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कार्यालयीन हिन्दी BAHIN Major T-8-104

RTMNU BA Semester 4 · Hindi Language (हिन्दी भाषा) · 2 units · हर इकाई के नोट्स

UniversityRTMNU – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
CourseB.A. (Four Year UG Programme, NEP 2020) – Hindi Language (हिन्दी भाषा)
SemesterSemester IV
Paper codeBAHIN Major T-8-104
Paper titleकार्यालयीन हिन्दी
CategoryMajor T-8 · Major (DSC) – मुख्य विषय
Credits2 credits (theory, 2 घंटे प्रति सप्ताह)
Marksसैद्धांतिक परीक्षा: 40 अंक + आंतरिक मूल्यांकन (CIE) 10 अंक = 50; उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 20
Syllabusas per official RTMNU NEP 2020 syllabus 2024-25 (B.A. Hindi Language Sem I to IV, लागू सत्र 2024-25 से)

इकाइयों के विषय आधिकारिक RTMNU पाठ्यक्रम के अनुसार हैं। Official RTMNU syllabus page · All RTMNU BA Hindi papers

Units

  1. 1इकाई I: कार्यालयीन हिन्दी के प्रमुख प्रकार्यNotes
  2. 2इकाई II: अनुवादNotes

RTMNU BA Sem 4 · BAHIN Major T-8-104 · इकाई I

इकाई I: कार्यालयीन हिन्दी के प्रमुख प्रकार्य

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • टिप्पण, प्रारूपण, संक्षेपण, पत्र लेखन

कार्यालयीन हिन्दी के प्रमुख प्रकार्य – परिचय

सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी कार्यालयों में कामकाज के लिए प्रयुक्त हिन्दी को कार्यालयीन हिन्दी या प्रशासनिक हिन्दी कहते हैं। संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी संघ की राजभाषा है। संविधान सभा ने यह निर्णय 14 सितंबर 1949 को लिया, इसलिए 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है। कार्यालयीन हिन्दी की भाषा औपचारिक, स्पष्ट, संक्षिप्त और निर्वैयक्तिक होती है। इसके चार प्रमुख प्रकार्य हैं – टिप्पण, प्रारूपण, संक्षेपण और पत्र लेखन।

टिप्पण

कार्यालय में किसी पत्र या मामले (फ़ाइल) पर निर्णय लेने में सहायता के लिए जो विचार, सुझाव या टिप्पणी लिखी जाती है, उसे टिप्पण (Noting) कहते हैं। सहायक या लिपिक मामले के तथ्य, नियम और पिछले उदाहरण लिखकर अधिकारी के सामने रखता है और अधिकारी आदेश देता है।

टिप्पण की विशेषताएँ

  • संक्षिप्त, स्पष्ट और तथ्यपूर्ण हो।
  • अन्य पुरुष (तृतीय पुरुष) और कर्मवाच्य में लिखा जाए, जैसे – "स्वीकृति दी जा सकती है।"
  • संबंधित नियम, आदेश और पूर्व उदाहरणों का उल्लेख।
  • अंत में बाईं ओर हस्ताक्षर, नाम, पदनाम और दिनांक।
  • व्यक्तिगत भावना, कठोर या अशिष्ट भाषा नहीं।

टिप्पण के प्रकार

सामान्य टिप्पण, सूक्ष्म टिप्पण (छोटी टिप्पणियाँ जैसे 'देख लिया', 'अनुमोदित'), नेमी (रोज़मर्रा का) टिप्पण, अनौपचारिक टिप्पण और विस्तृत टिप्पण।

टिप्पण का एक छोटा उदाहरण

विषय: श्री रमेश कुमार, लिपिक, का पाँच दिन के अर्जित अवकाश का आवेदन।
श्री रमेश कुमार ने पारिवारिक कारण से दिनांक ... से पाँच दिन के अर्जित अवकाश के लिए आवेदन किया है। उनके खाते में पर्याप्त अवकाश शेष है। इस अवधि में उनका कार्य दूसरे लिपिक को सौंपा जा सकता है। अतः अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।
अनुमोदनार्थ प्रस्तुत।

याद रखें: कुछ प्रचलित छोटी टिप्पणियाँ – "अनुमोदनार्थ प्रस्तुत", "कृपया चर्चा करें", "आवश्यक कार्रवाई हेतु", "देख लिया, धन्यवाद", "स्वीकृत"।

प्रारूपण

किसी पत्र, आदेश, परिपत्र या अधिसूचना का पहला कच्चा रूप तैयार करना प्रारूपण (Drafting) कहलाता है। अधिकारी के आदेश या टिप्पण के आधार पर सहायक मसौदा बनाता है। अधिकारी उसमें सुधार करके अनुमोदित करता है, फिर साफ़ प्रति (फ़ेयर कॉपी) भेजी जाती है।

अच्छे प्रारूप के गुण

  • शुद्धता – तथ्य, अंक, तिथि और नाम सही हों।
  • स्पष्टता और संक्षिप्तता – एक बात एक बार।
  • पूर्णता – संदर्भ संख्या, विषय, संबोधन, मुख्य भाग, समापन, हस्ताक्षर।
  • शिष्टता और औपचारिक भाषा।
  • सही प्रारूप (फ़ॉर्मेट) का पालन।

संक्षेपण

किसी लंबे लेख, पत्र, रिपोर्ट या पत्राचार के मुख्य भाव को कम शब्दों में, मूल अर्थ बदले बिना प्रस्तुत करना संक्षेपण (Précis) कहलाता है। सामान्यतः संक्षेपण मूल का लगभग एक-तिहाई होता है। व्यस्त अधिकारी पूरा पत्राचार न पढ़कर संक्षेपण से विषय समझ लेते हैं।

संक्षेपण की प्रक्रिया

  1. मूल अंश को ध्यान से दो-तीन बार पढ़ना।
  2. मुख्य विचार और आवश्यक तथ्य रेखांकित करना।
  3. उदाहरण, दोहराव, अलंकार और अनावश्यक विशेषण हटाना।
  4. अपने शब्दों में, अन्य पुरुष में, क्रमबद्ध लिखना।
  5. उपयुक्त शीर्षक देना और शब्द-संख्या जाँचना।

पत्र लेखन

कार्यालयों में सूचना, आदेश और अनुरोध भेजने का मुख्य साधन पत्र है। इसे कार्यालयीन या सरकारी पत्राचार कहते हैं।

सरकारी पत्र के प्रमुख प्रकार

प्रकारउपयोग
सरकारी पत्रएक कार्यालय से दूसरे कार्यालय, राज्य सरकार या संस्था को औपचारिक पत्र
अर्ध-सरकारी पत्रअधिकारी द्वारा दूसरे अधिकारी को व्यक्तिगत ध्यान दिलाने हेतु, संबोधन "प्रिय श्री ..."
कार्यालय ज्ञापनमंत्रालयों/विभागों के बीच सूचना, अन्य पुरुष में
परिपत्रएक ही सूचना अनेक कार्यालयों/कर्मचारियों को
अधिसूचनानियम, नियुक्ति आदि की सूचना, राजपत्र में प्रकाशित
कार्यालय आदेशकार्यालय के आंतरिक प्रशासन संबंधी आदेश
अनुस्मारकपहले भेजे गए पत्र की याद दिलाने हेतु

सरकारी पत्र के अंग

  1. पत्र संख्या और कार्यालय का नाम-पता
  2. दिनांक
  3. प्रेषक और प्रेषिती
  4. विषय और संदर्भ
  5. संबोधन – "महोदय"
  6. मुख्य भाग – "मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि ..."
  7. स्वनिर्देश – "भवदीय", फिर हस्ताक्षर और पदनाम
  8. पृष्ठांकन और संलग्नक (यदि हों)
परीक्षा टिप: टिप्पण और प्रारूपण का अंतर अक्सर पूछा जाता है – टिप्पण फ़ाइल पर निर्णय के लिए आंतरिक विचार है, जबकि प्रारूपण बाहर भेजे जाने वाले पत्र का मसौदा है।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) कार्यालयीन हिन्दी से आप क्या समझते हैं? टिप्पण और प्रारूपण का स्वरूप तथा विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) सरकारी पत्राचार के विविध प्रकारों का परिचय देते हुए सरकारी पत्र के अंगों पर प्रकाश डालिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) संक्षेपण की प्रक्रिया लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) अर्ध-सरकारी पत्र पर टिप्पणी लिखिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पण और प्रारूपण में अंतर स्पष्ट कीजिए।

RTMNU BA Sem 4 · BAHIN Major T-8-104 · इकाई II

इकाई II: अनुवाद

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • अनुवाद : अर्थ, परिभाषा, प्रकार तथा प्रक्रिया एवं प्रविधि

अनुवाद : अर्थ और परिभाषा

'अनुवाद' शब्द संस्कृत की 'वद्' धातु में 'अनु' उपसर्ग लगने से बना है। 'अनु' का अर्थ है – पीछे या बाद में, और 'वाद' का अर्थ है – कहना। इस प्रकार अनुवाद का मूल अर्थ है – किसी के कहे हुए को बाद में फिर से कहना। आज इसका अर्थ है – एक भाषा में कही गई बात को दूसरी भाषा में उसी अर्थ और भाव के साथ प्रस्तुत करना। अंग्रेज़ी में इसे 'ट्रांसलेशन' (Translation) कहते हैं, जिसका अर्थ है – एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना।

जिस भाषा से अनुवाद किया जाता है, उसे स्रोत भाषा (Source Language) और जिस भाषा में अनुवाद किया जाता है, उसे लक्ष्य भाषा (Target Language) कहते हैं।

प्रमुख परिभाषाएँ (भावार्थ)

  • जे. सी. कैटफ़र्ड – एक भाषा की पाठ-सामग्री को दूसरी भाषा की समतुल्य पाठ-सामग्री से बदलना अनुवाद है।
  • यूजीन नाइडा – स्रोत भाषा के संदेश को लक्ष्य भाषा में निकटतम, स्वाभाविक और समतुल्य रूप में प्रस्तुत करना अनुवाद है; पहले अर्थ की दृष्टि से, फिर शैली की दृष्टि से।
  • सामान्य परिभाषा – एक भाषा के विचार, भाव और शैली को दूसरी भाषा में यथासंभव मूल के समान रूप में व्यक्त करना अनुवाद है।

अनुवाद का महत्त्व

  • भारत जैसे बहुभाषी देश में राष्ट्रीय एकता का सेतु।
  • सरकारी कामकाज में हिन्दी-अंग्रेज़ी द्विभाषिकता के लिए अनिवार्य।
  • ज्ञान-विज्ञान, साहित्य और संस्कृति का आदान-प्रदान।
  • व्यापार, पर्यटन, मीडिया और विज्ञापन में रोज़गार।

अनुवाद के प्रकार

(क) प्रकृति / पद्धति के आधार पर

प्रकारस्वरूप
शब्दानुवादशब्द के स्थान पर शब्द; मूल के बहुत निकट, पर कभी-कभी अस्वाभाविक
भावानुवादमूल का भाव मुख्य; साहित्य के लिए उपयुक्त
छायानुवादमूल की छाया लेकर स्वतंत्र रचना-सा अनुवाद
सारानुवादमूल का सार संक्षेप में; समाचार और रिपोर्ट में
व्याख्यानुवादमूल के साथ व्याख्या भी; धार्मिक-दार्शनिक ग्रंथों में
आशु अनुवादबोली गई बात का तुरंत मौखिक अनुवाद; सम्मेलन, संसद में (दुभाषिया)
रूपांतरणएक विधा से दूसरी विधा में, जैसे कहानी का नाटक

(ख) विषय के आधार पर

साहित्यिक अनुवाद, कार्यालयीन (प्रशासनिक) अनुवाद, वैज्ञानिक-तकनीकी अनुवाद, विधिक (कानूनी) अनुवाद, वाणिज्यिक अनुवाद, जनसंचार माध्यमों का अनुवाद।

(ग) रोमन याकोब्सन का वर्गीकरण

  • अन्तःभाषिक – एक ही भाषा के भीतर (कठिन हिन्दी को सरल हिन्दी में)।
  • अंतरभाषिक – एक भाषा से दूसरी भाषा में (वास्तविक अनुवाद)।
  • अंतरप्रतीकात्मक – शब्दों से चित्र, संकेत या नृत्य जैसे दूसरे प्रतीकों में।

साधन के आधार पर मानव अनुवाद और मशीन (कंप्यूटर) अनुवाद भी दो प्रकार हैं।

अनुवाद प्रक्रिया

अनुवाद एक मानसिक प्रक्रिया है। यूजीन नाइडा ने इसके तीन मुख्य चरण बताए हैं:

  1. विश्लेषण – स्रोत पाठ को पढ़कर उसके शब्द, वाक्य-रचना, अर्थ और संदर्भ समझना।
  2. अंतरण – समझे हुए अर्थ को अनुवादक के मन में स्रोत भाषा से लक्ष्य भाषा की ओर ले जाना।
  3. पुनर्गठन – लक्ष्य भाषा की प्रकृति के अनुसार स्वाभाविक वाक्यों में अर्थ को फिर से रचना।

व्यावहारिक रूप से अनुवाद के बाद पुनरीक्षण (संशोधन) और मूल से मिलान भी आवश्यक चरण हैं।

अनुवाद प्रविधि

प्रविधि का अर्थ है – अनुवाद करने का व्यावहारिक तरीका। अच्छे अनुवाद के लिए ये बातें ध्यान में रखी जाती हैं:

  • पूरे पाठ को पहले समग्र रूप में पढ़ना, फिर इकाइयों में बाँटना।
  • उपयुक्त पर्याय चुनना; पारिभाषिक शब्दों के लिए मानक शब्दावली का प्रयोग।
  • मुहावरों और लोकोक्तियों का शब्दशः नहीं, समतुल्य अनुवाद।
  • लक्ष्य भाषा की वाक्य-रचना का पालन – अंग्रेज़ी के कर्ता-क्रिया-कर्म क्रम को हिन्दी के कर्ता-कर्म-क्रिया क्रम में बदलना।
  • नाम, अंक, तिथि और तथ्य बिना बदले रखना।
  • शब्दकोश, संदर्भ-ग्रंथ और विषय-विशेषज्ञ की सहायता लेना।

उदाहरण

"It is raining cats and dogs." का शब्दानुवाद अर्थहीन होगा; उचित अनुवाद है – "मूसलाधार बारिश हो रही है।"

परीक्षा टिप: अनुवाद प्रक्रिया के उत्तर में नाइडा के तीन चरण (विश्लेषण – अंतरण – पुनर्गठन) एक सरल रेखाचित्र की तरह क्रम से लिखें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) अनुवाद का अर्थ और परिभाषा स्पष्ट करते हुए उसके विविध प्रकारों का वर्णन कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) अनुवाद की प्रक्रिया और प्रविधि पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) स्रोत भाषा और लक्ष्य भाषा पर टिप्पणी लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) शब्दानुवाद और भावानुवाद में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) आशु अनुवाद पर टिप्पणी लिखिए।