पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- हिन्दी पत्रकारिता : उद्भव और विकास
हिन्दी पत्रकारिता : उद्भव और विकास
पत्रकारिता का अर्थ
'पत्रकारिता' शब्द 'पत्र' से बना है। समाचारपत्र या पत्रिका के लिए समाचार, विचार और जानकारी इकट्ठा करना, उन्हें लिखना, संपादित करना और जनता तक पहुँचाना पत्रकारिता कहलाता है। अंग्रेज़ी में इसे 'जर्नलिज़्म' (Journalism) कहते हैं। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, क्योंकि यह सरकार और समाज पर निगरानी रखती है।
भारत में पत्रकारिता की शुरुआत
भारत का पहला समाचारपत्र 'बंगाल गज़ट' (हिकीज़ बंगाल गज़ट) था, जिसे जेम्स ऑगस्टस हिकी ने सन् 1780 में कलकत्ता से अंग्रेज़ी में निकाला। इसके बाद बांग्ला, फ़ारसी और उर्दू में भी पत्र निकलने लगे। कलकत्ता उस समय अंग्रेज़ी शासन का केंद्र था, इसलिए हिन्दी पत्रकारिता का जन्म भी हिन्दी प्रदेश से दूर कलकत्ता में हुआ।
हिन्दी पत्रकारिता का उद्भव
हिन्दी का पहला समाचारपत्र 'उदन्त मार्तण्ड' है। यह साप्ताहिक पत्र 30 मई 1826 को कलकत्ता से निकला। इसके संपादक पं. जुगलकिशोर शुक्ल थे। आर्थिक कठिनाइयों और सरकारी सहायता न मिलने के कारण यह लगभग डेढ़ वर्ष में बंद हो गया। इसी की याद में हर वर्ष 30 मई को 'हिन्दी पत्रकारिता दिवस' मनाया जाता है।
हिन्दी पत्रकारिता का विकास – काल-विभाजन
अध्ययन की सुविधा के लिए हिन्दी पत्रकारिता के विकास को सामान्यतः इन चरणों में बाँटा जाता है:
| चरण | समय (लगभग) | मुख्य प्रवृत्ति |
|---|---|---|
| उद्भव काल | 1826 से 1867 | शुरुआती प्रयास, धर्म-सुधार और सूचना |
| भारतेन्दु युग | 1867 से 1900 | समाज-सुधार, जागरण, साहित्यिक पत्रिकाएँ |
| द्विवेदी युग | 1900 से 1920 | भाषा का परिष्कार, राष्ट्रीय चेतना |
| गांधी युग / स्वतंत्रता आंदोलन | 1920 से 1947 | मिशन की पत्रकारिता, आज़ादी की लड़ाई |
| स्वातंत्र्योत्तर काल | 1947 के बाद | व्यावसायिकता, तकनीक, बड़े समाचार-समूह |
1. उद्भव काल
उदन्त मार्तण्ड के बाद राजा शिवप्रसाद 'सितारे-हिन्द' की प्रेरणा से 'बनारस अखबार' (1845) निकला, पर उसकी भाषा उर्दू-मिश्रित थी। 'समाचार सुधावर्षण' (1854, श्यामसुंदर सेन) हिन्दी का पहला दैनिक माना जाता है। इस काल के पत्र कम समय तक चले, क्योंकि पाठक कम थे और छपाई महँगी थी।
2. भारतेन्दु युग
भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने हिन्दी पत्रकारिता को नई दिशा दी। उन्होंने 'कविवचन सुधा' (1868), 'हरिश्चंद्र मैगज़ीन' (1873, बाद में 'हरिश्चंद्र चंद्रिका') और स्त्रियों के लिए 'बालाबोधिनी' (1874) निकाली। बालकृष्ण भट्ट का 'हिन्दी प्रदीप' और प्रतापनारायण मिश्र का 'ब्राह्मण' इस युग के प्रसिद्ध पत्र हैं। इन पत्रों में समाज-सुधार, देशप्रेम, व्यंग्य और निबंध प्रमुख थे।
3. द्विवेदी युग
सन् 1900 में प्रयाग से 'सरस्वती' पत्रिका निकली। 1903 से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी इसके संपादक बने। उन्होंने खड़ी बोली हिन्दी को शुद्ध और व्याकरण-सम्मत बनाया तथा अनेक नए लेखक तैयार किए। इस युग में पत्रकारिता में भाषा की शुद्धता और विचार की गंभीरता आई।
4. स्वतंत्रता आंदोलन का काल
इस समय पत्रकारिता एक मिशन थी। गणेशशंकर विद्यार्थी का 'प्रताप' (कानपुर, 1913), शिवप्रसाद गुप्त द्वारा स्थापित 'आज' (वाराणसी, 1920; संपादक बाबूराव विष्णु पराड़कर) और माखनलाल चतुर्वेदी का 'कर्मवीर' अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध जनता को जगाने वाले पत्र थे। कई संपादकों को जेल जाना पड़ा, जुर्माने भरने पड़े। पराड़कर जी को हिन्दी पत्रकारिता का 'भीष्म पितामह' भी कहा जाता है।
5. स्वातंत्र्योत्तर काल
आज़ादी के बाद पत्रकारिता मिशन से व्यवसाय की ओर बढ़ी। बड़े समाचार-समूह बने, अनेक शहरों से एक साथ संस्करण निकलने लगे। रंगीन छपाई, कंप्यूटर, ऑफ़सेट मशीन और इंटरनेट ने पत्रकारिता को तेज़ बनाया। दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान आदि बड़े हिन्दी दैनिक हैं। आज हिन्दी के समाचारपत्र पाठक-संख्या में सबसे आगे गिने जाते हैं। ग्रामीण और क्षेत्रीय समाचारों को भी अब अधिक स्थान मिलता है।
हिन्दी पत्रकारिता की विशेषताएँ (सार)
- राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ा योगदान।
- खड़ी बोली हिन्दी के विकास और प्रचार में महत्त्वपूर्ण भूमिका।
- समाज-सुधार, शिक्षा और स्त्री-जागरण को बढ़ावा।
- साहित्य और पत्रकारिता का गहरा संबंध – कई साहित्यकार संपादक भी थे।
- आज तकनीक, व्यावसायिकता और व्यापक पहुँच इसकी पहचान है।
वर्तमान चुनौतियाँ
- विज्ञापन पर अधिक निर्भरता और व्यावसायिक दबाव।
- 'पेड न्यूज़' और सनसनीखेज़ समाचार।
- टीवी और इंटरनेट से प्रतिस्पर्धा।
- भाषा में अंग्रेज़ी शब्दों का अधिक मिश्रण।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी पत्रकारिता के उद्भव और विकास पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) स्वतंत्रता आंदोलन में हिन्दी पत्रकारिता के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) उदन्त मार्तण्ड पर टिप्पणी लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) भारतेन्दु युग की पत्रकारिता की विशेषताएँ लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) सरस्वती पत्रिका और महावीर प्रसाद द्विवेदी का योगदान स्पष्ट कीजिए।