पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- राष्ट्रीय काव्यधारा की अवधारणा एवं स्वरूप
- राष्ट्रीय काव्यधारा की पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय काव्यधारा की अवधारणा एवं स्वरूप
अर्थ और परिभाषा
राष्ट्रीय काव्यधारा वह कविता है जिसमें देश के प्रति प्रेम, स्वतंत्रता की आकांक्षा, देश के गौरव का गान, अन्याय और गुलामी के प्रति विद्रोह तथा देशवासियों में जागृति की भावना व्यक्त होती है। सरल शब्दों में – जो कविता "मैं" से ऊपर उठकर "हम" और "हमारे देश" की बात करे, वह राष्ट्रीय कविता है।
"राष्ट्र" केवल भूमि का टुकड़ा नहीं है। भूमि, उस पर रहने वाले लोग और उनकी संस्कृति – तीनों मिलकर राष्ट्र बनाते हैं। इसलिए राष्ट्रीय कविता में धरती के प्रति ममता, जनता के दुःख-दर्द और संस्कृति के प्रति गर्व – तीनों दिखाई देते हैं।
हिन्दी में राष्ट्रीय भावना भारतेन्दु युग से स्पष्ट रूप में दिखती है, द्विवेदी युग में यह प्रमुख स्वर बनी और स्वतंत्रता आंदोलन के समय (लगभग 1920–1947) यह एक अलग धारा के रूप में सामने आई। माखनलाल चतुर्वेदी, बालकृष्ण शर्मा "नवीन", सुभद्राकुमारी चौहान, सोहनलाल द्विवेदी, रामधारी सिंह "दिनकर", सियारामशरण गुप्त आदि इस धारा के प्रमुख कवि हैं। मैथिलीशरण गुप्त को "राष्ट्रकवि" कहा जाता है।
राष्ट्रीय काव्यधारा का स्वरूप (प्रमुख विशेषताएँ)
- देशप्रेम और मातृभूमि वंदना: भारत को माँ के रूप में देखना और उसकी सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानना।
- स्वतंत्रता की आकांक्षा: गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ने का आह्वान।
- बलिदान और त्याग की भावना: देश के लिए प्राण देने को गौरव मानना – जैसे "पुष्प की अभिलाषा" में फूल की इच्छा।
- अतीत का गौरवगान: राम, कृष्ण, बुद्ध, राणा प्रताप, शिवाजी, लक्ष्मीबाई जैसे पात्रों से प्रेरणा।
- वर्तमान की दुर्दशा का चित्रण: गरीबी, अशिक्षा, फूट और आलस्य पर दुःख।
- विद्रोह और क्रांति का स्वर: "नवीन" का विप्लव गान इसका उदाहरण है।
- गांधीवादी प्रभाव: सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, खादी, ग्राम-सुधार का संदेश (सोहनलाल द्विवेदी)।
- सामाजिक एकता: जाति, धर्म, प्रांत के भेद मिटाकर एक होने का आह्वान।
- वीर रस और ओज गुण: भाषा में जोश, सरलता और गेयता; कई कविताएँ प्रयाण गीत बनकर गाई गईं।
- मानवतावाद: राष्ट्रप्रेम के साथ विश्व-बंधुत्व की भावना भी।
राष्ट्रीय काव्यधारा की पृष्ठभूमि
राष्ट्रीय काव्यधारा अचानक पैदा नहीं हुई। इसके पीछे राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक कारण थे।
1. राजनीतिक पृष्ठभूमि
- अंग्रेज़ी शासन की दमन और शोषण नीति से जनता में असंतोष।
- 1857 का स्वाधीनता संग्राम – पहली बड़ी चुनौती, जिसकी स्मृति कविताओं में बार-बार आती है।
- 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना; 1905 का बंग-भंग और स्वदेशी आंदोलन।
- 1919 का जलियाँवाला बाग हत्याकांड, 1920 का असहयोग आंदोलन, 1930 का सविनय अवज्ञा (नमक सत्याग्रह) और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन।
- क्रांतिकारी आंदोलन – भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, रामप्रसाद बिस्मिल आदि का बलिदान।
2. सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
- ब्रह्म समाज, आर्य समाज आदि सुधार आंदोलनों ने आत्मगौरव जगाया।
- स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य तिलक ("स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है"), महात्मा गांधी जैसे नेताओं के विचारों का प्रभाव।
- भारतीय संस्कृति और इतिहास के गौरव की खोज।
3. आर्थिक पृष्ठभूमि
देश का धन इंग्लैंड जाने, कुटीर उद्योग नष्ट होने और किसानों पर भारी लगान से गरीबी बढ़ी। भारतेन्दु ने इस पीड़ा को "धन विदेश चलि जात" जैसे भाव से व्यक्त किया।
4. साहित्यिक पृष्ठभूमि
- भारतेन्दु युग: "भारत दुर्दशा" में देश की हालत पर करुणा; राष्ट्रीय चेतना का आरंभ।
- द्विवेदी युग: मैथिलीशरण गुप्त की "भारत-भारती" (1912) ने युवाओं में देशभक्ति जगाई।
- पत्र-पत्रिकाएँ: "प्रताप" (गणेशशंकर विद्यार्थी), "कर्मवीर" (माखनलाल चतुर्वेदी) जैसे पत्रों ने राष्ट्रीय कविता को मंच दिया।
- छायावाद के कवियों – प्रसाद, निराला – की कविताओं में भी राष्ट्रीय स्वर मिलता है।
| घटना | वर्ष |
|---|---|
| प्रथम स्वाधीनता संग्राम | 1857 |
| कांग्रेस की स्थापना | 1885 |
| बंग-भंग | 1905 |
| जलियाँवाला बाग | 1919 |
| भारत छोड़ो आंदोलन | 1942 |
| स्वतंत्रता | 1947 |
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) राष्ट्रीय काव्यधारा की अवधारणा स्पष्ट करते हुए उसकी प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी की राष्ट्रीय काव्यधारा की राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक पृष्ठभूमि का विवेचन कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) राष्ट्रीय कविता में बलिदान की भावना – टिप्पणी लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) राष्ट्रीय काव्यधारा पर गांधीवाद का प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) 'भारत-भारती' का राष्ट्रीय चेतना में योगदान बताइए।