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हिन्दी शब्द रचना बोध BAHIN Major T-6-103

RTMNU BA Semester 3 · Hindi Language (हिन्दी भाषा) · 2 units · हर इकाई के नोट्स

UniversityRTMNU – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
CourseB.A. (Four Year UG Programme, NEP 2020) – Hindi Language (हिन्दी भाषा)
SemesterSemester III
Paper codeBAHIN Major T-6-103
Paper titleहिन्दी शब्द रचना बोध
CategoryMajor T-6 · Major (DSC) – मुख्य विषय
Credits2 credits (theory, 2 घंटे प्रति सप्ताह)
Marksसैद्धांतिक परीक्षा: 40 अंक + आंतरिक मूल्यांकन (CIE) 10 अंक = 50; उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 20
Syllabusas per official RTMNU NEP 2020 syllabus 2024-25 (B.A. Hindi Language Sem I to IV, लागू सत्र 2024-25 से)

इकाइयों के विषय आधिकारिक RTMNU पाठ्यक्रम के अनुसार हैं। Official RTMNU syllabus page · All RTMNU BA Hindi papers

Units

  1. 1इकाई I: शब्द रचना का आशयNotes
  2. 2इकाई II: शब्द निर्माण की प्रक्रियाNotes

RTMNU BA Sem 3 · BAHIN Major T-6-103 · इकाई I

इकाई I: शब्द रचना का आशय

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • शब्द का अर्थ तथा महत्व
  • भाषा के तत्व
  • शब्दों के भेद
  • शब्द संरचना

शब्द का अर्थ तथा महत्व

एक या अधिक वर्णों के मेल से बनी स्वतंत्र और सार्थक ध्वनि-इकाई को शब्द कहते हैं। जैसे – क् + अ + म् + अ + ल् + अ = 'कमल'। यदि वर्णों का मेल अर्थ न दे (जैसे 'लमक'), तो वह शब्द नहीं कहलाता।

शब्द जब वाक्य में व्याकरण के नियमों के अनुसार प्रयोग होता है, तब उसे पद कहते हैं। 'राम' शब्द है, 'राम ने' पद है।

शब्द का महत्व

  • शब्द भाषा की नींव है; शब्दों से ही वाक्य और पूरी भाषा बनती है।
  • शब्द विचारों और भावों का वाहक है।
  • सही शब्द-चयन से भाषा प्रभावशाली, स्पष्ट और शुद्ध बनती है।
  • शब्द भंडार जितना समृद्ध होगा, अभिव्यक्ति उतनी सशक्त होगी।
  • शब्दों में समाज का इतिहास और संस्कृति छिपी रहती है – जैसे तत्सम, तद्भव और विदेशी शब्द हिन्दी के इतिहास को बताते हैं।
  • साहित्य, विज्ञान, प्रशासन, मीडिया – हर क्षेत्र की अपनी शब्दावली होती है।

भाषा के तत्व

भाषा कुछ मूल तत्वों से मिलकर बनती है। प्रमुख तत्व ये हैं –

  1. ध्वनि / वर्ण – भाषा की सबसे छोटी इकाई। हिन्दी वर्णमाला में स्वर और व्यंजन।
  2. शब्द – वर्णों का सार्थक समूह।
  3. पद – वाक्य में प्रयुक्त शब्द।
  4. वाक्य – पूरा विचार प्रकट करने वाला पद-समूह।
  5. अर्थ – भाषा की आत्मा; इसके बिना ध्वनि निरर्थक है।
  6. व्याकरण – भाषा को शुद्ध और व्यवस्थित रखने वाले नियम।
  7. लिपि – भाषा को लिखित रूप देने के चिह्न; हिन्दी की लिपि देवनागरी है।
याद रखें: वर्ण → शब्द → पद → वाक्य → अनुच्छेद। यह भाषा की इकाइयों का क्रम है।

शब्दों के भेद

हिन्दी शब्दों का वर्गीकरण चार आधारों पर किया जाता है।

1. उत्पत्ति (स्रोत) के आधार पर

भेदअर्थउदाहरण
तत्समसंस्कृत से बिना बदले आए शब्दअग्नि, क्षेत्र, सूर्य
तद्भवसंस्कृत से रूप बदलकर आए शब्दआग, खेत, सूरज
देशजलोक-बोलियों से बने शब्दपगड़ी, लोटा, खिड़की
विदेशी (आगत)दूसरी भाषाओं से आए शब्दस्कूल, डॉक्टर (अंग्रेज़ी); किताब, अदालत (अरबी-फ़ारसी)
संकरदो भाषाओं के अंशों से बने शब्दरेलगाड़ी, टिकटघर

2. रचना (बनावट) के आधार पर

  • रूढ़ – जिनके खंड सार्थक न हों: घर, पानी, कल।
  • यौगिक – दो सार्थक खंडों से बने: विद्यालय (विद्या + आलय), पाठशाला।
  • योगरूढ़ – यौगिक होकर भी किसी विशेष अर्थ में रूढ़: पंकज (कीचड़ में जन्मा, पर अर्थ केवल कमल), लंबोदर (गणेश)।

3. प्रयोग / रूपांतरण के आधार पर

  • विकारी – लिंग, वचन, कारक से रूप बदलते हैं: संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया।
  • अविकारी (अव्यय) – रूप नहीं बदलते: क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक, निपात।

4. अर्थ के आधार पर

  • एकार्थी – एक अर्थ: पुस्तक।
  • अनेकार्थी – कई अर्थ: कर, हार।
  • पर्यायवाची – समान अर्थ: जल, नीर, पानी।
  • विलोम – उल्टा अर्थ: दिन–रात।

शब्द संरचना

शब्द किन अंशों से बना है, इसका विश्लेषण शब्द संरचना कहलाता है। हर शब्द के केंद्र में एक मूल शब्द या धातु होता है, जिसमें आगे-पीछे अंश जुड़कर नए शब्द बनते हैं।

संरचनाउदाहरण
उपसर्ग + मूल शब्दअ + ज्ञान = अज्ञान
मूल शब्द + प्रत्ययमीठा + आस = मिठास
उपसर्ग + मूल + प्रत्ययअ + सफल + ता = असफलता
शब्द + शब्द (समास)राज + पुत्र = राजपुत्र
संधिहिम + आलय = हिमालय
पुनरुक्तिधीरे-धीरे, घर-घर

शब्द संरचना जानने से विद्यार्थी नए शब्दों का अर्थ स्वयं समझ सकता है, वर्तनी शुद्ध लिख सकता है और अपना शब्द भंडार बढ़ा सकता है।

शब्द भंडार बढ़ाने के उपाय

  • नियमित रूप से समाचारपत्र, पत्रिकाएँ और साहित्यिक पुस्तकें पढ़ना।
  • नए शब्द मिलने पर शब्दकोश में उसका अर्थ, लिंग और प्रयोग देखना।
  • उपसर्ग, प्रत्यय और समास की सहायता से एक मूल शब्द से कई शब्द बनाने का अभ्यास करना, जैसे 'ज्ञान' से अज्ञान, ज्ञानी, विज्ञान, ज्ञानवान।
  • पर्यायवाची और विलोम शब्दों की सूची बनाकर याद करना।
  • बोलचाल और लेखन में नए शब्दों का सही संदर्भ में प्रयोग करना।
परीक्षा टिप: 'शब्दों के भेद' वाले प्रश्न में चारों आधार – उत्पत्ति, रचना, प्रयोग और अर्थ – लिखें और हर भेद के कम से कम दो उदाहरण दें। तालिका बनाने से उत्तर साफ़ और आकर्षक लगता है।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) शब्द का अर्थ और महत्व स्पष्ट करते हुए भाषा के तत्वों पर प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी शब्दों के भेदों का विभिन्न आधारों पर सोदाहरण वर्गीकरण कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) तत्सम और तद्भव शब्दों में अंतर उदाहरण सहित लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) रूढ़, यौगिक और योगरूढ़ शब्द समझाइए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) शब्द संरचना पर टिप्पणी लिखिए।

RTMNU BA Sem 3 · BAHIN Major T-6-103 · इकाई II

इकाई II: शब्द निर्माण की प्रक्रिया

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • उपसर्ग-प्रत्यय की सहायता से शब्द निर्माण
  • संधि-समास की सहायता से शब्द निर्माण
  • शब्द शक्ति का महत्व
  • अभिधा, लक्षणा, व्यंजना शब्द शक्ति का परिचय

उपसर्ग-प्रत्यय की सहायता से शब्द निर्माण

उपसर्ग

जो शब्दांश किसी शब्द के पहले जुड़कर उसके अर्थ में परिवर्तन या विशेषता लाते हैं, उन्हें उपसर्ग कहते हैं। उपसर्ग का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता।

उपसर्ग का स्रोतउपसर्गबने शब्द
संस्कृत (तत्सम)अति, अनु, अप, प्र, वि, सम्, सु, दुर्अत्यधिक, अनुशासन, अपमान, प्रगति, विज्ञान, संयोग, सुयोग, दुर्गुण
हिन्दी (तद्भव)अ, अन, नि, भर, उनअछूता, अनपढ़, निडर, भरपेट, उनतीस
उर्दू-फ़ारसीबे, ना, ला, गैर, हमबेईमान, नापसंद, लाजवाब, गैरहाज़िर, हमदर्द
अंग्रेज़ीसब, हेड, वाइससब-इंस्पेक्टर, हेडमास्टर, वाइस-चांसलर

प्रत्यय

जो शब्दांश किसी शब्द या धातु के बाद जुड़कर नया शब्द बनाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहते हैं। प्रत्यय दो प्रकार के होते हैं –

  • कृत् प्रत्यय – क्रिया की धातु के बाद जुड़ते हैं; बने शब्द 'कृदंत' कहलाते हैं: लिख + अक = लेखक, पढ़ + आई = पढ़ाई, चल + अन = चलन।
  • तद्धित प्रत्यय – संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण के बाद जुड़ते हैं: मानव + ता = मानवता, बच्चा + पन = बचपन, समाज + इक = सामाजिक, दूध + वाला = दूधवाला।

एक ही शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों हो सकते हैं – अ + न्याय + ई = अन्यायी, सु + गंध + इत = सुगंधित।

संधि-समास की सहायता से शब्द निर्माण

संधि

दो वर्णों के पास आने से उनमें जो परिवर्तन या मेल होता है, उसे संधि कहते हैं। इसके तीन भेद हैं –

  • स्वर संधि – दो स्वरों का मेल: विद्या + आलय = विद्यालय (दीर्घ), सुर + इंद्र = सुरेंद्र (गुण), एक + एक = एकैक (वृद्धि), इति + आदि = इत्यादि (यण्)।
  • व्यंजन संधि – व्यंजन का स्वर या व्यंजन से मेल: जगत् + ईश = जगदीश, सत् + जन = सज्जन।
  • विसर्ग संधि – विसर्ग का मेल: मनः + योग = मनोयोग, निः + चल = निश्चल।

संधि के शब्दों को अलग करना संधि-विच्छेद कहलाता है।

समास

दो या अधिक शब्दों को मिलाकर, बीच के विभक्ति-चिह्न हटाकर, एक छोटा नया शब्द बनाना समास है। बने शब्द को समस्त पद और उसे खोलने को समास-विग्रह कहते हैं।

समासपहचानउदाहरण (विग्रह)
अव्ययीभावपहला पद अव्यय, प्रधानप्रतिदिन (हर दिन), यथाशक्ति
तत्पुरुषदूसरा पद प्रधान, कारक चिह्न लुप्तराजपुत्र (राजा का पुत्र)
कर्मधारयविशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेयनीलकमल (नीला है जो कमल)
द्विगुपहला पद संख्यावाचकत्रिभुवन (तीन भुवनों का समूह)
द्वंद्वदोनों पद प्रधानमाता-पिता (माता और पिता)
बहुव्रीहिकोई तीसरा अर्थ प्रधानदशानन (दस हैं आनन जिसके – रावण)
याद रखें: संधि में वर्णों का मेल होता है, समास में शब्दों का।

शब्द शक्ति का महत्व

शब्द में छिपे अर्थ को प्रकट करने वाली शक्ति को शब्द शक्ति कहते हैं। एक ही शब्द कभी सीधा अर्थ देता है, कभी लक्ष्य अर्थ और कभी छिपा हुआ व्यंग्य अर्थ।

  • शब्द शक्ति से भाषा के गहरे अर्थ समझ में आते हैं।
  • मुहावरे, लोकोक्तियाँ और काव्य का सौंदर्य शब्द शक्ति पर ही टिका है।
  • विज्ञापन, पत्रकारिता और भाषण में प्रभाव पैदा करने में सहायक।
  • वक्ता के वास्तविक आशय तक पहुँचने में मदद करती है।

अभिधा, लक्षणा, व्यंजना शब्द शक्ति का परिचय

शब्द शक्तिशब्दअर्थ
अभिधावाचकवाच्यार्थ (मुख्यार्थ)
लक्षणालक्षकलक्ष्यार्थ
व्यंजनाव्यंजकव्यंग्यार्थ

1. अभिधा

जिस शक्ति से शब्द का सीधा, मुख्य, कोशगत अर्थ निकले, वह अभिधा है। उदाहरण – 'गाय घास खा रही है।' यहाँ हर शब्द अपना सामान्य अर्थ दे रहा है।

2. लक्षणा

जब मुख्य अर्थ से बात न बने (मुख्यार्थ बाधा) और उससे जुड़ा दूसरा अर्थ लिया जाए, तो लक्षणा शक्ति होती है। इसकी शर्तें – मुख्यार्थ में बाधा, मुख्यार्थ से संबंध, और रूढ़ि या प्रयोजन।

  • 'मोहन शेर है' – मोहन सचमुच शेर नहीं; अर्थ है बहादुर।
  • 'वह आँखों का तारा है' – अर्थ है बहुत प्यारा।

भेद – रूढ़ि लक्षणा (परंपरा से चली आई) और प्रयोजनवती लक्षणा (किसी विशेष उद्देश्य से)।

3. व्यंजना

जब अभिधा और लक्षणा दोनों के बाद भी एक छिपा हुआ, विशेष अर्थ निकले, तो वह व्यंजना है। यह अर्थ वक्ता, श्रोता और प्रसंग पर निर्भर करता है। उदाहरण – 'सूरज डूब गया।' किसान के लिए अर्थ – काम समेटो; विद्यार्थी के लिए – पढ़ाई शुरू करो; माँ के लिए – दीया जलाओ।

भेद – शाब्दी व्यंजना (किसी विशेष शब्द पर आधारित) और आर्थी व्यंजना (अर्थ पर आधारित)।

परीक्षा टिप: तीनों शब्द शक्तियों की परिभाषा, शब्द-अर्थ के नाम और एक-एक उदाहरण तालिका में दें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) उपसर्ग और प्रत्यय की सहायता से शब्द निर्माण की प्रक्रिया को उदाहरण सहित समझाइए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) शब्द शक्ति का महत्व बताते हुए अभिधा, लक्षणा और व्यंजना का सोदाहरण परिचय दीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) संधि और समास में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) कृत् और तद्धित प्रत्यय पर टिप्पणी लिखिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) लक्षणा शब्द शक्ति पर टिप्पणी लिखिए।