पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- प्रयोजनमूलक हिन्दी : अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप
- प्रयोजनमूलक हिन्दी की विशेषताएँ एवं उपयोगिता
- प्रयोजनमूलक हिन्दी की विभिन्न प्रयुक्तियाँ एवं क्षेत्र
प्रयोजनमूलक हिन्दी : अर्थ, परिभाषा एवं स्वरूप
अर्थ
‘प्रयोजनमूलक’ शब्द दो शब्दों से बना है – ‘प्रयोजन’ और ‘मूलक’। प्रयोजन का अर्थ है उद्देश्य या काम, और मूलक का अर्थ है आधारित। अतः प्रयोजनमूलक हिन्दी वह हिन्दी है जो किसी निश्चित काम या उद्देश्य को पूरा करने के लिए प्रयोग की जाती है। अंग्रेज़ी में इसे Functional Hindi कहते हैं।
हिन्दी के दो मुख्य रूप माने जाते हैं – (1) सामान्य या साहित्यिक हिन्दी, जो भावों की अभिव्यक्ति और आनंद के लिए है; (2) प्रयोजनमूलक हिन्दी, जो कार्यालय, बैंक, व्यापार, विज्ञान, मीडिया आदि में रोज़ी-रोटी और कामकाज की भाषा है। इसे ‘कामकाजी हिन्दी’ भी कहते हैं।
परिभाषा
- जिस हिन्दी का प्रयोग किसी विशेष क्षेत्र के कार्य को पूरा करने के लिए निश्चित शब्दावली और निश्चित शैली में होता है, उसे प्रयोजनमूलक हिन्दी कहते हैं।
- प्रयोजनमूलक हिन्दी जीवन की व्यावहारिक आवश्यकताओं से जुड़ी हिन्दी है; इसका लक्ष्य सौंदर्य नहीं, बल्कि सही और स्पष्ट सूचना देना है।
हिन्दी में ‘प्रयोजनमूलक हिन्दी’ शब्द को लोकप्रिय बनाने का श्रेय प्रायः मोटूरि सत्यनारायण को दिया जाता है।
स्वरूप
- व्यावहारिक स्वरूप – यह दैनिक कामकाज की भाषा है।
- विषयनिष्ठ स्वरूप – इसमें लेखक की निजी भावना नहीं होती, केवल तथ्य होते हैं।
- पारिभाषिक स्वरूप – हर क्षेत्र की अपनी तकनीकी शब्दावली होती है, जैसे बैंक में ‘जमा’, ‘आहरण’, ‘ऋण’।
- मानक स्वरूप – इसमें व्याकरण और वर्तनी का मानक रूप अपनाया जाता है।
- बहुरूपी स्वरूप – क्षेत्र बदलने पर इसकी शब्दावली और शैली बदल जाती है।
| साहित्यिक हिन्दी | प्रयोजनमूलक हिन्दी |
|---|---|
| भाव और कल्पना प्रधान | तथ्य और सूचना प्रधान |
| अलंकार, प्रतीक, बिंब का प्रयोग | सीधी, सरल, एकार्थी भाषा |
| एक शब्द के कई अर्थ संभव | हर शब्द का निश्चित अर्थ |
| लेखक की शैली व्यक्तिगत | शैली निश्चित और औपचारिक |
प्रयोजनमूलक हिन्दी की विशेषताएँ एवं उपयोगिता
विशेषताएँ
- स्पष्टता – बात सीधे और साफ़ ढंग से कही जाती है, ताकि कोई भ्रम न हो।
- एकार्थकता – शब्द का एक ही अर्थ होता है। जैसे ‘अधिसूचना’ का अर्थ केवल Notification है।
- संक्षिप्तता – कम शब्दों में पूरी बात कही जाती है।
- पारिभाषिक शब्दावली – हर क्षेत्र के अपने तकनीकी शब्द होते हैं।
- वस्तुनिष्ठता – भावुकता नहीं, तटस्थता रहती है।
- औपचारिकता – कार्यालयीन भाषा में ‘महोदय’, ‘सादर’, ‘भवदीय’ जैसे निश्चित प्रयोग होते हैं।
- कर्मवाच्य की प्रधानता – जैसे ‘आदेश जारी किया जाता है’, ‘स्वीकृति दी जाती है’।
- ग्रहणशीलता – अंग्रेज़ी व अन्य भाषाओं के प्रचलित शब्द अपनाने की क्षमता, जैसे ‘बजट’, ‘टिकट’, ‘रेडियो’।
उपयोगिता
- रोज़गार – अनुवादक, हिन्दी अधिकारी, पत्रकार, उद्घोषक, विज्ञापन-लेखक आदि पदों के लिए यह आवश्यक है।
- राजभाषा के रूप में – केंद्र सरकार के कार्यालयों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ाने में सहायक।
- जनसंपर्क – सरकार और जनता के बीच संवाद जनता की भाषा में होता है।
- ज्ञान-विज्ञान का प्रसार – विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा का ज्ञान हिन्दी में पहुँचता है।
- व्यापार और बाज़ार – विज्ञापन, बैंकिंग, बीमा आदि में ग्राहक तक पहुँचने का माध्यम।
- राष्ट्रीय एकता – देश के विभिन्न भागों के बीच संपर्क भाषा का कार्य।
प्रयोजनमूलक हिन्दी की विभिन्न प्रयुक्तियाँ एवं क्षेत्र
प्रयुक्ति का अर्थ
प्रयुक्ति (Register) का अर्थ है – किसी विशेष क्षेत्र या परिस्थिति में भाषा का विशेष रूप। जैसे डॉक्टर, वकील, बैंक कर्मचारी और खेल-उद्घोषक एक ही हिन्दी बोलते हैं, पर उनकी शब्दावली और वाक्य-रचना अलग होती है। यही भाषा की प्रयुक्तियाँ हैं।
प्रमुख प्रयुक्तियाँ / क्षेत्र
| क्षेत्र | प्रयुक्ति की पहचान | उदाहरण शब्द |
|---|---|---|
| कार्यालयीन | औपचारिक, कर्मवाच्य | टिप्पणी, मसौदा, परिपत्र, ज्ञापन |
| बैंकिंग | संख्यात्मक, सटीक | खाता, जमा, आहरण, ब्याज |
| विधि (कानून) | जटिल, सूक्ष्म | याचिका, अभियुक्त, साक्ष्य, निर्णय |
| विज्ञान-तकनीकी | तर्कपूर्ण, सूत्रबद्ध | परमाणु, ऊर्जा, संगणक |
| वाणिज्य-व्यापार | संक्षिप्त, बाज़ारू | लाभ, हानि, निविदा, बीजक |
| जनसंचार | सरल, आकर्षक | समाचार, सुर्खी, प्रसारण |
| खेल | उत्साहपूर्ण | चौका, गोल, पारी, विजेता |
इनके अलावा चिकित्सा, कृषि, शिक्षा, रेलवे, डाक, पर्यटन, विज्ञापन और सूचना प्रौद्योगिकी भी प्रयोजनमूलक हिन्दी के क्षेत्र हैं। हर क्षेत्र की अपनी पारिभाषिक शब्दावली विकसित हो चुकी है।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) प्रयोजनमूलक हिन्दी का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसकी परिभाषा एवं स्वरूप पर प्रकाश डालिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) प्रयोजनमूलक हिन्दी की विशेषताओं और उपयोगिता का विस्तार से वर्णन कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) साहित्यिक हिन्दी और प्रयोजनमूलक हिन्दी में अंतर स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) प्रयुक्ति किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए – प्रयोजनमूलक हिन्दी के प्रमुख क्षेत्र।