Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 1
भारत महिमा
संक्षिप्त सार
भारत महिमा छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद की देशभक्ति से भरी कविता है। इसमें कवि भारत के गौरवशाली अतीत का वर्णन करते हैं – यहीं सबसे पहले ज्ञान का प्रकाश फैला, यहीं से संसार को दया, धर्म और संस्कृति मिली। अंत में कवि कहते हैं कि हमें इसी देश के लिए जीना चाहिए और इस पर अपना सब कुछ निछावर करने को तैयार रहना चाहिए।
मुख्य बिंदु
कवि परिचय: जयशंकर प्रसाद (जन्म १८९०, मृत्यु १९३७, वाराणसी) – छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक; कवि, नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार और निबंधकार।
हिमालय के आँगन में उषा ने भारत का स्वागत किया – यानी सबसे पहले भारत में ही ज्ञान का सवेरा हुआ।
भारतवासी स्वयं जागे और फिर पूरे विश्व को जगाया; अज्ञान का अँधेरा मिटा और संसार शोकरहित हुआ।
यहीं वीणा के सप्त स्वर गूँजे और साम-संगीत का जन्म हुआ।
भारत की विजय केवल हथियारों की नहीं, धर्म की विजय थी; सम्राट भी भिक्षु बनकर घर-घर दया का संदेश देते थे।
यूनानियों (यवन) को दया का दान, चीन को धर्म की दृष्टि, सिंहल (श्रीलंका) को शील मिला।
हमने किसी का कुछ छीना नहीं; हम कहीं बाहर से नहीं आए, यही हमारी जन्मभूमि है।
हमारे पूर्वजों का चरित्र पवित्र था, भुजाओं में शक्ति थी, फिर भी वे नम्र थे; अतिथि को देवता मानते थे, वचन में सत्य और प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहते थे।
आज भी वही रक्त, वही साहस, वही ज्ञान और वही शक्ति हमारे पास है।
संदेश: देश पर गर्व करें और उसके लिए सर्वस्व अर्पण करने को तैयार रहें।
महत्वपूर्ण शब्द
उपहार – भेंट
हीरक हार – हीरों का हार
आलोक – प्रकाश
व्योम – आकाश; तम – अँधेरा
संसृति – संसार
यवन – यूनानी
विपन्न – निर्धन, गरीब
टेव – आदत
निछावर करना (मुहावरा) – अर्पण करना, समर्पित करना
भाषा अध्ययन
रचना का प्रकार: कविता (देशभक्ति गीत); भाषा तत्सम-प्रधान खड़ी बोली।
मानवीकरण अलंकार: ‘उषा ने हँस अभिनंदन किया’ – उषा को मनुष्य की तरह हँसते और स्वागत करते दिखाया है।
अनुप्रास अलंकार: ‘कमल कोमल कर’ – ‘क’ वर्ण की आवृत्ति।
कविता में प्रयुक्त धातुएँ: लोहा (‘विजय केवल लोहे की नहीं’), स्वर्ण (‘स्वर्ण भूमि’)।
रस: वीर रस और देशप्रेम का भाव।
मुहावरा: निछावर करना – देश के लिए सैनिक अपना जीवन निछावर कर देते हैं।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. उचित जोड़ियाँ मिलाइए : संचय, अतिथि, वचन, हृदय
संचय – दान
अतिथि – देव
वचन – सत्य
हृदय – तेज
Q2. लिखिए : (१) कविता में प्रयुक्त दो धातुओं के नाम (२) भारतीय संस्कृति की दो विशेषताएँ
(१) लोहा, स्वर्ण। (२) अतिथि को देवता मानना; दया और दान की भावना (वचन में सत्य, किसी का कुछ न छीनना)।
Q3. ‘कहीं से हम आए थे नहीं’ – पंक्ति का तात्पर्य लिखिए।
कवि कहते हैं कि भारत ही हमारी मूल जन्मभूमि है। हम कहीं बाहर से आकर यहाँ नहीं बसे, न ही हमने किसी दूसरे की भूमि छीनी। प्रकृति की गोद में हम यहीं पले-बढ़े हैं।
Q4. ‘भारत ने संसार को क्या-क्या दिया’ – कविता के आधार पर लिखिए।
सबसे पहले ज्ञान का प्रकाश फैलाकर विश्व को जगाया।
सप्त स्वर और साम-संगीत दिया।
यवनों को दया, चीन को धर्म की दृष्टि और सिंहल को शील दिया।
धर्म की विजय का आदर्श दिया, हथियारों की नहीं।
Q5. पद्य विश्लेषण कीजिए (रचनाकार, रचना का प्रकार, पसंदीदा पंक्ति, कारण, संदेश)।
रचनाकार – जयशंकर प्रसाद; प्रकार – देशभक्तिपूर्ण कविता।
पसंदीदा पंक्ति – ‘जिएँ तो सदा इसी के लिए…’
कारण – यह पंक्ति देश के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव जगाती है।
संदेश – अपने देश के गौरव पर गर्व करें और उसके लिए सब कुछ अर्पण करने को तत्पर रहें।
परीक्षा टिप
पद्य विश्लेषण में पाँचों मुद्दे क्रम से लिखें। ‘उचित जोड़ियाँ’ और ‘तात्पर्य’ के लिए कविता की अंतिम चार पंक्तियाँ ध्यान से पढ़ें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 2
लक्ष्मी
संक्षिप्त सार
लक्ष्मी गुरुबचन सिंह की संवादात्मक कहानी है। करामत अली को उसके मित्र ज्ञान सिंह ने अपनी जर्सी गाय लक्ष्मी सौंपी थी। गाय बूढ़ी होकर दूध देना बंद कर देती है, घर का खर्च बढ़ता है और पत्नी व बेटा उसे बेचने को कहते हैं। करामत अली उसे ऐसे व्यापारी को नहीं बेचता जो उसे आगे कहीं और बेच दे, बल्कि गऊशाला में भरती कराने ले जाता है। कहानी वचन के प्रति जिम्मेदारी और पशुप्रेम सिखाती है।
मुख्य बिंदु
लेखक: गुरुबचन सिंह – सुप्रसिद्ध कहानीकार; भाषा सरल और प्रवाही।
विधा: संवादात्मक कहानी।
बेटे रहमान ने गुस्से में (तैश में आकर) लक्ष्मी की पीठ पर चार डंडे मारे, क्योंकि उसने दूध नहीं दिया।
मार के बाद लक्ष्मी डर गई, पास आने वाले को सिर हिलाकर मारने दौड़ती और रस्सी तोड़ने की कोशिश करती।
बीमार करामत अली उठकर आया, पीठ सहलाई; पत्नी रमजानी ने चोट पर लगाने के लिए रोगन दिया।
ज्ञान सिंह को मवेशी पालने का शौक था; उसने तीन बरस पहले लक्ष्मी खरीदी थी। दूध बेचना उसका धंधा नहीं था, बचा दूध बेचकर गाय के चारे का खर्च निकालता था।
नौकरी से अवकाश के बाद कंपनी का मकान छोड़ना था, इसलिए उसने लक्ष्मी करामत अली को सौंपी। करामत अली एक वर्ष से उसकी सेवा कर रहा था।
सादे चारे का ही खर्च तीन-साढ़े तीन सौ रुपये महीना था; साथी नईम ने गाय बेचने की सलाह दी।
खर्च बचाने के लिए रहमान लक्ष्मी को इलाके से बाहर नाले के पास चरने छोड़ आया; एक पड़ोसी शिकायत लेकर आया कि वह उसकी गाय का चारा खा गई, उसे बाँधकर रखो वरना काँजी हाउस भेज देंगे।
एक खरीदार आया जो गाय को ‘कहीं और बेच देने’ वाला था; करामत ने उसका पुराना धंधा पहचानकर उसे कोरा जवाब दे दिया।
अंत में करामत अली भरे गले से लक्ष्मी को दो किलोमीटर दूर गऊशाला में भरती कराने ले गया।
महत्वपूर्ण शब्द
बथान – गाय-बैल के रहने का स्थान
मवेशी – खेती और दूध के काम आने वाले पशु
पुआल – धान के सूखे डंठल
खली – तेल निकालने के बाद तिलहन का बचा भाग
हौका – लंबी साँस (दीर्घ निःश्वास)
काँजी हाउस – सरकारी मवेशीखाना, जहाँ लावारिस पशु बंद किए जाते हैं
मुहावरे: मुँह मारना – जल्दी-जल्दी खाना; गला भर आना – भावुक होना; कोरा जवाब देना – साफ मना करना; तैश में आना – आवेश में आना।
हिंदी-मराठी समोच्चारित शब्द: एक जैसे उच्चारण पर अलग अर्थ – जैसे ‘पत्र’ हिंदी में खत (चिट्ठी) के अर्थ में आता है; ‘कल’ हिंदी में बीता या आने वाला दिन है, मराठी में ‘झुकाव/रुझान’।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. कारण लिखिए : करामत अली ने लक्ष्मी को गऊशाला में भरती किया।
घर में कोई लक्ष्मी की चिंता नहीं करता था, खर्च बढ़ रहा था और वह उसे ऐसे व्यापारी के हाथ बेचना नहीं चाहता था जो उसे आगे बेच देता। मित्र ज्ञान सिंह को दिए वचन के कारण उसने उसे सुरक्षित जगह पहुँचाया।
Q2. गलत वाक्य सही करके लिखिए : करामत अली पिछले चार सालों से गाय की सेवा करता चला आ रहा था।
सही वाक्य – करामत अली पिछले एक वर्ष से गाय की सेवा करता चला आ रहा था।
Q3. ज्ञान सिंह का पशुप्रेम दर्शाने वाली बातें लिखिए।
उसे मवेशी पालने का बहुत शौक था।
वह किसी भी हालत में लक्ष्मी को बेचना नहीं चाहता था।
दूध बेचना उसका धंधा नहीं था, केवल चारे का खर्च निकालता था।
जाते समय भरोसेमंद मित्र को गाय सौंपी।
Q4. लक्ष्मी (करामत अली की गाय) का वर्णन कीजिए : नाम, उम्र, नस्ल, स्थिति।
नाम – लक्ष्मी; उम्र – पहले अधेड़, अब बूढ़ी; नस्ल – जर्सी; स्थिति – दूध देना बंद, मार से घायल और भयभीत।
Q5. ‘यदि आप करामत अली की जगह होते तो…’ – अपने विचार लिखिए।
मैं भी बूढ़ी गाय को पशु-व्यापारी को न बेचता।
उसे गऊशाला या पशु संरक्षण संस्था को सौंपता।
बूढ़े पशु की सेवा को मानवता का कर्तव्य मानता।
परिवार को भी पशुप्रेम का महत्त्व समझाता।
परीक्षा टिप
घटनाक्रम वाले प्रश्न के लिए कहानी का क्रम याद रखें: मार → रोगन → ज्ञान सिंह की याद → खर्च की चिंता → खुला छोड़ना → खरीदार → गऊशाला।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 3
वाह रे ! हमदर्द
संक्षिप्त सार
वाह रे ! हमदर्द घनश्याम अग्रवाल का हास्य-व्यंग्य निबंध है। साइकिल और कार की टक्कर में लेखक की टाँग टूट जाती है और वह सार्वजनिक अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में भरती होता है। असली परेशानी टाँग नहीं, बल्कि हमदर्दी जताने आने वाले लोग बनते हैं। लेखक हँसी-हँसी में दिखाते हैं कि दिखावटी हमदर्दी मरीज के लिए कितनी पीड़ादायक हो सकती है।
मुख्य बिंदु
लेखक: घनश्याम अग्रवाल (जन्म १९४२, अकोला, महाराष्ट्र) – हास्य-व्यंग्य कवि और लेखक। कृतियाँ: ‘हँसीघर के आईने’, ‘आजादी की दुम’, ‘आई एम सॉरी’, ‘अपने-अपने सपने’ (लघुकथा संग्रह)।
विधा: हास्य-व्यंग्य निबंध (यह पाठ ‘हँसीघर के आईने’ से लिया गया है)।
पूँजीवाद-समाजवाद पर भाषण सुनकर लौटते समय लेखक की साइकिल कार से भिड़ गई – ‘झगड़े में टाँग अड़ाई’ और टाँग टूट गई।
लेखक का नया मुहावरा: ‘टाँग का टूटना’ यानी सार्वजनिक अस्पताल में कुछ दिन रहना।
जनरल वार्ड में मिलने का समय तय होता है, पर प्राइवेट वार्ड मिलने वालों के लिए ‘खुला निमंत्रण’ है।
ऑफिस के बड़े बाबू ने सोए लेखक को जगाने के लिए टूटी टाँग दबा दी और पूछा – ‘अब दर्द कैसा है?’
सोनाबाई अपने चार बच्चों के साथ आई; बच्चों ने कुर्सी-मेज पर चढ़कर, रेत की थैली पर बॉक्सिंग करके और दवा की शीशी गिराकर हंगामा किया।
एक आदमी गलत कमरे में आकर रोने लगा; पत्नी ने उसे रिश्तेदार समझकर टैक्सी का किराया दे दिया।
कवि लपकानंद ने बेतुकी कविता सुनाई – ‘मेरे दोस्त की टूट गई है टाँग…’।
अंत में लेखक प्रार्थना करता है कि दूसरी टाँग टूटे तो ऐसी जगह जहाँ कोई परिचित न हो – ‘बड़े बेदर्द होते हैं ये हमदर्दी जताने वाले’।
महत्वपूर्ण शब्द
हमदर्दी – सहानुभूति
फिक्र – चिंता
एहसान – कृतज्ञता, उपकार
औंधा – उल्टा
औपचारिकता – केवल दिखावे के लिए किया गया व्यवहार
टाँग अड़ाना (मुहावरा) – बाधा डालना
काँप उठना (मुहावरा) – भयभीत होना
भाषा अध्ययन
संज्ञा के भेद (भाषा बिंदु): व्यक्तिवाचक (सोनाबाई, गोवा), जातिवाचक (गाय, बच्चे), भाववाचक (हमदर्दी, दर्द), समूहवाचक (टुकड़ी, सेना), द्रव्यवाचक (सोना, चाँदी)।
उदाहरण: ‘सैनिकों की टुकड़ी आगे बढ़ी’ – सैनिक (जातिवाचक), टुकड़ी (समूहवाचक)।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 4
मन (पूरक पठन)
संक्षिप्त सार
मन विकास परिहार के हाइकु का संकलन है (पूरक पठन)। हाइकु जापान की काव्य विधा है जिसमें बहुत कम शब्दों में गहरी बात कही जाती है। इन हाइकु में कवि ने जीवन, कर्म, दुख, आशा, प्रेम और प्रकृति से जुड़े छोटे-छोटे अनुभव व्यक्त किए हैं।
मुख्य बिंदु
कवि परिचय: विकास परिहार (जन्म १९८३, गुना, मध्य प्रदेश)। २००० से २००६ तक भारतीय वायुसेना में सेवा, फिर पत्रकारिता और रेडियो से जुड़े; नाट्य गतिविधियों में भी रुचि।
हाइकु: जापान की लोकप्रिय विधा, विश्व की सबसे छोटी कविता मानी जाती है। ढाँचा: ५ + ७ + ५ = १७ वर्ण, तीन पंक्तियाँ।
हिंदी साहित्य ने पाँचवें दशक से हाइकु को अपनाया।
कर्म का संदेश: जीवन भर कर्म करते रहो, फल पाने की चिंता मत करो।
आशा: घना अँधेरा हो तो प्रकाश और अधिक चमकता है; काँटों के बीच खिलखिलाता फूल प्रेरणा देता है।
दुख की अभिव्यक्ति: भीतरी कुंठा आँसू बनकर आँखों के रास्ते बाहर आती है; आँसुओं के खारे जल से दुख धुल जाता है और मन पवित्र हो जाता है।
जिजीविषा: जीवन का विष पीकर भी जीना ही जीने की सच्ची इच्छा है।
साथ पर दूरी: रेल की पटरियाँ साथ चलती हैं, फिर भी मौन रहती हैं (कभी मिलती नहीं)।
प्रकृति: फागुन रंग-बिरंगे रंग लेकर आता है; सितारे बादलों की ओट में छिपे तो आकाश सूना हो गया।
विडंबना: सागर में रहकर भी मछली प्यासी रही।
महत्वपूर्ण शब्द
मँझधार – नदी के प्रवाह का बीच का भाग
कुंठा – घोर निराशा
विषाद – इच्छा पूरी न होने का दुख
जिजीविषा – जीने की इच्छा
ओट – आड़
हाइकु – ५-७-५ वर्णों की तीन पंक्तियों वाली छोटी कविता
भाषा अध्ययन
विधा: हाइकु; हर हाइकु एक स्वतंत्र भाव लिए है।
रूपक/प्रतीक: ‘जीवन नैया’ – जीवन को नाव माना है (रूपक अलंकार)।
मानवीकरण: ‘खिलखिलाता फूल देता प्रेरणा’, ‘बरसीं आँखें’।
विरोधाभास: ‘सागर में भी रहकर मछली प्यासी ही रही’।
महीना और ऋतु: फागुन – वसंत ऋतु।
उपयोजित लेखन: बधाई के लिए धन्यवाद पत्र (दिनांक, संबोधन, अभिवादन, प्रारंभ, विषय विवेचन, समापन, नाम, पता, ई-मेल)।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. उचित जोड़ियाँ मिलाइए : मछली, गीतों के स्वर, रेल की पटरियाँ, आकाश
मछली – प्यासी; गीतों के स्वर – अमर; रेल की पटरियाँ – मौन; आकाश – सूना।
Q2. परिणाम लिखिए : (१) सितारों का छिपना (२) तुम्हारा गीतों को स्वर देना
(१) आकाश सूना हो गया। (२) गीत अमर हो गए।
Q3. ‘करते जाओ / पाने की मत सोचो / जीवन सारा’ – हाइकु से मिलने वाला संदेश लिखिए।
मनुष्य को पूरे जीवन निःस्वार्थ भाव से कर्म करते रहना चाहिए। फल की चिंता करने से मन अशांत होता है, इसलिए केवल कर्म पर ध्यान देना चाहिए।
Q4. केंद्रीय भाव स्पष्ट कीजिए : ‘काँटों के बीच / खिलखिलाता फूल / देता प्रेरणा’।
फूल काँटों के बीच रहकर भी हँसता-खिलता है।
उसी तरह मनुष्य को कठिनाइयों में भी प्रसन्न रहना चाहिए।
संघर्ष में मुस्कुराना ही सच्ची प्रेरणा है।
Q5. हाइकु विधा की विशेषताएँ लिखिए।
जापान की काव्य विधा, विश्व की सबसे छोटी कविता।
तीन पंक्तियाँ, ५-७-५ = १७ वर्ण।
कम शब्दों में गहरा अर्थ, प्रायः प्रकृति और अनुभूति पर आधारित।
हिंदी में पाँचवें दशक से लोकप्रिय।
परीक्षा टिप
पूरक पठन से प्रायः छोटे प्रश्न (जोड़ियाँ, परिणाम, केंद्रीय भाव) आते हैं। हाइकु का ५-७-५ नियम अवश्य याद रखें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 5
गोवा : जैसा मैंने देखा
संक्षिप्त सार
गोवा : जैसा मैंने देखा विनय शर्मा का यात्रा वर्णन है। लेखक परिवार के साथ इंदौर से गोवा घूमने जाते हैं और वहाँ के सुंदर समुद्र तटों, जीवनशैली, खान-पान, जलक्रीड़ाओं और त्योहारों का रोचक वर्णन करते हैं। अंत में वे बताते हैं कि पश्चिमी फैशन के बीच भी गोवा ने भारतीय संस्कृति को सँभालकर रखा है।
मुख्य बिंदु
लेखक: विनय शर्मा (जन्म १९७३, उज्जैन, म.प्र.) – यात्रा वृत्तांत उनकी पसंदीदा विधा; व्यंग्य और ललित निबंध भी लिखे। कृतियाँ: ‘आनंद का उद्गम अमरकंटक’ (ललित निबंध), ‘चित्र परीक्षा’ (व्यंग्य), ‘अमरनाथ की यात्रा : प्रकृति के बीच’, ‘कोइंबतूर में कुछ दिन’ (यात्रा वृत्तांत)।
विधा: यात्रा वर्णन।
२३ नवंबर को ‘गोवा एक्सप्रेस’ से मड़गाँव पहुँचे; मड़गाँव से ५ किमी दक्षिण बेनालियम के रिसॉर्ट में ठहरे।
लेखक के अनुसार जीवन की समस्याओं से राहत पाने का अच्छा तरीका पर्यटन है – मन तरोताजा होता है।
गोवा के दो जिले – उत्तर गोवा और दक्षिण गोवा; राजधानी पणजी मांडवी नदी के किनारे। समुद्री इलाका होने से उमस और नमी रहती है।
बेनालियम बीच पर बच्चे बार-बार रेत का घर बनाते रहे – लेखक ने सीखा कि आशावाद हो तो कोई काम असंभव नहीं।
बेनालियम बीच: रेतीला, उथला, मछुआरों की पहली पसंद; मछलियाँ स्थानीय बाजार में बिकती हैं।
अंजुना बीच: नीले पानीवाला, पथरीला, गहरा; बॉलीवुड की पहली पसंद (फिल्मों की शूटिंग)।
कलिंगवुड बीच: गोवा का सबसे लंबा (३-४ किमी), रेतीला; वाटर स्पोर्ट्स; लेखक को पैराग्लाइडिंग में सबसे अधिक रोमांच आया।
गोवा में छोटे-बड़े लगभग ४० बीच, प्रमुख ७-८। कोलवा बीच पर बोटिंग में डॉल्फिन देखीं।
शाकाहारी पर्यटकों को भोजन की समस्या होती है, क्योंकि ‘सी फूड’ अधिक है।
दशहरा: रावण का पुतला नहीं जलाया जाता; सुबह वाहनों की पूजा, शाम को भगवान की पालकी मंदिर ले जाई जाती है, एक विशेष पेड़ की पत्तियाँ देकर बधाई दी जाती है।
महत्वपूर्ण शब्द
आबोहवा – जलवायु
हरीतिमा – हरियाली
सैलानी – पर्यटक
खानापूर्ति – औपचारिकता पूरी करना
सुस्वादु – स्वादिष्ट
मन तरंगायित होना – मन उमंग से भरना
निजात पाना – मुक्ति पाना; दो-चार होना – जूझना; जेब ढीली होना – बहुत खर्च होना
भाषा अध्ययन
विशेषण और उसके भेद (भाषा बिंदु): गुणवाचक (नीला पानी, भयभीत गाय), परिमाणवाचक (दस लीटर दूध, दो गज जमीन), संख्यावाचक (चालीस छात्र), अनिश्चित (कुछ लोग), सार्वनामिक (वही पानी, यह लड़का)।
सहायक क्रिया: मुख्य क्रिया के साथ आकर अर्थ पूरा करती है – ‘दौड़ पड़ी’, ‘मिल जाता है’, ‘बनाने लगे’, ‘पकड़ी जाती हैं’।
उपयोजित लेखन: व्यवस्थापक, औषधि भंडार को माँग पत्र (औपचारिक पत्र)।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. लिखिए : (१) नीले पानीवाला पथरीला (२) रेतीला तथा उथला (३) सबसे लंबा (४) मछुआरों की पहली पसंद
(१) अंजुना बीच (२) बेनालियम बीच (३) कलिंगवुड बीच (४) बेनालियम बीच
Q2. यात्रा के दौरान लेखक की दिनचर्या लिखिए।
सुबह जल्दी उठना, जल्दी नाश्ता करना, दिन भर घूमना-फिरना और शाम को रिसॉर्ट लौटकर थकान मिटाने के लिए पूल में तैरना।
Q3. नवरात्रि तथा दशहरा पर्व में गोवा की अलग परंपराएँ लिखिए।
रावण का पुतला नहीं जलाया जाता।
सुबह लोग वाहनों की सफाई कर उनकी पूजा करते हैं।
शाम को भगवान की पालकी मंदिर ले जाई जाती है।
एक विशेष पेड़ की पत्तियाँ देकर एक-दूसरे को बधाई देते हैं।
Q4. बेनालियम और अंजुना बीच में अंतर स्पष्ट कीजिए।
बेनालियम: रेतीला, उथला, मछुआरों की पसंद, मछली व्यवसाय।
अंजुना: पथरीला, गहरा, नीला पानी, फिल्मों की शूटिंग की पसंद।
दोनों व्यावसायिक हैं, पर व्यवसाय की प्रकृति अलग है।
Q5. अभिव्यक्ति : ‘प्रकृति को सुंदर बनाए रखने में मेरा योगदान’।
पर्यटन स्थलों पर कचरा न फैलाना, प्लास्टिक का कम उपयोग।
पेड़ लगाना और उनकी देखभाल करना।
पानी और बिजली की बचत।
समुद्र तट और नदियों को स्वच्छ रखने के अभियानों में भाग लेना।
परीक्षा टिप
तीनों बीचों की विशेषताएँ तालिका बनाकर याद करें। विशेषण के पाँचों भेद उदाहरण सहित लिखने का अभ्यास करें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 6
गिरिधर नागर
संक्षिप्त सार
गिरिधर नागर में संत मीराबाई के तीन पद हैं। पहले पद में मीरा कहती हैं कि गिरिधर गोपाल (श्रीकृष्ण) ही उनके सब कुछ हैं, इसके लिए उन्होंने कुल-मर्यादा और लोक-लाज छोड़ दी। दूसरे पद में वे प्रभु से भवसागर से पार लगाने की विनती करती हैं। तीसरे पद में वे होली के रूपक द्वारा भक्ति के आनंद का वर्णन करती हैं।
मुख्य बिंदु
कवयित्री परिचय: संत मीराबाई – पाठ्यपुस्तक के अनुसार जन्म १५१६, जोधपुर (राजस्थान); मृत्यु १५४६, द्वारिका (गुजरात)। बचपन से कृष्णभक्ति में लीन; गृहत्याग कर मंदिरों में भजन गाती थीं।
उनके भजन माधुर्य भाव से भरे हैं। प्रमुख कृतियाँ: ‘नरसी जी का मायरा’, ‘गीत गोविंद’, ‘राग गोविंद’, ‘राग सोरठ के पद’।
पद १: सिर पर मोर-मुकुट धारण करने वाले कृष्ण ही मेरे पति हैं, दूसरा कोई नहीं। मीरा संतों के पास बैठीं, लोक-लाज खो दी।
आँसुओं के जल से सींचकर उन्होंने प्रेम की बेल बोई, जो अब फैलकर आनंद का फल दे रही है।
दही बिलोकर मक्खन निकाल लिया, छाछ दूसरों के लिए छोड़ दी – यानी भक्ति का सार पा लिया।
भक्त को देखकर प्रसन्न हुईं, संसार (मोह-माया) को देखकर दुखी हुईं।
पद २: हरि के बिना मेरी कोई गति नहीं; तुम मेरे पालनहार हो, मैं तुम्हारी दासी हूँ। संसार विकारों का सागर है, नाव का पाल फट गया है, प्रभु पाल बाँधो, नहीं तो नाव डूब जाएगी।
विरहिणी मीरा प्रिय की राह देख रही है और उनकी शरण में है।
पद ३: फागुन के चार दिन हैं, होली खेलो। बिना करताल-पखावज के ‘अनहद’ नाद गूँज रहा है, रोम-रोम गा रहा है।
शील-संतोष की केसर, प्रेम की पिचकारी, गुलाल से आकाश लाल – मीरा प्रभु के चरण-कमलों पर बलिहारी जाती हैं।
महत्वपूर्ण शब्द
कुल की कानि – वंश की मर्यादा
ढिग – पास
मथनियाँ – दही मथने का बर्तन
रावरी – आपकी
चेरी – दासी
नेरी – निकट
छतीसूँ – श्रेष्ठ (छत्तीस राग)
कँवल – कमल; बलिहारना – निछावर होना
भाषा अध्ययन
भाषा: राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा; विधा: पद (गेय रचना)।
गिरिधर गोपाल, गिरिधर नागर, लाल गिरिधर, हरि, प्रभु।
Q3. होली के समय आनंद निर्मित करने वाले घटक लिखिए।
अनहद नाद की झनकार
शील-संतोष की केसर का रंग
प्रेम-प्रीत की पिचकारी
उड़ता गुलाल और बरसता रंग
Q4. दूसरे पद का सरल अर्थ लिखिए।
मीरा कहती हैं – हे प्रभु, तुम्हारे बिना मेरा उद्धार नहीं। तुम मेरे पालनहार हो, मैं तुम्हारी दासी हूँ। मैं बार-बार तुम्हें पुकारती हूँ। यह संसार विकारों का सागर है, मेरी जीवन-नाव का पाल फट गया है; उसे बाँधकर मुझे डूबने से बचा लो। मैं विरहिणी तुम्हारी राह देख रही हूँ और तुम्हारी शरण में हूँ।
Q5. ‘दूध की मथनियाँ बड़े प्रेम से बिलोई…’ – पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
जैसे दही मथकर मक्खन निकाला जाता है, वैसे मीरा ने भक्ति से जीवन का सार पाया।
मक्खन (प्रभु-प्रेम) मीरा ने ले लिया, छाछ (सांसारिक सुख) दूसरों के लिए छोड़ दी।
भाव: सच्चे भक्त को सार ग्रहण कर असार छोड़ देना चाहिए।
परीक्षा टिप
पदों का सरल अर्थ लिखते समय पहले प्रसंग (मीरा कृष्ण से कहती हैं) बताएँ, फिर भाव। रूपक अलंकार के उदाहरण पाठ से ही दें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 7
खुला आकाश (पूरक पठन)
संक्षिप्त सार
खुला आकाश कुँवर नारायण की डायरी के कुछ अंश हैं (पूरक पठन, ‘दिशाओं का खुला आकाश’ से)। इनमें लेखक भीतरी दुनिया, आत्मचिंतन, सही साहित्य, सहज जीवन, बुढ़ापे में जीने का अर्थ, महानगर का तंग जीवन और चीजों की गुलामी पर अपने विचार लिखते हैं। मुख्य संदेश है – दूसरों से वाद-विवाद नहीं, स्वयं से संवाद करो।
मुख्य बिंदु
लेखक परिचय: कुँवर नारायण (जन्म १९२७, फैजाबाद; मृत्यु २०१७, लखनऊ) – ‘नई कविता’ आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर; ‘ज्ञानपीठ’ पुरस्कार प्राप्त। कृतियाँ: ‘चक्रव्यूह’, ‘परिवेश : हम-तुम’, ‘आत्मजयी’, ‘कोई दूसरा नहीं’, ‘इन दिनों’; ‘तीसरा सप्तक’ में कविताएँ।
विधा: डायरी – हर अंश के नीचे तारीख दी गई है।
अंदर की दुनिया: हमारे भीतर की दुनिया बाहर से कहीं बड़ी है; सच्ची आजादी इसी भीतरी दुनिया में है।
मकान पर मकान: लेखक की गली में आसमान नहीं दिखता, पेड़ नहीं; चिड़ियाँ बिजली-टेलीफोन के तारों पर बैठी प्लास्टिक के खिलौनों-सी लगती हैं।
सही साहित्य: वह जो दोनों आँखों से देखा जाए – केवल बाईं या केवल दाईं आँख से नहीं (एकतरफा नहीं, संतुलित दृष्टि)।
जानें खुद को: चुपचाप बैठकर अपने बारे में सोचें; दूसरों पर भी उतना ही भरोसा रखें जितना अपनी समझ पर।
सिर्फ मनुष्य होते: कुछ मनुष्य बाघ-भेड़िये-बिच्छू जैसे, कुछ गाय-बकरी-तितली जैसे होते हैं; काश सब केवल मनुष्य होते।
लुका-छिपाकर जीना: लेखक को सहज, खुला जीवन पसंद है; छिपाकर जीना चारित्रिक बेईमानी है और आत्मविश्वास की कमी दिखाता है।
दिल्ली में रहना: शहर एक भीड़ भरी बस जैसा – पायदान पर लटके रहने जैसा जीवन।
बहाने और बहस: जो करना चाहते हैं उसके लिए रास्ते निकालते हैं, जो नहीं चाहते उसके लिए बहाने। बहस अपने से करो, दूसरों से बहस से केवल झगड़ा मिलता है।
चीजों की गुलामी: कंप्यूटर और मोटर ने मानो लेखक को ‘खरीद’ लिया है; पहले एक मालिक के कई गुलाम होते थे, अब हर चीज के दर्जनों गुलाम हैं।
महत्वपूर्ण शब्द
सँकरी – पतली, कम चौड़ी, तंग
लकड़बग्घा – भेड़िये की जाति का एक पशु
गोजर – कनखजूरा
चलायमान – चलता हुआ
दंभ – घमंड
आत्मचिंतन – अपने बारे में गहराई से सोचना
भाषा अध्ययन
संधि (भाषा बिंदु) – दो वर्णों के मेल से होने वाला परिवर्तन।
स्वर संधि: महा + आत्मा = महात्मा; सदा + एव = सदैव; सप्त + अह = सप्ताह; सूर्य + अस्त = सूर्यास्त; भानु + उदय = भानूदय।
व्यंजन संधि: सत् + जन = सज्जन; दिक् + गज = दिग्गज; सम् + तोष = संतोष; यदि + अपि = यद्यपि (स्वर संधि – यण)।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 8
गजल
संक्षिप्त सार
गजल माणिक वर्मा की प्रेरणादायी रचना है (‘गजल मेरी इबादत है’ से)। हर शेर में कवि कहते हैं कि केवल दिखावे के लिए सुंदर या ऊँचा दिखना बेकार है; सच्चा मनुष्य वह है जो अपने अच्छे कर्मों से दिखाई दे – नींव का पत्थर, मील का पत्थर, आईना, रोशनी और मोती बनकर।
मुख्य बिंदु
कवि परिचय: माणिक वर्मा (जन्म १९३८, उज्जैन, म.प्र.) – हास्य-व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर, वाचिक (मंचीय) परंपरा के प्रमुख कवि; उनके व्यंग्य धारदार और गजलें प्रेरक हैं।
कृतियाँ: ‘गजल मेरी इबादत है’, ‘आखिरी पत्ता’ (गजल संग्रह), ‘आदमी और बिजली का खंभा’, ‘महाभारत अभी जारी है’, ‘मुल्क के मालिको जवाब दो’।
केंद्रीय भाव: रूप-रंग से नहीं, कर्मों से सुंदर दिखो।
स्वर्णिम शिखर बनकर नहीं, नींव बनकर दिखो – चुपचाप दूसरों का आधार बनो।
चलो तो धूल बनकर आसमान पर लिखो; रुको तो मील का पत्थर बनो, जो दूसरों को राह दिखाए।
केवल दिखने के लिए दिखना व्यर्थ है – आदमी बनकर (इंसानियत के साथ) दिखो।
पत्थरों के शहर (संवेदनहीन समाज) में ऐसा आईना बनो जो टूटकर बिखरे नहीं – सच दिखाओ।
मोमबत्ती के धागे की तरह जलोगे, तभी हर दिल की जलन (पीड़ा) महसूस होगी।
जुगनू की तरह समय की धुंध में रोशनी बनो।
हमारी एक मर्यादा है – मोती बनना है तो सीप के अंदर रहो (संयम)।
फूल बनने से डरने वाली कली को तितली के टूटे पंख जैसा साहस दिखाओ; भीड़ में हर चेहरे में ईश्वर/प्रिय दिखे – यह कवि की कामना है।
महत्वपूर्ण शब्द
स्वर्णिम – सोने के रंग का, सुनहला
गर्द – धूल
शक्ल – चेहरा
धुंध – धुआँ, कोहरा
नींव – इमारत का आधार
मर्यादा – सीमा, नियम
भाषा अध्ययन
गजल: उर्दू-फारसी से आई काव्य विधा; दो-दो पंक्तियों के स्वतंत्र शेर।
रदीफ: हर शेर के अंत में दोहराया जाने वाला शब्द – यहाँ ‘दिखो’।
काफिया: रदीफ से पहले आने वाले तुकांत शब्द – शिखर/अंदर, पत्थर, आईना, रोशनी…
मतला – पहला शेर; मक्ता – अंतिम शेर।
प्रतीक: नींव – विनम्र योगदान; मील का पत्थर – मार्गदर्शन; पत्थरों का शहर – संवेदनहीन समाज; जुगनू – छोटी पर सच्ची रोशनी।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 9
रीढ़ की हड्डी
संक्षिप्त सार
रीढ़ की हड्डी जगदीशचंद्र माथुर की प्रसिद्ध एकांकी है (‘भोर का तारा’ संग्रह से)। रामस्वरूप अपनी बी.ए. पास बेटी उमा के विवाह के लिए गोपाल प्रसाद और उनके बेटे शंकर को बुलाते हैं, पर उमा की पढ़ाई छिपाते हैं, क्योंकि वर-पक्ष को ‘कम पढ़ी’ लड़की चाहिए। लड़की को वस्तु की तरह परखे जाने पर उमा विरोध करती है और शंकर की कायरता उजागर करती है। एकांकी स्त्री-शिक्षा और नारी-सम्मान का समर्थन करती है तथा दकियानूसी सोच पर प्रहार करती है।
मुख्य बिंदु
लेखक: जगदीशचंद्र माथुर (जन्म १९१७, बुलंदशहर, उ.प्र.; मृत्यु १९७८) – प्रसिद्ध नाटककार; आकाशवाणी में रहते हुए हिंदी को लोकप्रिय बनाने में योगदान। कृतियाँ: ‘कोणार्क’, ‘पहला राजा’, ‘भोर का तारा’, ‘शारदीया’।
विधा: एकांकी। पात्र: उमा, रामस्वरूप (पिता), प्रेमा (माँ), शंकर, गोपाल प्रसाद (शंकर के पिता), रतन (नौकर)।
गोपाल प्रसाद वकील हैं, पढ़े-लिखे हैं, पर चाहते हैं कि बहू ज्यादा पढ़ी न हो; शंकर मेडिकल कॉलेज में पढ़ता है।
गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ कहते हैं और ‘खूबसूरती पर टैक्स’ का मजाक करते हैं; उनके लिए लड़की का सुंदर होना और जन्मपत्री मिलना जरूरी है।
उनके अनुसार लड़कियों को अधिक पढ़ने की जरूरत नहीं – सिलाई-पुराई आ जाए, बस।
उमा के चश्मे से वे चौंकते हैं; रामस्वरूप झूठ बोलते हैं कि आँखें दुखने से चश्मा लगा है।
उमा ने मीरा का भजन ‘मेरे तो गिरिधर गोपाल’ गाया; पेंटिंग और सिलाई के बारे में भी पूछा गया।
इनाम के प्रश्न पर उमा बोल उठती है – कुर्सी-मेज बिकते समय दुकानदार उनसे कुछ नहीं पूछता, केवल खरीदार को दिखाता है।
उमा कहती है कि उसने बी.ए. पास करके कोई पाप नहीं किया; शंकर लड़कियों के होस्टल में ताक-झाँक करते पकड़ा गया था और नौकरानी के पैरों पड़कर भागा था।
अंत में उमा कहती है – घर जाकर पता लगाइए कि आपके बेटे के रीढ़ की हड्डी (बैकबोन) है भी या नहीं।
शीर्षक की सार्थकता: रीढ़ की हड्डी = चरित्र की दृढ़ता और स्वाभिमान। शंकर में यह नहीं है, उमा में है।
महत्वपूर्ण शब्द
तख्त – लकड़ी की बड़ी चौकी
तश्तरी – छोटी थाली
तकल्लुफ – शिष्टाचार, औपचारिकता
खँखारना – गला साफ करना
जायचा – जन्मपत्री
बैकबोन – रीढ़ की हड्डी; यहाँ – दृढ़ चरित्र
भाषा अध्ययन
अव्यय (अविकारी शब्द) के भेद (भाषा बिंदु):
क्रियाविशेषण अव्यय – धीरे-धीरे, आगे, प्रायः (उन्होंने मुझे धीरे-धीरे हिलाया)।
संबंधसूचक अव्यय – के सामने, के पास, की तरफ, के बाद (गाय को घर के सामने बाँधा)।
समुच्चयबोधक अव्यय – और, कि, क्योंकि, इसलिए, बल्कि, यदि…तो (वह उठा और घर चला गया)।
Q1. कारण लिखिए : (१) बाप-बेटे चौंक उठे (२) उमा को गुस्सा आया
(१) उमा की नाक पर सुनहरी रिम वाला चश्मा देखकर, उन्हें लगा कि वह अधिक पढ़ी है। (२) उसे वस्तु की तरह नाप-तौलकर परखा जा रहा था, जिससे उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुँची।
Q2. गोपाल प्रसाद की दृष्टि में बहू ऐसी हो – लिखिए।
सुंदर हो, ज्यादा पढ़ी-लिखी न हो (मैट्रिक तक), सिलाई-पुराई जानती हो, गाना-बजाना जानती हो, जन्मपत्री मिलती हो।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 10
ठेस (पूरक पठन)
संक्षिप्त सार
ठेस फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ की प्रसिद्ध कहानी है (पूरक पठन)। गाँव का कारीगर सिरचन चिक, शीतलपाटी, मोढ़े जैसी सुंदर चीजें बनाने में बेजोड़ है, पर लोग उसे ‘बेगार’ और ‘चटोर’ समझते हैं। मानू दीदी की विदाई के लिए चिक बनाते समय चाची और मँझली भाभी की कड़वी बातों से उसके स्वाभिमान को ठेस लगती है और वह काम अधूरा छोड़ देता है। अंत में वह स्टेशन पर दौड़ता आकर सारी चीजें मानू को अपनी ओर से उपहार देता है और पैसे लेने से मना कर देता है।
मुख्य बिंदु
लेखक परिचय: फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ (जन्म १९२१, पूर्णिया, बिहार; मृत्यु १९७७) – हिंदी कथा को नई दिशा देने वाले आंचलिक कथाकार। कृतियाँ: ‘मैला आँचल’, ‘परती परिकथा’, ‘जुलूस’ (उपन्यास), ‘एक आदिम रात्रि की महक’, ‘ठुमरी’ (कहानी संग्रह)।
विधा: कहानी (आंचलिक); कथावाचक – घर का छोटा बेटा (‘बबुआ जी’)।
खेती के समय किसान सिरचन को नहीं बुलाते; लोग उसे बेकार ही नहीं, ‘बेगार’ समझते हैं।
सिरचन के काम: मोथी घास की शीतलपाटी, बाँस की तीलियों की चिक, सतरंगे मोढ़े, मूँज की रस्सी के जाले, ताड़ के पत्तों की छतरी-टोपी।
उसकी मजदूरी को लोग ‘बेकाम का काम’ मानते हैं – पेट भर खिला दो और पुराना कपड़ा दे दो।
वह स्वादिष्ट भोजन (घी, दही की कढ़ी, मलाईवाला दूध) का शौकीन है, इसलिए लोग उसे ‘चटोर’ कहते हैं।
माँ ने मानू की विदाई के लिए चिक और शीतलपाटी बनाने को बुलाया और ‘मोहर छापवाली धोती’ देने का वादा किया।
मँझली भाभी के ताने और चाची की कड़वी बात (‘चटोर कहीं के’) से सिरचन को ठेस लगी; उसने औजार समेटे और अधूरी चिक छोड़कर चला गया।
मनाने गए कथावाचक से उसने कहा – अब यह काम नहीं करूँगा; उसकी पत्नी की बुनी शीतलपाटी ही उसके पास बची थी।
अंत: स्टेशन पर सिरचन दौड़ता आया और शीतलपाटी, चिक तथा कुश की एक जोड़ी आसनी मानू को दे दी। मानू धोती का दाम देने लगी तो उसने जीभ दाँत से काटकर दोनों हाथ जोड़ दिए। मानू फूट-फूटकर रो पड़ी।
संदेश: कलाकार अपनी कला से नहीं, सम्मान से जीता है; उसके स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुँचानी चाहिए।
काल परिवर्तन (भाषा बिंदु): वर्तमान, भूत और भविष्य – हर एक के सामान्य, अपूर्ण और पूर्ण रूप।
वाक्य: ‘मानू को ससुराल पहुँचाने मैं ही जा रहा था’ – अपूर्ण भूतकाल।
सामान्य वर्तमान – मैं ही जाता हूँ; सामान्य भविष्य – मैं ही जाऊँगा; अपूर्ण भविष्य – मैं ही जा रहा होऊँगा।
पूर्ण वर्तमान – मैं ही गया हूँ; सामान्य भूत – मैं ही गया; पूर्ण भूत – मैं ही गया था; पूर्ण भविष्य – मैं ही गया होऊँगा।
अपूर्ण वर्तमान – मैं ही जा रहा हूँ।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. कृति पूर्ण कीजिए : (१) सिरचन का मेहनताना (२) मानू को उपहार में मिला
(१) भरपेट भोजन और काम पूरा होने पर पुराना कपड़ा (इस बार मोहर छापवाली धोती का वादा)। (२) शीतलपाटी, चिक और कुश की एक जोड़ी आसनी।
Q2. सिरचन को लोग क्या-क्या कहते थे?
बेकार, बेगार (बेगार करने वाला), चटोर, कामचोर।
Q3. वाक्यों का उचित क्रम लगाइए : सातों तारे मंद पड़ गए। / ये मेरी ओर से हैं। / लोग उसको बेकार ही नहीं, बेगार समझते हैं। / मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है।
१. लोग उसको बेकार ही नहीं, बेगार समझते हैं। २. मानू दीदी काकी की सबसे छोटी बेटी है। ३. सातों तारे मंद पड़ गए। ४. ये मेरी ओर से हैं। सब चीजें हैं दीदी।
Q4. ‘ठेस’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
सिरचन सच्चा कलाकार है, जिसे सम्मान चाहिए, दया नहीं।
चाची और भाभी के तानों से उसके मन को ठेस पहुँची और उसने काम छोड़ दिया।
फिर भी मानू के प्रति स्नेह के कारण उसने उपहार पूरा करके दिया।
पूरी कहानी कलाकार के आहत स्वाभिमान पर टिकी है, इसलिए शीर्षक सार्थक है।
Q5. अभिव्यक्ति : ‘कला और कलाकार का सम्मान करना हमारा दायित्व है।’
लोक कलाएँ हमारी संस्कृति की पहचान हैं।
कलाकार को उचित मेहनताना और आदर मिलना चाहिए।
सम्मान न मिलने पर कलाकार कला छोड़ देते हैं और कला लुप्त हो जाती है।
हमें हस्तकला की वस्तुएँ खरीदकर कलाकारों को प्रोत्साहन देना चाहिए।
परीक्षा टिप
पूरक पठन होने पर भी सिरचन के काम, मेहनताना और कहानी का अंत अवश्य याद रखें। काल परिवर्तन के आठ-नौ रूप एक ही वाक्य पर अभ्यास करें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 11
कृषक का गान
संक्षिप्त सार
कृषक का गान (पाठ में शीर्षक ‘कृषक गान’) दिनेश भारद्वाज का गीत है (‘गीतों का अवतार’ संग्रह से)। इसमें कवि अन्नदाता किसान की दुर्दशा का वर्णन करते हैं – वह संसार का पालन करता है, फिर भी स्वयं दुख, गरीबी और उपेक्षा में जीता है। कवि उसका गुणगान करके समाज में उसका सम्मान फिर से स्थापित करना चाहते हैं।
मुख्य बिंदु
कवि परिचय: दिनेश भारद्वाज (जन्म १९४३, मुरैना, म.प्र.) – रचनाएँ जमीन से जुड़ी, देश की मिट्टी की सुगंध वाली। कृतियाँ: ‘जन्म और जिंदगी’, ‘तृष्णा से तृप्ति तक’ (कविता संग्रह), ‘एकात्म’ (दोहा संग्रह)।
विधा: गीत; हर छंद के अंत में टेक – ‘उस कृषक का गान कर लूँ’।
किसान संतोष की तलवार लेकर जीता है; संसार में वसंत (मधुमास) है, पर उसके जीवन में सदा पतझड़ रहा है।
गरीबी (दीनता) ही उसका अभिमान है – कवि उस पर गर्व करना चाहते हैं।
किसान के श्रम और रक्त को चूसकर संसार ने ‘मधुरस’ बनाया; धूप-छाँव उसके लिए एक समान है (हर मौसम में अविचल)।
वह विश्व का पालक है, पर अपने ही पाले हुओं के पैरों तले कुचला जाता है।
कवि उससे हाथ मिलाकर नई सृष्टि का निर्माण करना चाहते हैं।
वह अपने कमजोर शरीर को पत्तियों (साधारण भोजन) से पालता है और बंजर जमीन को अपने खून-पसीने से उपजाऊ बनाता है।
कवि देवता-राक्षस सबको छोड़कर किसान का ध्यान करना चाहते हैं।
किसान यंत्र की तरह जी रहा है, जबकि बाकी सब अधिकार माँगते हैं; कवि उसके कण-कण से घोंसले (नीड़) का निर्माण करना चाहते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द
मधुमास – वसंत ऋतु
सृजक – रचना करने वाला
मनुजता – मनुष्यता
पालित – पाला हुआ, आश्रित
ऊसर – बंजर, अनुपजाऊ
उर्वरा – उपजाऊ भूमि
नीड़ – घोंसला
भाषा अध्ययन
रचना का प्रकार: गीत; तत्सम शब्दावली (सृजक, मनुजता, उर्वरा)।
रूपक अलंकार: ‘संतोष की तलवार’ – संतोष पर तलवार का आरोप।
विरोधाभास: ‘जगत में मधुमास, उसपर सदा पतझर’; ‘विश्व का पालक… पद दलित हो मर रहा है’।
ऋतुओं के नाम: मधुमास (वसंत), पतझर।
कविता के शब्द: निर्माता – सृजक; शरीर – तन; राक्षस – असुर; मानव – मनुज (मनुजता)।
भाव: करुणा और किसान के प्रति आदर।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. वाक्य पूर्ण कीजिए : (१) कृषक कमजोर शरीर को … (२) कृषक बंजर जमीन को …
(१) पत्तियों से पालता है। (२) अपने खून से उपजाऊ बना देता है।
Q2. कृषक इन स्थितियों में अविचल रहता है – लिखिए।
धूप और छाया (सुख-दुख), पतझड़ जैसी कठिनाई, गरीबी।
Q3. पंक्तियों में कवि के मन में कृषक के प्रति जागृत भाव लिखिए।
‘आज उसपर मान कर लूँ’ – गर्व/सम्मान का भाव।
‘आह्वान उसका आज कर लूँ’ – उसे साथ बुलाने का भाव।
‘नव सृष्टि का निर्माण कर लूँ’ – सहयोग और निर्माण का भाव।
‘आज उसका ध्यान कर लूँ’ – श्रद्धा और भक्ति का भाव।
Q4. कविता की प्रथम चार पंक्तियों का भावार्थ लिखिए।
किसान संतोष रूपी तलवार हाथ में लेकर जीवन बिताता है। संसार में चारों ओर वसंत जैसी खुशहाली है, पर किसान के जीवन में हमेशा पतझड़ जैसी कमी रही है। गरीबी को ही वह अपना गौरव मानता है। कवि कहते हैं कि आज मैं उस किसान पर गर्व करूँ और उसका गुणगान करूँ।
Q5. पद्य विश्लेषण कीजिए।
कवि – दिनेश भारद्वाज; प्रकार – गीत।
पसंदीदा पंक्ति – ‘विश्व का पालक बन जो, अमर उसको कर रहा है’।
कारण – किसान के महान योगदान और उसकी उपेक्षा का सच इस पंक्ति में है।
प्रेरणा – अन्नदाता किसान का आदर करें और उसके श्रम का मूल्य समझें।
परीक्षा टिप
‘पद्य विश्लेषण’ और ‘भावार्थ’ सबसे अधिक पूछे जाते हैं। विरोधाभास वाली पंक्तियाँ (मधुमास–पतझर, पालक–पददलित) उदाहरण में लिखें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 12
बरषहिं जलद
संक्षिप्त सार
बरषहिं जलद गोस्वामी तुलसीदास के ‘रामचरितमानस’ के किष्किंधा कांड से लिया गया पद्यांश है (चौपाई और दोहा छंद)। सीता-हरण के बाद श्रीराम वर्षा ऋतु का वर्णन करते हैं। हर प्राकृतिक दृश्य की तुलना वे समाज के गुण-दुर्गुण, सज्जन-दुर्जन और ज्ञान-भक्ति से करते हैं। इस तरह प्रकृति वर्णन के साथ नीति और उपदेश भी मिलता है।
मुख्य बिंदु
कवि परिचय: गोस्वामी तुलसीदास (पाठ्यपुस्तक के अनुसार जन्म १५११, बाँदा, उ.प्र.; मृत्यु १६२३, वाराणसी) – संत, कवि, विद्वान; संस्कृत के ज्ञाता होते हुए भी जनभाषा अवधी में लिखा।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 13
दो लघुकथाएँ (पूरक पठन)
संक्षिप्त सार
दो लघुकथाएँ (पूरक पठन) नरेंद्रकौर छाबड़ा की ‘मेरी चुनिंदा लघुकथाएँ’ से ली गई हैं – ‘कंगाल’ और ‘सही उत्तर’। पहली में लेखिका दिखाती हैं कि हम बड़ी दुकानों में बिना मोल-भाव खर्च करते हैं, पर गरीब फेरीवाले से दो रुपये के लिए झिक-झिक करते हैं। दूसरी में ईमानदार युवक भ्रष्टाचार पर सच्चा उत्तर देकर नौकरी पाता है – सत्य कुछ समय निराश हो सकता है, पराजित नहीं।
मुख्य बिंदु
लेखिका परिचय: नरेंद्रकौर छाबड़ा – जानी-मानी कथाकार; कहानियों के साथ अनेक लघुकथाएँ लिखीं। कृति: ‘मेरी चुनिंदा लघुकथाएँ’।
विधा: लघुकथा – कम शब्दों में एक घटना और तीखा संदेश।
कंगाल: भीषण गरमी से राहत पाने लेखक पहाड़ों पर गए; झील किनारे भुट्टेवाले ने एक भुट्टा पाँच रुपये का बताया।
लेखक ने शहर में दो रुपये का भाव बताकर मोल-भाव किया, फिर आगे बढ़ गए।
तभी मन में विचार आया – हम हजारों रुपये होटलों में बिना पूछे खर्च करते हैं, पर गरीब से दो रुपये के लिए झगड़ते हैं; ‘कितने कंगाल हैं हम !’
लेखक लौटे, बीस रुपये में चार भुट्टे खरीदे और मन को सुकून मिला।
सही उत्तर: योग्य युवक को हर जगह भ्रष्टाचार और रिश्वत के कारण नौकरी नहीं मिलती थी।
साक्षात्कार में उसने कहा – भ्रष्टाचार देश को घुन की तरह खाने वाला कीड़ा और कलंक है; रिश्वत भ्रष्टाचार की बहन है।
उपहार केवल खुशियों का आदान-प्रदान है, पर रिश्वत से रुके काम, दबी फाइलें, पदोन्नति करवाई जाती हैं – इसका समर्थन नहीं हो सकता।
अधिकारियों ने उसके सही उत्तर की दाद दी और उसका चयन कर लिया।
संदेश: ‘सत्य कुछ समय के लिए निराश हो सकता है, परास्त नहीं।’
महत्वपूर्ण शब्द
भीषण – भयानक
लिजलिजे – सीलनभरे
नीरवता – एकदम शांति
कंगाल – गरीब, निर्धन; यहाँ – मन से छोटा
साक्षात्कार – मुलाकात, इंटरव्यू
रिश्वत – घूस
बोलबाला होना – प्रभाव होना; दाद देना – प्रशंसा करना; सीना तानकर खड़े रहना – निर्भय होकर खड़े रहना
भाषा अध्ययन
अर्थ के आधार पर वाक्य भेद: विधानार्थक (इस वर्ष भीषण गरमी पड़ रही थी), निषेधार्थक (तुम्हारी बात मुझे अच्छी नहीं लगी), प्रश्नार्थक (आप किन्हें पसंद करते हैं?), आज्ञार्थक (सुनील, जरा ड्राइवर को बुलाओ), विस्मयादिबोधक (वाह ! कैसी सुगंध है), इच्छार्थक/संदेहार्थक आदि।
परिवर्तन: ‘थोड़ी बातें हुईं’ → निषेधार्थक: ‘ज्यादा बातें नहीं हुईं।’
रचना के आधार पर वाक्य भेद: साधारण (हर ओर से अब वह निराश हो गया था), संयुक्त (‘और’, ‘पर’ से जुड़े दो स्वतंत्र वाक्य – वह बूढ़ी काकी पर झपटी और… बोली), मिश्र (‘कि’, ‘क्योंकि’ से जुड़ा आश्रित उपवाक्य – जी करता कि मौका मिलते ही उसे चलाऊँ)।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. कारण लिखिए : (१) युवक को पहले नौकरी न मिल सकी (२) आखिरकार अधिकारियों ने युवक का चयन कर लिया
(१) हर जगह भ्रष्टाचार और रिश्वत का बोलबाला था, इसलिए योग्यता होते हुए भी चयन नहीं होता था। (२) भ्रष्टाचार और रिश्वत पर उसके सच्चे, तर्कपूर्ण उत्तर से अधिकारी प्रभावित हुए।
Q2. लोग रिश्वत देकर कौन-से लाभ उठाते हैं?
रुके हुए कार्य, दबी हुई फाइलें, टलती हुई पदोन्नति, रोकी गई नौकरी पाना।
Q3. ‘कंगाल’ लघुकथा में लेखक के मन परिवर्तन के कारण लिखिए।
उन्हें लगा कि हम बड़ी जगहों पर बिना दाम पूछे खर्च करते हैं।
गरीब भुट्टेवाले से दो-तीन रुपये के लिए मोल-भाव करना मन की कंगाली है।
इसलिए वे लौटे और पूरे दाम देकर चार भुट्टे खरीदे।
Q4. अर्थ के आधार पर भेद लिखिए : (१) हाय ! कितनी निर्दयी हूँ मैं। (२) काकी उठो, भोजन कर लो।
(१) विस्मयादिबोधक वाक्य (२) आज्ञार्थक वाक्य।
Q5. अभिव्यक्ति : ‘भ्रष्टाचार एक कलंक’।
भ्रष्टाचार योग्य लोगों का हक छीनता है और देश की प्रगति रोकता है।
इससे जनता का व्यवस्था पर विश्वास टूटता है।
हमें न रिश्वत देनी चाहिए, न लेनी चाहिए; शिकायत के अधिकार का उपयोग करना चाहिए।
ईमानदारी और पारदर्शिता ही इसका इलाज है।
परीक्षा टिप
दोनों लघुकथाओं के शीर्षक और उनका संदेश अलग-अलग याद रखें। वाक्य भेद में ‘अर्थ के आधार पर’ और ‘रचना के आधार पर’ का अंतर समझें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 14
श्रम साधना
संक्षिप्त सार
श्रम साधना श्रीकृष्णदास जाजू का वैचारिक निबंध है। लेखक बताते हैं कि संपत्ति का निर्माण प्रकृति के द्रव्यों और मनुष्य के शरीर श्रम से होता है, फिर भी श्रम करने वाले गरीब रहते हैं और धन थोड़े लोगों के हाथ में जमा होता है। वे श्रम की प्रतिष्ठा, आर्थिक-सामाजिक समता, ट्रस्टीशिप और गांधीजी के अहिंसक मार्ग पर बल देते हैं।
मुख्य बिंदु
लेखक परिचय: श्रीकृष्णदास जाजू (जन्म १८८२, अकासर, राजस्थान; मृत्यु १९५५, जयपुर) – १९२० में वकालत छोड़कर गांधीजी के रचनात्मक कार्यों से जुड़े; कई पुस्तकों के संपादन में योगदान।
विधा: वैचारिक निबंध।
गुलामी की प्रथा हजारों वर्ष चली; मनुष्य का विवेक जागा तो उसे छोड़ना पड़ा – वैसे ही संपत्ति के स्वामित्व की पुरानी मान्यताएँ भी बदलनी चाहिए।
रुपया, नोट, सोना-चाँदी संपत्ति नहीं, केवल उसके माप-तौल के साधन हैं; संपत्ति वे चीजें हैं जो मनुष्य के उपयोग में आती हैं।
अन्न, वस्त्र और मकान मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताएँ हैं।
संपत्ति के मुख्य साधन दो हैं – सृष्टि के द्रव्य और मनुष्य का शरीर श्रम; केवल बौद्धिक श्रम से उपयोग की चीज नहीं बनती।
किसान अन्न उगाता है, पर वही अनाज व्यापारियों को धनवान बनाता है; संपत्ति मजदूर बनाते हैं, धन व्यवस्थापकों के पास जमा होता है।
व्यवसायों के दो वर्ग: श्रमजीवी (किसान, मजदूर, बढ़ई, लुहार) और बुद्धिजीवी (मंत्री, न्यायाधीश, वकील, डॉक्टर, अध्यापक, व्यापारी)।
बिना शरीर श्रम किए आजीविका की सामग्री के उपयोग का न्यायोचित अधिकार नहीं मिलता; पैसे की जड़ भी अंत में श्रम ही है।
धनिक अपनी अतिरिक्त संपत्ति का उपयोग समाज-हित में ट्रस्टी के रूप में करें – यही संपत्ति दान यज्ञ और भूदान यज्ञ का आशय है।
स्वार्थ वृत्ति से स्पर्धा बढ़ती है और ‘मत्स्य न्याय’ चलता है; समाज परोपकार वृत्ति से ही ऊँचा उठता है।
हम शरीर श्रम को हीन मानते हैं – यह दोष बदलना होगा। गांधीजी ने श्रम की प्रतिष्ठा के लिए रचनात्मक कार्य चलाए; अहिंसा के मार्ग से आर्थिक-सामाजिक समता संभव है।
महत्वपूर्ण शब्द
तत्त्ववेत्ता – दार्शनिक
न्यायोचित – न्याय के अनुसार उचित
संपत्ति का स्वामित्व – संपत्ति पर अधिकार
ट्रस्टी – न्यासी; दूसरों के हित में संपत्ति सँभालने वाला
मत्स्य न्याय – बड़ी मछली का छोटी को निगलना; बलवान का दुर्बल पर अत्याचार
कल्याणकारी राज्य – कर लेकर दुर्बलों की सहायता करने वाला राज्य
गुजर-बसर करना (मुहावरा) – जीवन निर्वाह करना
भाषा अध्ययन
मुहावरे (भाषा बिंदु) – अर्थ और प्रयोग:
हाथ फेरना – स्नेह करना: करामत अली ने लक्ष्मी की पीठ पर हाथ फेरा।
काँप उठना – भयभीत होना: अस्पताल का नाम सुनते ही मैं काँप उठा।
इज्जत उतारना – अपमानित करना; दुम हिलाना – चापलूसी करना; तिलमिला जाना – क्रोध में आना; बोलबाला होना – प्रभाव होना।
गला फाड़ना – जोर से चिल्लाना; कलेजे में हूक उठना – मन में तीव्र पीड़ा होना; सीना तानकर खड़े रहना – निर्भय होकर डटे रहना; जेब ढीली होना – अधिक खर्च होना।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. लिखिए : (१) संपत्ति के मुख्य साधन (२) मनुष्य की प्राथमिक आवश्यकताएँ
(१) सृष्टि के द्रव्य और मनुष्य का शरीर श्रम। (२) अन्न, वस्त्र और मकान।
Q2. शरीर श्रम से और बौद्धिक काम से निर्वाह करने वालों के दो-दो उदाहरण लिखिए।
शरीर श्रम – किसान, बढ़ई (मजदूर, लुहार)। बौद्धिक काम – वकील, अध्यापक (डॉक्टर, न्यायाधीश)।
Q3. लेखक के अनुसार धनिकों को अपनी संपत्ति का उपयोग कैसे करना चाहिए?
आवश्यकता से अधिक संपत्ति पर अपना अधिकार न समझें।
उसे समाज-हित में ट्रस्टी के रूप में उपयोग करें।
संपत्ति दान और भूदान जैसे यज्ञों में सहयोग दें।
विषमता दूर करने में सहयोग करें।
Q4. ‘श्रम की प्रतिष्ठा’ के बारे में लेखक के विचार स्पष्ट कीजिए।
समाज शरीर श्रम को हीन दृष्टि से देखता है, यह बड़ा दोष है।
अमीर नौकरों से काम लेता है, गरीब मजबूरी में श्रम करता है।
श्रम के प्रति केवल प्रतिष्ठा नहीं, दिल में प्रेम होना चाहिए।
श्रमिक अपने श्रम का सही मूल्य जान ले तो आर्थिक क्रांति हो सकती है।
Q5. अभिव्यक्ति : ‘मेवे फलते श्रम की डाल’।
परिश्रम ही सफलता और समृद्धि का आधार है।
किसान, वैज्ञानिक, खिलाड़ी सबकी सफलता के पीछे निरंतर श्रम है।
बिना श्रम के मिला सुख टिकता नहीं।
इसलिए हर व्यक्ति को श्रम का सम्मान और स्वयं श्रम करना चाहिए।
परीक्षा टिप
वैचारिक निबंध में लेखक के मुख्य तर्क (संपत्ति के साधन, दो वर्ग, ट्रस्टीशिप, अहिंसा) क्रम से लिखें। मुहावरों का प्रयोग अपने वाक्य में करें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 15
छापा
संक्षिप्त सार
छापा ओमप्रकाश ‘आदित्य’ की हास्य-व्यंग्य कविता है (‘गोरी बैठी छत पर’ से)। कवि के घर आयकर विभाग का छापा पड़ता है। अधिकारी सोना, चाँदी, अर्थ और मुद्रा माँगते हैं, तो कवि इन शब्दों के दूसरे अर्थ लेकर मजेदार उत्तर देते हैं। पूरे घर में कुछ नहीं मिलता, अधिकारी शर्मिंदा होकर लौटते हैं और कवि उनसे कहते हैं कि गरीबों के घर कम-से-कम एक तख्त तो डलवा दीजिए।
मुख्य बिंदु
कवि परिचय: ओमप्रकाश ‘आदित्य’ (जन्म १९३६, गुरुग्राम, हरियाणा; मृत्यु २००९, भोपाल) – हिंदी की वाचिक (मंचीय) परंपरा में हास्य-व्यंग्य के शिखर पुरुष, छंद शास्त्र के पारखी।
कृतियाँ: ‘इधर भी गधे हैं-उधर भी गधे हैं’, ‘मॉडर्न शादी’, ‘गोरी बैठी छत पर’ (काव्य संग्रह)।
विधा: हास्य-व्यंग्य कविता; आम आदमी की आर्थिक स्थिति और छापामारों की कार्यप्रणाली पर व्यंग्य।
श्लेष का खेल: ‘सोना’ माँगा तो कवि बोले – मेरी आँखों में है, कई रातों से सोया नहीं।
‘स्वर्ण’ माँगा तो – सुवर्ण (अच्छे वर्ण/अक्षर) मैंने अपने काव्य में बिखेरे हैं।
‘अर्थ’ (धन) माँगा तो – अर्थ (मतलब) मेरी नई कविताओं में है, मिले तो ढूँढ़ लो।
‘चाँदी’ माँगी तो – मेरे बालों में धीरे-धीरे आ रही है (सफेद बाल)।
‘नोट’ माँगे तो – परीक्षा से एक महीने पहले तैयार करूँगा (नोट्स); ‘मुद्रा’ माँगी तो – मुद्राएँ मेरे मुख पर देख लीजिए।
छापामारों ने तकिये की रूई नोची, टूटी अलमारी, रसोई की खाली पीपियाँ, बच्चों की गुल्लक, कनस्तर, मटके सब देखे – सब में ‘शून्य’ मिला।
घर का ‘अरण्यकांड’ (उजाड़पन) देखकर उनके हृदय में रौद्र की जगह करुण रस आ गया; वे क्षमा माँगकर सिर झुकाए जाने लगे।
अंत का व्यंग्य: अमीरों के सोने-चाँदी के पलंग निकलवाइए, पर जिनके घर बैठने को कुछ नहीं, वहाँ एक तख्त तो डलवा दीजिए।
महत्वपूर्ण शब्द
छापा – सरकारी जाँच के लिए अचानक घर/दफ्तर की तलाशी
रोष – गुस्सा
अर्जित – कमाया हुआ; अनधिकृत – बिना अधिकार का
अर्थ – धन (और मतलब)
कनस्तर – टीन का पीपा
तख्त – लकड़ी की बड़ी चौकी
उद्भ्रांत – चकराया हुआ; अरण्यकांड – यहाँ उजाड़, खाली स्थिति
भाषा अध्ययन
श्लेष अलंकार: एक शब्द के कई अर्थ – सोना (स्वर्ण/नींद), अर्थ (धन/मतलब), चाँदी (धातु/सफेद बाल), मुद्रा (पैसा/चेहरे का भाव), नोट (रुपये/अध्ययन नोट्स)।
रस: हास्य रस; छापामारों के मन में ‘रौद्र’ से ‘करुण’ रस का परिवर्तन।
कवि छापामारों से कहते हैं कि जिनके घर में सोने-चाँदी के पलंग हैं, उनसे वह धन निकलवाना ठीक है। पर जिन गरीबों के घर बैठने तक को कुछ नहीं है, उनके यहाँ कम-से-कम एक तख्त तो डलवा दीजिए। इसमें सरकार से गरीबों की सहायता की अपेक्षा व्यक्त हुई है।
Q5. अभिव्यक्ति : ‘कर जमा करना, देश के विकास को गति देना है।’
कर से सड़कें, स्कूल, अस्पताल, बिजली जैसी सुविधाएँ बनती हैं।
ईमानदारी से कर भरना हर नागरिक का कर्तव्य है।
कर चोरी से देश की प्रगति रुकती है और गरीबों तक मदद नहीं पहुँचती।
समय पर कर भरना सच्ची देशसेवा है।
परीक्षा टिप
इस कविता में श्लेष के उदाहरण सबसे महत्त्वपूर्ण हैं – हर शब्द के दोनों अर्थ (सामान्य और कविता वाला) लिखें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 16
ईमानदारी की प्रतिमूर्ति
संक्षिप्त सार
ईमानदारी की प्रतिमूर्ति सुनील शास्त्री का संस्मरण है, जिसमें वे अपने पिता, भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की ईमानदारी, सादगी, किफायत और त्याग के प्रसंग बताते हैं। सरकारी गाड़ी के निजी उपयोग का किराया भरवाना, फटे कुरतों का उपयोग और गहनों का त्याग जैसे प्रसंग दिखाते हैं कि शास्त्री जी सच्चे अर्थों में ईमानदारी की मूर्ति थे।
मुख्य बिंदु
लेखक परिचय: सुनील शास्त्री (जन्म १९५०) – लाल बहादुर शास्त्री के पुत्र; राजनेता, कवि और लेखक। कृति: ‘लाल बहादुर शास्त्री : मेरे बाबू जी’ (अंग्रेजी अनुवाद भी हुआ)।
विधा: संस्मरण।
लेखक के जन्म के समय शास्त्री जी उत्तर प्रदेश के पुलिस मंत्री (गृहमंत्री) थे।
प्रधानमंत्री निवास में इंपाला शेवरलेट गाड़ी थी, जो केवल ‘स्टेट गेस्ट’ के आने पर निकलती थी; शास्त्री जी स्वयं फिएट का प्रयोग करते थे।
लेखक और अनिल भैया इंपाला लेकर एक दावत में गए और देर रात चुपके से लौटे।
सुबह शास्त्री जी ने ड्राइवर से लॉग बुक में १४ किलोमीटर ‘निजी उपयोग’ लिखवाया और साठ पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से पैसे सरकारी खाते में जमा करवाने को कहा।
यह सुनकर दोनों भाई फूट-फूटकर रोए; यह घटना उनके जीवन का आदर्श बन गई।
आज लेखक भी अपने बच्चों को सरकारी गाड़ी नहीं, साइकिल या रिक्शे से स्कूल भेजते हैं।
अलमारी ठीक करते समय लेखक ने फटे कुरते अम्मा को दे दिए; बाबू जी बोले – जाड़े में कोट के नीचे पहन लूँगा, खादी का एक-एक सूत काम आना चाहिए।
फटे कुरतों के रूमाल बनवाते थे।
अम्मा (ललिता जी) ने चाचा जी के घाटे की भरपाई के लिए अपने गहने दे दिए, केवल टीका, नथुनी, बिछिया (सुहाग के गहने) रखे; बहाना सोचा कि गांधीजी के कहने पर गहने पहनना छोड़ दिया।
शास्त्री जी के गुण: ईमानदारी, सादगी, सरलता, सच्चाई, परदुखकातरता, किफायत।
महत्वपूर्ण शब्द
प्रतिमूर्ति – साक्षात रूप, प्रतीक
हिदायत – निर्देश
लॉग बुक – गाड़ी के चलने का रिकॉर्ड रखने वाली पुस्तिका
किफायत – बचत, कम खर्च
बेतरतीब – अव्यवस्थित
ओहदा – पद
झुरझुरी आना – रोमांच होना; घर करना – मन में बस जाना
भाषा अध्ययन
वाक्य शुद्धि (भाषा बिंदु) – लिंग, वचन, कारक और क्रिया की अशुद्धियाँ सुधारना:
अशुद्ध: करामत अली गाय अपनी घर लाई। → शुद्ध: करामत अली गाय अपने घर लाया।
अशुद्ध: लक्ष्मी की एक झब्बेदार पूँछ था। → शुद्ध: लक्ष्मी की एक झब्बेदार पूँछ थी।
अशुद्ध: डॉ. महादेव साहा ने बाजार से नए पुस्तक को खरीदा। → शुद्ध: …ने बाजार से नई पुस्तक खरीदी।
अशुद्ध: सिरचन को कोई लड़का-बाला नहीं थे। → शुद्ध: सिरचन का कोई लड़का-बाला नहीं था।
नियम: क्रिया और विशेषण का लिंग-वचन संज्ञा के अनुसार; ‘का-की-के’ अगले शब्द के अनुसार।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. कारण लिखिए : लेखक और अनिल भैया फूट-फूटकर रोने लगे।
बाबू जी ने गाड़ी के निजी उपयोग (१४ किमी) का किराया साठ पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से सरकारी खाते में जमा करवाने को कहा; उनकी ईमानदारी ने दोनों के मन को झकझोर दिया।
Q2. संजाल पूर्ण कीजिए : लाल बहादुर शास्त्री जी के गुण।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 17
हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन)
संक्षिप्त सार
हम इस धरती की संतति हैं (पूरक पठन) उमाकांत मालवीय की कव्वाली है। इसमें लड़कों और लड़कियों के दो दल नोक-झोंक करते हुए भारत के शूरवीर और महान स्त्री-पुरुषों का गुणगान करते हैं। अंत में दोनों मिलकर कहते हैं कि झगड़े से कुछ नहीं मिलेगा – स्त्री और पुरुष भारत माता के रथ के दो पहिये हैं।
मुख्य बिंदु
कवि परिचय: उमाकांत मालवीय (जन्म १९३१, मुंबई; मृत्यु १९८२, इलाहाबाद) – जन सरोकारों के रचनाकार; हिंदी में ‘नवगीत का भगीरथ’ कहे जाते हैं। कृतियाँ: ‘मेहँदी और महावर’, ‘देवकी’, ‘रक्तपथ’, ‘सुबह रक्तपलाश की’।
विधा: कव्वाली – लगभग सात सौ वर्ष पुरानी लोकप्रिय काव्य विधा; किसी की तारीफ या शान में गाया जाने वाला गीत।
प्रस्तुति: पहला पद लड़कों का समूह, दूसरा लड़कियों का समूह और अंतिम पद दोनों मिलकर गाते हैं।
लड़कों का पद: इसी मिट्टी में ध्रुव जैसे बच्चे खेले, लगन के सच्चे प्रह्लाद हुए; भरत शेरों के जबड़े खुलवाकर दाँत गिनते थे; जयमल-पत्ता किसी को कुछ नहीं गिनते थे।
लड़कियों का पद: इसी धरती पर झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, चाँदबीबी जन्मीं; पद्मिनी के जौहर की ज्वाला यहीं जली; सीता और सावित्री की यह धरती है।
दोनों दल एक-दूसरे को ‘चुप रहिए’, ‘शेखी न बघारें’, ‘ताने सहिए’ कहते हैं।
अंतिम पद: आपस में ‘टंटा’ (झगड़ा) व्यर्थ है; ध्रुव हो या रजिया – सब भारत माँ के हैं।
संदेश: स्त्री-पुरुष समानता; दोनों मिलकर ही देश आगे बढ़ा सकते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द
संतति – संतान
दतुली – दाँत
शऊर – काम करने का ढंग, बुद्धि
जौहर – राजस्थान की प्राचीन प्रथा, जिसमें स्त्रियाँ स्वाभिमान की रक्षा के लिए अग्नि में प्रवेश करती थीं
खफा – नाराज
टंटा – व्यर्थ का झगड़ा
शेखी बघारना (मुहावरा) – अपनी प्रशंसा स्वयं करना; डींग मारना – बड़ी-बड़ी बातें करना
भाषा अध्ययन
विधा की पहचान: टेक की पुनरावृत्ति – ‘अजी क्या कहिए, हाँ क्या कहिए’, ‘चुप रहिए’, ‘दो पहिये’।
रूपक अलंकार: ‘भारत माता के रथ के… दो पहिये’ – स्त्री-पुरुष को पहिये माना है।
उर्दू शब्दों का प्रयोग: जनाब, शऊर, खफा, तारीफ।
रस: वीर रस और हल्की नोक-झोंक से हास्य।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. वर्गीकरण कीजिए : ऐतिहासिक और पौराणिक चरित्र।
पौराणिक – ध्रुव, प्रह्लाद, भरत, सीता, सावित्री।
ऐतिहासिक – लक्ष्मीबाई, रजिया सुलताना, दुर्गावती, पद्मिनी, चाँदबीबी, जयमल।
Q2. विशेषताओं के आधार पर पहचानिए।
भारत माता के रथ के दो पहिये – स्त्री और पुरुष (लड़के-लड़कियाँ); खूब लड़ने वाली मर्दानी – झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई; अपनी लगन का सच्चा – प्रह्लाद; किसी को कुछ न गिनने वाले – जयमल-पत्ता।
Q3. सही/गलत पहचानकर गलत वाक्य सही कीजिए।
भरत शेर के दाँत गिनते थे – सही।
झगड़ने से सब कुछ प्राप्त होता है – गलत; सही: झगड़े से कुछ हासिल नहीं होगा।
ध्रुव आकाश में खेले थे – गलत; सही: ध्रुव इस धरती की मिट्टी में खेले थे।
Q4. कविता से प्राप्त संदेश लिखिए।
स्त्री और पुरुष दोनों समान रूप से महान हैं।
आपस में श्रेष्ठता का झगड़ा व्यर्थ है।
दोनों मिलकर ही देश रूपी रथ आगे बढ़ा सकते हैं।
हमें अपने देश के वीरों और वीरांगनाओं पर गर्व करना चाहिए।
Q5. कव्वाली विधा की विशेषताएँ लिखिए।
लगभग सात सौ वर्ष पुरानी लोकप्रिय गेय विधा।
किसी की तारीफ या शान में गाई जाती है।
दो दलों के सवाल-जवाब और टेक की पुनरावृत्ति।
सामूहिक गायन, ताल और जोश से भरी प्रस्तुति।
परीक्षा टिप
पूरक पठन में ‘वर्गीकरण’ (ऐतिहासिक/पौराणिक) प्रश्न आसानी से पूछा जाता है – नाम सही वर्ग में लिखें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 18
महिला आश्रम
संक्षिप्त सार
महिला आश्रम काका कालेलकर के दो पत्र हैं (‘काका कालेलकर ग्रंथावली’ से), जो उन्होंने सरोज को लिखे। पहले पत्र में वे एक ऐसे महिला आश्रम की कल्पना और नियम बताते हैं जहाँ परेशान महिलाएँ बिना संकोच, अपने खर्च से रहकर सेवा में जीवन लगा सकें। साथ ही वे सरदी में खिले फूलों का सुंदर वर्णन करते हैं। दूसरे पत्र में वे सरोज के स्वास्थ्य की चिंता और नियमित पत्र-व्यवहार की बात करते हैं।
मुख्य बिंदु
लेखक परिचय: काका कालेलकर – दत्तात्रेय बालकृष्ण कालेलकर (जन्म १८८५, सातारा, महाराष्ट्र; मृत्यु १९८१, नई दिल्ली)। हिंदी, गुजराती, मराठी और अंग्रेजी में लेखन; राष्ट्रभाषा प्रचार को राष्ट्रीय कार्यक्रम माना; उच्चकोटि के वैचारिक निबंधकार।
कृतियाँ: ‘राष्ट्रीय शिक्षा के आदर्शों का विकास’, ‘जीवन-संस्कृति की बुनियाद’, ‘नक्षत्रमाला’, ‘स्मरणयात्रा’, ‘धर्मोदय’ (आत्मचरित्र)।
विधा: पत्र (पहला पत्र दिनांक २१.१२.४४)।
आश्रम के नियम: व्यवस्था या संचालन में किसी पुरुष का संबंध न हो; अखबार में विज्ञापन न दिया जाए; पैसे माँगने न जाएँ।
आने वाली महिला अपने खाने-पीने और कपड़ों की व्यवस्था करके आए; गरीब हो तो सिफारिश करने वाले खर्च की पक्की व्यवस्था करें।
पूरी पहचान के बिना किसी को दाखिला नहीं; महिला जब चाहे आश्रम छोड़ सकती है; आश्रम एक या तीन महीने का नोटिस देकर किसी को हटा सकता है।
आश्रम किसी एक धर्म से नहीं जुड़ेगा – सदाचार, भक्ति और सेवा का वातावरण; स्वावलंबन और सादगी का आग्रह।
आगे उपयोगी उद्योग और आसान पढ़ाई; आश्रम शिक्षा-संस्था नहीं, बल्कि कलह-कुढ़न से मुक्त मानवतापूर्ण आश्रयस्थान होगा।
गुलदाउदी (क्रिजेन्थीमम): कलियाँ महीनों तक नहीं खुलतीं, मानो कोई रहस्य पेट में भरकर होंठ सी लिए हों; एक-एक पंखुड़ी करके खिलती हैं और बहुत टिकती हैं।
रास्ते के किनारे लगे जिनिया के पौधे को लेखक ने सिरहाने के पास लगाया; उसने सुंदर फूल दिए।
दूसरा पत्र: बापू चाहते हैं कि हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए लेखक उर्दू सीखें; सरोज को पूरा आराम करने का संदेश; तारों के नक्शे बनाने के लिए कंपास बॉक्स मँगाया; फूलों के गमले हटा दिए, केवल सादा क्रोटन रखा।
महत्वपूर्ण शब्द
कलह – विवाद, झगड़ा
कुढ़न – खीझ
बेखटके – बिना संकोच के
स्वावलंबन – अपने पैरों पर खड़े होना
निमित्तमात्र – केवल माध्यम
शुभाशीष – शुभ आशीर्वाद
भाषा अध्ययन
‘ता’ प्रत्यय से बने शब्द: मानव + ता = मानवता, सरल + ता = सरलता, कुशल + ता = कुशलता, सुंदर + ता = सुंदरता, उत्कट + ता = उत्कटता।
अंगों से जुड़े मुहावरे (भाषा बिंदु):
आँख लगना – नींद आना; आँखें चुराना – सामने आने से बचना।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 19
अपनी गंध नहीं बेचूँगा
संक्षिप्त सार
अपनी गंध नहीं बेचूँगा बालकवि बैरागी का गीत है। इसमें फूल कहता है कि चाहे सारे फूल, बगीचे और सौ फागुन बिक जाएँ, वह अपनी गंध (सुगंध) नहीं बेचेगा। फूल के माध्यम से कवि मनुष्य को स्वाभिमान और खुद्दारी का संदेश देते हैं – बिकने से बेहतर है अपनी माटी में झर जाना।
मुख्य बिंदु
कवि परिचय: बालकवि बैरागी (मूल नाम नंदरामदास बैरागी; जन्म १९३१, मंदसौर, म.प्र.; मृत्यु २०१८, मंदसौर) – संघर्ष से प्रेरणा लेकर कविता में प्रतिष्ठित; साहित्य के साथ राजनीति में सक्रिय। रचनाएँ ओजगुण संपन्न; बच्चों के लिए अनेक गीत।
कृतियाँ: ‘गौरव-गीत’, ‘दरद दीवानी’ (काव्य संग्रह)।
विधा: गीत; टेक – ‘अपनी गंध नहीं बेचूँगा’।
गंध यहाँ स्वाभिमान, संस्कार और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
फूल पर पहला हक उस डाली का है जिसने गोद खिलाया, उस कोंपल का जिसने लाली दी और उन काँटों का जिन्होंने लक्ष्मण जैसी चौकी देकर जान बचाई।
चाहे कोई उसे नोचे-तोड़े या मालिन से पंखुड़ियों का रिश्ता जोड़े, अपने संस्कार की सौगंध नहीं बेचेगा।
उसे मौसम से कुछ लेना-देना नहीं – मौसम आते-जाते रहते हैं; भँवरों के सुर, पतझड़ का रोना, पिचकारी का जादू उस पर असर नहीं करते।
नीलामी लगाने और दाम बढ़ाने वालों से कहता है – स्वयं से किया अनुबंध नहीं बेचूँगा।
उसे अपना अंत पता है – पंखुड़ी-पंखुड़ी झर जाएगा; पर पहले पवन परी के साथ हर घर जाकर गंध बाँटेगा।
उस दिन मंडी (बाजार) समझेगी कि खुद्दारी किसे कहते हैं; बिकने से बेहतर अपनी माटी में झर जाना।
महत्वपूर्ण शब्द
गंध – महक, सुगंध
कोंपल – नई कोमल पत्तियाँ
अरुणाई – लालिमा
अनुबंध – समझौता, प्रतिज्ञा
प्रतिबंध – रुकावट
खुद्दारी – स्वाभिमान
सुमन – फूल; उपवन – बगीचा
भाषा अध्ययन
मानवीकरण अलंकार: फूल मनुष्य की तरह बोलता और प्रतिज्ञा करता है; ‘पवन परी’, ‘गंध कुमारी’।
उपमा अलंकार: ‘लछमन जैसी चौकी देकर’ – काँटों की तुलना लक्ष्मण से।
Q1. फूल के अनुसार उसे तोड़ने का पहला अधिकार इन्हें है – लिखिए।
डाली, कोंपल और काँटे।
Q2. फूल को बिक जाने से भी बेहतर लगता है…
अपनी माटी में झर जाना (बिकने से बेहतर मर जाना)।
Q3. कारण लिखिए : (१) फूल अपनी सौगंध नहीं बेचेगा (२) फूल को मौसम से कुछ लेना नहीं है
(१) वह सौगंध उसका संस्कार बन चुकी है, जिसे वह किसी कीमत पर नहीं छोड़ सकता। (२) मौसम तो आते-जाते रहते हैं; बाहरी परिस्थितियाँ उसके स्वभाव को नहीं बदल सकतीं।
Q4. ‘दाता होगा तो दे देगा, खाता होगा तो खाएगा’ – अर्थ लिखिए।
देने वाला अपनी इच्छा से देगा और लेने वाला लेगा।
फूल को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता; वह किसी पर निर्भर नहीं।
भाव: स्वाभिमानी व्यक्ति लाभ-हानि की चिंता किए बिना अपने मूल्यों पर अडिग रहता है।
Q5. पद्य विश्लेषण कीजिए।
रचनाकार – बालकवि बैरागी; प्रकार – गीत।
पसंदीदा पंक्ति – ‘बिकने से बेहतर मर जाऊँ, अपनी माटी में झर जाऊँ’।
कारण – इसमें स्वाभिमान और देशप्रेम का ओजपूर्ण भाव है।
संदेश – किसी भी लालच में अपना स्वाभिमान और संस्कार नहीं बेचना चाहिए।
परीक्षा टिप
प्रतीकों (गंध, मंडी, मौसम) का अर्थ समझाकर उत्तर लिखें। ‘पहला हक’ वाले तीन घटक (डाली, कोंपल, काँटे) अवश्य याद रखें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 20
जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ
संक्षिप्त सार
जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ एक साक्षात्कार है, जिसमें विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने प्रसिद्ध उपन्यासकार अमृतलाल नागर से बातचीत की है (‘एक नाव के यात्री’ से)। नागर जी अपने लेखन की शुरुआत, प्रेरणा, प्रभाव, उपन्यासों के फील्डवर्क, प्रिय लेखकों और जीवन-दर्शन के बारे में बताते हैं। अंत में कहते हैं – मनाओ कि जब तक जिंदा रहूँ, लिखता रहूँ।
मुख्य बिंदु
लेखक परिचय: विश्वनाथ प्रसाद तिवारी (जन्म १९४१, देवरिया, उ.प्र.) – कवि, लेखक, आलोचक और संपादक। कृतियाँ: ‘फिर भी कुछ रह जाएगा’ (कविता), ‘अंतहीन आकाश’ (यात्रा), ‘अमेरिका और यूरोप में एक भारतीय मन’ (यात्रा संस्मरण), ‘अस्ति और भवति’ (आत्मकथा), ‘बातचीत’ (साक्षात्कार संग्रह)।
विधा: साक्षात्कार (भेंटवार्ता)।
नागर जी ने लिखने से पहले पढ़ना शुरू किया; ‘छापे का अक्षर’ उनका पहला मित्र था। पितामह घर में ‘सरस्वती’ और ‘गृहलक्ष्मी’ पत्रिकाएँ मँगाते थे।
आरंभ में सनेही जी और अयोध्यासिंह उपाध्याय की कविताएँ, प्रेमचंद, कौशिक, बंकिम और बाद में शरतचंद्र को पढ़ा।
पहली कविता: साइमन कमीशन के बहिष्कार (१९२८-२९) के समय लाठीचार्ज के अनुभव से – ‘कब लौं कहौं लाठी खाय !’
पिता सरकारी कर्मचारी थे, इसलिए राजनीति में नहीं गए; पहली कहानी १९३३ में छपी (‘अपशकुन’)।
गरीबों के प्रति करुणा समाज और पिता के संस्कारों से आई – पिता दूसरों के दुख में तुरंत पहुँचते थे।
१९३३ में जवाहरलाल नेहरू से भेंट हुई (उनकी माँ के अस्पताल में रहते समय)।
पहला उपन्यास: ‘महाकाल’ – लिखा १९४४ में, छपा १९४६ में; बाद में ‘भूख’ नाम से प्रकाशित।
१९३१ से १९३७ तक हर वर्ष कोलकाता जाकर शरतचंद्र से मिलते रहे; तुलसीदास उन्हें ‘घुट्टी में पिलाए गए’।
‘खंजन नयन’ (सूरदास पर), ‘गदर के फूल’, ‘नाच्यो बहुत गोपाल’ जैसे उपन्यासों के लिए बहुत फील्डवर्क किया।
पूरे अखंड भारत (पेशावर से कन्याकुमारी) का भ्रमण किया, जिससे चरित्र और उनका मनोविज्ञान समझा। समकालीनों में रामविलास शर्मा सबसे प्रिय; टॉल्स्टॉय और चेखव भी प्रिय।
महत्वपूर्ण शब्द
साक्षात्कार – किसी व्यक्ति से प्रश्नोत्तर के रूप में की गई बातचीत
बहिष्कार करना – त्याग करना, निकाल देना
भ्रमण – घूमना-फिरना
शैली – लिखने का तरीका
संकलन – संग्रह
फील्डवर्क – स्थान पर जाकर किया गया अध्ययन
घुट्टी में पिलाना (मुहावरा) – बचपन से ही संस्कार देना
भाषा अध्ययन
मुख्य और सहायक क्रिया (भाषा बिंदु):
अध्ययन करना (मुख्य) पड़ा (सहायक); सताने (मुख्य) लगे (सहायक); रूठ (मुख्य) गई (सहायक); हड़बड़ा (मुख्य) उठे (सहायक); लौटा (मुख्य) दी (सहायक); समझ (मुख्य) पाया (सहायक)।
कारक चिह्न: ने, को, से, के लिए, का/की/के, में/पर, हे/अरे।
उपयोजित लेखन: साक्षात्कार के लिए प्रश्नों की सूची बनाना (जैसे किसी खिलाड़ी के लिए)।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. कृति पूर्ण कीजिए : नागर जी के साहित्य सृजन में सहायक (१) लेखक (२) पत्रिकाएँ
(१) प्रेमचंद, बंकिम, शरतचंद्र (कौशिक)। (२) ‘सरस्वती’ और ‘गृहलक्ष्मी’।
Q2. नागर जी की पहली कविता को प्रस्फुटित करने वाला अनुभव लिखिए।
साइमन कमीशन के बहिष्कार (१९२८-२९) के समय हुआ लाठीचार्ज। इसी अनुभव से पहली कविता फूटी – ‘कब लौं कहौं लाठी खाय !’
Q3. नागर जी ने अपने उपन्यासों के लिए फील्डवर्क कैसे किया?
‘गदर के फूल’ के लिए अनेक लोगों से मिले।
‘नाच्यो बहुत गोपाल’ के लिए सफाई कर्मियों की बस्तियों में जाकर रीति-रिवाजों का अध्ययन किया।
हर जाति के रीति-रिवाज इकट्ठे किए, बड़े-बूढ़ों से सुना।
पूरे भारत की यात्रा करके चरित्रों का मनोविज्ञान समझा।
Q4. नागर जी के जीवन पर पड़े प्रभावों को स्पष्ट कीजिए।
पारिवारिक संस्कार: पितामह की पत्रिकाएँ, पिता की करुणा।
गांधीजी के व्यक्तित्व और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रभाव।
आर्य समाज जैसे सामाजिक आंदोलनों का आरंभिक असर।
तुलसीदास, शरतचंद्र, प्रेमचंद जैसे साहित्यकारों का प्रभाव।
Q5. उपयोजित लेखन : किसी खिलाड़ी का साक्षात्कार लेने हेतु पाँच प्रश्न बनाइए।
आपको इस खेल में रुचि कैसे जागी?
आपके प्रेरणास्रोत और प्रशिक्षक कौन हैं?
आपकी दिनचर्या और अभ्यास का समय कैसा होता है?
आपकी सबसे यादगार जीत कौन-सी है?
नए खिलाड़ियों को आप क्या संदेश देंगे?
परीक्षा टिप
साक्षात्कार पाठ में वर्ष और कृतियों के नाम (१९३३ नेहरू भेंट, ‘महाकाल’ १९४४/१९४६, ‘भूख’) सही लिखें। मुख्य-सहायक क्रिया अलग-अलग पहचानने का अभ्यास करें।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 21
बूढ़ी काकी (पूरक पठन)
संक्षिप्त सार
बूढ़ी काकी (पूरक पठन) मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है। बूढ़ी काकी ने अपनी सारी संपत्ति भतीजे बुद्धिराम के नाम लिख दी, पर बदले में उन्हें पेट भर भोजन भी नहीं मिलता। मुखराम के तिलक के उत्सव में पकवानों की सुगंध से व्याकुल काकी अपमानित होती हैं, और रात में जूठी पत्तलों से खाने लगती हैं। यह दृश्य देखकर रूपा का हृदय बदल जाता है। कहानी वृद्धों के प्रति तिरस्कार और वादाखिलाफी पर प्रहार करती है।
मुख्य बिंदु
लेखक परिचय: प्रेमचंद (मूल नाम धनपत राय; जन्म १८८०, लमही, उ.प्र.; मृत्यु १९३६, वाराणसी) – आधुनिक हिंदी कहानी के पितामह; शोषित किसान, मजदूर, स्त्रियों की समस्याओं का चित्रण।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 22
समता की ओर
संक्षिप्त सार
समता की ओर छायावाद के प्रतिष्ठित कवि मुकुटधर पांडेय की कविता है। इसमें शिशिर ऋतु की कड़ी ठंड से प्रकृति और प्राणियों में आए बदलाव का वर्णन है। कवि धनी और गरीब के जीवन की तुलना करते हैं – धनी सुख में हैं, जबकि सर्दी के सारे दुख गरीबों के सिर पड़ते हैं। अंत में संदेश है कि अमीर-गरीब भाई-भाई हैं; अमीरों को गरीब भाइयों की भलाई करनी चाहिए।
मुख्य बिंदु
कवि परिचय: मुकुटधर पांडेय (जन्म १८९५, बिलासपुर, छत्तीसगढ़; मृत्यु १९८९) – छायावाद के प्रतिष्ठित कवि; १२ वर्ष की आयु से लेखन। रचनाओं में मानव प्रेम, प्रकृति सौंदर्य, मानवीकरण, आध्यात्मिकता और गीतात्मकता।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 24
शब्द संपदा
संक्षिप्त सार
शब्द संपदा के प्रश्न पढ़े हुए गद्य और पद्य के उतारे पर आधारित होते हैं – कुल 4 प्रश्न, 8 अंक। उतारे में से शब्द चुनकर लिंग, वचन, विलोम, उपसर्ग-प्रत्यय आदि लिखने होते हैं।
मुख्य बिंदु
पहले उतारे में दिया गया शब्द ध्यान से पढ़ो, फिर वही रूप बदलो जो पूछा गया है।
लिंग पहचानने के लिए शब्द के साथ "अच्छा/अच्छी" लगाकर देखो।
उपसर्ग शब्द के आगे, प्रत्यय शब्द के पीछे जुड़ता है।
कृदंत = क्रिया + प्रत्यय; तद्धित = संज्ञा/सर्वनाम/विशेषण + प्रत्यय।
वर्तनी (मात्रा, अनुस्वार, चंद्रबिंदु) सही लिखना ज़रूरी है।
Class 10 (SSC Board) · Hindi (Lokbharati) · Chapter 25
उपयोजित लेखन
संक्षिप्त सार
उपयोजित लेखन विभाग 26 अंक का है: पत्र लेखन (5), गद्य आकलन – प्रश्न निर्मिति (4), वृत्तांत या कहानी लेखन (5), विज्ञापन (5), निबंध (7)। हर रचना का ढाँचा याद हो तो अंक आसानी से मिलते हैं।
मुख्य बिंदु
हर रचना में दिए गए सभी मुद्दे/बिंदु ज़रूर लो।
शब्द-सीमा का ध्यान रखो; साफ़, छोटे वाक्य और सही विरामचिह्न लिखो।
पत्र में अपना असली नाम-पता नहीं, प्रश्न में दिया गया नाम-पता लिखो।
कहानी और वृत्तांत भूतकाल में लिखे जाते हैं।
भाषा अध्ययन
1. पत्र लेखन (ई-मेल प्रारूप)
औपचारिक पत्र (शिकायत, माँग, आवेदन): दिनांक → प्रति (पद, संस्था, पता, ई-मेल आईडी) → विषय → संदर्भ (हो तो) → महोदय/महोदया → विषय विवेचन (2-3 छोटे अनुच्छेद) → भवदीय/भवदीया → नाम, पता, ई-मेल आईडी।
अनौपचारिक पत्र (बधाई, अभिनंदन, सलाह): दिनांक → संबोधन (प्रिय/आदरणीय) → अभिवादन → कुशलक्षेम → मुख्य बात → समापन → तुम्हारा/तुम्हारी → नाम, पता, ई-मेल आईडी।
टिप: औपचारिक पत्र में विषय एक पंक्ति का और भाषा विनम्र रखो।
छोटा उदाहरण (विषय): "विषय – कॉलोनी में पानी की कमी के बारे में शिकायत।"
2. गद्य आकलन – प्रश्न निर्मिति
दिए गए परिच्छेद पर ऐसे 4 प्रश्न बनाओ जिनके उत्तर परिच्छेद में एक-एक वाक्य में हों।
टिप: पूरे परिच्छेद से प्रश्न लो, हर प्रश्न के अंत में (?) लगाओ, उत्तर नहीं लिखना है।
छोटा उदाहरण – परिच्छेद: "सावित्रीबाई फुले ने 1848 में पुणे में लड़कियों का पहला स्कूल शुरू किया।" प्रश्न: सावित्रीबाई फुले ने लड़कियों का स्कूल कहाँ शुरू किया?
3. वृत्तांत लेखन
किसी कार्यक्रम/घटना की रिपोर्ट। ढाँचा: शीर्षक → स्थान, दिनांक, समय → कार्यक्रम का क्रम → मुख्य अतिथि/विशेष बात → समापन।
टिप: स्थल, काल, घटना तीनों ज़रूर लिखो; भूतकाल का प्रयोग करो।
छोटा उदाहरण: "विज्ञान प्रदर्शनी संपन्न – नागपुर, 5 जनवरी। नवजीवन विद्यालय में आज विज्ञान प्रदर्शनी लगी। छात्रों ने 40 प्रयोग दिखाए। प्रधानाचार्य ने विजेताओं को पुरस्कार दिए।"
4. कहानी लेखन
दिए गए मुद्दों से कहानी बनाओ। ढाँचा: शुरुआत (पात्र, स्थान) → घटना/समस्या → चरम → अंत → शीर्षक और सीख।
टिप: संवाद जोड़ो, मुद्दों का क्रम न बदलो, शीर्षक छोटा और आकर्षक रखो।
छोटा उदाहरण – शीर्षक: "सच्चा दोस्त"। अमन को रास्ते में एक बटुआ मिला। उसमें पैसे और एक पता था। अमन ने बटुआ उसी पते पर लौटा दिया। मालिक ने उसे धन्यवाद दिया। सीख: ईमानदारी सबसे बड़ा गुण है।
5. विज्ञापन लेखन
ढाँचा: आकर्षक शीर्षक/नारा → मुख्य जानकारी (क्या, कहाँ, कब) → विशेषताएँ/छूट → संपर्क (पता, फ़ोन)।
टिप: कम शब्द, बड़ा असर; जानकारी चौखट में, बीच-बीच में अलग-अलग शीर्षक।
छोटा उदाहरण: "पढ़ो और बढ़ो! पुस्तक मेला – 10 से 15 मई, टाउन हॉल, सातारा। हर किताब पर 20% छूट। संपर्क: 98XXXXXXXX"
6. निबंध लेखन
प्रकार: वर्णनात्मक, आत्मकथनात्मक (जैसे "मैं पेड़ बोल रहा हूँ"), कल्पनाप्रधान ("यदि मोबाइल न होता"), वैचारिक।
ढाँचा: शीर्षक → प्रस्तावना → विस्तार (2-3 अनुच्छेद) → उपसंहार।
टिप: एक सुविचार या पंक्ति से शुरुआत करो, अनुच्छेद बनाओ, अंत में अपनी राय लिखो।
छोटा उदाहरण (प्रस्तावना): "पेड़ हमें बिना माँगे छाया, फल और साँसें देते हैं। सच कहें तो पेड़ धरती के सबसे बड़े दानी हैं।"
उदाहरण
प्रश्न: अनौपचारिक पत्र की शुरुआत लिखो – मित्र को खेल प्रतियोगिता जीतने पर बधाई। उत्तर: दिनांक: 12 फरवरी 2026। प्रिय मित्र रोहन, सप्रेम नमस्ते। यहाँ सब कुशल है। तुम्हारी दौड़ प्रतियोगिता की जीत की खबर सुनकर मन खुश हो गया…
झटपट दोहराई
औपचारिक पत्र: विषय + महोदय + भवदीय; अनौपचारिक: संबोधन + कुशलक्षेम + तुम्हारा।
गद्य आकलन: 4 प्रश्न, उत्तर परिच्छेद में एक वाक्य में।