पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- एकांकी की परिभाषा - एकांकी के तत्व - एकांकी की विशेषताएँ
- हिन्दी एकांकी का इतिहास और विकास
- एकांकी और नाटक में अंतर
- एकांकी का भाषा-शिल्प
1. एकाँकी की परिभाषा, तत्व और विशेषताएँ
अर्थ
एकाँकी का अर्थ है एक अंक वाला नाटक। अंग्रेज़ी में इसे वन-ऐक्ट प्ले (One-Act Play) कहते हैं। यह नाटक का लघु रूप है। इसमें जीवन की किसी एक घटना, एक समस्या या एक मनोभाव को एक ही अंक में, कम पात्रों और कम समय में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया जाता है।
परिभाषा
- डॉ. रामकुमार वर्मा (भावार्थ): एकाँकी में कोई एक घटना होती है। वह जिज्ञासा और कौतूहल से भरी नाटकीय शैली में आगे बढ़ती है, अपने चरम बिंदु तक पहुँचती है और वहीं समाप्त हो जाती है।
- सामान्य परिभाषा: एकाँकी वह दृश्य-काव्य है जिसमें एक अंक में एक केंद्रीय घटना या समस्या को एक ही प्रभाव (एकोन्मुखता) के साथ रंगमंच पर प्रस्तुत किया जाता है।
एकाँकी के तत्व
- कथावस्तु (Plot): संक्षिप्त और सुगठित होती है। इसमें एक ही मुख्य घटना रहती है। प्रासंगिक कथाएँ नहीं होतीं। आरंभ, संघर्ष, चरम सीमा (Climax) और अंत शीघ्रता से आते हैं।
- पात्र एवं चरित्र-चित्रण: पात्र कम होते हैं। प्रायः किसी एक प्रमुख पात्र के चरित्र का एक पक्ष उभारा जाता है।
- संवाद या कथोपकथन (Dialogue): संवाद छोटे, चुस्त, स्वाभाविक और पात्रानुकूल होते हैं। ये कथा को आगे बढ़ाते हैं और चरित्र को भी स्पष्ट करते हैं।
- देशकाल एवं वातावरण: घटना जिस समय और स्थान की है, उसका सजीव चित्रण किया जाता है। यह काम प्रायः रंग-निर्देशों के माध्यम से होता है।
- संकलन-त्रय (Three Unities): स्थान, समय और कार्य की एकता। एकाँकी में इसका पालन प्रायः अधिक होता है।
- भाषा-शैली: सरल, प्रभावपूर्ण और विषय के अनुकूल होती है।
- उद्देश्य: किसी समस्या, विचार या भाव को दर्शक तक पहुँचाना। उद्देश्य प्रायः संकेत रूप में व्यक्त होता है, उपदेश के रूप में नहीं।
- अभिनेयता (Stageability): एकाँकी रंगमंच पर खेलने योग्य होना चाहिए।
एकाँकी की विशेषताएँ
- संक्षिप्तता: इसका मंचन प्रायः कम समय में पूरा हो जाता है।
- एकोन्मुखता: पूरी रचना एक ही लक्ष्य की ओर बढ़ती है।
- तीव्र गति: घटनाएँ शीघ्रता से चरम सीमा तक पहुँचती हैं।
- कौतूहल और जिज्ञासा: दर्शक अंत तक बँधा रहता है।
- प्रभावान्विति: अंत में एक गहरी और समग्र छाप छोड़ना।
- कम दृश्य, सरल मंच-सज्जा: इसके कारण विद्यालयों, महाविद्यालयों और रेडियो पर इसका मंचन सरल होता है।
2. हिन्दी एकाँकी का इतिहास और विकास
(क) पूर्व-पीठिका : भारतेंदु युग
भारतेंदु हरिश्चंद्र और उनके समकालीन लेखकों ने छोटे-छोटे प्रहसन और लघु नाटक लिखे। अंधेर नगरी और भारत दुर्दशा जैसी रचनाओं में एकाँकी के बीज दिखाई देते हैं। फिर भी इन्हें आधुनिक अर्थ में पूर्ण एकाँकी नहीं माना जाता।
(ख) द्विवेदी युग
इस युग में कुछ लघु नाटक लिखे गए, पर एकाँकी का स्वतंत्र शिल्प अभी विकसित नहीं हुआ था। अनुवादों के द्वारा पाश्चात्य वन-ऐक्ट प्ले का परिचय मिलने लगा था।
(ग) प्रसाद युग / आधुनिक एकाँकी का उदय
- जयशंकर प्रसाद की एक घूँट (लगभग 1929-30) को अनेक विद्वान पहला आधुनिक हिन्दी एकाँकी मानते हैं।
- डॉ. रामकुमार वर्मा की बादल की मृत्यु को भी पहला एकाँकी मानने का मत है। वर्मा जी को प्रायः हिन्दी एकाँकी का जनक कहा जाता है। उनके ऐतिहासिक एकाँकी प्रसिद्ध हैं, जैसे पृथ्वीराज की आँखें और दीपदान।
- भुवनेश्वर का संग्रह कारवाँ यथार्थवादी और नई शैली के एकाँकियों के लिए प्रसिद्ध है।
(घ) प्रसादोत्तर और स्वातंत्र्योत्तर युग (विकास काल)
- प्रमुख एकाँकीकार: उपेन्द्रनाथ अश्क, उदयशंकर भट्ट, सेठ गोविन्ददास, लक्ष्मीनारायण मिश्र, जगदीशचंद्र माथुर (भोर का तारा), विष्णु प्रभाकर, भारत भूषण अग्रवाल, धर्मवीर भारती, लक्ष्मीनारायण लाल आदि।
- रेडियो एकाँकी (Radio Play): आकाशवाणी के प्रसार से ध्वनि-प्रधान एकाँकी बहुत लोकप्रिय हुए।
- विषयों का विस्तार: ऐतिहासिक, पौराणिक, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, राजनीतिक, हास्य-व्यंग्य और प्रतीकात्मक विषयों पर एकाँकी लिखे गए।
- नए प्रयोग: विसंगति, प्रतीक, नुक्कड़ नाटक और मिथकों की नई व्याख्या, जैसे महाभारत की एक साँझ।
विकास के कारण
- पाश्चात्य वन-ऐक्ट प्ले का प्रभाव
- व्यस्त आधुनिक जीवन में समय का अभाव
- रेडियो और रंगमंच का विकास
- विद्यालयों और महाविद्यालयों में मंचन की सुविधा
- पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन के अवसर
3. एकाँकी और नाटक में अंतर
| आधार | एकाँकी | नाटक |
|---|---|---|
| अंक | केवल एक अंक | अनेक अंक |
| कथावस्तु | एक घटना, कोई प्रासंगिक कथा नहीं | मुख्य कथा के साथ प्रासंगिक कथाएँ भी |
| पात्र | कम पात्र | अधिक पात्र |
| चरित्र-चित्रण | चरित्र का एक पक्ष | चरित्र का पूर्ण और क्रमिक विकास |
| समय | मंचन में कम समय | मंचन में अधिक समय |
| गति | तीव्र, चरम सीमा शीघ्र | धीमी, क्रमिक |
| संकलन-त्रय | पालन प्रायः अधिक | पालन आवश्यक नहीं |
| प्रभाव | एक तीव्र प्रभाव | व्यापक और बहुआयामी प्रभाव |
| मंच-सज्जा | सरल | विस्तृत |
निष्कर्ष: एकाँकी नाटक का छोटा संस्करण मात्र नहीं है। इसका अपना स्वतंत्र शिल्प है। जैसे कहानी उपन्यास से अलग विधा है, वैसे ही एकाँकी भी नाटक से अलग विधा है।
4. एकाँकी का भाषा-शिल्प
- पात्रानुकूल भाषा: राजा, किसान, बालक, विद्वान आदि सभी अपनी स्थिति के अनुसार बोलते हैं।
- संक्षिप्त और सारगर्भित संवाद: लंबे भाषणों के स्थान पर छोटे और चुटीले वाक्य होते हैं।
- विषयानुकूल भाषा: ऐतिहासिक या पौराणिक एकाँकियों में तत्सम-प्रधान भाषा होती है, सामाजिक एकाँकियों में बोलचाल की हिन्दी, और उर्दू या अंग्रेज़ी शब्दों का स्वाभाविक प्रयोग भी होता है।
- रंग-निर्देश (Stage Directions): दृश्य, वेशभूषा, प्रकाश, ध्वनि और पात्रों के हाव-भाव के संकेत दिए जाते हैं। रामकुमार वर्मा के रंग-निर्देश विस्तृत और काव्यात्मक माने जाते हैं।
- नाटकीयता: प्रश्न, विस्मय, विराम और मौन से तनाव पैदा किया जाता है।
- व्यंग्य और हास्य: सामाजिक एकाँकियों में व्यंग्य का पैनापन दिखाई देता है।
- प्रतीक और बिंब: आधुनिक एकाँकियों में अर्थ को गहरा करने के लिए इनका प्रयोग होता है।
- मुहावरे और लोकोक्तियाँ: इनसे भाषा में सजीवता आती है।
- ध्वनि-प्रधानता: रेडियो एकाँकी में भाषा और ध्वनि-प्रभाव ही दृश्य का काम करते हैं।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) एकाँकी की परिभाषा देते हुए उसके प्रमुख तत्वों और विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी एकाँकी के उद्भव और विकास का परिचय प्रमुख एकाँकीकारों और उनकी रचनाओं के उल्लेख सहित दीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) एकाँकी और नाटक में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए: एकाँकी का भाषा-शिल्प।
- (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए: हिन्दी एकाँकी के विकास में डॉ. रामकुमार वर्मा का योगदान।