पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- जहां आकाश नहीं दिखाई देता – विष्णु प्रभाकर
- घीसा – महादेवी वर्मा
- बैलगाड़ी – बेढब बनारसी
1. जहां आकाश नहीं दिखाई देता – विष्णु प्रभाकर
लेखक परिचय
- विष्णु प्रभाकर (1912–2009) हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार, नाटककार, उपन्यासकार और जीवनीकार थे।
- शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की जीवनी 'आवारा मसीहा' उनकी सबसे चर्चित कृति है।
- उपन्यास 'अर्धनारीश्वर' पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया।
- उन्होंने कहानी, नाटक, एकांकी, जीवनी, संस्मरण, यात्रा-वृत्त और रिपोर्ताज जैसी अनेक विधाओं में लिखा।
- उनके लेखन पर गांधीवादी विचारधारा, मानवतावाद और सामाजिक यथार्थ का प्रभाव है। उनकी भाषा सरल, सहज और संवेदनशील है।
रचना का अध्ययन कैसे करें
यह रचना पाठ्यक्रम में रिपोर्ताज (Reportage) विधा के उदाहरण के रूप में रखी गई है। रिपोर्ताज में लेखक किसी घटना, स्थान या परिस्थिति को अपनी आँखों से देखकर उसका जीवंत, तथ्यपरक और भावपूर्ण वर्णन करता है।
- शीर्षक का संकेत: 'जहां आकाश नहीं दिखाई देता' शीर्षक किसी ऐसे स्थान या जीवन की ओर इशारा करता है जहाँ खुलापन, प्रकाश और स्वतंत्रता नहीं है। मूल पाठ पढ़कर स्वयं तय करें कि यह स्थान कौन-सा है और वहाँ के लोगों का जीवन कैसा है।
- तथ्य और भाव: देखें कि लेखक ने तथ्यों के साथ अपनी संवेदना को कैसे जोड़ा है।
- मानवीय पक्ष: वहाँ रहने या काम करने वाले लोगों की कठिनाइयों, संघर्ष और जिजीविषा को पहचानें।
- शैली: आँखों देखा वर्णन, चित्रात्मकता, संवाद और सजीवता पर ध्यान दें।
2. घीसा – महादेवी वर्मा
लेखिका परिचय
- महादेवी वर्मा (1907–1987) छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उन्हें 'आधुनिक मीरा' कहा जाता है।
- काव्य-संग्रह 'यामा' पर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
- गद्य-कृतियाँ: 'अतीत के चलचित्र', 'स्मृति की रेखाएँ', 'पथ के साथी', 'मेरा परिवार', 'शृंखला की कड़ियाँ'।
- उनके रेखाचित्रों में समाज के उपेक्षित, गरीब और शोषित लोगों के प्रति गहरी करुणा दिखाई देती है।
विषय-वस्तु (सार अपने शब्दों में)
'घीसा' महादेवी वर्मा का प्रसिद्ध रेखाचित्र (Sketch) है, जो 'अतीत के चलचित्र' में संकलित है। लेखिका प्रयाग के पास गंगा पार के एक गाँव में गरीब ग्रामीण बच्चों को पढ़ाने जाया करती थीं। वहीं उनकी भेंट घीसा नाम के एक गरीब, उपेक्षित बालक से होती है। उसकी विधवा माँ को गाँव वाले तिरस्कार की दृष्टि से देखते थे। घीसा बहुत गरीब होते हुए भी पढ़ाई के प्रति लगनशील और अपनी 'गुरु साहब' के प्रति अत्यंत श्रद्धालु था। लेखिका के आने से पहले वह पढ़ाई की जगह साफ़ करता और हर बात ध्यान से सुनता। विदा के समय वह अपनी सामर्थ्य से बढ़कर गुरु को भेंट देने का प्रयास करता है, जो उसके निश्छल प्रेम का प्रमाण है। रचना में बालक की मासूमियत, समाज की निष्ठुरता और लेखिका की ममता एक साथ दिखाई देती है।
घीसा का चरित्र-चित्रण
- गुरुभक्त: गुरु के प्रति अपार श्रद्धा और समर्पण।
- लगनशील और जिज्ञासु: अभावों के बीच भी सीखने की तीव्र इच्छा।
- संवेदनशील और त्यागी: अपनी छोटी-सी पूँजी भी गुरु के लिए न्योछावर करने को तैयार।
- उपेक्षित और अभावग्रस्त: गरीबी और सामाजिक तिरस्कार का शिकार।
- मौन और गंभीर: अपनी उम्र से अधिक समझदार।
प्रमुख विशेषताएँ
- करुणा और वात्सल्य भाव की प्रधानता।
- ग्रामीण जीवन, गरीबी और सामाजिक भेदभाव का यथार्थ चित्रण।
- संक्षिप्त, सजीव और भावपूर्ण शब्द-चित्र।
- काव्यात्मक, तत्सम-प्रधान पर प्रवाहपूर्ण भाषा।
- लेखिका का आत्मीय और संस्मरणात्मक दृष्टिकोण।
3. बैलगाड़ी – बेढब बनारसी
लेखक परिचय
- बेढब बनारसी हिंदी के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य लेखक और कवि थे। उनका वास्तविक नाम कृष्णदेव प्रसाद गौड़ था।
- वे बनारस (वाराणसी) से जुड़े थे; उनकी रचनाओं में बनारसी मस्ती और ठेठ अंदाज़ मिलता है।
- उन्होंने गद्य और पद्य दोनों में हास्य-व्यंग्य लिखा। समाज की कमियों, दिखावे और विसंगतियों पर हल्के-फुल्के ढंग से चोट करना उनकी विशेषता है।
रचना का अध्ययन कैसे करें
'बैलगाड़ी' को पढ़ते समय इन बिंदुओं पर ध्यान दें:
- विषय: बैलगाड़ी ग्रामीण भारत की पारंपरिक सवारी है। देखें कि लेखक ने इसके माध्यम से धीमी चाल, ग्रामीण जीवन या आधुनिकता से तुलना जैसे किन पक्षों को उभारा है।
- हास्य-व्यंग्य: किन स्थितियों, पात्रों या वर्णनों से हास्य उत्पन्न होता है और किस बात पर व्यंग्य किया गया है।
- विधा: शब्द-चित्र, संस्मरण या रिपोर्ताज में से किसके तत्व इसमें मिलते हैं।
- भाषा-शैली: बोलचाल की भाषा, मुहावरे, अतिशयोक्ति और चुटीलापन पहचानें।
तीनों रचनाओं की तुलना
| आधार | जहां आकाश नहीं दिखाई देता | घीसा | बैलगाड़ी |
|---|---|---|---|
| रचनाकार | विष्णु प्रभाकर | महादेवी वर्मा | बेढब बनारसी |
| मुख्य विधा | रिपोर्ताज | रेखाचित्र | हास्य-व्यंग्यात्मक गद्य |
| प्रधान भाव | यथार्थ और संवेदना | करुणा और वात्सल्य | हास्य और व्यंग्य |
| भाषा | सरल, वर्णनात्मक | काव्यात्मक, भावपूर्ण | बोलचाल की, चुटीली |
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) महादेवी वर्मा के रेखाचित्र 'घीसा' का सार लिखते हुए घीसा का चरित्र-चित्रण कीजिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) रिपोर्ताज विधा के तत्वों के आधार पर विष्णु प्रभाकर की रचना 'जहां आकाश नहीं दिखाई देता' की समीक्षा कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए: बेढब बनारसी का हास्य-व्यंग्य और 'बैलगाड़ी'।
- (लघूत्तरी प्रश्न) 'घीसा' रेखाचित्र में व्यक्त करुणा और सामाजिक यथार्थ पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) विष्णु प्रभाकर का साहित्यिक परिचय दीजिए।