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आधुनिक हिन्दी गद्य साहित्य (कथा साहित्य) (Modern Hindi Prose Literature (Fiction / Short Stories)) BAHLT ME-01-105

RTMNU BA Semester 5 · Hindi Literature (हिन्दी साहित्य) · 4 units · हर इकाई के नोट्स

UniversityRTMNU – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
CourseB.A. (Four Year UG Programme, NEP 2020) – Hindi Literature (हिन्दी साहित्य)
SemesterSemester V
Paper codeBAHLT-ME-01-105
Paper titleआधुनिक हिन्दी गद्य साहित्य (कथा साहित्य) (Modern Hindi Prose Literature (Fiction / Short Stories))
CategoryMajor Elective 01 (option)
Credits04
MarksTheory 80 + CIE 20 = 100 (Passing 40)
पाठ्यपुस्तकसंदर्भ पुस्तक: साहित्य वसुधा
Syllabusas per official RTMNU NEP 2020 syllabus 2026-27 (Semester V–VI)

इकाइयों के विषय आधिकारिक RTMNU पाठ्यक्रम के अनुसार हैं; नोट्स और प्रश्न PadhaiNotes द्वारा सरल हिन्दी में लिखे गए हैं। RTMNU BA Hindi – All papers

Units

  1. 1इकाई I: प्रियंवदा, प्रेमचंद, अमरकांत व टाकभौरे की कहानियाँNotes
  2. 2इकाई II: उदय प्रकाश, गुलेरी, यशपाल व साहनी की कहानियाँNotes
  3. 3इकाई III: प्रभाकर, राकेश, उदय प्रकाश व वाल्मीकि की कहानियाँNotes
  4. 4इकाई IV: खडसे, प्रसाद, भंडारी व कालिया की कहानियाँNotes

RTMNU BA Sem 5 · BAHLT ME-01-105 · इकाई I

इकाई I: प्रियंवदा, प्रेमचंद, अमरकांत व टाकभौरे की कहानियाँ

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • जिंदगी और गुलाब के फूल – उषा प्रियंवदा
  • बूढ़ी काकी – मुंशी प्रेमचंद
  • जिन्दगी और जोंक – अमरकांत
  • संघर्ष – सुशीला टाकभौरे

1. जिंदगी और गुलाब के फूल – उषा प्रियंवदा

लेखिका परिचय

उषा प्रियंवदा (जन्म 1930, कानपुर) 'नई कहानी' आंदोलन की प्रमुख कथाकार हैं। उन्होंने लंबे समय तक अमेरिका में अध्यापन किया। उनके प्रमुख उपन्यास हैं 'पचपन खंभे लाल दीवारें' और 'रुकोगी नहीं राधिका'। 'वापसी' उनकी बहुचर्चित कहानी है। उनकी कहानियों में मध्यवर्गीय परिवार, अकेलापन, अजनबीपन और बदलते पारिवारिक संबंधों का सूक्ष्म चित्रण मिलता है।

कथावस्तु (सार)

कहानी का नायक सुबोध एक स्वाभिमानी युवक है। वह सिद्धांत और आत्मसम्मान के कारण अपनी नौकरी छोड़ देता है और बेरोज़गार हो जाता है। उसकी बहन वृंदा नौकरी करने लगती है और घर की कमाने वाली सदस्य बन जाती है। धीरे-धीरे घर में सुबोध का महत्व घटता जाता है। माँ का स्नेह और ध्यान कमाने वाली बेटी की ओर झुक जाता है। सुबोध अपने ही घर में उपेक्षित, फालतू और अजनबी जैसा अनुभव करने लगता है। कहानी दिखाती है कि आधुनिक मध्यवर्गीय जीवन में संबंधों का आधार भावना कम और आर्थिक उपयोगिता अधिक हो गया है।

मुख्य विषय

  • आर्थिक आधार पर संबंध: कमाने वाला ही घर में सम्मान पाता है।
  • बेरोज़गारी की पीड़ा: शिक्षित युवक की हताशा और हीनभावना।
  • अजनबीपन (Alienation): अपने ही घर में पराया हो जाना।
  • बदलती स्त्री-भूमिका: कमाऊ स्त्री का परिवार में बढ़ता स्थान।
  • शीर्षक: 'गुलाब के फूल' जीवन की कोमल आशाओं और सपनों के प्रतीक हैं, जो कठोर यथार्थ में मुरझा जाते हैं।

शिल्प

मनोवैज्ञानिक चित्रण, सहज भाषा, छोटे-छोटे घरेलू प्रसंगों द्वारा गहरी बात कहना और प्रतीकात्मकता इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।

2. बूढ़ी काकी – मुंशी प्रेमचंद

लेखक परिचय

प्रेमचंद (1880–1936) का वास्तविक नाम धनपत राय था। उनका जन्म वाराणसी के पास लमही गाँव में हुआ। उन्हें 'उपन्यास सम्राट' कहा जाता है। प्रमुख कृतियाँ: 'गोदान', 'गबन', 'निर्मला', 'रंगभूमि'; कहानियाँ: 'कफ़न', 'ईदगाह', 'पूस की रात', 'नमक का दारोगा'। उनकी कहानियाँ 'मानसरोवर' के खंडों में संकलित हैं।

कथावस्तु (सार)

बूढ़ी काकी एक विधवा वृद्धा हैं, जिनका अपना कोई नहीं है। उन्होंने अपनी सारी संपत्ति भतीजे बुद्धिराम के नाम कर दी। संपत्ति मिलते ही बुद्धिराम और उसकी पत्नी रूपा उनकी उपेक्षा करने लगे। घर में बेटे के तिलक का उत्सव होता है और तरह-तरह के पकवान बनते हैं। भूख से व्याकुल काकी भोज में पहुँच जाती हैं और अपमानित होकर लौटा दी जाती हैं। केवल छोटी बच्ची लाडली उनसे सच्चा प्रेम करती है। रात को लाडली उन्हें वहाँ ले जाती है जहाँ मेहमानों की जूठी पत्तलें पड़ी हैं, और काकी जूठन खाने लगती हैं। यह दृश्य देखकर रूपा का हृदय काँप उठता है। उसे पश्चाताप होता है और वह काकी को आदरपूर्वक भोजन परोसती है।

मुख्य बिंदु

  • वृद्धों की उपेक्षा: संपत्ति के बाद सेवा समाप्त हो जाना।
  • प्रसिद्ध कथन का भाव: बुढ़ापा प्रायः बचपन का पुनरागमन होता है, अर्थात् वृद्ध भी बच्चों की तरह स्वाद और स्नेह चाहते हैं।
  • बाल-मन की निश्छलता: लाडली मानवता की प्रतीक है।
  • हृदय-परिवर्तन: प्रेमचंद का आदर्शोन्मुख यथार्थवाद।

पात्र

पात्रविशेषता
बूढ़ी काकीअसहाय, भूखी, उपेक्षित, बाल-स्वभाव वाली वृद्धा
बुद्धिरामस्वार्थी, संपत्ति लेकर कर्तव्य भूलने वाला
रूपाकठोर, पर अंत में पश्चाताप करने वाली
लाडलीनिश्छल, करुणामयी बालिका

3. जिन्दगी और जोंक – अमरकांत

लेखक परिचय

अमरकांत (1925–2014) का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ। वे 'नई कहानी' के प्रमुख कथाकार हैं। उपन्यास 'इन्हीं हथियारों से' पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला और बाद में ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए। प्रसिद्ध कहानियाँ: 'दोपहर का भोजन', 'डिप्टी कलक्टरी', 'जिन्दगी और जोंक'।

कथावस्तु (सार)

कहानी का केंद्रीय पात्र रजुआ एक अत्यंत गरीब, बेसहारा व्यक्ति है जो एक मोहल्ले में आकर रहने लगता है। चोरी के संदेह में उसे पीटा जाता है, फिर भी वह वहीं टिका रहता है। पेट भरने के लिए वह मोहल्ले भर के छोटे-मोटे काम करता है। लोग उसका शोषण करते हैं, उसका मज़ाक उड़ाते हैं, पर वह हर अपमान सहकर भी जीता रहता है। बीमारी और कष्ट में भी वह जीवन से चिपका रहता है। कहानी का वर्णन 'मैं' (कथावाचक) की दृष्टि से हुआ है।

मुख्य विषय

  • जिजीविषा (जीने की इच्छा): रजुआ जोंक की तरह जीवन से चिपका है।
  • शीर्षक का द्विअर्थ: जीवन रजुआ को जोंक की तरह चूसता है, और रजुआ भी जोंक की तरह जीवन को पकड़े रहता है।
  • निम्नवर्ग का शोषण और मध्यवर्ग की संवेदनहीनता।
  • यथार्थवादी शैली: व्यंग्य, सहज भाषा, सूक्ष्म निरीक्षण।

4. संघर्ष – सुशीला टाकभौरे

लेखिका परिचय

सुशीला टाकभौरे हिंदी की प्रमुख दलित लेखिका हैं, जिनका कार्यक्षेत्र नागपुर क्षेत्र रहा है। उन्होंने कहानी, कविता, नाटक और आत्मकथा लिखी है। उनकी आत्मकथा 'शिकंजे का दर्द' दलित स्त्री के दोहरे शोषण (जाति और लिंग) का मार्मिक दस्तावेज़ है।

दलित कहानी की विशेषताएँ

  • स्वानुभूति (अपना भोगा हुआ यथार्थ) पर आधारित लेखन।
  • जातिगत भेदभाव, अपमान और शोषण का विरोध।
  • डॉ. आंबेडकर के विचारों से प्रेरित चेतना: शिक्षा, समानता, स्वाभिमान।
  • दलित स्त्री का दोहरा संघर्ष।
  • सीधी, सरल और प्रश्न उठाने वाली भाषा।
अध्ययन सुझाव: 'संघर्ष' कहानी को संदर्भ पुस्तक 'साहित्य वसुधा' से स्वयं ध्यानपूर्वक पढ़ें। उत्तर लिखते समय (1) कथावस्तु, (2) मुख्य पात्र और उनका संघर्ष, (3) जाति/स्त्री प्रश्न, (4) शीर्षक की सार्थकता, (5) भाषा-शैली इन बिंदुओं पर अपने नोट्स बनाएँ।

चारों कहानियों की तुलना

कहानीलेखकमुख्य समस्या
जिंदगी और गुलाब के फूलउषा प्रियंवदाबेरोज़गारी, अजनबीपन
बूढ़ी काकीप्रेमचंदवृद्धों की उपेक्षा
जिन्दगी और जोंकअमरकांतनिम्नवर्ग का शोषण, जिजीविषा
संघर्षसुशीला टाकभौरेदलित चेतना, सामाजिक संघर्ष

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'बूढ़ी काकी' कहानी की कथावस्तु लिखते हुए उसमें चित्रित वृद्धों की समस्या पर प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'जिंदगी और गुलाब के फूल' कहानी के आधार पर सुबोध का चरित्र-चित्रण कीजिए तथा कहानी के मूल उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) 'जिन्दगी और जोंक' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए: बूढ़ी काकी कहानी की लाडली।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) सुशीला टाकभौरे का साहित्यिक परिचय दीजिए।

RTMNU BA Sem 5 · BAHLT ME-01-105 · इकाई II

इकाई II: उदय प्रकाश, गुलेरी, यशपाल व साहनी की कहानियाँ

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • अपराध – उदय प्रकाश
  • उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी
  • अखबार में नाम – यशपाल
  • चीफ की दावत – भीष्म साहनी

1. अपराध – उदय प्रकाश

लेखक परिचय

  • उदय प्रकाश (जन्म 1952, मध्य प्रदेश के शहडोल क्षेत्र का एक गाँव) समकालीन हिंदी के प्रमुख कथाकार और कवि हैं।
  • प्रमुख कहानियाँ: तिरिछ, पीली छतरी वाली लड़की, और अंत में प्रार्थना, पॉल गोमरा का स्कूटर, वारेन हेस्टिंग्स का सांड।
  • कविता-संग्रह: सुनो कारीगर, अबूतर कबूतर।
  • लंबी कहानी मोहनदास पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • लेखन की विशेषताएँ: व्यवस्था की क्रूरता, आम आदमी की असहायता और स्मृति व अपराध-बोध जैसे विषय। उनकी कहानियों में यथार्थ और फैंटेसी (कल्पना) का मिश्रण तथा व्यंग्य मिलता है।

कहानी का अध्ययन कैसे करें

इस कहानी की कथावस्तु यहाँ सत्यापित रूप में नहीं दी गई है। विद्यार्थी संदर्भ पुस्तक साहित्य वसुधा से मूल कहानी पढ़कर इन बिंदुओं पर अपने नोट्स बनाएँ।
  • शीर्षक का अर्थ: कहानी में अपराध किसने किया, क्यों किया और उसका परिणाम क्या हुआ।
  • मनोवैज्ञानिक पक्ष: पात्रों के मन में पश्चाताप या अपराध-बोध किस रूप में आता है।
  • पात्र-योजना: मुख्य पात्रों का चरित्र-चित्रण उदाहरण सहित।
  • भाषा-शैली: आत्मकथात्मक या वर्णनात्मक शैली, संवेदनशील और सहज भाषा।
  • उद्देश्य: कहानी का संदेश और उसकी सामाजिक प्रासंगिकता।

2. उसने कहा था – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

लेखक परिचय

  • चंद्रधर शर्मा गुलेरी (1883–1922) संस्कृत, प्राकृत और पुरातत्व के विद्वान तथा निबंधकार थे।
  • उन्होंने केवल तीन कहानियाँ लिखीं: सुखमय जीवन, बुद्धू का काँटा और उसने कहा था।
  • उसने कहा था सन् 1915 में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई। इसे हिंदी की पहली श्रेष्ठ आधुनिक कहानियों में गिना जाता है।

कथासार (संक्षेप में)

  • बचपन का प्रसंग: अमृतसर के बाजार में लगभग बारह वर्ष के एक लड़के और आठ वर्ष की एक लड़की की कई बार भेंट होती है। लड़का बार-बार पूछता है, "तेरी कुड़माई (सगाई) हो गई?" एक दिन लड़की उत्तर देती है कि उसकी सगाई हो चुकी है। इससे लड़के का मन टूट जाता है।
  • पच्चीस वर्ष बाद: वही लड़का अब लहना सिंह है, जो सेना में जमादार है। छुट्टी के बाद वह सूबेदार हज़ारा सिंह के घर जाता है। वहाँ उसे पता चलता है कि सूबेदारनी वही बचपन वाली लड़की है। वह लहना से अपने पति और बेटे बोधा सिंह की रक्षा करने का वचन माँगती है।
  • युद्ध का प्रसंग: प्रथम विश्वयुद्ध में फ्रांस की खंदकों (Trenches) में लहना बीमार बोधा को अपने गर्म कपड़े दे देता है। वह लपटन साहब का वेश धरे जर्मन जासूस को पहचान लेता है और शत्रु के हमले को नाकाम कर देता है।
  • अंत: लहना गंभीर रूप से घायल होता है, पर अपना घाव छिपाता है। वह सूबेदार और बोधा को गाड़ी में सुरक्षित भेज देता है। अंतिम क्षणों में बचपन की स्मृतियाँ उभरती हैं और वज़ीरा सिंह की गोद में उसकी मृत्यु हो जाती है। उसने सूबेदारनी का कहा हुआ वचन प्राणों की कीमत पर निभाया।

प्रमुख विशेषताएँ

  • निःस्वार्थ प्रेम और त्याग: प्रेम का आदर्श और उदात्त रूप।
  • शिल्प: पूर्वदीप्ति (Flashback) शैली का सफल प्रयोग।
  • शीर्षक: सांकेतिक और पूरी तरह सार्थक।
  • भाषा: पंजाबी शब्दों से युक्त सजीव भाषा, जिसमें हास्य और करुणा दोनों हैं।
  • लहना सिंह का चरित्र: वीर, वचन का पक्का, चतुर, त्यागी और विनोदी।

3. अखबार में नाम – यशपाल

लेखक परिचय

  • यशपाल (1903–1976) क्रांतिकारी लेखक थे। वे स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारी दल से जुड़े रहे।
  • उपन्यास: दिव्या, दादा कामरेड, झूठा सच (विभाजन पर आधारित)।
  • मेरी तेरी उसकी बात पर उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
  • दृष्टि: मार्क्सवादी और यथार्थवादी। वे सामाजिक पाखंड, मध्यवर्गीय दिखावे और शोषण पर तीखा व्यंग्य करते हैं।

कहानी का अध्ययन कैसे करें

इस कहानी की कथावस्तु यहाँ सत्यापित रूप में नहीं दी गई है। मूल पाठ साहित्य वसुधा से पढ़ें।
  • शीर्षक: "अखबार में नाम" छपने का कहानी में क्या अर्थ और महत्व है।
  • मुख्य पात्र: उसकी इच्छाओं, मनोवृत्ति और सामाजिक स्थिति का विश्लेषण।
  • व्यंग्य: यशपाल की व्यंग्यात्मक दृष्टि कहानी में कहाँ और कैसे दिखाई देती है।
  • संदेश: कहानी का उद्देश्य और समाज पर उसकी टिप्पणी।

4. चीफ की दावत – भीष्म साहनी

लेखक परिचय

  • भीष्म साहनी (1915–2003) का जन्म रावलपिंडी में हुआ था। वे नई कहानी आंदोलन के प्रमुख लेखक हैं।
  • प्रमुख कृतियाँ: तमस (उपन्यास, साहित्य अकादमी पुरस्कार), भाग्यरेखा (कहानी-संग्रह), हानूश और कबिरा खड़ा बाजार में (नाटक)।

कथासार

  • दावत की तैयारी: मध्यवर्गीय शामनाथ अपनी तरक्की की आशा में अपने विदेशी चीफ को घर पर दावत देता है। घर सजाते समय उसकी सबसे बड़ी चिंता उसकी बूढ़ी, अनपढ़ माँ है, जिसे वह "छिपाना" चाहता है।
  • माँ से भेंट: माँ को कोठरी के बाहर कुर्सी पर बैठा दिया जाता है, जहाँ उन्हें नींद आ जाती है। चीफ उनसे मिलकर प्रसन्न होता है और उनसे गाना सुनता है। माँ एक पंजाबी लोकगीत गाती हैं।
  • फुलकारी का प्रसंग: चीफ पंजाब की लोककला फुलकारी में रुचि दिखाता है। तरक्की के लालच में शामनाथ माँ से फुलकारी बनाने को कहता है, जबकि माँ की आँखें कमज़ोर हैं और वे हरिद्वार जाकर रहना चाहती थीं।
  • अंत: बेटे की तरक्की के लिए माँ अपनी इच्छा त्यागकर फुलकारी बनाने को तैयार हो जाती हैं।

मुख्य बिंदु

  • मध्यवर्ग की स्वार्थपरता, दिखावा और अवसरवाद।
  • पीढ़ियों का अंतर और वृद्धों की उपेक्षा।
  • पाश्चात्य प्रभाव के कारण अपनी संस्कृति के प्रति हीनभावना।
  • माँ का चरित्र: ममता, त्याग और सहनशीलता की प्रतिमूर्ति।
  • शैली: सहज भाषा और सूक्ष्म व्यंग्य।

तुलनात्मक तालिका

कहानीलेखकमूल विषय
उसने कहा थाचंद्रधर शर्मा गुलेरीनिःस्वार्थ प्रेम, त्याग, वचन-पालन
चीफ की दावतभीष्म साहनीमध्यवर्गीय स्वार्थ, माँ की उपेक्षा
अखबार में नामयशपालमूल पाठ से अध्ययन करें
अपराधउदय प्रकाशमूल पाठ से अध्ययन करें

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'उसने कहा था' कहानी की कथावस्तु लिखते हुए लहना सिंह का चरित्र-चित्रण कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'चीफ की दावत' कहानी में चित्रित मध्यवर्गीय मानसिकता और माँ के चरित्र पर प्रकाश डालिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) 'उसने कहा था' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) यशपाल का साहित्यिक परिचय दीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) उदय प्रकाश का कथा-साहित्य में योगदान संक्षेप में लिखिए।

RTMNU BA Sem 5 · BAHLT ME-01-105 · इकाई III

इकाई III: प्रभाकर, राकेश, उदय प्रकाश व वाल्मीकि की कहानियाँ

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • अभाव – विष्णु प्रभाकर
  • मलबे का मालिक – मोहन राकेश
  • पगला बाबा – उदय प्रकाश
  • शवयात्रा – ओमप्रकाश वाल्मीकि

1. अभाव – विष्णु प्रभाकर

लेखक परिचय

  • विष्णु प्रभाकर (1912–2009) हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार, उपन्यासकार, नाटककार और जीवनीकार थे।
  • जन्म: मीरापुर, जिला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)।
  • प्रसिद्ध कृतियाँ: आवारा मसीहा (शरतचंद्र की जीवनी), अर्धनारीश्वर (उपन्यास, साहित्य अकादमी पुरस्कार), कहानी धरती अब भी घूम रही है।
  • उन पर गांधीवादी विचारधारा और मानवतावाद का प्रभाव था। उनके साहित्य में सामाजिक यथार्थ, नैतिक मूल्य और मध्यवर्गीय जीवन की समस्याएँ दिखाई देती हैं।

कहानी के अध्ययन हेतु मार्गदर्शन

इस कहानी की कथावस्तु हमारी ओर से सत्यापित नहीं है। इसलिए विद्यार्थी मूल पाठ साहित्य वसुधा से पढ़ें और नीचे दिए बिंदुओं के आधार पर अपने नोट्स बनाएँ।

  • शीर्षक की सार्थकता: कहानी में किस चीज़ का अभाव है? आर्थिक, भावनात्मक या नैतिक? यह स्पष्ट करें।
  • मुख्य पात्र: पात्रों की परिस्थिति, संघर्ष और मनोदशा लिखें।
  • उद्देश्य: लेखक का मानवतावादी दृष्टिकोण और समाज पर टिप्पणी।
  • भाषा-शैली: सरल, प्रवाहपूर्ण और संवादात्मक भाषा। विष्णु प्रभाकर की कहानियों में यही विशेषता मिलती है।

2. मलबे का मालिक – मोहन राकेश

लेखक परिचय

  • मोहन राकेश (1925–1972), जन्म अमृतसर। वे नई कहानी आंदोलन के प्रमुख स्तंभ थे। कमलेश्वर और राजेंद्र यादव के साथ उनकी त्रयी प्रसिद्ध है।
  • नाटक: आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे।
  • उपन्यास: अँधेरे बंद कमरे।
  • कहानियाँ: मिस पाल, एक और ज़िंदगी, आर्द्रा।

कथासार (अपने शब्दों में)

यह कहानी भारत-विभाजन (1947) की त्रासदी पर आधारित है।

  • विभाजन के लगभग साढ़े सात वर्ष बाद बूढ़ा अब्दुल गनी (गनी मियाँ) हॉकी मैच देखने आए लोगों के साथ लाहौर से अमृतसर आता है। वह अपना पुराना घर देखना चाहता है।
  • दंगों में उसका बेटा चिरागदीन, बहू और पोतियाँ मार डाले गए थे। उसका घर अब मलबे में बदल चुका है।
  • हत्या का दोषी रक्खा पहलवान है। वह उसी मलबे पर बैठकर स्वयं को उसका मालिक समझता है।
  • गनी इस सच्चाई से अनजान है। वह रक्खा से स्नेह से मिलता है, उसे दुआएँ देता है और लौट जाता है।
  • गनी का यह निश्छल व्यवहार रक्खा के मन में अपराध-बोध जगा देता है। अंत में मलबे पर बैठा रक्खा अपने ही भीतर टूटता हुआ दिखता है।

मुख्य विशेषताएँ

  • विभाजन की पीड़ा: घर, परिवार और पहचान का उजड़ना।
  • प्रतीकात्मकता: मलबा नष्ट हुई मानवता और संबंधों का प्रतीक है।
  • मनोवैज्ञानिक चित्रण: रक्खा का अपराध-बोध और भय।
  • मानवता बनाम सांप्रदायिकता: गनी की सरलता के सामने हिंसा की हार।
  • व्यंग्य: हत्यारा ही मलबे का मालिक बन बैठा है।

पात्र-चित्रण

  • गनी मियाँ: सरल, भावुक, क्षमाशील और स्मृतियों में जीने वाला वृद्ध।
  • रक्खा पहलवान: बाहर से दबंग, भीतर से डरा हुआ और अपराध-बोध से ग्रस्त।

3. पगला बाबा – उदय प्रकाश

लेखक परिचय

  • उदय प्रकाश (जन्म 1952), जन्म मध्य प्रदेश। वे समकालीन हिंदी के प्रमुख कहानीकार और कवि हैं।
  • प्रमुख रचनाएँ: तिरिछ, पीली छतरी वाली लड़की, और अंत में प्रार्थना, वारेन हेस्टिंग्स का साँड, मोहनदास (साहित्य अकादमी पुरस्कार)।
  • उनकी कहानियों में भूमंडलीकरण, सत्ता-तंत्र, शोषण और आम आदमी की असहायता का यथार्थ है। साथ ही फैंटेसी और व्यंग्य का प्रयोग भी मिलता है।

अध्ययन हेतु मार्गदर्शन

इस कहानी का कथानक हमारी ओर से सत्यापित नहीं है। मूल पाठ पढ़कर इन बिंदुओं पर तैयारी करें:

  • 'पगला बाबा' नामक पात्र को समाज 'पागल' क्यों मानता है? क्या वह वास्तव में पागल है या समाज की सच्चाई दिखाने वाला पात्र है?
  • कहानी में व्यवस्था, अंधविश्वास या संवेदनहीनता पर व्यंग्य को पहचानें।
  • उदय प्रकाश की शैली की विशेषताएँ लिखें: किस्सागोई, व्यंग्य, यथार्थ और कल्पना का मिश्रण।

4. शवयात्रा – ओमप्रकाश वाल्मीकि

लेखक परिचय

  • ओमप्रकाश वाल्मीकि (1950–2013), जन्म बरला गाँव, जिला मुज़फ्फरनगर (उ.प्र.)। वे दलित साहित्य के प्रमुख रचनाकार थे।
  • आत्मकथा: जूठन।
  • कहानी-संग्रह: सलाम, घुसपैठिये।
  • कविता-संग्रह: सदियों का संताप, बस्स! बहुत हो चुका।
  • आलोचना: दलित साहित्य का सौंदर्यशास्त्र।

कथासार (संक्षेप में)

कहानी गाँव के एक अत्यंत निम्न समझे जाने वाले बल्हार दलित परिवार की है।

  • परिवार का बेटा शहर में नौकरी करता है और गाँव में पक्का मकान बनवाना चाहता है। गाँव के लोग, जिनमें दूसरी दलित जातियाँ भी शामिल हैं, यह बर्दाश्त नहीं करते।
  • उसकी छोटी बेटी बीमार पड़ती है। समय पर इलाज नहीं मिलता और उसकी मृत्यु हो जाती है।
  • गाँव के सामान्य श्मशान में उसके अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं मिलती। परिवार अपमान सहते हुए अलग स्थान पर उसका अंतिम संस्कार करता है।

मुख्य बिंदु

  • जाति-व्यवस्था की क्रूरता: मृत्यु के बाद भी सम्मान नहीं मिलता।
  • दलितों के भीतर जातिगत ऊँच-नीच: कहानी दिखाती है कि शोषित वर्ग के भीतर भी भेदभाव मौजूद है।
  • शहर बनाम गाँव: शिक्षा और रोजगार से आई चेतना का गाँव की रूढ़ियों से टकराव।
  • शैली: यथार्थवादी, मार्मिक, सीधी और अनुभवजन्य भाषा। इसमें आक्रोश भी है और करुणा भी।

तुलनात्मक तालिका

कहानीलेखकमूल विषयसाहित्यिक प्रवृत्ति
अभावविष्णु प्रभाकरमूल पाठ से निर्धारित करेंमानवतावादी यथार्थ
मलबे का मालिकमोहन राकेशविभाजन की त्रासदी, अपराध-बोधनई कहानी
पगला बाबाउदय प्रकाशमूल पाठ से निर्धारित करेंसमकालीन कहानी
शवयात्राओमप्रकाश वाल्मीकिजातिगत भेदभावदलित साहित्य
परीक्षा टिप: हर कहानी के उत्तर में लेखक परिचय, कथासार, उद्देश्य, पात्र-चित्रण, शीर्षक की सार्थकता और भाषा-शैली अवश्य लिखें। 'मलबे का मालिक' और 'शवयात्रा' से दीर्घ प्रश्न आने की संभावना अधिक है।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'मलबे का मालिक' कहानी में चित्रित विभाजन की त्रासदी का वर्णन करते हुए शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'शवयात्रा' कहानी के आधार पर दलित जीवन की समस्याओं और जातिगत भेदभाव पर प्रकाश डालिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) रक्खा पहलवान का चरित्र-चित्रण कीजिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) ओमप्रकाश वाल्मीकि का साहित्यिक परिचय दीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) विष्णु प्रभाकर की कहानी 'अभाव' की कथावस्तु एवं उद्देश्य पर टिप्पणी लिखिए।

RTMNU BA Sem 5 · BAHLT ME-01-105 · इकाई IV

इकाई IV: खडसे, प्रसाद, भंडारी व कालिया की कहानियाँ

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • बोनस – दामोदर खडसे
  • आकाशदीप – जयशंकर प्रसाद
  • अकेली – मन्नू भंडारी
  • लकी – ममता कालिया

बोनस – दामोदर खडसे

लेखक परिचय

दामोदर खडसे महाराष्ट्र से जुड़े समकालीन हिंदी लेखक हैं। वे कहानी, कविता और उपन्यास लिखते हैं। मराठी से हिंदी अनुवादक के रूप में भी उनकी विशेष पहचान है। उनकी रचनाओं में मध्यवर्गीय और नौकरीपेशा व्यक्ति का जीवन, दफ्तरी व्यवस्था, आर्थिक दबाव और मानवीय संवेदना प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं।

कहानी का अध्ययन कैसे करें

  • शीर्षक का अर्थ: 'बोनस' वेतन के अतिरिक्त मिलने वाला लाभ है। अध्ययन करते समय देखें कि कहानी में यह शब्द केवल धन का सूचक है या किसी गहरे व्यंग्य और प्रतीक का।
  • विषय-बिंदु: नौकरीपेशा वर्ग की आर्थिक विवशता, अपेक्षा और निराशा, कर्मचारी और व्यवस्था का संबंध।
  • उत्तर लिखने का ढाँचा: लेखक परिचय, कथासार, मूल संवेदना, पात्र-चित्रण, भाषा-शैली और शीर्षक की सार्थकता।
सूचना: इस कहानी का कथानक और पात्र यहाँ सत्यापित नहीं किए गए हैं। विद्यार्थी 'साहित्य वसुधा' से मूल कहानी अवश्य पढ़ें और उसके आधार पर स्वयं कथासार तैयार करें।

आकाशदीप – जयशंकर प्रसाद

लेखक परिचय

जयशंकर प्रसाद (1889–1937, वाराणसी) छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। वे कवि, नाटककार, कहानीकार और उपन्यासकार थे। प्रमुख रचनाएँ हैं: 'कामायनी' (महाकाव्य), 'स्कंदगुप्त' और 'चंद्रगुप्त' (नाटक), 'कंकाल' (उपन्यास)। 'आकाशदीप' उनके इसी नाम के कहानी-संग्रह की प्रसिद्ध कहानी है।

कथासार (अपने शब्दों में)

नायिका चंपा एक व्यापारी जहाज के रक्षक की पुत्री है। उसके पिता जलदस्युओं से लड़ते हुए मारे गए थे। चंपा और जलदस्यु बुद्धगुप्त एक नाव पर बंदी हैं। दोनों मिलकर बंधन से मुक्त होते हैं और एक द्वीप पर पहुँचते हैं, जिसे बुद्धगुप्त 'चंपा द्वीप' नाम देता है। चंपा ऊँचे स्थान पर 'आकाशदीप' जलाती है, जैसे उसकी माँ पिता की प्रतीक्षा में जलाया करती थी। बुद्धगुप्त धनवान और शक्तिशाली हो जाता है और चंपा से प्रेम करता है। चंपा भी उससे प्रेम करती है, पर उसके मन में यह संदेह बना रहता है कि उसके पिता का हत्यारा बुद्धगुप्त ही हो सकता है। अंत में बुद्धगुप्त उसे साथ लेकर भारत लौटना चाहता है, पर चंपा मना कर देती है। वह द्वीप पर रहकर नाविकों के लिए आकाशदीप जलाती रहती है और जीवन भर अकेली रहती है।

प्रमुख बिंदु

  • मूल संवेदना: प्रेम और कर्तव्य का अंतर्द्वंद्व, त्याग और विरह।
  • चंपा: स्वाभिमानी, साहसी, भावुक और त्यागमयी नारी।
  • बुद्धगुप्त: साहसी और महत्वाकांक्षी है, पर प्रेम के कारण उसका हृदय परिवर्तित होता है।
  • प्रतीक: आकाशदीप आशा, प्रतीक्षा, पथ-प्रदर्शन और त्याग का प्रतीक है।
  • शैली: तत्सम-प्रधान काव्यात्मक भाषा, प्रकृति-चित्रण, ऐतिहासिक-रोमानी वातावरण और भावुकता।

अकेली – मन्नू भंडारी

लेखिका परिचय

मन्नू भंडारी (1931–2021) 'नई कहानी' आंदोलन की प्रमुख लेखिका हैं। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं: 'आपका बंटी' और 'महाभोज' (उपन्यास), 'यही सच है' (कहानी)। उन्होंने स्त्री-मन, पारिवारिक संबंधों और अकेलेपन का यथार्थ चित्रण किया है।

कथासार

सोमा बुआ एक वृद्ध और अकेली स्त्री हैं। उनके जवान बेटे की मृत्यु हो चुकी है। पति संन्यासी बन गए हैं और वर्ष में केवल कुछ समय के लिए घर आते हैं। अकेलेपन से बचने के लिए बुआ पड़ोस के हर सुख-दुख के अवसर पर बिना बुलाए पहुँच जाती हैं और काम में हाथ बँटाती हैं। इस पर पति उन्हें डाँटते भी हैं। एक दूर के संबंधी के घर विवाह की खबर सुनकर बुआ बड़े उत्साह से अपनी जमा-पूँजी से उपहार की तैयारी करती हैं और निमंत्रण की प्रतीक्षा करती हैं, पर बुलावा नहीं आता। अंत में उनकी निराशा और गहरा अकेलापन पाठक को द्रवित कर देता है।

प्रमुख बिंदु

  • मूल संवेदना: वृद्ध, उपेक्षित स्त्री का अकेलापन और अपनत्व की भूख।
  • सामाजिक पक्ष: स्वार्थी समाज और पति की उदासीनता।
  • शैली: सरल बोलचाल की भाषा, मनोवैज्ञानिक चित्रण और व्यंग्य।
  • शीर्षक: 'अकेली' सोमा बुआ की भावनात्मक स्थिति को सटीक रूप से व्यक्त करता है।

लकी – ममता कालिया

लेखिका परिचय

ममता कालिया (जन्म 1940) प्रसिद्ध समकालीन हिंदी कथाकार हैं। उनके प्रमुख उपन्यास 'बेघर' और 'दौड़' हैं। उनकी रचनाओं में शहरी मध्यवर्ग, कामकाजी स्त्री, बदलते पारिवारिक मूल्य और उपभोक्तावाद का चित्रण मिलता है। उनकी भाषा सहज, चुटीली और व्यंग्यपूर्ण होती है।

अध्ययन संकेत

  • शीर्षक 'लकी' (भाग्यशाली) में छिपे व्यंग्य या विडंबना को पहचानें।
  • देखें कि कहानी में स्त्री-जीवन और आधुनिक मध्यवर्ग की कौन-सी समस्या उठाई गई है।
  • पात्रों के व्यवहार, संवाद और लेखिका की व्यंग्य-शैली पर ध्यान दें।
सूचना: इस कहानी का कथानक और पात्र यहाँ सत्यापित नहीं किए गए हैं। मूल पाठ पढ़कर ही कथासार लिखें।

तुलनात्मक तालिका

कहानीलेखकधारा/कालमुख्य विषय
आकाशदीपजयशंकर प्रसादछायावाद युगप्रेम-कर्तव्य द्वंद्व, त्याग
अकेलीमन्नू भंडारीनई कहानीवृद्धा का अकेलापन
लकीममता कालियासमकालीनमध्यवर्गीय/स्त्री जीवन (मूल पाठ से पुष्टि करें)
बोनसदामोदर खडसेसमकालीननौकरीपेशा जीवन (मूल पाठ से पुष्टि करें)

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'आकाशदीप' कहानी का कथासार लिखते हुए चंपा का चरित्र-चित्रण कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'अकेली' कहानी की मूल संवेदना स्पष्ट करते हुए सोमा बुआ के अकेलेपन का विवेचन कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) 'आकाशदीप' शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) मन्नू भंडारी का साहित्यिक परिचय दीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) ममता कालिया अथवा दामोदर खडसे के कथा-साहित्य पर टिप्पणी लिखिए।