
  • देवनागरी – हिंदी, मराठी, संस्कृत की लिपि।
  • रोमन लिपि – अंग्रेजी की लिपि (A, B, C...)।
  • लिप्यंतरण – एक लिपि से दूसरी लिपि में लिखना।
  • अनुवाद – एक भाषा से दूसरी भाषा में बदलना।

भाषा अध्ययन

  • लिप्यंतरण: कलम – kalam; सिक्का – sikka; कमीज – kameej।
  • अनुवाद: कलम – pen; सिक्का – coin; कमीज – shirt।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. "जहाज" को रोमन लिपि में लिखो।

jahaj।

Q2. लिप्यंतरण और अनुवाद में क्या अंतर है?

लिप्यंतरण में केवल लिपि बदलती है, अनुवाद में भाषा बदल जाती है।

Q3. चित्र में कौन-से वाहन हैं?

जहाज, ट्रैक्टर, ऑटो रिक्शा, बस, ट्रक।

Q4. बस पर क्या लिखा है?

"धूम्रपान मना है।"

Q5. हिंदी किस लिपि में लिखी जाती है?

देवनागरी लिपि में।

परीक्षा टिप

"kalam" लिप्यंतरण है, "pen" अनुवाद है – यह एक उदाहरण याद रखो तो अंतर कभी नहीं भूलोगे।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 29

वीरों को प्रणाम

संक्षिप्त सार

"वीरों को प्रणाम" रमेश दीक्षित की देशभक्ति कविता है। कवि उन वीरों को सौ-सौ बार प्रणाम करते हैं, जिन्हें देश की मिट्टी का कण-कण प्राणों से प्यारा है। यह वह धरती है जहाँ गंगा-जमुना बहती हैं और जहाँ लोगों में देश पर मर मिटने की धुन रहती है। हमें आजादी भीख में नहीं, वीरों के प्राणों के बलिदान से मिली है।

मुख्य बिंदु

  • कवि: रमेश दीक्षित। विधा: देशभक्ति कविता (पढ़ो और गाओ)।
  • जिन वीरों को देश की मिट्टी का कण-कण प्राणों से प्यारा है, उन्हें सौ-सौ बार प्रणाम।
  • इस धरती पर गंगा-जमुना बहती हैं; यहाँ देश पर मर मिटने की धुन रहती है।
  • वीरों के बलिदान से भारत (हिंद वतन) तारे की तरह चमका।
  • यह आजादी किसी से भीख में नहीं मिली; हमने प्राणों का अर्पण करना सीखा है।
  • चित्र में टूटी हुई जंजीर गुलामी से मुक्ति (आजादी) का प्रतीक है।
  • संदेश: स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करो और देश से प्रेम करो।

महत्वपूर्ण शब्द

  • कण-कण – हर छोटा कण।
  • प्राणार्पण – प्राण अर्पित करना, जान देना।
  • बलिदान – देश के लिए त्याग या प्राण देना।
  • वतन – देश।
  • धुन – लगन।

भाषा अध्ययन

  • पंक्तियों का क्रम: (1) देश की मिट्टी का कण-कण है, (2) जिन्हें प्राण से प्यारा। ... (3) सीखा हम लोगों ने कुछ तो, (4) प्राणार्पण की सीख में।
  • समानार्थी: देश = वतन, राष्ट्र; प्राण = जान; प्रणाम = नमस्कार।
  • मुहावरा: मर मिटना = प्राण दे देना।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. कवि किन्हें सौ-सौ बार प्रणाम करते हैं?

उन वीरों को, जिन्हें देश की मिट्टी का कण-कण प्राणों से प्यारा है।

Q2. धरती पर कौन-सी नदियाँ बहती हैं?

गंगा और जमुना।

Q3. भारत किसके बलिदान से चमका?

वीरों के बलिदान से।

Q4. "यह आजादी नहीं मिली है, हमें किसी से भीख में" – अर्थ बताओ।

आजादी वीरों के संघर्ष और प्राणों के बलिदान से मिली है, किसी की दया से नहीं।

Q5. किन्हीं तीन स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखो।

महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, भगत सिंह।

परीक्षा टिप

कविता की टेक "प्रणाम ऐसे वीरों को, सौ-सौ बार हमारा" याद रखो और भावार्थ में "बलिदान" शब्द जरूर लिखो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 30

सपूत

संक्षिप्त सार

"सपूत" श्रीकृष्ण की कहानी है। फुलेरा गाँव के पनघट पर तीन स्त्रियाँ अपने-अपने बेटों के गुण बखान करती हैं – एक का बेटा बड़ा विद्वान है, दूसरी का बड़ा पहलवान। तीसरी चुप रहती है; उसका बेटा साधारण किसान है। जब तीनों बेटे आते हैं, तो विद्वान और पहलवान अपनी-अपनी धुन में चले जाते हैं, पर किसान बेटा माँ के सिर से घड़ा उतारकर खुद उठा लेता है। सब समझ जाती हैं कि सच्चा सपूत वही है।

मुख्य बिंदु

  • लेखक: श्रीकृष्ण। विधा: कहानी (पढ़ो, समझो और दोहराओ)।
  • फुलेरा एक आदर्श गाँव था – गलियों में रोज झाड़ू, नालियाँ साफ, लिपे-पुते घर-आँगन, बहुत-से पेड़, कुएँ का पानी निर्मल, पनघट स्वच्छ।
  • पहली स्त्री: मेरा बेटा बड़ा विद्वान है; बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ लेता है, तारों के नाम बता देता है।
  • दूसरी स्त्री: मेरा बेटा बलवान पहलवान है; रोज पाँच सौ दंड-बैठक लगाता है, बड़े पहलवान उससे घबराते हैं।
  • तीसरी स्त्री: सपूत-कपूत मैं नहीं समझती; मेरा बेटा सीधा-सादा किसान है, दिन भर खेत में, शाम को घर का काम करता है।
  • विद्वान बेटा बोला – "व्याख्यान देने जा रहा हूँ" और चला गया।
  • पहलवान बेटा बोला – "जल्दी घर पहुँचो, मुझे जोरों की भूख लगी है" और चला गया।
  • किसान बेटे ने माँ के सिर से घड़ा अपने सिर पर रखा – "माँ, तुम क्यों पानी भरने आईं? मैं तो आ ही रहा था।"
  • दोनों स्त्रियों का सिर संकोच से झुक गया; उन्हें बोध हुआ कि कर्तव्य और सेवा के बिना ज्ञान और बल अधूरे हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • सपूत – अच्छा, कर्तव्यनिष्ठ पुत्र। कपूत – बुरा पुत्र।
  • पनघट – कुएँ/नदी पर पानी भरने की जगह।
  • बखान – प्रशंसा।
  • दंड-बैठक – एक तरह का व्यायाम।
  • व्याख्यान – भाषण।

भाषा अध्ययन

  • विलोम: सपूत × कपूत, विद्वान × मूर्ख, स्वच्छ × गंदा।
  • मुहावरे: ताल ठोकना = लड़ने को तैयार होना; सिर झुक जाना = लज्जित होना; धूम मचना = प्रसिद्ध होना।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. फुलेरा गाँव आदर्श क्यों था?

गलियाँ-नालियाँ साफ, घर-आँगन सुंदर, बहुत पेड़, कुएँ का पानी निर्मल और पनघट स्वच्छ था।

Q2. तीनों स्त्रियों ने अपने बेटों की कौन-सी विशेषताएँ बताईं?

पहली – विद्वान; दूसरी – बलवान पहलवान; तीसरी – सीधा-सादा मेहनती किसान।

Q3. तीसरी स्त्री के बेटे ने क्या किया?

माँ के सिर से घड़ा उतारकर अपने सिर पर रखा और उत्साह से घर ले गया।

Q4. दोनों स्त्रियों को क्या बोध हुआ?

कर्तव्य और सेवा के बिना ज्ञान और बल अधूरे हैं; सपूत तीसरी स्त्री का बेटा है।

Q5. अच्छे लड़के/लड़की में कौन-से गुण होने चाहिए?

माता-पिता की सेवा, मेहनत, विनम्रता, सादगी और कर्तव्य-भावना।

परीक्षा टिप

कहानी का सार एक वाक्य में लिखो – "कर्तव्य और सेवा के बिना ज्ञान और बल अधूरे हैं।"

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 31

राष्ट्रीय त्योहार

संक्षिप्त सार

"राष्ट्रीय त्योहार" एक संवाद-पाठ है। कक्षा में ज्ञान, आकांक्षा, त्र्यंबक और क्षितिज राष्ट्रीय त्योहारों पर चर्चा करते हैं। 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ – यह स्वतंत्रता दिवस है; 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ – यह गणतंत्र दिवस है। बच्चे इन दिनों के उत्सव, आजादी की रक्षा और तिरंगे के सम्मान के बारे में बात करते हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: संवाद (पढ़ो और बोलो)।
  • स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस हमारे राष्ट्रीय त्योहार हैं।
  • अमर सपूतों के अथक प्रयासों से 15 अगस्त 1947 को देश स्वतंत्र हुआ – यह स्वतंत्रता दिवस है।
  • आजादी के बाद बड़ी लगन से संविधान बनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ – यह गणतंत्र दिवस है।
  • इन दिनों राष्ट्रध्वज फहराते हैं, राष्ट्रगीत गाते हैं; राज्य, जिला, शहर, गाँव और विद्यालयों में धूमधाम से मनाते हैं।
  • प्रभात फेरियाँ निकलती हैं, जगह-जगह सजावट और रोशनी होती है।
  • आजादी बड़े संघर्षों से मिली है – हमें इसकी रक्षा करनी है और स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान सदैव याद रखना है।
  • तिरंगे का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है।
  • झंडावंदन के लिए समय पर उपस्थित रहना चाहिए; राष्ट्रगीत के समय सावधान की मुद्रा में खड़े रहना चाहिए।

महत्वपूर्ण शब्द

  • राष्ट्रीय – पूरे देश का।
  • संविधान – देश के नियमों का मूल ग्रंथ।
  • गणतंत्र – जनता द्वारा चुनी सरकार वाला शासन।
  • प्रभात फेरी – सुबह निकाली जाने वाली यात्रा।
  • झंडावंदन – झंडा फहराकर उसका सम्मान करना।
  • अथक – बिना थके।

भाषा अध्ययन

  • उचित जोड़ियाँ: स्वतंत्रता दिवस – 15 अगस्त; 26 जनवरी – गणतंत्र दिवस; राष्ट्रगीत के समय – सदैव सावधान की मुद्रा में खड़े रहें; झंडावंदन के लिए – समय पर उपस्थित होना आवश्यक है।
  • विलोम: स्वतंत्र × परतंत्र, आजादी × गुलामी।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. हमारे राष्ट्रीय त्योहार कौन-से हैं?

स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और गणतंत्र दिवस (26 जनवरी)।

Q2. 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस क्यों मनाते हैं?

क्योंकि 26 जनवरी 1950 को देश में संविधान लागू किया गया था।

Q3. राष्ट्रीय त्योहारों पर क्या-क्या होता है?

राष्ट्रध्वज फहराते हैं, राष्ट्रगीत गाते हैं, प्रभात फेरियाँ निकलती हैं, सजावट और रोशनी होती है।

Q4. राष्ट्रगीत के समय हमें कैसे खड़े रहना चाहिए?

सदैव सावधान की मुद्रा में।

Q5. आजादी की रक्षा के लिए हम क्या कर सकते हैं?

नियमों का पालन करें, तिरंगे का सम्मान करें, देश की संपत्ति की रक्षा करें और स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान याद रखें।

परीक्षा टिप

दो तारीखें और उनके कारण (15 अगस्त 1947 – आजादी; 26 जनवरी 1950 – संविधान लागू) बिल्कुल सही लिखो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 32

(अ) हम अलग - रूप एक

संक्षिप्त सार

"हम अलग – रूप एक" पंचमाक्षर और अनुस्वार का पाठ है। चित्रों में टंकी, शंख, पतंग, कंघी, कंचा, पंछी, जंजीर, झंझावात, घंटा, डंठल, डंडा, पंढरपुर, संतरा, ग्रंथ, संदूक, कंधा, चंपा, गुंफन, कंबल और खंभा हैं। इन सबमें बिंदी (ं) लगी है, पर बोलते समय वह अलग-अलग पंचमाक्षर (ङ, ञ, ण, न, म) की ध्वनि देती है – इसलिए "हम अलग, रूप एक"।

मुख्य बिंदु

  • विधा: पढ़ो, समझो और लिखो।
  • क, च, ट, त, प वर्गों के पंचमाक्षर (पाँचवें अक्षर) हैं: ङ, ञ, ण, न, म।
  • कोई पंचमाक्षर अपने ही वर्ग के किसी वर्ण से पहले आए, तो उसकी जगह अनुस्वार (ं) लिखा जा सकता है।
  • क वर्ग (ङ): शंख (शङ्ख), पतंग, कंघी, टंकी।
  • च वर्ग (ञ): कंचा, पंछी, जंजीर, झंझावात।
  • ट वर्ग (ण): घंटा, डंठल, डंडा, पंढरपुर।
  • त वर्ग (न): संतरा, ग्रंथ, संदूक, कंधा।
  • प वर्ग (म): चंपा, गुंफन, कंबल, खंभा।
  • पहचान: बिंदी के बाद वाला वर्ण जिस वर्ग का हो, बिंदी उसी वर्ग के पंचमाक्षर की ध्वनि देती है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • पंचमाक्षर – हर वर्ग का पाँचवाँ अक्षर (ङ, ञ, ण, न, म)।
  • अनुस्वार – वर्ण के ऊपर लगने वाली बिंदी (ं)।
  • झंझावात – तेज आँधी-तूफान।
  • गुंफन – गूँथना।

भाषा अध्ययन

  • शंख = श + ङ् + ख; पंछी = प + ञ् + छी; डंडा = ड + ण् + डा; संतरा = स + न् + तरा; कंबल = क + म् + बल।
  • वर्ग: क ख ग घ ङ | च छ ज झ ञ | ट ठ ड ढ ण | त थ द ध न | प फ ब भ म।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. पंचमाक्षर कौन-से हैं?

ङ, ञ, ण, न, म।

Q2. "शंख" में बिंदी किस पंचमाक्षर की ध्वनि देती है?

ङ की (क वर्ग)।

Q3. "म" की ध्वनि वाले तीन शब्द लिखो।

चंपा, कंबल, खंभा।

Q4. "ण" की ध्वनि वाले दो शब्द लिखो।

घंटा, डंडा।

Q5. "न" की ध्वनि वाले दो शब्द लिखो।

संतरा, संदूक।

परीक्षा टिप

बिंदी के बाद वाला अक्षर देखो – वह जिस वर्ग का है, उसी वर्ग का पंचमाक्षर बोला जाता है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 33

(ब) छुक-छुक गाड़ी

संक्षिप्त सार

"छुक-छुक गाड़ी" एक खेल-कहानी है। रविवार को पाठशाला की छुट्टी थी, तो आसपास के बच्चे इकट्ठे हुए। सबसे बड़े वर्ष ने कहा – "चलो, छुक-छुक गाड़ी खेलते हैं।" उसने हाजिरी लेकर सबको क्रमांक दिए और हर बच्चे का नया नाम रखा – महीनों, ऋतुओं, दिशाओं और प्रकृति के नामों पर। वर्ष इंजन बना और बाकी बच्चे क्रम से जुड़कर रेलगाड़ी बन गए।

मुख्य बिंदु

  • विधा: कहानी (पढ़ो और अनुलेखन करो)।
  • रविवार को छुट्टी थी; एक से चौबीस तक बच्चे हाजिर थे, वर्ष का क्रमांक पच्चीस हुआ।
  • वर्ष ने संख्या के अनुसार नाम दिए, जैसे: एक – चैत्र, दो – वैशाख, तीन – ज्येष्ठ, चार – आषाढ़, पाँच – श्रावण, छह – भाद्रपद, सात – आश्विन, आठ – कार्तिक, नौ – अग्रहायण, दस – पौष, ग्यारह – माघ, बारह – फाल्गुन (हिंदू महीने)।
  • दिशाओं के नाम: आग्नेय, नैऋत्य, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, वायव्य, ईशान्य, पूर्व।
  • अन्य नाम: आकाश, इंद्रधनुष, बादल, धरती।
  • वर्ष इंजन बना; सब बच्चे उलटे क्रम में अपना क्रमांक और नाम बोलते हुए इंजन के पीछे जुड़ते गए।
  • बाद में छह बच्चे और जुड़ गए – उनके नाम ऋतुओं के आधार पर रखे जा सकते हैं।
  • यह खेल गरमी, वर्षा, सर्दी – हर मौसम में खेला जा सकता है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • हाजिरी – उपस्थिति।
  • क्रमांक – क्रम की संख्या।
  • इंजन – गाड़ी को खींचने वाला सबसे आगे का भाग।
  • दिशा – पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण आदि।

भाषा अध्ययन

  • सप्ताह के दिन: सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।
  • छह ऋतुएँ: वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर।
  • गिनती (अंकों में): १, २, ३ ... २५ – देवनागरी अंक भी लिखना सीखो।
  • आठ दिशाएँ: पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान्य, आग्नेय, नैऋत्य, वायव्य।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. बच्चे किस दिन और क्यों इकट्ठे हुए?

रविवार को, क्योंकि पाठशाला में छुट्टी थी।

Q2. छुक-छुक गाड़ी का इंजन कौन बना?

वर्ष (सबसे बड़ा बच्चा)।

Q3. पहले बारह बच्चों के नाम किस आधार पर रखे गए?

हिंदू महीनों के नामों पर (चैत्र से फाल्गुन तक)।

Q4. ऋतुओं के नाम लिखो।

वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर।

Q5. सप्ताह के सात दिनों के नाम लिखो।

सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।

परीक्षा टिप

महीनों, ऋतुओं और दिशाओं के नाम क्रम से याद करो; "लिखो" वाले प्रश्न इन्हीं पर आते हैं।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 34

ज्ञानी

संक्षिप्त सार

"ज्ञानी" एक हास्य-संवाद है। बंडूभाऊ (मराठी भाषी) और सुदामा (हिंदी भाषी) पड़ोसी हैं। एक ही शब्द का दोनों भाषाओं में अलग अर्थ होने से उनकी बातचीत में मजेदार गलतफहमियाँ होती हैं – "शिक्षा", "बंदर", "ऊन" और "खत" जैसे शब्दों पर। अंत में संदेश है कि जो जितनी अधिक भाषाएँ सीखता है, उसका ज्ञान उतना ही बढ़ता है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: संवाद (अनुलेखन करो)।
  • दोनों परिवार आमने-सामने रहते हैं, सुख-दुख में साथ हैं, पर मातृभाषा अलग है।
  • शिक्षा: बंडूभाऊ के लिए = दंड (सजा); सुदामा के लिए = पढ़ाई।
  • बंदर: सुदामा के लिए = वानर; बंडूभाऊ के लिए = बंदरगाह।
  • ऊन: सुदामा के लिए = स्वेटर का ऊन; बंडूभाऊ के लिए = धूप।
  • खत: सुदामा के लिए = पत्र (चिट्ठी); बंडूभाऊ के लिए = खाद।
  • घास: हिंदी में = घास (चारा); मराठी में = निवाला (कौर)।
  • जाड़ा: हिंदी में = ठंडी (सर्दी); मराठी में = मोटा।
  • यदि दोनों हिंदी और मराठी समझते, तो यह स्थिति नहीं बनती।
  • सीख: जितनी अधिक भाषाएँ सीखोगे, उतना ज्ञान बढ़ेगा।

महत्वपूर्ण शब्द

  • समोच्चारित शब्द – एक जैसे बोले जाने वाले, पर अलग अर्थ वाले शब्द।
  • मातृभाषा – घर की भाषा।
  • मनोरंजक – मन बहलाने वाला, मजेदार।
  • सहभागी – साथ देने वाला।

भाषा अध्ययन

  • हिंदी-मराठी समोच्चारित शब्द (हिंदी अर्थ – मराठी अर्थ): शिक्षा (पढ़ाई – दंड), बंदर (वानर – बंदरगाह), ऊन (ऊन – धूप), खत (पत्र – खाद), घास (घास – निवाला), जाड़ा (ठंडी – मोटा)।
  • विरामचिह्न: प्रश्नवाचक (?) – "तो क्या बच्चे ऐसे ही भीगते रहेंगे?"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. बंडूभाऊ और सुदामा की मातृभाषा क्या है?

बंडूभाऊ की मराठी, सुदामा की हिंदी।

Q2. "शिक्षा" शब्द से क्या गलतफहमी हुई?

बंडूभाऊ ने दंड के अर्थ में कहा, सुदामा ने पढ़ाई समझा।

Q3. "खत" का हिंदी और मराठी अर्थ लिखो।

हिंदी में पत्र (चिट्ठी); मराठी में खाद।

Q4. "बंदर" शब्द से कैसी मजेदार स्थिति बनी?

सुदामा ने कहा बच्चे बंदर (वानर) हैं; बंडूभाऊ ने बंदर (बंदरगाह) समझकर कहा – पास में समुद्र ही नहीं, तो बंदर पर कैसे जाएँगे?

Q5. इस संवाद से क्या सीख मिलती है?

जितनी अधिक भाषाएँ सीखेंगे, ज्ञान उतना बढ़ेगा और गलतफहमियाँ कम होंगी।

परीक्षा टिप

समोच्चारित शब्दों की तालिका (हिंदी अर्थ – शब्द – मराठी अर्थ) बनाकर याद करो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 35

बचाव

संक्षिप्त सार

"बचाव" एक जानकारी-पाठ है। इसमें तीन प्राकृतिक आपदाओं – भूकंप, बाढ़ और त्सुनामी – के कारण और उनसे बचने के उपाय सरल भाषा में बताए गए हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: जानकारी (पढ़ो, समझो और श्रुतलेखन करो)।
  • छत, दीवारें आदि गिरने लगती हैं।
  • बचाव: तुरंत घर से बाहर खुली जगह में आ जाओ, या मेज, लकड़ी के तख्त के नीचे या दरवाजे के पीछे छिप जाओ।
  • भूकंप: पृथ्वी के भीतर चट्टानों की परतें आगे-पीछे खिसकने से धरती हिलने लगती है।
  • बचाव: पानी बढ़ने की सूचना मिलते ही सुरक्षित स्थान पर पहुँच जाओ।
  • बाढ़: लगातार अधिक बारिश से नदी-नाले भरकर बहने लगते हैं; गाँवों, बस्तियों, इमारतों में पानी भर जाता है, फसलें नष्ट होती हैं।
  • बचाव: सूचना मिलते ही तटवर्ती लोग तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाएँ; समुद्र तट को पाटकर बस्तियाँ नहीं बनानी चाहिए।
  • त्सुनामी की पूर्व सूचना देने वाले यंत्र आजकल विकसित हो रहे हैं।
  • त्सुनामी: समुद्र के तल में भूकंप आने से ऊँची-ऊँची लहरें उठती हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • आपदा – अचानक आने वाली बड़ी मुसीबत।
  • प्राकृतिक – प्रकृति से होने वाली।
  • तटवर्ती – समुद्र किनारे का।
  • पाटना – भरकर समतल करना।
  • पूर्व सूचना – पहले से मिली खबर (चेतावनी)।

भाषा अध्ययन

  • विभक्ति चिह्न (कारक चिह्न): के, से, में, पर, को, का – "पृथ्वी के भीतर", "बारिश से", "घर के बाहर", "तट को"।
  • अन्य प्राकृतिक आपदाएँ: सूखा (अकाल), चक्रवात (तूफान), भूस्खलन, बादल फटना।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. भूकंप क्यों आता है?

पृथ्वी के भीतर चट्टानों की परतें आगे-पीछे खिसकने से धरती हिलती है।

Q2. भूकंप के समय हमें क्या करना चाहिए?

तुरंत खुली जगह में आएँ, या मेज/तख्त के नीचे या दरवाजे के पीछे छिप जाएँ।

Q3. बाढ़ कैसे आती है और उससे क्या नुकसान होता है?

लगातार भारी बारिश से नदी-नाले उफनते हैं; बस्तियों में पानी भर जाता है और फसलें नष्ट हो जाती हैं।

Q4. त्सुनामी क्या है?

समुद्र के तल में भूकंप आने से उठने वाली बहुत ऊँची लहरें।

Q5. प्राकृतिक आपदाओं के नाम लिखो।

भूकंप, बाढ़, त्सुनामी, सूखा, चक्रवात।

परीक्षा टिप

हर आपदा के लिए दो बातें लिखो – "क्या है" और "बचाव कैसे करें"; यही पूरा उत्तर बनता है।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 36

निरीक्षण

संक्षिप्त सार

"निरीक्षण" एक छोटे विज्ञान-प्रयोग का पाठ है। एक ही प्रकार के दो बीज दो गमलों में बोए जाते हैं – एक गमला धूप में और दूसरा छाया वाले कमरे में रखा जाता है। पाँच दिन बाद धूप वाला पौधा हरा और स्वस्थ होता है, जबकि छाया वाला पौधा मुरझाया और पीला पड़ जाता है। इससे पता चलता है कि पौधों के लिए धूप जरूरी है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: प्रयोग / निरीक्षण (समझो और बताओ)।
  • चरण 1: किसी एक प्रकार के दो बीज लो – चना, मूँग, मटर या जौ।
  • चरण 2: उन्हें दो अलग-अलग गमलों में बोओ।
  • चरण 3: प्रतिदिन दोनों गमलों में थोड़ा-थोड़ा पानी छिड़को।
  • चरण 4: दो-तीन दिन में अंकुर उग आएँगे; तीन-चार दिन में वे पौधे बन जाएँगे।
  • चरण 5: पहला गमला छत/आँगन में रखो जहाँ सीधी धूप लगे; दूसरा कमरे में रखो जहाँ धूप न आए।
  • चरण 6: पाँच दिन बाद निरीक्षण करो।
  • परिणाम: धूप वाले पौधे के पत्ते हरे और स्वस्थ; छाया वाले पौधे के पत्ते मुरझाए और कुछ-कुछ पीले।
  • निष्कर्ष: पौधे सूर्य के प्रकाश में अपना भोजन बनाते हैं और हरे रहते हैं; धूप न मिलने पर वे कमजोर हो जाते हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • निरीक्षण – ध्यान से देखना और जाँचना।
  • अंकुर – बीज से निकला नन्हा पौधा।
  • निष्कर्ष – प्रयोग से निकला परिणाम।
  • मुरझाना – कुम्हलाना, सूखने लगना।

भाषा अध्ययन

  • क्रम-सूचक शब्द: पहले, फिर, उसके बाद, अंत में – प्रयोग लिखते समय इनका प्रयोग करो।
  • विलोम: हरा × पीला, स्वस्थ × अस्वस्थ, धूप × छाया।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. प्रयोग के लिए कौन-से बीज ले सकते हैं?

चना, मूँग, मटर या जौ।

Q2. धूप में रखा पौधा हरा क्यों है?

उसे सूर्य का प्रकाश मिला, जिससे उसने भोजन बनाया और स्वस्थ रहा।

Q3. कमरे में रखा पौधा क्यों मुरझा गया?

उसे धूप नहीं मिली, इसलिए वह कमजोर और पीला पड़ गया।

Q4. प्रयोग के चरण क्रम से लिखो।

बीज लेना → दो गमलों में बोना → रोज पानी देना → एक धूप में, एक छाया में रखना → पाँच दिन बाद निरीक्षण।

Q5. इस प्रयोग का निष्कर्ष क्या है?

पौधों के बढ़ने और हरे रहने के लिए धूप आवश्यक है।

परीक्षा टिप

प्रयोग वाले प्रश्न में "सामग्री, कृति, निरीक्षण, निष्कर्ष" – चारों भाग लिखो।

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५ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 37

चलो-चलें

संक्षिप्त सार

"चलो-चलें" एक मानचित्र (नक्शा) वाला चित्र-पाठ है। गोलू-भोलू मोटर में बैठे हैं और उन्हें पेंग्विन के घर तक पहुँचना है। रास्ते में पक्की सड़क, कच्ची सड़क, पगडंडी, पुल, इकहरी रेलवे और कई जगहें हैं – मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, बुद्धविहार, अस्पताल, पशु अस्पताल, समता विद्यालय, कारखाना, किला, बगीचा, जलाशय और दलदल। साथ ही सड़क के सांकेतिक चिह्न (शांतिक्षेत्र, पास में विद्यालय है, ट्रैफिक सिग्नल) भी दिए गए हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: मार्ग बताओ (मानचित्र-वाचन)।
  • कार्य: गोलू-भोलू को मोटर से पेंग्विन के घर तक पहुँचाने वाला रास्ता पेंसिल से रेखांकित करो।
  • रास्तों के प्रकार: पक्की सड़क, कच्ची सड़क, पगडंडी, पुल, इकहरी रेलवे (एक पटरी वाली रेल)।
  • धार्मिक स्थान: मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, बुद्धविहार – सब एक ही नगर में, यानी सर्वधर्म समभाव।
  • अन्य स्थान: अस्पताल, पशु अस्पताल, समता विद्यालय, कारखाना, किला, बगीचा, जलाशय, दलदल।
  • हॉर्न पर लाल रेखा = शांतिक्षेत्र (हॉर्न न बजाएँ), अस्पताल के पास।
  • त्रिकोण में दो बच्चे = पास में विद्यालय है (धीरे चलाएँ)।
  • लाल-पीली-हरी बत्ती = यातायात सिग्नल।
  • सांकेतिक चिह्न:
  • मार्ग बताते समय दिशा-शब्दों का प्रयोग करते हैं: सीधे, दाएँ मुड़ो, बाएँ मुड़ो, पुल पार करो।

महत्वपूर्ण शब्द

  • मार्ग – रास्ता।
  • पगडंडी – खेतों/जंगल में पैदल चलने का पतला रास्ता।
  • सांकेतिक चिह्न – संकेत से संदेश देने वाले चिह्न।
  • शांतिक्षेत्र – जहाँ शोर (हॉर्न) मना हो।
  • जलाशय – पानी जमा रहने की जगह (तालाब)।
  • दलदल – कीचड़ भरी गीली जमीन।

भाषा अध्ययन

  • दिशा-निर्देश के वाक्य: "पक्की सड़क पर सीधे जाओ।" "सिग्नल से बाएँ मुड़ो।" "पुल पार करके दाएँ जाओ।"
  • विलोम: पक्की × कच्ची, पास × दूर, दाएँ × बाएँ।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. मानचित्र में कौन-कौन से धार्मिक स्थान हैं?

मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर और बुद्धविहार।

Q2. शांतिक्षेत्र का चिह्न कहाँ लगा है और उसका अर्थ क्या है?

अस्पताल के पास; यहाँ हॉर्न नहीं बजाना चाहिए।

Q3. "पास में विद्यालय है" चिह्न देखकर चालक को क्या करना चाहिए?

गाड़ी धीरे चलानी चाहिए और बच्चों का ध्यान रखना चाहिए।

Q4. मानचित्र में रास्तों के कौन-से प्रकार हैं?

पक्की सड़क, कच्ची सड़क, पगडंडी, पुल और इकहरी रेलवे।

Q5. अपने घर से विद्यालय तक का रास्ता तीन वाक्यों में बताओ।

घर से निकलकर सीधे मुख्य सड़क तक जाता/जाती हूँ। फिर बाएँ मुड़ता/मुड़ती हूँ। सिग्नल पार करके दाईं ओर विद्यालय है। (अपना रास्ता लिखो)

परीक्षा टिप

सांकेतिक चिह्नों के चित्र और अर्थ याद रखो; मार्ग बताने में "सीधे, दाएँ, बाएँ" शब्दों का सही प्रयोग करो।

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