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मीडिया – प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया BAHIN Major T7-104

RTMNU BA Semester 4 · Hindi Language (हिन्दी भाषा) · 4 units · हर इकाई के नोट्स

UniversityRTMNU – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
CourseB.A. (Four Year UG Programme, NEP 2020) – Hindi Language (हिन्दी भाषा)
SemesterSemester IV
Paper codeBAHIN Major T7-104
Paper titleमीडिया – प्रिंट तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया
CategoryMajor T-7 · Major (DSC) – मुख्य विषय
Credits4 credits (theory, 4 घंटे प्रति सप्ताह)
Marksसैद्धांतिक परीक्षा 3 घंटे: 80 अंक + आंतरिक मूल्यांकन (CIE) 20 अंक = 100; उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 40
Syllabusas per official RTMNU NEP 2020 syllabus 2024-25 (B.A. Hindi Language Sem I to IV, लागू सत्र 2024-25 से)

इकाइयों के विषय आधिकारिक RTMNU पाठ्यक्रम के अनुसार हैं। Official RTMNU syllabus page · All RTMNU BA Hindi papers

Units

  1. 1इकाई I: हिन्दी पत्रकारिता : उद्भव और विकासNotes
  2. 2इकाई II: प्रिंट मीडिया लेखनNotes
  3. 3इकाई III: इलेक्ट्रॉनिक मीडियाNotes
  4. 4इकाई IV: वेब पत्रकारिताNotes

RTMNU BA Sem 4 · BAHIN Major T7-104 · इकाई I

इकाई I: हिन्दी पत्रकारिता : उद्भव और विकास

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • हिन्दी पत्रकारिता : उद्भव और विकास

हिन्दी पत्रकारिता : उद्भव और विकास

पत्रकारिता का अर्थ

'पत्रकारिता' शब्द 'पत्र' से बना है। समाचारपत्र या पत्रिका के लिए समाचार, विचार और जानकारी इकट्ठा करना, उन्हें लिखना, संपादित करना और जनता तक पहुँचाना पत्रकारिता कहलाता है। अंग्रेज़ी में इसे 'जर्नलिज़्म' (Journalism) कहते हैं। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, क्योंकि यह सरकार और समाज पर निगरानी रखती है।

भारत में पत्रकारिता की शुरुआत

भारत का पहला समाचारपत्र 'बंगाल गज़ट' (हिकीज़ बंगाल गज़ट) था, जिसे जेम्स ऑगस्टस हिकी ने सन् 1780 में कलकत्ता से अंग्रेज़ी में निकाला। इसके बाद बांग्ला, फ़ारसी और उर्दू में भी पत्र निकलने लगे। कलकत्ता उस समय अंग्रेज़ी शासन का केंद्र था, इसलिए हिन्दी पत्रकारिता का जन्म भी हिन्दी प्रदेश से दूर कलकत्ता में हुआ।

हिन्दी पत्रकारिता का उद्भव

हिन्दी का पहला समाचारपत्र 'उदन्त मार्तण्ड' है। यह साप्ताहिक पत्र 30 मई 1826 को कलकत्ता से निकला। इसके संपादक पं. जुगलकिशोर शुक्ल थे। आर्थिक कठिनाइयों और सरकारी सहायता न मिलने के कारण यह लगभग डेढ़ वर्ष में बंद हो गया। इसी की याद में हर वर्ष 30 मई को 'हिन्दी पत्रकारिता दिवस' मनाया जाता है।

याद रखें: हिन्दी का पहला पत्र – उदन्त मार्तण्ड (1826, कलकत्ता, संपादक जुगलकिशोर शुक्ल)। हिन्दी का पहला दैनिक – समाचार सुधावर्षण (1854, कलकत्ता)।

हिन्दी पत्रकारिता का विकास – काल-विभाजन

अध्ययन की सुविधा के लिए हिन्दी पत्रकारिता के विकास को सामान्यतः इन चरणों में बाँटा जाता है:

चरणसमय (लगभग)मुख्य प्रवृत्ति
उद्भव काल1826 से 1867शुरुआती प्रयास, धर्म-सुधार और सूचना
भारतेन्दु युग1867 से 1900समाज-सुधार, जागरण, साहित्यिक पत्रिकाएँ
द्विवेदी युग1900 से 1920भाषा का परिष्कार, राष्ट्रीय चेतना
गांधी युग / स्वतंत्रता आंदोलन1920 से 1947मिशन की पत्रकारिता, आज़ादी की लड़ाई
स्वातंत्र्योत्तर काल1947 के बादव्यावसायिकता, तकनीक, बड़े समाचार-समूह

1. उद्भव काल

उदन्त मार्तण्ड के बाद राजा शिवप्रसाद 'सितारे-हिन्द' की प्रेरणा से 'बनारस अखबार' (1845) निकला, पर उसकी भाषा उर्दू-मिश्रित थी। 'समाचार सुधावर्षण' (1854, श्यामसुंदर सेन) हिन्दी का पहला दैनिक माना जाता है। इस काल के पत्र कम समय तक चले, क्योंकि पाठक कम थे और छपाई महँगी थी।

2. भारतेन्दु युग

भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने हिन्दी पत्रकारिता को नई दिशा दी। उन्होंने 'कविवचन सुधा' (1868), 'हरिश्चंद्र मैगज़ीन' (1873, बाद में 'हरिश्चंद्र चंद्रिका') और स्त्रियों के लिए 'बालाबोधिनी' (1874) निकाली। बालकृष्ण भट्ट का 'हिन्दी प्रदीप' और प्रतापनारायण मिश्र का 'ब्राह्मण' इस युग के प्रसिद्ध पत्र हैं। इन पत्रों में समाज-सुधार, देशप्रेम, व्यंग्य और निबंध प्रमुख थे।

3. द्विवेदी युग

सन् 1900 में प्रयाग से 'सरस्वती' पत्रिका निकली। 1903 से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी इसके संपादक बने। उन्होंने खड़ी बोली हिन्दी को शुद्ध और व्याकरण-सम्मत बनाया तथा अनेक नए लेखक तैयार किए। इस युग में पत्रकारिता में भाषा की शुद्धता और विचार की गंभीरता आई।

4. स्वतंत्रता आंदोलन का काल

इस समय पत्रकारिता एक मिशन थी। गणेशशंकर विद्यार्थी का 'प्रताप' (कानपुर, 1913), शिवप्रसाद गुप्त द्वारा स्थापित 'आज' (वाराणसी, 1920; संपादक बाबूराव विष्णु पराड़कर) और माखनलाल चतुर्वेदी का 'कर्मवीर' अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध जनता को जगाने वाले पत्र थे। कई संपादकों को जेल जाना पड़ा, जुर्माने भरने पड़े। पराड़कर जी को हिन्दी पत्रकारिता का 'भीष्म पितामह' भी कहा जाता है।

5. स्वातंत्र्योत्तर काल

आज़ादी के बाद पत्रकारिता मिशन से व्यवसाय की ओर बढ़ी। बड़े समाचार-समूह बने, अनेक शहरों से एक साथ संस्करण निकलने लगे। रंगीन छपाई, कंप्यूटर, ऑफ़सेट मशीन और इंटरनेट ने पत्रकारिता को तेज़ बनाया। दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान आदि बड़े हिन्दी दैनिक हैं। आज हिन्दी के समाचारपत्र पाठक-संख्या में सबसे आगे गिने जाते हैं। ग्रामीण और क्षेत्रीय समाचारों को भी अब अधिक स्थान मिलता है।

हिन्दी पत्रकारिता की विशेषताएँ (सार)

  • राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन में बड़ा योगदान।
  • खड़ी बोली हिन्दी के विकास और प्रचार में महत्त्वपूर्ण भूमिका।
  • समाज-सुधार, शिक्षा और स्त्री-जागरण को बढ़ावा।
  • साहित्य और पत्रकारिता का गहरा संबंध – कई साहित्यकार संपादक भी थे।
  • आज तकनीक, व्यावसायिकता और व्यापक पहुँच इसकी पहचान है।

वर्तमान चुनौतियाँ

  • विज्ञापन पर अधिक निर्भरता और व्यावसायिक दबाव।
  • 'पेड न्यूज़' और सनसनीखेज़ समाचार।
  • टीवी और इंटरनेट से प्रतिस्पर्धा।
  • भाषा में अंग्रेज़ी शब्दों का अधिक मिश्रण।
परीक्षा टिप: उत्तर में काल-विभाजन की तालिका बनाइए और हर युग के दो-दो प्रमुख पत्र, संपादक और वर्ष लिखिए। 'उदन्त मार्तण्ड' पर टिप्पणी अक्सर पूछी जाती है।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी पत्रकारिता के उद्भव और विकास पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) स्वतंत्रता आंदोलन में हिन्दी पत्रकारिता के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) उदन्त मार्तण्ड पर टिप्पणी लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) भारतेन्दु युग की पत्रकारिता की विशेषताएँ लिखिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) सरस्वती पत्रिका और महावीर प्रसाद द्विवेदी का योगदान स्पष्ट कीजिए।

RTMNU BA Sem 4 · BAHIN Major T7-104 · इकाई II

इकाई II: प्रिंट मीडिया लेखन

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • समाचार लेखन- समाचार के तत्व, समाचार के मूल्य
  • शीर्षक, उपशीर्षक, बुलेट्स
  • संपादकीय लेखन- संपादकीय का स्वरूप, संपादकीय के प्रकार
  • संपादन कला- पेजमेकिंग एवं पृष्ठ सज्जा

समाचार लेखन – समाचार के तत्व, समाचार के मूल्य

समाचार किसी ताज़ा, सच्ची और जनहित से जुड़ी घटना की वह सूचना है जो अधिक से अधिक लोगों के लिए रोचक और उपयोगी हो। अंग्रेज़ी में 'न्यूज़' (News) शब्द को कुछ लोग चारों दिशाओं (North, East, West, South) से जोड़ते हैं, यानी चारों ओर की खबर।

समाचार के तत्व (छह ककार)

एक अच्छे समाचार में छह प्रश्नों का उत्तर होना चाहिए। इन्हें छह ककार या 5W 1H कहते हैं:

  • क्या (What) – क्या घटना हुई?
  • कौन (Who) – घटना किससे जुड़ी है?
  • कब (When) – घटना कब हुई?
  • कहाँ (Where) – घटना कहाँ हुई?
  • क्यों (Why) – घटना का कारण क्या है?
  • कैसे (How) – घटना किस प्रकार हुई?

इसके अलावा सत्यता, निष्पक्षता, स्पष्टता, संक्षिप्तता और नवीनता भी समाचार के आवश्यक गुण हैं।

उल्टा पिरामिड शैली

समाचार प्रायः उल्टा पिरामिड (Inverted Pyramid) शैली में लिखा जाता है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात पहले अनुच्छेद में, जिसे इंट्रो या मुखड़ा कहते हैं, फिर कम महत्त्व की बातें। इससे जगह कम पड़ने पर नीचे का भाग काटा जा सकता है। समाचार के तीन भाग हैं – मुखड़ा, बॉडी (विस्तार) और समापन।

समाचार के मूल्य

कोई घटना समाचार बनेगी या नहीं, यह इन मूल्यों से तय होता है:

समाचार-मूल्यअर्थ
नवीनता / तात्कालिकताघटना ताज़ा हो
निकटतापाठक के क्षेत्र से जुड़ी घटना अधिक महत्त्वपूर्ण
प्रमुखताप्रसिद्ध व्यक्ति या संस्था से जुड़ी हो
प्रभावअधिक लोगों के जीवन पर असर डाले
मानवीय रुचिभावनाओं को छूने वाली घटना
असामान्यताअनोखी या अनपेक्षित घटना
टकराव / संघर्षविवाद, चुनाव, युद्ध आदि

शीर्षक, उपशीर्षक, बुलेट्स

शीर्षक (Headline) समाचार का सिर है। पाठक सबसे पहले शीर्षक पढ़ता है और उसी से तय करता है कि समाचार पढ़ना है या नहीं।

अच्छे शीर्षक की विशेषताएँ

  • छोटा, सरल और आकर्षक हो।
  • समाचार का सार बताए, भ्रामक न हो।
  • प्रायः वर्तमान काल और सक्रिय वाक्य में हो।
  • अनावश्यक शब्द न हों।

उपशीर्षक (Sub-heading) शीर्षक के नीचे या लंबे समाचार के बीच में दिया जाता है। यह शीर्षक की बात को थोड़ा आगे बढ़ाता है और लंबे समाचार को भागों में बाँटकर पढ़ना आसान बनाता है।

बुलेट्स बिंदुओं के रूप में दी गई मुख्य बातें हैं। व्यस्त पाठक इन्हें देखकर पूरा समाचार जल्दी समझ लेता है, जैसे बजट या परीक्षा-परिणाम की मुख्य बातें।

संपादकीय लेखन – संपादकीय का स्वरूप, संपादकीय के प्रकार

संपादकीय समाचारपत्र का वह लेख है जिसमें किसी ताज़ा घटना या मुद्दे पर पत्र की अपनी राय दी जाती है। यह प्रायः संपादकीय पृष्ठ पर छपता है और इस पर लेखक का नाम नहीं होता, क्योंकि यह पूरे पत्र का मत माना जाता है। संपादकीय को समाचारपत्र की आत्मा कहा जाता है।

स्वरूप / विशेषताएँ

  • सामयिक विषय, गंभीर और तर्कपूर्ण भाषा।
  • तथ्य, विश्लेषण और निष्कर्ष – तीनों का संतुलन।
  • जनमत बनाने और सरकार को सुझाव देने की क्षमता।
  • संक्षिप्त और सुसंगठित; भूमिका, विवेचन, निष्कर्ष।

संपादकीय के प्रकार

  • व्याख्यात्मक – किसी घटना को समझाने वाला।
  • आलोचनात्मक – किसी नीति या निर्णय की कमियाँ बताने वाला।
  • प्रशंसात्मक – किसी अच्छे काम की सराहना।
  • सुझावात्मक / समाधानपरक – समस्या का हल सुझाने वाला।
  • सूचनात्मक तथा हल्के-फुल्के व्यंग्यात्मक संपादकीय।

संपादन कला – पेजमेकिंग एवं पृष्ठ सज्जा

संपादन का अर्थ है प्राप्त सामग्री को जाँचना, सुधारना, काटना-छाँटना और छपने योग्य बनाना। संपादन के मुख्य सिद्धांत हैं – तथ्यों की शुद्धता, भाषा की शुद्धता, संक्षिप्तता, निष्पक्षता और पत्र की नीति का पालन।

पेजमेकिंग समाचारपत्र के पृष्ठ को तैयार करने की प्रक्रिया है। पहले यह हाथ से होती थी, अब कंप्यूटर पर डीटीपी (DTP) सॉफ़्टवेयर से होती है। पृष्ठ सज्जा (Layout) में यह तय होता है कि कौन-सा समाचार, चित्र, विज्ञापन और शीर्षक पृष्ठ पर कहाँ और कितनी जगह में जाएगा।

पृष्ठ सज्जा के मुख्य तत्व

  • मास्टहेड (पत्र का नाम), लीड समाचार और मुख्य शीर्षक।
  • कॉलम, फ़ोटो, कैप्शन, ग्राफ़िक्स और विज्ञापन का संतुलन।
  • सफ़ेद स्थान, फ़ॉन्ट के आकार और रंगों का उचित प्रयोग।
  • सबसे महत्त्वपूर्ण समाचार पहले पृष्ठ पर ऊपर रखना।
परीक्षा टिप: समाचार लेखन के प्रश्न में छह ककार और उल्टा पिरामिड का चित्र-वर्णन ज़रूर लिखें; संपादकीय के प्रश्न में स्वरूप और प्रकार दोनों दें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) समाचार किसे कहते हैं? समाचार के तत्वों और समाचार-मूल्यों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) संपादकीय का स्वरूप स्पष्ट करते हुए उसके प्रकारों पर प्रकाश डालिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) उल्टा पिरामिड शैली पर टिप्पणी लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) अच्छे शीर्षक की विशेषताएँ लिखिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) पेजमेकिंग एवं पृष्ठ सज्जा पर टिप्पणी लिखिए।

RTMNU BA Sem 4 · BAHIN Major T7-104 · इकाई III

इकाई III: इलेक्ट्रॉनिक मीडिया

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • इलेक्ट्रॉनिक मीडिया स्वरूप और विशेषताएँ
  • इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विविध रूप- रेडिओ, टेलीविज़न, सिनेमा, सोशल मीडिया
  • रेडियो लेखन कला
  • दृश्य-श्रव्य माध्यम लेखन कला

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया स्वरूप और विशेषताएँ

जिन माध्यमों में सूचना बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से ध्वनि, चित्र या दोनों के रूप में लोगों तक पहुँचती है, उन्हें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कहते हैं। रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा, इंटरनेट और सोशल मीडिया इसके उदाहरण हैं। प्रिंट मीडिया पढ़ने का माध्यम है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया सुनने और देखने का माध्यम है।

विशेषताएँ

  • तेज़ गति – घटना की सूचना तुरंत, कई बार सीधा प्रसारण (लाइव) के रूप में।
  • व्यापक पहुँच – अनपढ़ व्यक्ति भी सुनकर और देखकर समझ सकता है।
  • दृश्य और ध्वनि का प्रभाव – बात अधिक विश्वसनीय और भावनात्मक लगती है।
  • क्षणिकता – प्रसारित बात दोबारा सुनना कठिन, इसलिए भाषा सरल चाहिए।
  • मनोरंजन, सूचना और शिक्षा – तीनों कार्य एक साथ।
  • महँगी तकनीक और टीम-वर्क की आवश्यकता।
प्रिंट मीडियाइलेक्ट्रॉनिक मीडिया
पढ़ने का माध्यमसुनने-देखने का माध्यम
साक्षर पाठक आवश्यकनिरक्षर भी समझ सकता है
स्थायी, दोबारा पढ़ सकते हैंक्षणिक, एक बार सुनी बात
गति कम (अगले दिन)गति तेज़ (तुरंत)

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विविध रूप – रेडिओ, टेलीविज़न, सिनेमा, सोशल मीडिया

1. रेडियो

रेडियो केवल ध्वनि का माध्यम है। भारत में 1927 में मुंबई से इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी ने प्रसारण शुरू किया। 1936 में इसका नाम 'ऑल इंडिया रेडियो' हुआ, जिसे बाद में 'आकाशवाणी' कहा गया। रेडियो सस्ता है और गाँव-गाँव तक पहुँचता है। आजकल एफएम (FM) और सामुदायिक रेडियो भी लोकप्रिय हैं।

2. टेलीविज़न

टेलीविज़न दृश्य और श्रव्य दोनों का माध्यम है। भारत में दूरदर्शन का प्रसारण 15 सितंबर 1959 को दिल्ली से प्रयोग के रूप में शुरू हुआ। 1982 के एशियाई खेलों के समय रंगीन प्रसारण शुरू हुआ। 1990 के दशक से निजी और 24 घंटे के समाचार चैनल आए। टीवी समाचार, धारावाहिक, खेल और शिक्षा का शक्तिशाली माध्यम है।

3. सिनेमा

सिनेमा मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश का माध्यम है। भारत की पहली फ़ीचर फ़िल्म 'राजा हरिश्चंद्र' (1913) दादासाहब फालके ने बनाई और पहली बोलती फ़िल्म 'आलम आरा' (1931) थी। हिन्दी सिनेमा ने हिन्दी भाषा को देश-विदेश में लोकप्रिय बनाया।

4. सोशल मीडिया

इंटरनेट पर आधारित वे मंच जहाँ हर व्यक्ति सामग्री बना और बाँट सकता है, सोशल मीडिया कहलाते हैं, जैसे फ़ेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सऐप। इसकी विशेषता दोतरफ़ा संवाद है – पाठक तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है। इसका दोष है – फ़र्ज़ी खबरें (फ़ेक न्यूज़), अफ़वाहें और निजता का ख़तरा।

रेडियो लेखन कला

रेडियो के लिए लिखना कान के लिए लिखना है। श्रोता के सामने कोई चित्र या लिखा हुआ पाठ नहीं होता, इसलिए शब्दों से ही चित्र बनाना पड़ता है।

रेडियो लेखन के नियम

  • छोटे और सरल वाक्य; बोलचाल की भाषा।
  • कठिन शब्द, लंबे अंक और संक्षिप्त रूप (जैसे लंबे संक्षेपाक्षर) कम से कम।
  • महत्त्वपूर्ण बात को दोहराना ठीक है, ताकि श्रोता याद रख सके।
  • ध्वनि-प्रभाव और संगीत के संकेत आलेख में लिखे जाएँ।
  • समय-सीमा का ध्यान – प्रसारण सेकंड के हिसाब से चलता है।

रेडियो के प्रमुख रूप हैं – समाचार, वार्ता, रेडियो नाटक, रूपक (फ़ीचर), साक्षात्कार, परिचर्चा और विज्ञापन (जिंगल)।

दृश्य-श्रव्य माध्यम लेखन कला

टेलीविज़न और फ़िल्म के लिए लेखन आँख और कान दोनों के लिए होता है। यहाँ चित्र मुख्य हैं और शब्द उनका साथ देते हैं। इसलिए कहा जाता है कि शब्द चित्र को दोहराएँ नहीं, बल्कि उसे पूरा करें।

आलेख (स्क्रिप्ट) की विशेषताएँ

  • आलेख प्रायः दो कॉलम में लिखा जाता है – बाईं ओर दृश्य (Video), दाईं ओर ध्वनि/संवाद (Audio)।
  • दृश्य-विवरण में कैमरा शॉट, स्थान, समय (दिन/रात) का उल्लेख।
  • संवाद छोटे, स्वाभाविक और पात्र के अनुकूल।
  • टीवी समाचार में 'एंकर', 'विज़ुअल', 'बाइट' और 'पीस टू कैमरा' का संतुलन।

लेखन की प्रक्रिया

  1. विचार या विषय का चुनाव।
  2. शोध और सामग्री-संग्रह।
  3. कथा-रूपरेखा तथा दृश्य-विभाजन।
  4. पटकथा और संवाद-लेखन, फिर संपादन।
परीक्षा टिप: रेडियो लेखन = कान के लिए; दृश्य-श्रव्य लेखन = आँख और कान के लिए। यह अंतर तालिका बनाकर लिखें तो अच्छे अंक मिलते हैं।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का स्वरूप और विशेषताएँ स्पष्ट करते हुए उसके विविध रूपों का परिचय दीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) रेडियो लेखन कला और दृश्य-श्रव्य माध्यम लेखन कला की तुलना कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) सोशल मीडिया के लाभ और हानियाँ लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) दूरदर्शन पर टिप्पणी लिखिए।

RTMNU BA Sem 4 · BAHIN Major T7-104 · इकाई IV

इकाई IV: वेब पत्रकारिता

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • परिचय, उपयोग और महत्व
  • प्रमुख वेब पोर्टल – सामान्य परिचय, उपयोग
  • ब्लॉग- परिचय एवं महत्व
  • ब्लॉग निर्माण एवं लेखन

परिचय, उपयोग और महत्त्व

इंटरनेट के माध्यम से समाचार, लेख, चित्र, ऑडियो और वीडियो को लोगों तक पहुँचाना वेब पत्रकारिता कहलाता है। इसे ऑनलाइन पत्रकारिता, डिजिटल पत्रकारिता या साइबर पत्रकारिता भी कहते हैं। इसमें समाचार वेबसाइट, ई-पेपर, मोबाइल ऐप, पोर्टल, ब्लॉग और सोशल मीडिया शामिल हैं। आज लगभग हर बड़े समाचारपत्र और टीवी चैनल की अपनी वेबसाइट है।

वेब पत्रकारिता की विशेषताएँ

  • तात्कालिकता – समाचार तुरंत प्रकाशित और लगातार अपडेट।
  • बहु-माध्यमता (मल्टीमीडिया) – पाठ, चित्र, ऑडियो, वीडियो एक साथ।
  • अन्तःक्रियाशीलता – पाठक टिप्पणी, लाइक और शेयर कर सकता है।
  • हाइपरलिंक – एक समाचार से जुड़ी दूसरी जानकारी तक तुरंत पहुँच।
  • संग्रह (आर्काइव) – पुराने समाचार भी खोजकर पढ़े जा सकते हैं।
  • वैश्विक पहुँच – दुनिया में कहीं भी, कभी भी पढ़ा जा सकता है।

उपयोग

  • ताज़ा समाचार, खेल, मौसम, शेयर बाज़ार की तुरंत जानकारी।
  • शिक्षा, रोज़गार, परीक्षा-परिणाम और सरकारी सूचनाएँ।
  • नागरिक पत्रकारिता – आम आदमी भी घटना की सूचना दे सकता है।
  • विज्ञापन और व्यापार का नया माध्यम।

महत्त्व

वेब पत्रकारिता ने सूचना को लोकतांत्रिक बना दिया है। छोटे शहरों और गाँवों की खबरें भी अब देश-दुनिया तक पहुँचती हैं। हिन्दी में यूनिकोड फ़ॉन्ट आने के बाद हिन्दी वेब पत्रकारिता बहुत तेज़ी से बढ़ी। मोबाइल फ़ोन ने इसे हर हाथ तक पहुँचा दिया है।

सीमाएँ

  • फ़र्ज़ी खबरें और बिना जाँचे समाचार।
  • 'क्लिकबेट' यानी पाठक खींचने वाले भ्रामक शीर्षक।
  • डिजिटल विभाजन – सबके पास इंटरनेट नहीं।
  • साइबर अपराध और निजता का ख़तरा।

पारंपरिक पत्रकारिता और वेब पत्रकारिता में अंतर

पारंपरिक (प्रिंट) पत्रकारितावेब पत्रकारिता
दिन में एक बार प्रकाशनचौबीसों घंटे, हर मिनट अपडेट
स्थान (पृष्ठ) सीमितस्थान लगभग असीमित
केवल पाठ और चित्रपाठ, चित्र, ऑडियो, वीडियो, लिंक
एकतरफ़ा संवाददोतरफ़ा संवाद, तुरंत प्रतिक्रिया

प्रमुख वेब पोर्टल – सामान्य परिचय, उपयोग

वेब पोर्टल वह वेबसाइट है जो एक ही स्थान पर अनेक प्रकार की जानकारी और सेवाएँ देती है – समाचार, ईमेल, खोज, मनोरंजन, खेल, व्यापार आदि। पोर्टल को इंटरनेट का 'प्रवेश-द्वार' कहा जाता है।

पोर्टल के प्रकार

प्रकारउदाहरण
समाचार पोर्टलबीबीसी हिन्दी, समाचारपत्रों और चैनलों की हिन्दी वेबसाइटें (नवभारत टाइम्स, दैनिक भास्कर, आज तक आदि)
सामान्य हिन्दी पोर्टलवेबदुनिया जैसे बहु-विषयी पोर्टल
सरकारी पोर्टलभारत का राष्ट्रीय पोर्टल, पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की वेबसाइट
साहित्यिक पोर्टलहिन्दी साहित्य और ई-पत्रिकाओं की वेबसाइटें

वेब पोर्टल के उपयोग

  • एक ही जगह समाचार, लेख, वीडियो और ई-पेपर।
  • सरकारी योजनाओं, फ़ॉर्म और सेवाओं की जानकारी।
  • हिन्दी भाषा और साहित्य का प्रचार-प्रसार।
  • पाठकों की राय जानने के लिए सर्वेक्षण और टिप्पणियाँ।

ब्लॉग – परिचय एवं महत्त्व

ब्लॉग शब्द 'वेब लॉग' (Web Log) से बना है। यह इंटरनेट पर एक प्रकार की ऑनलाइन डायरी है, जिसमें लेखक अपने विचार, अनुभव, कविताएँ, लेख, चित्र आदि नियमित रूप से प्रकाशित करता है। ब्लॉग लिखने वाले को ब्लॉगर और ब्लॉग-जगत को ब्लॉगजगत या 'चिट्ठाजगत' कहते हैं। हिन्दी में ब्लॉग को 'चिट्ठा' भी कहा गया है।

महत्त्व

  • हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति का मुफ़्त और स्वतंत्र मंच।
  • संपादक या प्रकाशक की आवश्यकता नहीं।
  • पाठकों से सीधा संवाद – टिप्पणियों के माध्यम से।
  • हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता और नए लेखकों को पहचान।
  • विज्ञापन से आय का साधन भी।

ब्लॉग निर्माण एवं लेखन

ब्लॉग कैसे बनाएँ (चरण)

  1. ब्लॉगर या वर्डप्रेस जैसे किसी ब्लॉग मंच पर ईमेल से खाता बनाइए।
  2. ब्लॉग का नाम और वेब पता चुनिए।
  3. डिज़ाइन (थीम/टेम्पलेट) चुनिए और भाषा हिन्दी रखिए।
  4. 'नई पोस्ट' में शीर्षक और सामग्री लिखिए, चित्र जोड़िए।
  5. लेबल/टैग लगाकर 'प्रकाशित करें' दबाइए और लिंक साझा कीजिए।

अच्छे ब्लॉग लेखन के नियम

  • विषय स्पष्ट और रोचक; आकर्षक शीर्षक।
  • छोटे अनुच्छेद, सरल भाषा, उपशीर्षक और बिंदु।
  • नियमित लेखन – पाठक जुड़े रहते हैं।
  • तथ्यों की जाँच, दूसरों की सामग्री की चोरी नहीं।
  • मर्यादित भाषा; किसी की भावना को ठेस न पहुँचे।
  • पाठकों की टिप्पणियों का उत्तर देना।
याद रखें: ब्लॉग = वेब लॉग (ऑनलाइन डायरी)। पोर्टल = अनेक सेवाओं का एक प्रवेश-द्वार। वेब पत्रकारिता की सबसे बड़ी विशेषता – तात्कालिकता और अन्तःक्रियाशीलता।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) वेब पत्रकारिता का परिचय देते हुए उसके उपयोग और महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) ब्लॉग किसे कहते हैं? ब्लॉग का महत्त्व बताते हुए ब्लॉग निर्माण एवं लेखन की प्रक्रिया समझाइए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) वेब पोर्टल पर टिप्पणी लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) वेब पत्रकारिता की सीमाएँ लिखिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) अच्छे ब्लॉग लेखन के नियम लिखिए।