पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- अनुवाद की परिभाषा, अवधारणा और महत्व
- अनुवाद के विविध प्रकार
- अनुवाद सिद्धांत और इतिहास
अनुवाद की परिभाषा, अवधारणा और महत्व
'अनुवाद' शब्द 'अनु' उपसर्ग और 'वद्' धातु से बना है, जिसका मूल अर्थ है – किसी कही हुई बात को बाद में फिर से कहना। आज अनुवाद का अर्थ है – एक भाषा (स्रोत भाषा) में व्यक्त विचार, भाव और शैली को दूसरी भाषा (लक्ष्य भाषा) में यथासंभव समान रूप में प्रस्तुत करना। अंग्रेज़ी का 'ट्रांसलेशन' (Translation) शब्द भी 'पार ले जाना' अर्थ देता है।
परिभाषाएँ (भावार्थ)
- कैटफ़र्ड – एक भाषा की पाठ-सामग्री को दूसरी भाषा की समतुल्य पाठ-सामग्री से प्रतिस्थापित करना।
- नाइडा – स्रोत भाषा के संदेश का लक्ष्य भाषा में निकटतम स्वाभाविक समतुल्य प्रस्तुत करना; पहले अर्थ, फिर शैली।
अवधारणा
अनुवाद केवल शब्दों का बदलना नहीं है, बल्कि अर्थ और संस्कृति का अंतरण है। अनुवाद को कला, विज्ञान और शिल्प तीनों माना गया है – कला, क्योंकि इसमें सृजनात्मकता चाहिए; विज्ञान, क्योंकि इसके नियम और प्रक्रिया हैं; शिल्प, क्योंकि अभ्यास से इसमें कुशलता आती है। अनुवाद में समतुल्यता (Equivalence) केंद्रीय अवधारणा है।
महत्व
- बहुभाषी भारत में भावात्मक और राष्ट्रीय एकता।
- राजभाषा के रूप में हिन्दी के प्रयोग में सरकारी कामकाज का आधार।
- विश्व साहित्य, विज्ञान और तकनीक का ज्ञान अपनी भाषा में।
- वैश्वीकरण, व्यापार, पर्यटन और मीडिया में रोज़गार के अवसर।
- शिक्षा में मातृभाषा के माध्यम से पढ़ाई को सहायता।
- विभिन्न भाषाओं के साहित्य से हिन्दी साहित्य समृद्ध होता है और हिन्दी साहित्य दूसरे देशों तक पहुँचता है।
अच्छे अनुवादक के गुण
- स्रोत भाषा और लक्ष्य भाषा – दोनों का गहरा ज्ञान।
- विषय की समझ – जैसे विधि, विज्ञान या साहित्य।
- दोनों भाषाओं की संस्कृति, मुहावरों और लोकोक्तियों की जानकारी।
- मूल के प्रति ईमानदारी; अपनी ओर से कुछ जोड़ना या घटाना नहीं।
- धैर्य, अभ्यास और शब्दकोश तथा मानक शब्दावली के प्रयोग की आदत।
- भाषा पर ऐसा अधिकार कि अनुवाद मूल रचना जैसा सहज लगे।
अनुवाद के विविध प्रकार
| आधार | प्रकार |
|---|---|
| पद्धति | शब्दानुवाद, भावानुवाद, छायानुवाद, सारानुवाद, व्याख्यानुवाद, रूपांतरण |
| माध्यम | लिखित अनुवाद, मौखिक/आशु अनुवाद (दुभाषिया) |
| विषय | साहित्यिक, कार्यालयीन, वैज्ञानिक-तकनीकी, विधिक, वाणिज्यिक, मीडिया |
| साधन | मानव अनुवाद, मशीन अनुवाद, मशीन-सहायित अनुवाद |
| याकोब्सन | अन्तःभाषिक, अंतरभाषिक, अंतरप्रतीकात्मक |
- शब्दानुवाद – मूल के शब्दों और क्रम के निकट; विधि और तकनीकी पाठ में उपयोगी, पर अस्वाभाविक हो सकता है।
- भावानुवाद – मूल का भाव मुख्य; साहित्य, विशेषकर कविता में उपयुक्त।
- सारानुवाद – केवल मुख्य बातें; समाचार और भाषण में।
- आशु अनुवाद – तत्काल मौखिक अनुवाद; अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और संसद में।
अनुवाद सिद्धांत और इतिहास
प्रमुख अनुवाद सिद्धांत
- भाषावैज्ञानिक सिद्धांत (कैटफ़र्ड) – अनुवाद भाषिक इकाइयों का समतुल्य प्रतिस्थापन है।
- समतुल्यता सिद्धांत (नाइडा) – औपचारिक समतुल्यता (रूप के निकट) और गतिशील समतुल्यता (पाठक पर मूल जैसा प्रभाव)।
- न्यूमार्क का सिद्धांत – अर्थपरक अनुवाद (लेखक के अर्थ के प्रति निष्ठा) और संप्रेषणपरक अनुवाद (पाठक तक संदेश पहुँचाना)।
- स्कोपोस सिद्धांत (हांस फ़र्मियर) – अनुवाद का तरीका उसके उद्देश्य (स्कोपोस) से तय होता है।
- भारतीय दृष्टि – अनुवाद को 'पुनर्कथन' और 'पुनःसृजन' माना गया।
अनुवाद का संक्षिप्त इतिहास
- प्राचीन काल – भारत की 'पंचतंत्र' कथाओं का पहलवी, अरबी ('कलीला व दिमना') आदि भाषाओं में अनुवाद हुआ। बौद्ध ग्रंथों का चीनी और तिब्बती भाषाओं में अनुवाद हुआ।
- मध्य काल – मुग़ल काल में महाभारत, रामायण और उपनिषदों का फ़ारसी में अनुवाद हुआ; दारा शिकोह ने उपनिषदों का फ़ारसी अनुवाद कराया।
- आधुनिक काल – कलकत्ता के फ़ोर्ट विलियम कॉलेज (1800) में अनुवाद-कार्य हुआ; लल्लूलाल का 'प्रेमसागर' भागवत की कथा पर आधारित है। भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेज़ी नाटकों के अनुवाद किए। ईसाई मिशनरियों ने बाइबिल का हिन्दी अनुवाद किया।
- स्वतंत्रता के बाद – साहित्य अकादमी (1954), वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग (1961) और केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो (1971) जैसी संस्थाओं ने अनुवाद को व्यवस्थित रूप दिया। आज कंप्यूटर और मशीन अनुवाद का युग है।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) अनुवाद की परिभाषा देते हुए उसकी अवधारणा और महत्व स्पष्ट कीजिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) अनुवाद के प्रमुख सिद्धांतों का परिचय देते हुए अनुवाद के इतिहास पर प्रकाश डालिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) अनुवाद के विविध प्रकारों पर टिप्पणी लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) नाइडा की औपचारिक और गतिशील समतुल्यता स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) स्कोपोस सिद्धांत पर टिप्पणी लिखिए।