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प्रयोजनमूलक हिन्दी: सिद्धांत और प्रयोग BAHIN T3-102

RTMNU BA Semester 2 · Hindi Language (हिन्दी भाषा) · 4 units · हर इकाई के नोट्स

UniversityRTMNU – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
CourseB.A. (Four Year UG Programme, NEP 2020) – Hindi Language (हिन्दी भाषा)
SemesterSemester II
Paper codeBAHIN T3-102
Paper titleप्रयोजनमूलक हिन्दी: सिद्धांत और प्रयोग
CategoryMajor T-3 · Major (DSC) – मुख्य विषय
Credits4 credits (theory, 4 घंटे प्रति सप्ताह)
Marksसैद्धांतिक परीक्षा 3 घंटे: 80 अंक + आंतरिक मूल्यांकन (CIE) 20 अंक = 100; उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 40
Syllabusas per official RTMNU NEP 2020 syllabus 2024-25 (B.A. Hindi Language Sem I to IV, लागू सत्र 2024-25 से)

इकाइयों के विषय आधिकारिक RTMNU पाठ्यक्रम के अनुसार हैं। Official RTMNU syllabus page · All RTMNU BA Hindi papers

Units

  1. 1इकाई I: प्रयोजनमूलक हिन्दीNotes
  2. 2इकाई II: पारिभाषिक शब्दावलीNotes
  3. 3इकाई III: राजभाषा हिन्दीNotes
  4. 4इकाई IV: प्रयोजनमूलक हिन्दी के विभिन्न रूपNotes

RTMNU BA Sem 2 · BAHIN T3-102 · इकाई I

इकाई I: प्रयोजनमूलक हिन्दी

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • प्रयोजनमूलक हिन्दी : अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप
  • प्रयोजनमूलक हिन्दी की विशेषताएँ एवं उपयोगिता
  • प्रयोजनमूलक हिन्दी की विभिन्न प्रयुक्तियाँ एवं क्षेत्र

प्रयोजनमूलक हिन्दी : अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप

अर्थ

‘प्रयोजनमूलक’ शब्द दो शब्दों से बना है – ‘प्रयोजन’ और ‘मूलक’। प्रयोजन का अर्थ है उद्देश्य या काम, और मूलक का अर्थ है आधारित। अतः प्रयोजनमूलक हिन्दी वह हिन्दी है जो किसी निश्चित काम या उद्देश्य को पूरा करने के लिए प्रयोग की जाती है। अंग्रेज़ी में इसे Functional Hindi कहते हैं।

हिन्दी के दो मुख्य रूप माने जाते हैं – (1) सामान्य या साहित्यिक हिन्दी, जो भावों की अभिव्यक्ति और आनंद के लिए है; (2) प्रयोजनमूलक हिन्दी, जो कार्यालय, बैंक, व्यापार, विज्ञान, मीडिया आदि में रोज़ी-रोटी और कामकाज की भाषा है। इसे ‘कामकाजी हिन्दी’ भी कहते हैं।

परिभाषा

  • जिस हिन्दी का प्रयोग किसी विशेष क्षेत्र के कार्य को पूरा करने के लिए निश्चित शब्दावली और निश्चित शैली में होता है, उसे प्रयोजनमूलक हिन्दी कहते हैं।
  • प्रयोजनमूलक हिन्दी जीवन की व्यावहारिक आवश्यकताओं से जुड़ी हिन्दी है; इसका लक्ष्य सौंदर्य नहीं, बल्कि सही और स्पष्ट सूचना देना है।

हिन्दी में ‘प्रयोजनमूलक हिन्दी’ शब्द को लोकप्रिय बनाने का श्रेय प्रायः मोटूरि सत्यनारायण को दिया जाता है।

स्वरूप

  • व्यावहारिक स्वरूप – यह दैनिक कामकाज की भाषा है।
  • विषयनिष्ठ स्वरूप – इसमें लेखक की निजी भावना नहीं होती, केवल तथ्य होते हैं।
  • पारिभाषिक स्वरूप – हर क्षेत्र की अपनी तकनीकी शब्दावली होती है, जैसे बैंक में ‘जमा’, ‘आहरण’, ‘ऋण’।
  • मानक स्वरूप – इसमें व्याकरण और वर्तनी का मानक रूप अपनाया जाता है।
  • बहुरूपी स्वरूप – क्षेत्र बदलने पर इसकी शब्दावली और शैली बदल जाती है।
साहित्यिक हिन्दीप्रयोजनमूलक हिन्दी
भाव और कल्पना प्रधानतथ्य और सूचना प्रधान
अलंकार, प्रतीक, बिंब का प्रयोगसीधी, सरल, एकार्थी भाषा
एक शब्द के कई अर्थ संभवहर शब्द का निश्चित अर्थ
लेखक की शैली व्यक्तिगतशैली निश्चित और औपचारिक

प्रयोजनमूलक हिन्दी की विशेषताएँ एवं उपयोगिता

विशेषताएँ

  1. स्पष्टता – बात सीधे और साफ़ ढंग से कही जाती है, ताकि कोई भ्रम न हो।
  2. एकार्थकता – शब्द का एक ही अर्थ होता है। जैसे ‘अधिसूचना’ का अर्थ केवल Notification है।
  3. संक्षिप्तता – कम शब्दों में पूरी बात कही जाती है।
  4. पारिभाषिक शब्दावली – हर क्षेत्र के अपने तकनीकी शब्द होते हैं।
  5. वस्तुनिष्ठता – भावुकता नहीं, तटस्थता रहती है।
  6. औपचारिकता – कार्यालयीन भाषा में ‘महोदय’, ‘सादर’, ‘भवदीय’ जैसे निश्चित प्रयोग होते हैं।
  7. कर्मवाच्य की प्रधानता – जैसे ‘आदेश जारी किया जाता है’, ‘स्वीकृति दी जाती है’।
  8. ग्रहणशीलता – अंग्रेज़ी व अन्य भाषाओं के प्रचलित शब्द अपनाने की क्षमता, जैसे ‘बजट’, ‘टिकट’, ‘रेडियो’।

उपयोगिता

  • रोज़गार – अनुवादक, हिन्दी अधिकारी, पत्रकार, उद्घोषक, विज्ञापन-लेखक आदि पदों के लिए यह आवश्यक है।
  • राजभाषा के रूप में – केंद्र सरकार के कार्यालयों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने में सहायक।
  • जनसंपर्क – सरकार और जनता के बीच संवाद जनता की भाषा में होता है।
  • ज्ञान-विज्ञान का प्रसार – विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा का ज्ञान हिन्दी में पहुँचता है।
  • व्यापार और बाज़ार – विज्ञापन, बैंकिंग, बीमा आदि में ग्राहक तक पहुँचने का माध्यम।
  • राष्ट्रीय एकता – देश के विभिन्न भागों के बीच संपर्क भाषा का कार्य।

प्रयोजनमूलक हिन्दी की विभिन्न प्रयुक्तियाँ एवं क्षेत्र

प्रयुक्ति का अर्थ

प्रयुक्ति (Register) का अर्थ है – किसी विशेष क्षेत्र या परिस्थिति में भाषा का विशेष रूप। जैसे डॉक्टर, वकील, बैंक कर्मचारी और खेल-उद्घोषक एक ही हिन्दी बोलते हैं, पर उनकी शब्दावली और वाक्य-रचना अलग होती है। यही भाषा की प्रयुक्तियाँ हैं।

प्रमुख प्रयुक्तियाँ / क्षेत्र

क्षेत्रप्रयुक्ति की पहचानउदाहरण शब्द
कार्यालयीनऔपचारिक, कर्मवाच्यटिप्पणी, मसौदा, परिपत्र, ज्ञापन
बैंकिंगसंख्यात्मक, सटीकखाता, जमा, आहरण, ब्याज
विधि (कानून)जटिल, सूक्ष्मयाचिका, अभियुक्त, साक्ष्य, निर्णय
विज्ञान-तकनीकीतर्कपूर्ण, सूत्रबद्धपरमाणु, ऊर्जा, संगणक
वाणिज्य-व्यापारसंक्षिप्त, बाज़ारूलाभ, हानि, निविदा, बीजक
जनसंचारसरल, आकर्षकसमाचार, सुर्खी, प्रसारण
खेलउत्साहपूर्णचौका, गोल, पारी, विजेता

इनके अलावा चिकित्सा, कृषि, शिक्षा, रेलवे, डाक, पर्यटन, विज्ञापन और सूचना प्रौद्योगिकी भी प्रयोजनमूलक हिन्दी के क्षेत्र हैं। हर क्षेत्र की अपनी पारिभाषिक शब्दावली विकसित हो चुकी है।

परीक्षा टिप: प्रयोजनमूलक हिन्दी के प्रश्न में अर्थ + परिभाषा + साहित्यिक हिन्दी से अंतर की तालिका + विशेषताएँ + प्रयुक्तियों के उदाहरण अवश्य लिखें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) प्रयोजनमूलक हिन्दी का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसकी परिभाषा एवं स्वरूप पर प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) प्रयोजनमूलक हिन्दी की विशेषताओं और उपयोगिता का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) साहित्यिक हिन्दी और प्रयोजनमूलक हिन्दी में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) प्रयुक्ति किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए – प्रयोजनमूलक हिन्दी के प्रमुख क्षेत्र।

RTMNU BA Sem 2 · BAHIN T3-102 · इकाई II

इकाई II: पारिभाषिक शब्दावली

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • पारिभाषिक शब्दावली का अर्थ एवं परिभाषा
  • पारिभाषिक शब्दावली का इतिहास एवं विविध दृष्टिकोण
  • पारिभाषिक शब्दावली निर्माण के सिद्धांत
  • पारिभाषिक शब्दावली निर्माण की प्रक्रिया

पारिभाषिक शब्दावली का अर्थ एवं परिभाषा

‘पारिभाषिक’ शब्द ‘परिभाषा’ से बना है। जिस शब्द की परिभाषा निश्चित हो और जो किसी विशेष विषय या क्षेत्र में एक निश्चित अर्थ में प्रयोग हो, उसे पारिभाषिक शब्द (Technical Term) कहते हैं। ऐसे शब्दों के समूह को पारिभाषिक शब्दावली (Terminology) कहते हैं।

परिभाषा

  • पारिभाषिक शब्द वह शब्द है जिसका अर्थ किसी ज्ञान-क्षेत्र में स्पष्ट रूप से परिभाषित और सीमित होता है।
  • सामान्य शब्द का अर्थ प्रसंग के अनुसार बदल सकता है, पर पारिभाषिक शब्द का अर्थ उस क्षेत्र में स्थिर रहता है।

उदाहरण: ‘रस’ सामान्य भाषा में फल का रस है, पर काव्यशास्त्र में ‘रस’ एक पारिभाषिक शब्द है। इसी प्रकार ‘शक्ति’ सामान्य शब्द है, पर भौतिकी में ‘शक्ति’ (Power) का निश्चित अर्थ है।

शब्दों के प्रकार

प्रकारअर्थउदाहरण
सामान्य शब्ददैनिक बोलचाल के शब्दपानी, घर, रोटी
अर्ध-पारिभाषिक शब्दसामान्य और विशेष दोनों अर्थवेतन, आवेदन, खाता
पूर्ण पारिभाषिक शब्दकेवल विशेष अर्थअधिसूचना, परमाणु, अभियुक्त

विशेषताएँ

  • एक शब्द – एक अर्थ।
  • संक्षिप्त और सरल हो।
  • उच्चारण में सहज हो।
  • उससे नए शब्द (व्युत्पन्न शब्द) बन सकें।
  • पूरे देश में एक समान प्रयोग हो।

पारिभाषिक शब्दावली का इतिहास एवं विविध दृष्टिकोण

इतिहास

  • प्राचीन काल – संस्कृत में आयुर्वेद, ज्योतिष, गणित, व्याकरण और काव्यशास्त्र की समृद्ध पारिभाषिक शब्दावली थी।
  • मध्यकाल – मुगल शासन में प्रशासन की भाषा फ़ारसी रही। अदालत, ज़मीन और राजस्व के अनेक शब्द – जैसे अर्ज़ी, दस्तावेज़, तहसील, मालगुज़ारी – हिन्दी में आए।
  • अंग्रेज़ी काल – अंग्रेज़ी प्रशासन और शिक्षा से अंग्रेज़ी शब्द बढ़े। उन्नीसवीं सदी के अंत में काशी नागरी प्रचारिणी सभा जैसी संस्थाओं ने वैज्ञानिक शब्दों के हिन्दी रूप बनाने का प्रयास किया।
  • स्वतंत्रता के बाद – हिन्दी के राजभाषा बनने पर बड़े पैमाने पर शब्द-निर्माण हुआ। डॉ. रघुवीर ने अंग्रेज़ी-हिन्दी कोश बनाकर हज़ारों शब्द गढ़े। भारत सरकार ने 1961 में वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की स्थापना की, जिसने लाखों मानक शब्द तैयार किए।

विविध दृष्टिकोण (संप्रदाय)

  1. शुद्धतावादी / संस्कृतनिष्ठ दृष्टिकोण – सभी शब्द संस्कृत धातुओं से बनाए जाएँ। प्रमुख समर्थक डॉ. रघुवीर। उदाहरण: Department – विभाग, Secretary – सचिव। कमी: कई शब्द कठिन और बोझिल हो गए।
  2. अंतरराष्ट्रीयतावादी / ग्रहणवादी दृष्टिकोण – विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय शब्द ज्यों-के-त्यों ले लिए जाएँ। उदाहरण: ऑक्सीजन, रेडियो, मीटर।
  3. लोकवादी / हिन्दुस्तानी दृष्टिकोण – जनता की बोलचाल के सरल शब्द अपनाए जाएँ, चाहे वे उर्दू या बोलियों के हों। उदाहरण: अदालत, ज़िला, दफ़्तर।
  4. समन्वयवादी / मध्यमार्गी दृष्टिकोण – ऊपर के तीनों का संतुलन। शब्द सरल, प्रचलित और अर्थ में सटीक हो। आज भारत सरकार यही नीति अपनाती है।

पारिभाषिक शब्दावली निर्माण के सिद्धांत

  • एकरूपता – एक अवधारणा के लिए पूरे देश में एक ही शब्द।
  • स्पष्टता और एकार्थकता – शब्द का एक निश्चित अर्थ हो।
  • सरलता और संक्षिप्तता – शब्द छोटा और बोलने में आसान हो।
  • अंतरराष्ट्रीय शब्दों का ग्रहण – रासायनिक तत्व, इकाइयाँ, सूत्र आदि अंतरराष्ट्रीय रूप में ही रखे जाएँ, आवश्यकता होने पर लिप्यंतरण करें।
  • प्रचलित शब्दों का सम्मान – जो शब्द जनता में चल पड़े हैं, उन्हें बदलना ठीक नहीं; जैसे रेल, टिकट, बैंक।
  • भारतीय भाषाओं से ग्रहण – अन्य भारतीय भाषाओं के उपयुक्त शब्द लिए जा सकते हैं।
  • व्युत्पादन क्षमता – शब्द से विशेषण, क्रिया आदि बन सकें; जैसे प्रशासन – प्रशासक – प्रशासनिक।

पारिभाषिक शब्दावली निर्माण की प्रक्रिया

  1. अवधारणा की पहचान – मूल अंग्रेज़ी शब्द का अर्थ और प्रयोग-क्षेत्र समझना।
  2. उपलब्ध शब्दों की खोज – संस्कृत, हिन्दी, बोलियों और अन्य भारतीय भाषाओं में पहले से कोई शब्द है या नहीं, देखना।
  3. शब्द-निर्माण की विधियाँ:
    • ग्रहण – शब्द जैसे-का-तैसा लेना (कंप्यूटर, वोल्ट)।
    • अनुकूलन – उच्चारण के अनुसार ढालना (Academy – अकादमी)।
    • अनुवाद – अर्थ के आधार पर शब्द बनाना (Sub-committee – उपसमिति)।
    • नव-निर्माण – उपसर्ग, प्रत्यय, समास से नया शब्द गढ़ना (आकाशवाणी, दूरदर्शन)।
  4. विशेषज्ञ समिति द्वारा विचार – भाषाविद् और विषय-विशेषज्ञ मिलकर शब्द तय करते हैं।
  5. मानकीकरण और प्रकाशन – आयोग शब्दावलियाँ और कोश प्रकाशित करता है।
  6. प्रयोग और संशोधन – व्यवहार में कठिन शब्दों को समय-समय पर सुधारा जाता है।
याद रखें: वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग – स्थापना 1961। चार दृष्टिकोण – शुद्धतावादी, अंतरराष्ट्रीयतावादी, लोकवादी, समन्वयवादी।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) पारिभाषिक शब्दावली का अर्थ और परिभाषा स्पष्ट करते हुए उसके इतिहास पर प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) पारिभाषिक शब्दावली निर्माण के सिद्धांतों और प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) पारिभाषिक शब्दावली निर्माण के विविध दृष्टिकोण लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) सामान्य शब्द और पारिभाषिक शब्द में अंतर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए – वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग।

RTMNU BA Sem 2 · BAHIN T3-102 · इकाई III

इकाई III: राजभाषा हिन्दी

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • राजभाषा हिन्दी संकल्पना, अर्थ एवं स्वरूप
  • राजभाषा हिन्दी: संवैधानिक प्रावधान
  • राजभाषा संबंधी अधिनियम
  • राजभाषा हिन्दी संबंधी शिक्षण योजनाएँ

राजभाषा हिन्दी संकल्पना, अर्थ एवं स्वरूप

अर्थ और संकल्पना

राजभाषा (Official Language) का अर्थ है – राज-काज की भाषा, अर्थात वह भाषा जिसमें सरकार का प्रशासनिक कार्य, पत्र-व्यवहार, आदेश, नियम और अभिलेख तैयार होते हैं। भारत के संविधान ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को संघ की राजभाषा घोषित किया है। संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को यह निर्णय लिया, इसलिए हर वर्ष 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है।

राष्ट्रभाषाराजभाषा
पूरे राष्ट्र की भावनात्मक और सांस्कृतिक पहचानसरकारी कामकाज की भाषा
जनता द्वारा स्वाभाविक रूप से स्वीकृतसंविधान और कानून द्वारा निर्धारित
क्षेत्र व्यापक – जीवन के सभी क्षेत्रक्षेत्र सीमित – प्रशासन, न्याय, संसद

स्वरूप

  • औपचारिक, स्पष्ट और निश्चित भाषा।
  • पारिभाषिक शब्दावली का प्रयोग – अधिसूचना, परिपत्र, ज्ञापन, अनुमोदन।
  • कर्मवाच्य और निर्वैयक्तिक शैली – ‘सूचित किया जाता है कि...’।
  • द्विभाषिकता – अनेक दस्तावेज़ हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों में।
  • सरलता की ओर झुकाव – सरकार ने सरल हिन्दी के प्रयोग पर बल दिया है।

राजभाषा हिन्दी: संवैधानिक प्रावधान

संविधान के भाग 17 में अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा संबंधी प्रावधान हैं।

अनुच्छेदविषय
343संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिन्दी; अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप; संविधान लागू होने से 15 वर्ष तक अंग्रेज़ी का प्रयोग जारी
344राजभाषा के लिए आयोग और संसदीय समिति
345राज्य की राजभाषा या राजभाषाएँ
346राज्यों के बीच तथा राज्य और संघ के बीच पत्र-व्यवहार की भाषा
347किसी राज्य की जनसंख्या के एक भाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध
348उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालयों तथा अधिनियमों की भाषा
349भाषा संबंधी कुछ विधियाँ बनाने के लिए विशेष प्रक्रिया
350शिकायत निवारण के लिए अभ्यावेदन की भाषा; 350क – प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा; 350ख – भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी
351हिन्दी भाषा के विकास के लिए निदेश

इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 120 (संसद की भाषा) और 210 (राज्य विधानमंडल की भाषा) भी भाषा से जुड़े हैं। आठवीं अनुसूची में इस समय 22 भाषाएँ हैं।

याद रखें: अनुच्छेद 351 हिन्दी के विकास का ‘निदेश’ देता है – हिन्दी भारत की सामासिक संस्कृति की अभिव्यक्ति का माध्यम बने, और संस्कृत व अन्य भारतीय भाषाओं से शब्द ग्रहण करे।

राजभाषा संबंधी अधिनियम

  • राजभाषा अधिनियम 1963 – 15 वर्ष की अवधि समाप्त होने के बाद भी हिन्दी के साथ अंग्रेज़ी का प्रयोग जारी रखने की व्यवस्था। धारा 3(3) के अनुसार संकल्प, सामान्य आदेश, नियम, अधिसूचना, प्रेस विज्ञप्ति, संविदा, करार, लाइसेंस, निविदा आदि हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों में जारी करना अनिवार्य। धारा 4 के अंतर्गत संसदीय राजभाषा समिति का प्रावधान।
  • राजभाषा (संशोधन) अधिनियम 1967 – अंग्रेज़ी के प्रयोग को अनिश्चित काल तक जारी रखने की व्यवस्था।
  • राजभाषा संकल्प 1968 – हिन्दी के प्रसार के लिए वार्षिक कार्यक्रम बनाने और त्रिभाषा सूत्र अपनाने का संकल्प।
  • राजभाषा नियम 1976 – देश को क्षेत्र ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ में बाँटा गया और हर क्षेत्र के साथ पत्र-व्यवहार की भाषा तय की गई।
क्षेत्रस्थिति
कहिन्दी भाषी राज्य, जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान
खमहाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब तथा कुछ केंद्रशासित प्रदेश
गशेष राज्य

इन नियमों के पालन के लिए गृह मंत्रालय के अधीन राजभाषा विभाग कार्य करता है।

राजभाषा हिन्दी संबंधी शिक्षण योजनाएँ

केंद्र सरकार के कर्मचारियों को हिन्दी में काम करने योग्य बनाने के लिए अनेक प्रशिक्षण योजनाएँ चलाई जाती हैं:

  • हिन्दी शिक्षण योजना – हिन्दी न जानने वाले कर्मचारियों के लिए पाठ्यक्रम: प्रबोध (प्रारंभिक), प्रवीण (मध्यम) और प्राज्ञ (उच्च)। बाद में पारंगत पाठ्यक्रम भी जोड़ा गया।
  • हिन्दी टंकण और आशुलिपि प्रशिक्षण – टाइपिस्ट और स्टेनोग्राफ़र के लिए।
  • केंद्रीय हिन्दी प्रशिक्षण संस्थान – गहन पाठ्यक्रम और पत्राचार पाठ्यक्रम।
  • केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो – अनुवादकों को प्रशिक्षण और सरकारी दस्तावेज़ों का अनुवाद।
  • कंप्यूटर पर हिन्दी प्रशिक्षण – यूनिकोड, हिन्दी टाइपिंग टूल्स और ई-शिक्षण (जैसे ‘लीला’ सॉफ़्टवेयर)।
  • प्रोत्साहन योजनाएँ – परीक्षा पास करने पर नकद पुरस्कार, वेतन-वृद्धि; हिन्दी पखवाड़ा; राजभाषा पुरस्कार।
परीक्षा टिप: संवैधानिक प्रावधान के उत्तर में अनुच्छेद 343 से 351 की तालिका अवश्य बनाएँ – इससे पूरे अंक मिलते हैं।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) राजभाषा हिन्दी की संकल्पना स्पष्ट करते हुए उसके संवैधानिक प्रावधानों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) राजभाषा अधिनियम 1963 तथा राजभाषा नियम 1976 का परिचय देते हुए राजभाषा हिन्दी की शिक्षण योजनाओं पर प्रकाश डालिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए – अनुच्छेद 343 और 351।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) हिन्दी शिक्षण योजना के अंतर्गत चलने वाले पाठ्यक्रमों का परिचय दीजिए।

RTMNU BA Sem 2 · BAHIN T3-102 · इकाई IV

इकाई IV: प्रयोजनमूलक हिन्दी के विभिन्न रूप

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • मीडिया की भाषा – दृश्य, श्राव्य तथा अन्य
  • बैंकिंग की भाषा
  • विज्ञान की भाषा
  • वाणिज्य एवं व्यवसाय की भाषा

मीडिया की भाषा – दृश्य, श्राव्य तथा अन्य

मीडिया अर्थात जनसंचार माध्यम – समाचार-पत्र, रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा और इंटरनेट। इनकी भाषा जनता तक जल्दी और प्रभावी ढंग से सूचना पहुँचाने वाली होती है।

(क) मुद्रित माध्यम (प्रिंट) की भाषा

  • पढ़ने के लिए लिखी जाती है; पाठक दोबारा पढ़ सकता है।
  • शीर्षक छोटा और आकर्षक – जैसे ‘महँगाई की मार’।
  • उलटा पिरामिड शैली – सबसे महत्त्वपूर्ण बात पहले।
  • छह ककार – क्या, कौन, कब, कहाँ, क्यों, कैसे – का उत्तर।

(ख) श्राव्य माध्यम (रेडियो) की भाषा

  • कान के लिए लिखी जाती है; श्रोता दोबारा नहीं सुन सकता।
  • छोटे, सरल वाक्य; कठिन संख्याओं को गोल करके बोलना – ‘लगभग दो करोड़’।
  • बोलचाल की आत्मीय भाषा, उच्चारण की शुद्धता, ध्वनि-प्रभाव का सहारा।

(ग) दृश्य-श्राव्य माध्यम (टेलीविज़न, सिनेमा) की भाषा

  • शब्द और चित्र साथ चलते हैं; चित्र जो दिखाता है, उसे दोहराना नहीं।
  • संक्षिप्त, नाटकीय और बोलचाल की भाषा; हिन्दी-अंग्रेज़ी मिश्रित (हिंग्लिश) प्रयोग अधिक।

(घ) अन्य – नव माध्यम (इंटरनेट, सोशल मीडिया)

  • अत्यंत संक्षिप्त भाषा, हैशटैग, इमोजी, संक्षिप्ताक्षर।
  • रोमन लिपि में हिन्दी का प्रयोग भी; तात्कालिकता प्रमुख।

मीडिया की भाषा की सामान्य विशेषताएँ

  • सरलता और सुबोधता – साधारण पढ़ा-लिखा व्यक्ति भी समझ सके।
  • तात्कालिकता – ताज़ा घटना को तुरंत प्रस्तुत करना।
  • आकर्षण – शीर्षक, नारे और दृश्य से ध्यान खींचना।
  • विश्वसनीयता और तटस्थता – तथ्य की जाँच, पक्षपात से बचना।
  • मिश्रित शब्दावली – हिन्दी, उर्दू और अंग्रेज़ी के प्रचलित शब्दों का मेल।

उदाहरण के लिए, अख़बार लिखता है – ‘शहर में भारी बारिश, कई इलाक़ों में जलभराव’; वही समाचार रेडियो पर – ‘आज शहर में भारी बारिश हुई। कई इलाक़ों में पानी भर गया है।’ टीवी पर दृश्य दिखाते हुए केवल – ‘आप देख सकते हैं, सड़कों पर घुटनों तक पानी है।’

बैंकिंग की भाषा

बैंक जनता के धन से जुड़ी संस्था है, इसलिए उसकी भाषा अत्यंत सटीक, स्पष्ट और विश्वसनीय होनी चाहिए। एक शब्द की गलती से आर्थिक हानि हो सकती है।

विशेषताएँ

  • पारिभाषिक शब्दावली की प्रधानता।
  • संख्याओं और राशियों की शुद्धता – अंकों और शब्दों दोनों में।
  • निश्चित प्रपत्र (फ़ॉर्म) – जमा-पर्ची, आहरण-पर्ची, खाता खोलने का फ़ॉर्म।
  • औपचारिक पत्र-व्यवहार – ‘आपके खाते में ... राशि जमा की गई है’।
  • ग्राहक के लिए सरलता – ग्रामीण ग्राहकों तक सेवा।
अंग्रेज़ीहिन्दी
Depositजमा
Withdrawalआहरण
Loanऋण
Interestब्याज
Overdraftओवरड्राफ़्ट / अधिविकर्ष
Chequeचेक / धनादेश
Fixed Depositसावधि जमा
Mortgageबंधक

वाक्य-नमूने: ‘कृपया अपने खाते का केवाईसी अद्यतन कराएँ।’ ‘आपका ऋण आवेदन स्वीकृत कर दिया गया है।’ ‘चेक अपर्याप्त निधि के कारण अनादृत हुआ।’

भारतीय रिज़र्व बैंक और सरकारी बैंकों में राजभाषा विभाग होते हैं, जो हिन्दी में प्रपत्र, पासबुक और ग्राहक-सेवा उपलब्ध कराते हैं। आजकल एटीएम, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई में भी हिन्दी का विकल्प मिलता है।

विज्ञान की भाषा

विज्ञान तर्क, प्रयोग और प्रमाण पर आधारित है, इसलिए उसकी भाषा भी तर्कपूर्ण और वस्तुनिष्ठ होती है।

विशेषताएँ

  1. एकार्थकता – हर शब्द का एक निश्चित अर्थ; जैसे ‘द्रव्यमान’ और ‘भार’ अलग-अलग हैं।
  2. तटस्थता – भावुकता नहीं।
  3. सूत्र और प्रतीक – H₂O जैसे सूत्र अंतरराष्ट्रीय रूप में।
  4. परिभाषा और वर्गीकरण की शैली।
  5. कर्मवाच्य – ‘परखनली को गर्म किया गया’।
  6. अंतरराष्ट्रीय शब्दों का ग्रहण – ऑक्सीजन, प्रोटीन, वोल्ट।

उदाहरण शब्द: परमाणु (Atom), अणु (Molecule), गुरुत्वाकर्षण (Gravitation), प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis), कोशिका (Cell)।

हिन्दी में विज्ञान लेखन की चुनौती – कठिन शब्दावली, पुस्तकों की कमी। उपाय – सरल भाषा, लोकप्रिय विज्ञान लेखन, मानक शब्दावली का प्रयोग।

वाणिज्य एवं व्यवसाय की भाषा

व्यापार, उद्योग, बाज़ार, आयात-निर्यात, शेयर बाज़ार और कर-व्यवस्था में प्रयुक्त भाषा वाणिज्यिक भाषा है।

विशेषताएँ

  • संक्षिप्त और सीधी भाषा – समय ही धन है।
  • व्यावसायिक पत्र – पूछताछ पत्र, आदेश पत्र, शिकायत पत्र, स्मरण पत्र।
  • संक्षिप्ताक्षर – जीएसटी, एफ़.ओ.बी., सी.आई.एफ़.
  • बाज़ार की भाषा में मुहावरे – ‘भाव चढ़े’, ‘बाज़ार लुढ़का’, ‘तेज़ी-मंदी’।
  • अंग्रेज़ी, फ़ारसी और देशी शब्दों का मेल – बही-खाता, हुंडी, बीमा, कमीशन।
अंग्रेज़ीहिन्दी
Invoiceबीजक
Tenderनिविदा
Profit / Lossलाभ / हानि
Shareअंश / शेयर
Import / Exportआयात / निर्यात
Partnershipसाझेदारी
परीक्षा टिप: हर प्रयुक्ति के उत्तर में – परिचय, 5-6 विशेषताएँ, उदाहरण-शब्दों की छोटी तालिका और एक-दो वाक्य के नमूने लिखें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) मीडिया की भाषा पर प्रकाश डालते हुए मुद्रित, श्राव्य और दृश्य-श्राव्य माध्यमों की भाषा का अंतर स्पष्ट कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) बैंकिंग की भाषा और विज्ञान की भाषा की विशेषताओं का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) रेडियो की भाषा की विशेषताएँ लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) वाणिज्य एवं व्यवसाय की भाषा की विशेषताएँ बताइए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए – सोशल मीडिया की भाषा।