पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- रश्मिरथी [खंडकाव्य] – रामधारीसिंह दिनकर
रामधारीसिंह दिनकर – जीवन परिचय
रामधारीसिंह "दिनकर" आधुनिक हिन्दी कविता के ओजस्वी कवि हैं। उनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगूसराय जिले के सिमरिया गाँव में हुआ। उनका निधन 24 अप्रैल 1974 को हुआ। वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे। उनकी देशभक्ति और ओजपूर्ण कविता के कारण उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है।
प्रमुख रचनाएँ
- काव्य – रेणुका, हुंकार, रसवंती, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, उर्वशी, परशुराम की प्रतीक्षा।
- गद्य – संस्कृति के चार अध्याय, अर्धनारीश्वर।
सम्मान
- संस्कृति के चार अध्याय के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार।
- उर्वशी के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार।
- पद्मभूषण।
रश्मिरथी – रचना परिचय
रश्मिरथी दिनकर का प्रसिद्ध खंडकाव्य है, जो 1952 में प्रकाशित हुआ। इसमें सात सर्ग हैं। इसकी कथा महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन पर आधारित है। "रश्मिरथी" का अर्थ है – सूर्य की किरणों के रथ पर सवार, अर्थात् सूर्यपुत्र। कर्ण सूर्य का पुत्र था, इसलिए उसे रश्मिरथी कहा गया।
दिनकर ने कर्ण को एक उपेक्षित, किंतु महान नायक के रूप में प्रस्तुत किया है। समाज ने उसे "सूतपुत्र" कहकर अपमानित किया, पर उसने अपनी वीरता, दानशीलता और मित्रता से अपना स्थान बनाया।
रश्मिरथी – कथावस्तु (सर्गानुसार कथासार)
प्रथम सर्ग – रंगभूमि में कर्ण
हस्तिनापुर में कौरव-पांडव राजकुमारों का शस्त्र-प्रदर्शन होता है। अर्जुन अपनी कला दिखाता है। तभी एक अज्ञात युवक कर्ण आकर अर्जुन को चुनौती देता है। कृपाचार्य उससे उसका कुल और जाति पूछते हैं। कर्ण अपमानित होता है। दुर्योधन उसकी प्रतिभा पहचानकर उसे अंगदेश का राजा बना देता है। यहीं से कर्ण और दुर्योधन की अटूट मित्रता शुरू होती है। रंगभूमि में बैठी कुंती अपने पुत्र को पहचानकर मन ही मन व्याकुल होती है।
द्वितीय सर्ग – परशुराम के आश्रम में
कर्ण विद्या प्राप्त करने के लिए परशुराम के आश्रम में जाता है। परशुराम केवल ब्राह्मणों को शिक्षा देते थे, इसलिए कर्ण अपनी जाति छिपाता है। एक दिन गुरु कर्ण की जंघा पर सिर रखकर सोते हैं। एक कीड़ा कर्ण की जंघा काटता है, खून बहता है, पर कर्ण गुरु की नींद न टूटे इसलिए पीड़ा सहता है। जागने पर परशुराम समझ जाते हैं कि इतना धैर्य ब्राह्मण में नहीं हो सकता। वे क्रोधित होकर शाप देते हैं कि सबसे ज़रूरी समय पर वह यह विद्या भूल जाएगा।
तृतीय सर्ग – कृष्ण का संधि प्रस्ताव और कर्ण
पांडवों के वनवास के बाद कृष्ण शांति-दूत बनकर हस्तिनापुर जाते हैं और पांडवों के लिए केवल पाँच गाँव माँगते हैं। दुर्योधन मना कर देता है और कृष्ण को बंदी बनाने का प्रयास करता है; तब कृष्ण अपना विराट रूप दिखाते हैं। लौटते समय कृष्ण कर्ण को उसके जन्म का रहस्य बताते हैं कि वह कुंती का ज्येष्ठ पुत्र है। वे उसे पांडवों की ओर आने और राज्य पाने का प्रस्ताव देते हैं। कर्ण दुर्योधन की मित्रता के कारण यह प्रस्ताव ठुकरा देता है।
चतुर्थ सर्ग – कवच-कुंडल का दान
कर्ण अपनी दानशीलता के लिए प्रसिद्ध था। अर्जुन की रक्षा के लिए इंद्र ब्राह्मण का वेश धरकर कर्ण से उसके जन्मजात कवच और कुंडल माँगते हैं। कर्ण जानते हुए भी कि इनके बिना उसकी रक्षा कठिन होगी, उन्हें दान कर देता है। उसकी दानवीरता से प्रभावित होकर इंद्र उसे एक अमोघ शक्ति देते हैं, जिसका प्रयोग वह एक ही बार कर सकता था।
पंचम सर्ग – माता कुंती और कर्ण
कुंती कर्ण से मिलने जाती है और उसे बताती है कि वह उसकी माँ है। वह कर्ण से पांडवों के पक्ष में आने की विनती करती है। कर्ण माँ को दुःख और उलाहने के साथ उत्तर देता है कि जब उसे सबसे अधिक आवश्यकता थी, तब माँ ने उसे त्याग दिया। फिर भी वह वचन देता है कि अर्जुन को छोड़कर वह किसी पांडव का वध नहीं करेगा, जिससे कुंती के पाँच पुत्र बने रहेंगे।
षष्ठ सर्ग – युद्ध और शक्ति का प्रयोग
महाभारत का युद्ध शुरू होता है। भीष्म के आहत होने के बाद कर्ण युद्ध में उतरता है। युद्ध में भीम का पुत्र घटोत्कच कौरव सेना का भारी संहार करता है। विवश होकर कर्ण इंद्र की दी हुई शक्ति का प्रयोग घटोत्कच पर कर देता है, जो उसने अर्जुन के लिए बचाकर रखी थी।
सप्तम सर्ग – कर्ण का अंत
कर्ण और अर्जुन का निर्णायक युद्ध होता है। शल्य कर्ण के सारथी हैं, पर वे बार-बार उसका मनोबल तोड़ते हैं। युद्ध के बीच कर्ण के रथ का पहिया धरती में धँस जाता है और परशुराम के शाप के कारण वह विद्या भी भूल जाता है। जब कर्ण पहिया निकाल रहा होता है, तब कृष्ण के संकेत पर अर्जुन उस पर बाण चलाता है और कर्ण वीरगति पाता है। अंत में कृष्ण भी कर्ण की महानता को स्वीकार करते हैं।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) रश्मिरथी खंडकाव्य की कथावस्तु सर्गानुसार संक्षेप में लिखिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) रामधारीसिंह दिनकर का साहित्यिक परिचय देते हुए रश्मिरथी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) रश्मिरथी के कृष्ण-कर्ण संवाद (तृतीय सर्ग) पर टिप्पणी लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) कुंती-कर्ण संवाद का सार लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) परशुराम के शाप की घटना संक्षेप में लिखिए।