पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- पटकथा लेखन की परिभाषा तथा स्वरूप
- पटकथा लेखन की भाषा
- पटकथा लेखन का तकनीकी तरीका
- पटकथा लेखन की नींव - कहानी
1. पटकथा लेखन की परिभाषा तथा स्वरूप
अर्थ: 'पटकथा' शब्द दो शब्दों से बना है: पट (परदा) + कथा (कहानी)। अर्थात् परदे पर दिखाई जाने वाली कहानी। अंग्रेज़ी में इसे स्क्रीनप्ले (Screenplay) या स्क्रिप्ट (Script) कहते हैं।
परिभाषा: पटकथा वह लिखित रूप है जिसमें किसी कहानी को दृश्य-श्रव्य माध्यम (फ़िल्म, टीवी, रेडियो, विज्ञापन, वेब) के लिए दृश्यों, क्रियाओं, संवादों और तकनीकी संकेतों के क्रम में प्रस्तुत किया जाता है। सरल शब्दों में, पटकथा फ़िल्म का नक्शा या ब्लूप्रिंट (Blueprint) है, जिसके आधार पर निर्देशक, अभिनेता, कैमरामैन और संपादक मिलकर कार्यक्रम बनाते हैं।
पटकथा का स्वरूप (विशेषताएँ)
- दृश्यात्मकता: पटकथा में वही लिखा जाता है जो परदे पर दिखाया या सुनाया जा सके।
- संवादात्मकता: कहानी मुख्य रूप से संवादों और क्रियाओं के माध्यम से आगे बढ़ती है।
- तकनीकी स्वरूप: इसमें दृश्य-शीर्षक, शॉट, कैमरा और ध्वनि के संकेत होते हैं।
- दृश्य-विभाजन: पूरी कथा छोटे-छोटे दृश्यों (Scenes) में बँटी होती है।
- समयबद्धता: कार्यक्रम की अवधि निश्चित होती है, इसलिए कथा कसी हुई होती है।
- सामूहिक कला: पटकथा अंतिम रचना नहीं, बल्कि पूरी टीम के लिए आधार-ग्रंथ है।
- माध्यम-सापेक्षता: रेडियो, सिनेमा और विज्ञापन की पटकथा का रूप माध्यम के अनुसार बदलता है।
कहानी और पटकथा में अंतर
| आधार | कहानी | पटकथा |
|---|---|---|
| उद्देश्य | पढ़ने के लिए | परदे पर दिखाने के लिए |
| माध्यम | शब्द/मुद्रित रूप | दृश्य-श्रव्य |
| वर्णन | विस्तृत, मनोभावों का वर्णन संभव | संक्षिप्त, केवल दिखने-सुनने योग्य बातें |
| संरचना | अनुच्छेदों में | दृश्यों और शॉट्स में |
| पाठक | सामान्य पाठक | निर्देशक, अभिनेता, तकनीकी दल |
2. पटकथा लेखन की भाषा
पटकथा की भाषा साहित्यिक कम और व्यावहारिक तथा दृश्यात्मक अधिक होती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ:
- सरल और स्पष्ट: ताकि पूरी टीम एक ही अर्थ समझे।
- वर्तमान काल: दृश्य का वर्णन वर्तमान काल में होता है, जैसे 'राधा खिड़की खोलती है।'
- संक्षिप्तता: लंबे वर्णन के स्थान पर छोटे, सटीक वाक्य।
- क्रियापरक (Action-oriented): 'वह दुखी है' न लिखकर 'उसकी आँखों में आँसू आ जाते हैं' लिखना।
- पात्रानुकूल भाषा: पात्र की आयु, शिक्षा, क्षेत्र और वर्ग के अनुसार संवाद, जैसे ग्रामीण पात्र की बोली अलग और शहरी पात्र की अलग।
- बोलचाल की भाषा: संवाद स्वाभाविक हों, किताबी नहीं।
- ध्वनि और बिंब: ध्वनि-प्रभाव (Sound Effects) और दृश्य-बिंबों का संकेत।
- तकनीकी शब्दावली: कट टू (CUT TO), फ़ेड इन (FADE IN), क्लोज़-अप (Close-up) आदि का प्रयोग।
3. पटकथा लेखन का तकनीकी तरीका
(क) लेखन के चरण
- विचार (Idea): मूल कथा-विचार का चयन।
- एक-पंक्ति सार (One-line/Logline): पूरी कहानी एक-दो वाक्यों में।
- सारांश (Synopsis): कहानी का संक्षिप्त रूप, जिसमें आरंभ, मध्य और अंत हो।
- ट्रीटमेंट (Treatment): कहानी का विस्तृत गद्य-रूप, जिसमें पात्र और घटनाएँ स्पष्ट हों।
- दृश्य-क्रम (Step Outline): दृश्यों की क्रमवार सूची।
- पहला प्रारूप (First Draft): संवाद और निर्देशों सहित पूरी पटकथा।
- संशोधन (Revision): कसावट, सुधार और काट-छाँट।
- शूटिंग स्क्रिप्ट (Shooting Script): शॉट-संख्या और तकनीकी विवरण सहित अंतिम रूप।
(ख) पटकथा के प्रारूप (Format) के तत्व
- दृश्य-शीर्षक (Scene Heading/Slugline): आंतरिक/बाह्य (INT./EXT.), स्थान और समय (दिन/रात)।
- क्रिया-वर्णन (Action): दृश्य में क्या हो रहा है।
- पात्र का नाम: संवाद से पहले।
- संवाद (Dialogue): पात्र के बोले जाने वाले शब्द।
- भाव-निर्देश (Parenthetical): कोष्ठक में बोलने का ढंग, जैसे (धीरे से)।
- संक्रमण (Transition): कट टू, फ़ेड आउट, डिज़ॉल्व आदि।
उदाहरण:
दृश्य 1, आंतरिक, रसोईघर, सुबह
माँ चूल्हे पर चाय चढ़ाती है। दरवाज़े की घंटी बजती है।
माँ: (आवाज़ देकर) रमेश, देखो कौन है!
कट टू
(ग) प्रमुख तकनीकी शब्द
- शॉट के प्रकार: लॉन्ग शॉट (Long Shot), मिड शॉट (Mid Shot), क्लोज़-अप (Close-up)।
- कैमरा गति: पैन (Pan), टिल्ट (Tilt), ज़ूम (Zoom), ट्रॉली (Trolley)।
- अन्य: फ़्लैशबैक (Flashback), मोंटाज (Montage), वॉइस ओवर (V.O.), ऑफ़ स्क्रीन (O.S.)।
4. पटकथा लेखन की नींव: कहानी
पटकथा का आधार कहानी है। तकनीक कितनी भी उन्नत हो, कमज़ोर कहानी पर अच्छी पटकथा नहीं बन सकती। इसलिए कहानी को पटकथा की नींव कहा जाता है।
कहानी के आवश्यक तत्व
- कथानक (Plot): घटनाओं का कार्य-कारण पर आधारित क्रम।
- पात्र (Characters): नायक, प्रतिनायक और सहायक पात्र, जिनका स्पष्ट चरित्र-चित्रण हो।
- द्वंद्व या संघर्ष (Conflict): कहानी की प्रेरक शक्ति, जो बाहरी या आंतरिक हो सकता है।
- परिवेश (Setting): देश, काल और वातावरण।
- चरम सीमा (Climax): संघर्ष का सर्वोच्च बिंदु।
- उद्देश्य/संदेश (Theme): कहानी का मूल विचार।
तीन-अंकीय संरचना (Three-Act Structure)
अरस्तू ने कथा के आदि, मध्य और अंत की बात कही थी। इसी आधार पर आधुनिक पटकथा में तीन अंक माने जाते हैं:
- आरंभ (स्थापना): पात्र, परिवेश और समस्या का परिचय।
- मध्य (संघर्ष): बाधाएँ, टकराव और तनाव का विकास।
- अंत (समाधान): चरम सीमा और परिणाम।
कहानी के स्रोत
- मौलिक कहानी, जो लेखक की अपनी कल्पना हो।
- रूपांतरण (Adaptation): साहित्यिक कृति पर आधारित, जैसे प्रेमचंद की कहानी 'शतरंज के खिलाड़ी' पर सत्यजित राय की फ़िल्म और आर.के. नारायण के उपन्यास पर आधारित फ़िल्म 'गाइड'।
- सत्य घटनाएँ, जीवनियाँ, इतिहास और लोककथाएँ।
अच्छी कहानी के गुण
- रोचकता और जिज्ञासा बनी रहे।
- पात्र विश्वसनीय हों।
- स्पष्ट संघर्ष और तार्किक विकास हो।
- दृश्य रूप में ढलने की क्षमता हो।
- भावनात्मक जुड़ाव और सार्थक संदेश हो।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) पटकथा लेखन की परिभाषा देते हुए उसके स्वरूप और विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डालिए। कहानी और पटकथा में अंतर भी स्पष्ट कीजिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) पटकथा लेखन के तकनीकी तरीके को चरणबद्ध रूप में समझाइए तथा पटकथा के प्रारूप के प्रमुख तत्वों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) पटकथा लेखन की भाषा की विशेषताएँ लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) 'कहानी पटकथा की नींव है', इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए: तीन-अंकीय संरचना (Three-Act Structure) अथवा ट्रीटमेंट (Treatment)।