पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- कबीरदास, जायसी, तुलसीदास, सूरदास – सामान्य परिचय, जीवन दर्शन, सामाजिक चिंतन
कबीरदास : सामान्य परिचय, जीवन दर्शन, सामाजिक चिंतन
जीवन परिचय: कबीरदास भक्तिकाल की निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के सबसे बड़े कवि हैं। परंपरा के अनुसार उनका जन्म संवत 1455 (सन 1398) में काशी में और निधन मगहर में हुआ। उनका पालन-पोषण नीरू और नीमा नामक जुलाहा दंपति ने किया। स्वामी रामानंद को उनका गुरु माना जाता है। पत्नी का नाम लोई तथा पुत्र-पुत्री के नाम कमाल और कमाली बताए जाते हैं।
रचना: कबीर पढ़े-लिखे नहीं थे। उनकी वाणी का संग्रह उनके शिष्य धर्मदास ने बीजक नाम से किया। इसके तीन भाग हैं – साखी, सबद और रमैनी।
जीवन दर्शन
- ईश्वर निर्गुण, निराकार और घट-घट में व्याप्त है।
- सच्ची भक्ति प्रेम और आत्मज्ञान से होती है, बाहरी आडंबर से नहीं।
- गुरु ही ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग दिखाता है।
- माया, अहंकार और विषय-वासना भक्ति के सबसे बड़े बाधक हैं।
सामाजिक चिंतन
कबीर समाज सुधारक कवि थे। उन्होंने जाति-पाँति, ऊँच-नीच, छुआछूत, मूर्तिपूजा, तीर्थ, रोज़ा-नमाज़ जैसे बाहरी कर्मकांड का खुलकर विरोध किया। हिंदू और मुसलमान दोनों के पाखंड पर उन्होंने समान रूप से व्यंग्य किया। वे मानवता, समानता और सच्चे आचरण के पक्षधर थे।
मलिक मुहम्मद जायसी : सामान्य परिचय, जीवन दर्शन, सामाजिक चिंतन
जीवन परिचय: जायसी भक्तिकाल की निर्गुण प्रेमाश्रयी (सूफी) शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। वे उत्तर प्रदेश के जायस नगर के निवासी थे, इसलिए 'जायसी' कहलाए। वे सूफी संतों की परंपरा से जुड़े थे।
प्रमुख रचनाएँ: पद्मावत (प्रसिद्ध प्रेमाख्यान महाकाव्य), अखरावट, आखिरी कलाम।
जीवन दर्शन
- सूफी मत के अनुसार ईश्वर की प्राप्ति प्रेम से होती है। ईश्वर को प्रियतम (स्त्री रूप) और साधक को प्रेमी माना गया है।
- लौकिक प्रेम-कथा के माध्यम से अलौकिक (आध्यात्मिक) प्रेम का संकेत दिया गया है।
- प्रेम-मार्ग में विरह, त्याग और कष्ट सहना साधना का अंग है।
सामाजिक चिंतन
जायसी ने हिंदू घरों की कथा को लेकर हिंदू-मुस्लिम सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। उनकी रचनाओं में लोक-जीवन, रीति-रिवाज, पर्व, ऋतुएँ और ग्रामीण संस्कृति का सजीव चित्र मिलता है। भाषा ठेठ अवधी है।
गोस्वामी तुलसीदास : सामान्य परिचय, जीवन दर्शन, सामाजिक चिंतन
जीवन परिचय: तुलसीदास सगुण भक्ति की रामभक्ति शाखा के शिरोमणि कवि हैं। प्रचलित मत के अनुसार उनका जन्म संवत 1589 (सन 1532) में हुआ और निधन संवत 1680 (सन 1623) में काशी में हुआ। पिता आत्माराम दुबे, माता हुलसी, गुरु नरहरिदास और पत्नी रत्नावली मानी जाती हैं। कहा जाता है कि पत्नी की फटकार से ही उनके मन में वैराग्य जागा।
प्रमुख रचनाएँ: रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्ण गीतावली, बरवै रामायण, जानकी मंगल, पार्वती मंगल।
जीवन दर्शन
- राम सगुण-साकार ब्रह्म हैं; दास्य भाव की भक्ति श्रेष्ठ है।
- ज्ञान, भक्ति और कर्म का समन्वय; शैव-वैष्णव, सगुण-निर्गुण का समन्वय।
- मर्यादा, धर्म और लोकमंगल पर बल।
सामाजिक चिंतन
तुलसी ने आदर्श परिवार, आदर्श राजा और आदर्श समाज की कल्पना 'रामराज्य' के रूप में की। राम आदर्श पुत्र और राजा हैं, भरत आदर्श भाई, सीता आदर्श पत्नी। उन्होंने कलियुग के दोषों का वर्णन करके नैतिक जीवन की प्रेरणा दी। इसीलिए वे 'लोकनायक' कवि कहे जाते हैं।
सूरदास : सामान्य परिचय, जीवन दर्शन, सामाजिक चिंतन
जीवन परिचय: सूरदास कृष्णभक्ति शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि हैं। प्रचलित मत के अनुसार उनका जन्म संवत 1535 (सन 1478) में हुआ। वे वल्लभाचार्य के शिष्य थे और पुष्टिमार्ग में दीक्षित हुए। वे 'अष्टछाप' के प्रमुख कवि थे। वे नेत्रहीन थे, परंतु जन्मांध थे या नहीं, इस पर विद्वानों में मतभेद है।
प्रमुख रचनाएँ: सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी।
जीवन दर्शन
- पुष्टिमार्ग : भगवान की कृपा (पुष्टि) ही मुक्ति का साधन है।
- सख्य, वात्सल्य और माधुर्य भाव की भक्ति।
- ज्ञान और योग की तुलना में प्रेम-भक्ति श्रेष्ठ है (भ्रमरगीत इसका प्रमाण है)।
सामाजिक चिंतन
सूर ने ब्रज के ग्रामीण, सरल, प्रेममय जीवन का चित्र खींचा। गोप-गोपियों के सहज जीवन के माध्यम से उन्होंने बताया कि भक्ति के लिए शास्त्रज्ञान नहीं, निर्मल हृदय चाहिए। वात्सल्य और शृंगार के वे बेजोड़ कवि हैं।
| कवि | धारा / शाखा | प्रमुख रचना | भाषा |
|---|---|---|---|
| कबीरदास | निर्गुण – ज्ञानाश्रयी | बीजक | सधुक्कड़ी |
| जायसी | निर्गुण – प्रेमाश्रयी (सूफी) | पद्मावत | अवधी |
| तुलसीदास | सगुण – रामभक्ति | रामचरितमानस | अवधी, ब्रज |
| सूरदास | सगुण – कृष्णभक्ति | सूरसागर | ब्रजभाषा |
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) भक्तिकाल के प्रमुख कवियों – कबीर, जायसी, तुलसी और सूर – के जीवन दर्शन की तुलनात्मक विवेचना कीजिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) तुलसीदास के जीवन परिचय एवं सामाजिक चिंतन पर प्रकाश डालिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) कबीर का सामाजिक चिंतन – टिप्पणी लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) जायसी का सूफी दर्शन – टिप्पणी लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) सूरदास और पुष्टिमार्ग – टिप्पणी लिखिए।