पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- भाषा की परिभाषा, लक्षण, भाषा विज्ञान स्वरूप और व्याप्ति
- भाषिक संरचना, उद्देश्य
- भाषा विज्ञान की विभिन्न अध्ययन पद्धतियाँ
भाषा की परिभाषा, लक्षण, भाषा विज्ञान : स्वरूप और व्याप्ति
भाषा का अर्थ
'भाषा' शब्द संस्कृत की 'भाष्' धातु से बना है, जिसका अर्थ है – बोलना या कहना। अतः भाषा वह साधन है जिससे मनुष्य बोलकर अपने विचार, भाव और अनुभव दूसरों तक पहुँचाता है।
परिभाषाएँ
- कामताप्रसाद गुरु के अनुसार भाषा वह साधन है जिसके द्वारा मनुष्य अपने विचार दूसरों पर प्रकट करता है और दूसरों के विचार स्वयं समझता है।
- हेनरी स्वीट के अनुसार ध्वनियों (उच्चरित शब्दों) के द्वारा विचारों की अभिव्यक्ति ही भाषा है।
- सरल परिभाषा – भाषा मुख से उच्चरित यादृच्छिक ध्वनि-प्रतीकों की वह व्यवस्था है, जिसके द्वारा एक समाज के लोग आपस में विचारों का आदान-प्रदान करते हैं।
भाषा के लक्षण (विशेषताएँ)
- भाषा सामाजिक वस्तु है – भाषा समाज में जन्म लेती है, समाज में ही सीखी और प्रयोग की जाती है।
- भाषा अर्जित संपत्ति है – भाषा पैतृक (जन्मजात) नहीं होती। बच्चा जिस समाज में पलता है, वही भाषा सीखता है।
- भाषा परिवर्तनशील है – संस्कृत से पालि, प्राकृत, अपभ्रंश होते हुए हिन्दी बनी। यह परिवर्तन का ही प्रमाण है।
- भाषा परंपरागत है – भाषा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है।
- भाषा यादृच्छिक है – शब्द और अर्थ का संबंध मनमाना (समाज द्वारा माना हुआ) है। 'पानी' को अंग्रेज़ी में 'वॉटर' कहते हैं।
- भाषा का कोई अंतिम रूप नहीं – वह सदा विकसित होती रहती है।
- भाषा कठिनता से सरलता की ओर जाती है – जैसे 'कर्म' से 'काम'।
- भाषा व्यवस्थित (संरचनात्मक) होती है – ध्वनि, शब्द, पद, वाक्य के नियम होते हैं।
भाषा विज्ञान का स्वरूप
भाषा का वैज्ञानिक अध्ययन ही भाषा विज्ञान (Linguistics) है। इसमें भाषा की उत्पत्ति, विकास, संरचना, ध्वनि, शब्द, वाक्य और अर्थ का क्रमबद्ध अध्ययन किया जाता है। हिन्दी में इसे भाषाशास्त्र, शब्दशास्त्र, तुलनात्मक भाषाशास्त्र आदि नामों से भी पुकारा गया।
- भाषा विज्ञान विज्ञान है, क्योंकि यह निरीक्षण, वर्गीकरण और निष्कर्ष की पद्धति अपनाता है।
- यह कला नहीं है, क्योंकि इसका उद्देश्य सुंदर रचना करना नहीं, बल्कि तथ्य जानना है।
- यह भौतिक विज्ञान जैसा पूर्ण निश्चित विज्ञान नहीं, बल्कि सामाजिक विज्ञान है, क्योंकि भाषा मनुष्य के व्यवहार पर निर्भर है।
भाषा विज्ञान की व्याप्ति (क्षेत्र)
| अंग | अध्ययन का विषय |
|---|---|
| ध्वनि / स्वन विज्ञान | भाषा की ध्वनियाँ, उच्चारण, ध्वनि परिवर्तन |
| रूप विज्ञान | शब्द से पद बनने की प्रक्रिया, रूपिम |
| वाक्य विज्ञान | वाक्य की रचना, पदक्रम, वाक्य के भेद |
| अर्थ विज्ञान | शब्द-अर्थ संबंध, अर्थ परिवर्तन |
| शब्द विज्ञान / व्युत्पत्ति | शब्दों का इतिहास और स्रोत |
| अन्य क्षेत्र | भाषा की उत्पत्ति, भाषाओं का वर्गीकरण, लिपि, बोली विज्ञान, समाज भाषा विज्ञान |
भाषिक संरचना, उद्देश्य
हर भाषा एक व्यवस्था है। छोटी इकाइयाँ मिलकर बड़ी इकाई बनाती हैं। इसी क्रम को भाषिक संरचना कहते हैं।
- स्वन / ध्वनि – सबसे छोटी उच्चरित इकाई, जैसे क्, अ।
- अक्षर – एक साँस के झटके में बोली गई ध्वनि-इकाई, जैसे 'क', 'मल'।
- रूपिम / शब्द – अर्थ वाली सबसे छोटी इकाई, जैसे 'लड़का'।
- पद – वाक्य में प्रयुक्त शब्द, जैसे 'लड़के ने'।
- पदबंध – पदों का समूह, जैसे 'मेरा छोटा भाई'।
- उपवाक्य और वाक्य – पूरा विचार प्रकट करने वाली इकाई।
- प्रोक्ति – वाक्यों का संबद्ध समूह (अनुच्छेद, संवाद)।
इन सब स्तरों पर अर्थ जुड़ा रहता है। इसलिए भाषा की संरचना के दो पक्ष माने जाते हैं – अभिव्यक्ति पक्ष (ध्वनि, शब्द, वाक्य) और कथ्य पक्ष (अर्थ)।
भाषा विज्ञान के उद्देश्य
- भाषा की उत्पत्ति और विकास की जानकारी प्राप्त करना।
- भाषा की ध्वनि, शब्द, वाक्य और अर्थ की व्यवस्था समझना।
- भाषाओं की तुलना करके उनके परिवार (भाषा-परिवार) तय करना।
- शुद्ध उच्चारण, भाषा शिक्षण, अनुवाद और कोश निर्माण में सहायता करना।
- प्राचीन ग्रंथों और संस्कृति को समझने में सहायता करना।
भाषा विज्ञान की विभिन्न अध्ययन पद्धतियाँ
भाषा का अध्ययन कई दृष्टियों से किया जाता है। प्रमुख पद्धतियाँ ये हैं –
- वर्णनात्मक पद्धति – किसी एक भाषा का, किसी एक समय पर, जैसा है वैसा वर्णन। जैसे आज की खड़ी बोली हिन्दी की ध्वनियों का अध्ययन। इसे एककालिक अध्ययन भी कहते हैं।
- ऐतिहासिक पद्धति – किसी भाषा के विकास का अलग-अलग कालों में अध्ययन। जैसे संस्कृत → प्राकृत → अपभ्रंश → हिन्दी। इसे कालक्रमिक अध्ययन भी कहते हैं।
- तुलनात्मक पद्धति – दो या अधिक भाषाओं की तुलना करके समानता खोजना। जैसे संस्कृत 'पितृ', फ़ारसी 'पिदर', अंग्रेज़ी 'फ़ादर' – इससे भारोपीय परिवार का पता चला।
- व्यतिरेकी पद्धति – दो भाषाओं के अंतर पर ध्यान, जैसे हिन्दी और मराठी के लिंग-प्रयोग का अंतर। भाषा शिक्षण और अनुवाद में उपयोगी।
- संरचनात्मक पद्धति – भाषा की इकाइयों (स्वनिम, रूपिम, वाक्य) के आपसी संबंधों का अध्ययन।
- प्रायोगिक / अनुप्रयुक्त पद्धति – भाषा ज्ञान का प्रयोग शिक्षण, अनुवाद, कंप्यूटर आदि में।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) भाषा की परिभाषा देते हुए उसके प्रमुख लक्षणों पर प्रकाश डालिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) भाषा विज्ञान का स्वरूप स्पष्ट करते हुए उसकी व्याप्ति और अध्ययन पद्धतियों का विवेचन कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) भाषिक संरचना पर टिप्पणी लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) भाषा विज्ञान के उद्देश्य लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) तुलनात्मक अध्ययन पद्धति पर टिप्पणी लिखिए।