पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- आधुनिक हिन्दी का विकास क्रम
- नागरी लिपि एवं वर्तनी का स्वरूप तथा विकास
- नागरी लिपि की विशेषताएँ
- मानक हिन्दी वर्तनी
आधुनिक हिन्दी का विकास क्रम
प्रयोजनमूलक हिन्दी (Functional Hindi) हिन्दी का वह रूप है जो किसी विशेष काम या प्रयोजन के लिए प्रयोग होता है – जैसे कार्यालय, बैंक, विज्ञापन, मीडिया, विज्ञान, व्यापार और कानून। साहित्यिक हिन्दी का उद्देश्य रस और सौंदर्य है, जबकि प्रयोजनमूलक हिन्दी का उद्देश्य स्पष्ट सूचना और व्यावहारिक काम है। इस रूप की नींव आधुनिक खड़ी बोली हिन्दी के विकास से पड़ी।
विकास के प्रमुख चरण
| चरण | मुख्य बातें |
|---|---|
| आरंभिक गद्य (लगभग 1800 के आसपास) | कोलकाता के फोर्ट विलियम कॉलेज (1800) में गद्य लेखन; लल्लूलाल (प्रेमसागर), सदल मिश्र; इंशा अल्ला खाँ की 'रानी केतकी की कहानी'; सदासुखलाल। |
| पत्रकारिता का आरंभ | पहला हिन्दी समाचारपत्र 'उदन्त मार्तण्ड' (1826, कोलकाता, संपादक जुगलकिशोर शुक्ल)। समाचारपत्रों से गद्य जनता तक पहुँचा। |
| भारतेन्दु युग | भारतेन्दु हरिश्चंद्र और उनके मंडल ने खड़ी बोली गद्य को सरल और जीवंत बनाया; नाटक, निबंध, पत्रिकाएँ। |
| द्विवेदी युग | महावीरप्रसाद द्विवेदी ने 'सरस्वती' पत्रिका के माध्यम से व्याकरण और वर्तनी की शुद्धता पर बल दिया; खड़ी बोली कविता की भाषा भी बनी। |
| स्वतंत्रता आंदोलन | हिन्दी राष्ट्रीय एकता और जनसंपर्क की भाषा बनी। |
| स्वतंत्रता के बाद | 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिन्दी को संघ की राजभाषा स्वीकार किया (अनुच्छेद 343)। राजभाषा अधिनियम 1963; पारिभाषिक शब्दावली का निर्माण। |
| वर्तमान | बैंक, रेलवे, विज्ञापन, टीवी, इंटरनेट, सोशल मीडिया – हर क्षेत्र में प्रयोजनमूलक हिन्दी का विस्तार। |
प्रयोजनमूलक हिन्दी की विशेषताएँ
- स्पष्टता, संक्षिप्तता और एकार्थकता।
- विशेष क्षेत्र की पारिभाषिक शब्दावली।
- भावुकता नहीं, तथ्यात्मकता।
- निश्चित प्रारूप (पत्र, सूचना, विज्ञापन, रिपोर्ट)।
नागरी लिपि एवं वर्तनी का स्वरूप तथा विकास
हिन्दी, संस्कृत, मराठी, नेपाली आदि भाषाएँ देवनागरी (नागरी) लिपि में लिखी जाती हैं। भारत की अधिकांश लिपियों की तरह नागरी का मूल स्रोत ब्राह्मी लिपि है।
विकास क्रम
ब्राह्मी → गुप्त लिपि → कुटिल लिपि → प्राचीन नागरी → देवनागरी। मध्यकाल में शिलालेखों, ताम्रपत्रों और पांडुलिपियों में इसका प्रयोग बढ़ा। छापाखाने के आने पर अक्षरों के रूप स्थिर होने लगे।
वर्तनी का स्वरूप
किसी शब्द को लिखते समय वर्णों का जो क्रम और रूप अपनाया जाता है, उसे वर्तनी (Spelling) कहते हैं। उच्चारण और लेखन में निकटता नागरी की शक्ति है, पर क्षेत्रीय उच्चारण-भेद और छपाई की अलग परंपराओं से वर्तनी में अनेकरूपता आई (जैसे गयी/गई, हिंदी/हिन्दी)। इसे दूर करने के लिए स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय हिन्दी निदेशालय ने देवनागरी लिपि और वर्तनी के मानकीकरण का काम किया। कंप्यूटर युग में यूनिकोड ने देवनागरी को डिजिटल रूप में एक समान बना दिया।
नागरी लिपि की विशेषताएँ
- वैज्ञानिक वर्णक्रम – पहले स्वर, फिर व्यंजन; व्यंजन उच्चारण स्थान के क्रम में (कंठ से होंठ तक) – क, च, ट, त, प वर्ग।
- एक ध्वनि के लिए एक चिह्न – अधिकतर जैसा बोला जाता है, वैसा लिखा जाता है।
- मात्रा व्यवस्था – स्वर व्यंजन के साथ मात्रा के रूप में जुड़ते हैं: क, का, कि, की।
- पर्याप्त वर्ण – घोष-अघोष, अल्पप्राण-महाप्राण, नासिक्य ध्वनियों के अलग वर्ण।
- शिरोरेखा – शब्दों को एक इकाई के रूप में जोड़ती है।
- अनेक भाषाओं के लिए उपयुक्त – नुक्ता आदि के प्रयोग से विदेशी ध्वनियाँ (ज़, फ़) भी लिखी जाती हैं।
कुछ सीमाएँ – 'इ' की मात्रा व्यंजन से पहले लिखी जाती है पर उच्चारण बाद में; 'र' के कई रूप (कर्म, प्रकाश, ट्रक); संयुक्ताक्षर कुछ जटिल; शिरोरेखा से लिखने की गति थोड़ी कम।
मानक हिन्दी वर्तनी
पूरे देश में एक समान, शुद्ध और स्वीकृत वर्तनी को मानक वर्तनी कहते हैं। इसके मुख्य नियम –
- पंचमाक्षर के स्थान पर अनुस्वार – संबंध, हिंदी, अंत। पर जहाँ पंचमाक्षर दोहराया जाए या बाद में दूसरा वर्ग हो, वहाँ वही रहे – अन्न, सम्मेलन, अन्य।
- अनुस्वार और चंद्रबिंदु में भेद – हंस (पक्षी), हँस (हँसना)। शिरोरेखा के ऊपर मात्रा होने पर चंद्रबिंदु की जगह बिंदु: मैं, नहीं।
- विभक्ति चिह्न – संज्ञा से अलग लिखें: राम ने, घर में; सर्वनाम से मिलाकर: उसने, आपको।
- ए/ये, ई/यी – मानक रूप: गए, गई, नई, लिए।
- हल् चिह्न – तत्सम शब्दों में आवश्यक: जगत्, विद्वान्।
- विदेशी ध्वनियाँ – अंग्रेज़ी 'ऑ' के लिए अर्धचंद्र: डॉक्टर, कॉलेज।
- संयुक्त वर्ण – खड़ी पाई वाले व्यंजनों का पाई हटाकर संयोग: प्यास, ख्याति।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) प्रयोजनमूलक हिन्दी का स्वरूप स्पष्ट करते हुए आधुनिक हिन्दी के विकास क्रम पर प्रकाश डालिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) नागरी लिपि के विकास और उसकी विशेषताओं का विवेचन कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) मानक हिन्दी वर्तनी के नियम लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) वर्तनी किसे कहते हैं? उसकी अनेकरूपता के कारण लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) नागरी लिपि की सीमाओं पर टिप्पणी लिखिए।