पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- रीतिकाल – पृष्ठभूमि, काल निर्धारण, नामकरण
- सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
- प्रमुख प्रवृत्तियाँ – रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध, रीतिमुक्त
रीतिकाल – पृष्ठभूमि, काल निर्धारण, नामकरण
"रीति" शब्द का अर्थ
संस्कृत काव्यशास्त्र में आचार्य वामन ने "रीति" को काव्य की आत्मा कहा था। पर हिन्दी में "रीति" शब्द का अर्थ कुछ अलग है। हिन्दी में रीति का अर्थ है – काव्य रचना की पद्धति या नियम, यानी रस, अलंकार, नायिका-भेद, छंद आदि काव्यांगों का शास्त्रीय विवेचन। जिन ग्रंथों में काव्य के लक्षण और उदाहरण दिए गए, उन्हें रीति ग्रंथ या लक्षण ग्रंथ कहा गया।
काल निर्धारण
आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने रीतिकाल का समय संवत् 1700 से 1900 तक माना है। इसे उत्तर मध्यकाल भी कहा जाता है। ईसवी सन् में यह लगभग सत्रहवीं शताब्दी के मध्य से उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य तक का समय है।
नामकरण
| नाम | विद्वान | आधार |
|---|---|---|
| रीतिकाल | आचार्य रामचंद्र शुक्ल | रीति ग्रंथों और लक्षण-उदाहरण पद्धति की प्रधानता |
| अलंकृत काल | मिश्रबंधु | अलंकारों और सजावट की प्रवृत्ति |
| श्रृंगार काल | आचार्य विश्वनाथप्रसाद मिश्र | श्रृंगार रस की प्रधानता |
| कलाकाल | डॉ. रमाशंकर शुक्ल "रसाल" | कलात्मकता और चमत्कार पर बल |
सबसे अधिक मान्य नाम रीतिकाल है, क्योंकि इस काल के अधिकांश कवियों ने रीति को ध्यान में रखकर ही रचना की। "श्रृंगार काल" नाम भी उचित माना जाता है, पर उसमें भूषण जैसे वीर रस के कवि और नीति कवि छूट जाते हैं।
राजनैतिक पृष्ठभूमि
- शाहजहाँ के समय मुगल वैभव चरम पर था। औरंगज़ेब के बाद मुगल साम्राज्य कमज़ोर होने लगा।
- छोटे-छोटे राजा और नवाब स्वतंत्र होने लगे। मराठा, सिख और जाट शक्तियाँ उभरीं।
- नादिरशाह और अहमदशाह अब्दाली के आक्रमण हुए। अंत में अंग्रेज़ों का प्रभुत्व बढ़ा।
- कवि राजदरबारों पर आश्रित थे। वे आश्रयदाता को प्रसन्न करने के लिए रचना करते थे।
सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
सामाजिक पृष्ठभूमि
- समाज दो वर्गों में बँटा था – विलासी सामंत वर्ग और शोषित सामान्य जनता।
- राजाओं और सामंतों का जीवन भोग-विलास में डूबा था। अनेक रानियाँ और रखैलें रखना सामान्य था।
- स्त्री को भोग की वस्तु समझा जाने लगा था। इसका प्रभाव नायिका-भेद और नख-शिख वर्णन पर पड़ा।
- जाति-प्रथा, अंधविश्वास और रूढ़ियाँ बढ़ी हुई थीं।
आर्थिक पृष्ठभूमि
- किसानों और कारीगरों पर भारी कर थे। जनता गरीबी में जी रही थी।
- धन का बड़ा भाग राजदरबारों की शान-शौकत पर खर्च होता था।
- कवियों को आश्रयदाताओं से धन, जागीर और सम्मान मिलता था, इसलिए उनकी कविता दरबारी रुचि के अनुसार ढली।
सांस्कृतिक एवं धार्मिक पृष्ठभूमि
- भक्तिकाल की राधा-कृष्ण भक्ति धीरे-धीरे लौकिक श्रृंगार का साधन बन गई।
- संगीत, चित्रकला (राजपूत और पहाड़ी शैली), स्थापत्य में भी अलंकरण और सजावट की प्रवृत्ति थी।
- संस्कृत काव्यशास्त्र (रस, अलंकार, ध्वनि) का प्रभाव हिन्दी कवियों पर पड़ा।
- ब्रजभाषा पूरे उत्तर भारत की काव्य-भाषा बन गई।
प्रमुख प्रवृत्तियाँ – रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध, रीतिमुक्त
रीति से संबंध के आधार पर रीतिकाल के कवियों को तीन वर्गों में बाँटा जाता है।
| धारा | अर्थ | प्रमुख कवि |
|---|---|---|
| रीतिबद्ध | जिन्होंने लक्षण ग्रंथ लिखे; पहले काव्यांग का लक्षण, फिर उदाहरण में अपनी कविता | केशवदास, चिंतामणि, मतिराम, देव, भिखारीदास, पद्माकर, जसवंत सिंह |
| रीतिसिद्ध | लक्षण ग्रंथ नहीं लिखे, पर रीति के पूरे ज्ञान के साथ कविता रची | बिहारी, सेनापति, रसनिधि |
| रीतिमुक्त | रीति के बंधन से मुक्त होकर हृदय की सच्ची अनुभूति से कविता लिखी | घनानंद, बोधा, आलम, ठाकुर |
रीतिकाल की सामान्य प्रवृत्तियाँ
- श्रृंगार रस की प्रधानता – संयोग और वियोग, नायिका-भेद, नख-शिख वर्णन।
- लक्षण ग्रंथों की रचना – रस, अलंकार, छंद, नायिका-भेद पर ग्रंथ।
- आश्रयदाताओं की प्रशंसा – दरबारी कविता।
- अलंकारों और चमत्कार पर बल – कलापक्ष प्रबल, भावपक्ष अपेक्षाकृत कमज़ोर।
- मुक्तक शैली – कवित्त, सवैया और दोहा प्रमुख छंद।
- ब्रजभाषा का उत्कर्ष – मधुर, कोमल और परिष्कृत भाषा।
- वीर, नीति और भक्ति काव्य भी गौण रूप में – भूषण (वीर), वृंद और गिरिधर कविराय (नीति)।
- प्रकृति चित्रण – प्रायः उद्दीपन रूप में; षड्ऋतु और बारहमासा वर्णन।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) रीतिकाल की राजनैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का वर्णन करते हुए रीतिकाल के नामकरण की समस्या पर विचार कीजिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) रीतिकाल की प्रमुख प्रवृत्तियों का परिचय देते हुए रीतिबद्ध, रीतिसिद्ध और रीतिमुक्त काव्यधाराओं का अंतर स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) "रीति" शब्द का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) रीतिमुक्त काव्य की विशेषताएँ लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) रीतिकाल के विभिन्न नामों पर टिप्पणी लिखिए।