MH State Board All Notes Free5th to 12th & BA, BSc, B.Com 🔍

राष्ट्रीय काव्यधारा BAHLT Major T-8-104

RTMNU BA Semester 4 · Hindi Literature (हिन्दी साहित्य) · 2 units · हर इकाई के नोट्स

UniversityRTMNU – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
CourseB.A. (Four Year UG Programme, NEP 2020) – Hindi Literature (हिन्दी साहित्य)
SemesterSemester IV
Paper codeBAHLT Major T-8-104
Paper titleराष्ट्रीय काव्यधारा
CategoryMajor T-8 · Major (DSC) – मुख्य विषय
Credits2 credits (theory, 2 घंटे प्रति सप्ताह)
Marksसैद्धांतिक परीक्षा: 40 अंक + आंतरिक मूल्यांकन (CIE) 10 अंक = 50; उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 20
Syllabusas per official RTMNU NEP 2020 syllabus 2024-25 (B.A. Hindi Literature Sem I to IV, लागू सत्र 2024-25 से)

इकाइयों के विषय आधिकारिक RTMNU पाठ्यक्रम के अनुसार हैं। Official RTMNU syllabus page · All RTMNU BA Hindi papers

Units

  1. 1इकाई I: राष्ट्रीय काव्यधारा: अवधारणा, स्वरूप एवं पृष्ठभूमिNotes
  2. 2इकाई II: राष्ट्रीय चेतना का काव्यNotes

RTMNU BA Sem 4 · BAHLT Major T-8-104 · इकाई I

इकाई I: राष्ट्रीय काव्यधारा: अवधारणा, स्वरूप एवं पृष्ठभूमि

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • राष्ट्रीय काव्यधारा की अवधारणा एवं स्वरूप
  • राष्ट्रीय काव्यधारा की पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय काव्यधारा की अवधारणा एवं स्वरूप

अर्थ और परिभाषा

राष्ट्रीय काव्यधारा वह कविता है जिसमें देश के प्रति प्रेम, स्वतंत्रता की आकांक्षा, देश के गौरव का गान, अन्याय और गुलामी के प्रति विद्रोह तथा देशवासियों में जागृति की भावना व्यक्त होती है। सरल शब्दों में – जो कविता "मैं" से ऊपर उठकर "हम" और "हमारे देश" की बात करे, वह राष्ट्रीय कविता है।

"राष्ट्र" केवल भूमि का टुकड़ा नहीं है। भूमि, उस पर रहने वाले लोग और उनकी संस्कृति – तीनों मिलकर राष्ट्र बनाते हैं। इसलिए राष्ट्रीय कविता में धरती के प्रति ममता, जनता के दुःख-दर्द और संस्कृति के प्रति गर्व – तीनों दिखाई देते हैं।

हिन्दी में राष्ट्रीय भावना भारतेन्दु युग से स्पष्ट रूप में दिखती है, द्विवेदी युग में यह प्रमुख स्वर बनी और स्वतंत्रता आंदोलन के समय (लगभग 1920–1947) यह एक अलग धारा के रूप में सामने आई। माखनलाल चतुर्वेदी, बालकृष्ण शर्मा "नवीन", सुभद्राकुमारी चौहान, सोहनलाल द्विवेदी, रामधारी सिंह "दिनकर", सियारामशरण गुप्त आदि इस धारा के प्रमुख कवि हैं। मैथिलीशरण गुप्त को "राष्ट्रकवि" कहा जाता है।

राष्ट्रीय काव्यधारा का स्वरूप (प्रमुख विशेषताएँ)

  1. देशप्रेम और मातृभूमि वंदना: भारत को माँ के रूप में देखना और उसकी सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानना।
  2. स्वतंत्रता की आकांक्षा: गुलामी की बेड़ियाँ तोड़ने का आह्वान।
  3. बलिदान और त्याग की भावना: देश के लिए प्राण देने को गौरव मानना – जैसे "पुष्प की अभिलाषा" में फूल की इच्छा।
  4. अतीत का गौरवगान: राम, कृष्ण, बुद्ध, राणा प्रताप, शिवाजी, लक्ष्मीबाई जैसे पात्रों से प्रेरणा।
  5. वर्तमान की दुर्दशा का चित्रण: गरीबी, अशिक्षा, फूट और आलस्य पर दुःख।
  6. विद्रोह और क्रांति का स्वर: "नवीन" का विप्लव गान इसका उदाहरण है।
  7. गांधीवादी प्रभाव: सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, खादी, ग्राम-सुधार का संदेश (सोहनलाल द्विवेदी)।
  8. सामाजिक एकता: जाति, धर्म, प्रांत के भेद मिटाकर एक होने का आह्वान।
  9. वीर रस और ओज गुण: भाषा में जोश, सरलता और गेयता; कई कविताएँ प्रयाण गीत बनकर गाई गईं।
  10. मानवतावाद: राष्ट्रप्रेम के साथ विश्व-बंधुत्व की भावना भी।
परीक्षा टिप: "स्वरूप" वाले प्रश्न में हर विशेषता के साथ एक कवि या कविता का उदाहरण दें – जैसे बलिदान = पुष्प की अभिलाषा, क्रांति = विप्लव गान, वीरता = झाँसी की रानी की समाधि पर।

राष्ट्रीय काव्यधारा की पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय काव्यधारा अचानक पैदा नहीं हुई। इसके पीछे राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक कारण थे।

1. राजनीतिक पृष्ठभूमि

  • अंग्रेज़ी शासन की दमन और शोषण नीति से जनता में असंतोष।
  • 1857 का स्वाधीनता संग्राम – पहली बड़ी चुनौती, जिसकी स्मृति कविताओं में बार-बार आती है।
  • 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना; 1905 का बंग-भंग और स्वदेशी आंदोलन।
  • 1919 का जलियाँवाला बाग हत्याकांड, 1920 का असहयोग आंदोलन, 1930 का सविनय अवज्ञा (नमक सत्याग्रह) और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन।
  • क्रांतिकारी आंदोलन – भगत सिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, रामप्रसाद बिस्मिल आदि का बलिदान।

2. सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

  • ब्रह्म समाज, आर्य समाज आदि सुधार आंदोलनों ने आत्मगौरव जगाया।
  • स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य तिलक ("स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है"), महात्मा गांधी जैसे नेताओं के विचारों का प्रभाव।
  • भारतीय संस्कृति और इतिहास के गौरव की खोज।

3. आर्थिक पृष्ठभूमि

देश का धन इंग्लैंड जाने, कुटीर उद्योग नष्ट होने और किसानों पर भारी लगान से गरीबी बढ़ी। भारतेन्दु ने इस पीड़ा को "धन विदेश चलि जात" जैसे भाव से व्यक्त किया।

4. साहित्यिक पृष्ठभूमि

  • भारतेन्दु युग: "भारत दुर्दशा" में देश की हालत पर करुणा; राष्ट्रीय चेतना का आरंभ।
  • द्विवेदी युग: मैथिलीशरण गुप्त की "भारत-भारती" (1912) ने युवाओं में देशभक्ति जगाई।
  • पत्र-पत्रिकाएँ: "प्रताप" (गणेशशंकर विद्यार्थी), "कर्मवीर" (माखनलाल चतुर्वेदी) जैसे पत्रों ने राष्ट्रीय कविता को मंच दिया।
  • छायावाद के कवियों – प्रसाद, निराला – की कविताओं में भी राष्ट्रीय स्वर मिलता है।
घटनावर्ष
प्रथम स्वाधीनता संग्राम1857
कांग्रेस की स्थापना1885
बंग-भंग1905
जलियाँवाला बाग1919
भारत छोड़ो आंदोलन1942
स्वतंत्रता1947
याद रखें: राष्ट्रीय काव्यधारा स्वतंत्रता आंदोलन की "आवाज़" थी – कवि स्वयं जेल गए, सत्याग्रह किया और कविता से जनता को जगाया।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) राष्ट्रीय काव्यधारा की अवधारणा स्पष्ट करते हुए उसकी प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी की राष्ट्रीय काव्यधारा की राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक पृष्ठभूमि का विवेचन कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) राष्ट्रीय कविता में बलिदान की भावना – टिप्पणी लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) राष्ट्रीय काव्यधारा पर गांधीवाद का प्रभाव स्पष्ट कीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) 'भारत-भारती' का राष्ट्रीय चेतना में योगदान बताइए।

RTMNU BA Sem 4 · BAHLT Major T-8-104 · इकाई II

इकाई II: राष्ट्रीय चेतना का काव्य

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • माखनलाल चतुर्वेदी- पुष्प की अभिलाषा
  • मैथिलीशरण गुप्त- स्वतन्त्रता पुकारती
  • बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'- विप्लव गान
  • सुभद्राकुमारी चौहान – झाँसी की रानी की समाधि पर
  • सोहनलाल द्विवेदी- मातृभूमि
  • रामप्रसाद बिस्मिल- न चाहूँ मान दुनिया में

माखनलाल चतुर्वेदी – पुष्प की अभिलाषा

कवि परिचय: माखनलाल चतुर्वेदी (1889–1968) का जन्म मध्य प्रदेश के बाबई में हुआ। वे स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार और कवि थे और कई बार जेल गए। वे "एक भारतीय आत्मा" नाम से लिखते थे। "कर्मवीर" और "प्रभा" का संपादन किया। प्रमुख रचनाएँ – हिमकिरीटिनी, हिमतरंगिनी, माता, युग चरण। "हिमतरंगिनी" पर उन्हें 1955 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

केंद्रीय भाव: इस कविता में एक फूल अपनी इच्छा बताता है। वह न देवबाला के गहनों में गूँथा जाना चाहता है, न प्रेमी की माला में, न सम्राटों के शव पर और न देवताओं के सिर पर चढ़कर इतराना चाहता है। उसकी एक ही इच्छा है – माली उसे तोड़कर उस रास्ते पर फेंक दे, जिस पर मातृभूमि के लिए शीश चढ़ाने वाले वीर जाते हैं। वीरों के पैरों तले कुचला जाना ही उसके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

  • फूल के माध्यम से देशभक्त भारतीय की इच्छा व्यक्त हुई है – व्यक्तिगत सुख, वैभव और पूजा से ऊपर देश सेवा।
  • त्याग और बलिदान की भावना; विनम्रता।
  • शिल्प: मानवीकरण, प्रतीकात्मकता, सरल खड़ी बोली, छोटी-छोटी पंक्तियाँ, गेयता।
याद रखें: यह कविता कवि ने जेल-जीवन के दौरान लिखी मानी जाती है। "मुझे तोड़ लेना वनमाली" – इसकी प्रसिद्ध पंक्ति का आरंभ है।

मैथिलीशरण गुप्त – स्वतन्त्रता पुकारती

कवि परिचय: मैथिलीशरण गुप्त (1886–1964) का जन्म चिरगाँव (झाँसी) में हुआ। महावीर प्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से उन्होंने खड़ी बोली में कविता लिखी। "भारत-भारती" (1912) से वे पूरे देश में प्रसिद्ध हुए और गांधीजी ने उन्हें "राष्ट्रकवि" कहा। प्रमुख रचनाएँ – साकेत, यशोधरा, जयद्रथ वध, पंचवटी, द्वापर।

केंद्रीय भाव: इस कविता का मूल स्वर है – स्वतंत्रता स्वयं देशवासियों को पुकार रही है। कवि भारत के युवाओं को आलस्य और भय छोड़कर आगे बढ़ने, कष्ट सहने और देश के लिए बलिदान देने का आह्वान करता है। स्वतंत्रता किसी की दया से नहीं, अपने साहस और त्याग से मिलती है – यह संदेश कविता में है।

  • प्रयाण-गीत जैसी ओजपूर्ण लय; वीर रस।
  • भारत के गौरवशाली अतीत की याद दिलाकर वर्तमान को जगाना।
  • तत्सम-प्रधान, शुद्ध खड़ी बोली।
ध्यान दें: "स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती" वाला प्रसिद्ध प्रयाण गीत जयशंकर प्रसाद के नाटक "चंद्रगुप्त" में भी मिलता है। पाठ्यक्रम में यह कविता गुप्त जी के नाम दी गई है, इसलिए अपनी पाठ्यपुस्तक में छपा पाठ अवश्य देख लें।

बालकृष्ण शर्मा "नवीन" – विप्लव गान

कवि परिचय: बालकृष्ण शर्मा "नवीन" (1897–1960) का जन्म मध्य प्रदेश के शाजापुर क्षेत्र में हुआ। वे गणेशशंकर विद्यार्थी के साथ "प्रताप" पत्र से जुड़े और स्वतंत्रता आंदोलन में कई बार जेल गए। प्रमुख रचनाएँ – कुमकुम, रश्मिरेखा, अपलक, क्वासि, उर्मिला।

केंद्रीय भाव: "विप्लव" का अर्थ है – क्रांति, उथल-पुथल। कवि दूसरे कवियों से कहता है कि ऐसी तान सुनाओ जिससे पूरी व्यवस्था में उथल-पुथल मच जाए। पुरानी, सड़ी-गली, अन्यायपूर्ण व्यवस्था जलकर नष्ट हो जाए और उसकी जगह नया, न्यायपूर्ण समाज बने। कविता में आग, प्रलय, विनाश और ताण्डव जैसे चित्र हैं।

  • क्रांति और विद्रोह का प्रचंड स्वर; विनाश के बाद नवनिर्माण की आशा।
  • ओज गुण, वीर और रौद्र रस।
  • प्रभावशाली बिंब, तीव्र गति वाली लय।

सुभद्राकुमारी चौहान – झाँसी की रानी की समाधि पर

कवयित्री परिचय: सुभद्राकुमारी चौहान (1904–1948) का जन्म प्रयाग (इलाहाबाद) के पास निहालपुर में हुआ। विवाह के बाद वे जबलपुर में रहीं और असहयोग आंदोलन में भाग लेकर जेल गईं। प्रसिद्ध कविता "झाँसी की रानी" के लिए वे घर-घर जानी जाती हैं। काव्य-संग्रह – मुकुल, त्रिधारा; कहानी-संग्रह – बिखरे मोती, उन्मादिनी।

केंद्रीय भाव: कवयित्री रानी लक्ष्मीबाई की समाधि के सामने खड़ी होकर भाव व्यक्त करती है। इस समाधि में वीरांगना की राख छिपी है, जो देश के लिए लड़ते हुए बलिदान हो गई। कवयित्री कहती है कि यह छोटी-सी समाधि बड़े-बड़े महलों और स्मारकों से अधिक पवित्र और मूल्यवान है, क्योंकि वीर का मान युद्ध में बलिदान से बढ़ता है। आने वाली पीढ़ियाँ इस समाधि से प्रेरणा लेंगी।

  • वीरता, बलिदान और श्रद्धा का भाव; नारी शक्ति का गौरव।
  • 1857 की स्मृति के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरणा।
  • सरल, प्रवाहपूर्ण भाषा; करुणा और ओज का मेल।

सोहनलाल द्विवेदी – मातृभूमि

कवि परिचय: सोहनलाल द्विवेदी (1906–1988) का जन्म उत्तर प्रदेश के फतेहपुर ज़िले के बिंदकी में हुआ। वे गांधीवादी विचारधारा के प्रमुख राष्ट्रीय कवि हैं। उनकी कविताओं में खादी, ग्राम, अहिंसा और देशभक्ति का स्वर है। उन्होंने बच्चों के लिए भी बहुत लिखा। प्रमुख रचनाएँ – भैरवी, पूजागीत, वासवदत्ता, युगाधार।

केंद्रीय भाव: इस कविता में मातृभूमि भारत की वंदना है। कवि भारत की प्राकृतिक सुंदरता – हिमालय, नदियाँ, हरे-भरे खेत – और उसके गौरवशाली इतिहास तथा संस्कृति का गान करता है। मातृभूमि को माँ के समान पूजनीय बताकर कवि उसकी सेवा और रक्षा के लिए तन-मन-धन अर्पित करने की प्रेरणा देता है।

  • मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता।
  • सरल, गेय, बोधगम्य भाषा – विद्यार्थी भी आसानी से समझ सकें।

रामप्रसाद बिस्मिल – न चाहूँ मान दुनिया में

कवि परिचय: रामप्रसाद "बिस्मिल" (1897–1927) का जन्म शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। वे हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन से जुड़े प्रमुख क्रांतिकारी थे। 1925 के काकोरी कांड के कारण उन्हें फाँसी की सज़ा हुई और 19 दिसंबर 1927 को गोरखपुर जेल में फाँसी दी गई। वे कवि और शायर भी थे; "बिस्मिल" उनका उपनाम था। जेल में उन्होंने आत्मकथा भी लिखी।

केंद्रीय भाव: इस गीत में क्रांतिकारी कवि ईश्वर या भारत माता से प्रार्थना करता है कि उसे दुनिया में मान-सम्मान या स्वर्ग नहीं चाहिए। उसकी एक ही कामना है कि वह सदा भारत का दीवाना बना रहे, देश की सेवा में जीए और ज़रूरत पड़े तो देश के लिए प्राण दे दे।

  • निःस्वार्थ देशभक्ति, त्याग और बलिदान की चरम भावना।
  • भाषा हिन्दुस्तानी (हिन्दी-उर्दू मिश्रित), गीत/ग़ज़ल जैसी लय।
  • कवि का जीवन और कविता एक-से हैं – जो लिखा, वही जिया।
परीक्षा टिप: कविता की व्याख्या में – संदर्भ (कवि, कविता), प्रसंग, व्याख्या, विशेष (भाषा, रस, अलंकार) – यह क्रम रखें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'पुष्प की अभिलाषा' कविता का केंद्रीय भाव स्पष्ट करते हुए उसमें व्यक्त राष्ट्रप्रेम की विवेचना कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) पाठ्यक्रम की कविताओं के आधार पर राष्ट्रीय चेतना के विविध स्वरों (बलिदान, क्रांति, मातृभूमि वंदना) पर प्रकाश डालिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) 'विप्लव गान' का मूल भाव लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) 'झाँसी की रानी की समाधि पर' कविता में व्यक्त श्रद्धा भाव स्पष्ट कीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) रामप्रसाद बिस्मिल का संक्षिप्त परिचय दीजिए।