MH State Board All Notes Free5th to 12th & BA, BSc, B.Com 🔍

खड़ी बोली हिन्दी BAHIN Minor T1-102

RTMNU BA Semester 2 · Hindi Language (हिन्दी भाषा) · 2 units · हर इकाई के नोट्स

UniversityRTMNU – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
CourseB.A. (Four Year UG Programme, NEP 2020) – Hindi Language (हिन्दी भाषा)
SemesterSemester II
Paper codeBAHIN Minor T1-102
Paper titleखड़ी बोली हिन्दी
CategoryMinor T-1 · Minor – गौण विषय (दूसरे Major वाले विद्यार्थियों के लिए)
Credits2 credits (theory, 2 घंटे प्रति सप्ताह)
Marksसैद्धांतिक परीक्षा: 40 अंक + आंतरिक मूल्यांकन (CIE) 10 अंक = 50; उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 20
Syllabusas per official RTMNU NEP 2020 syllabus 2024-25 (B.A. Hindi Language Sem I to IV, लागू सत्र 2024-25 से)

इकाइयों के विषय आधिकारिक RTMNU पाठ्यक्रम के अनुसार हैं। Official RTMNU syllabus page · All RTMNU BA Hindi papers

Units

  1. 1इकाई I: खड़ी बोली का इतिहासNotes
  2. 2इकाई II: खड़ी बोली गद्य : निबंधNotes

RTMNU BA Sem 2 · BAHIN Minor T1-102 · इकाई I

इकाई I: खड़ी बोली का इतिहास

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • भारतेन्दु युग [सामान्य परिचय]
  • द्विवेदी युग [सामान्य परिचय]
  • छायावाद युग [सामान्य परिचय]

खड़ी बोली मूलतः दिल्ली, मेरठ और आसपास के क्षेत्र (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) की बोली है, जिसे ‘कौरवी’ भी कहा जाता है। आज की मानक हिन्दी इसी खड़ी बोली पर आधारित है। अमीर ख़ुसरो की पहेलियों और मुकरियों में इसके आरंभिक रूप मिलते हैं। उन्नीसवीं सदी के आरंभ में फ़ोर्ट विलियम कॉलेज (कलकत्ता, 1800) से जुड़े लल्लूलाल (प्रेमसागर) और सदल मिश्र (नासिकेतोपाख्यान) तथा इंशा अल्ला ख़ाँ (रानी केतकी की कहानी) और सदासुखलाल ने खड़ी बोली गद्य को आगे बढ़ाया। आधुनिक काल में खड़ी बोली पहले गद्य की और फिर कविता की भाषा बनी।

युगलगभग समयखड़ी बोली की स्थिति
भारतेन्दु युगलगभग 1850–1900गद्य में खड़ी बोली, कविता में प्रायः ब्रजभाषा
द्विवेदी युगलगभग 1900–1920कविता में भी खड़ी बोली की प्रतिष्ठा; भाषा का परिष्कार
छायावाद युगलगभग 1918–1936खड़ी बोली में कोमलता, लाक्षणिकता और काव्य-सौंदर्य

भारतेन्दु युग [सामान्य परिचय]

इस युग का नाम भारतेन्दु हरिश्चंद्र (1850–1885) के नाम पर पड़ा। उन्हें आधुनिक हिन्दी साहित्य का जनक माना जाता है। यह हिन्दी में नवजागरण का युग था।

प्रमुख विशेषताएँ

  • गद्य का विकास – नाटक, निबंध, उपन्यास, पत्रकारिता का आरंभ। भारतेन्दु ने स्वयं लिखा कि उनके समय में ‘हिन्दी नई चाल में ढली’।
  • पत्र-पत्रिकाएँ – कविवचनसुधा, हरिश्चंद्र मैगज़ीन (बाद में हरिश्चंद्र चंद्रिका), बालाबोधिनी।
  • राष्ट्रीयता और देशभक्ति – अंग्रेज़ी शासन से होने वाली आर्थिक लूट पर चिंता।
  • समाज-सुधार – बाल-विवाह, छुआछूत, अंधविश्वास का विरोध; स्त्री-शिक्षा का समर्थन।
  • भाषा – गद्य में खड़ी बोली, कविता में अधिकतर ब्रजभाषा। हास्य-व्यंग्य की प्रवृत्ति।

प्रमुख रचनाकार और रचनाएँ

  • भारतेन्दु हरिश्चंद्र – भारत दुर्दशा, अंधेर नगरी, सत्य हरिश्चंद्र (नाटक)।
  • प्रतापनारायण मिश्र, बालकृष्ण भट्ट, बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’, राधाचरण गोस्वामी, श्रीनिवास दास (परीक्षा गुरु)।

इसी युग के अंत में 1893 में काशी नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना हुई, जिसने नागरी लिपि और हिन्दी के प्रचार, कोश-निर्माण और प्राचीन ग्रंथों की खोज का बड़ा काम किया। भारतेन्दु युग ने खड़ी बोली गद्य को जनता से जोड़ा, पर कविता की भाषा के रूप में खड़ी बोली अभी पूरी तरह स्वीकृत नहीं हुई थी। ब्रजभाषा बनाम खड़ी बोली का विवाद इसी समय शुरू हुआ।

द्विवेदी युग [सामान्य परिचय]

इस युग का नाम आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी (1864–1938) के नाम पर है। उन्होंने 1903 से ‘सरस्वती’ पत्रिका का संपादन किया और हिन्दी भाषा को व्याकरण-सम्मत, शुद्ध और एकरूप बनाया।

प्रमुख विशेषताएँ

  • खड़ी बोली कविता की भाषा बनी – ब्रजभाषा का स्थान खड़ी बोली ने लिया।
  • भाषा-संस्कार – वर्तनी, व्याकरण और विराम-चिह्नों में एकरूपता।
  • आदर्शवाद और नैतिकता – कर्तव्य, त्याग, सदाचार का संदेश।
  • राष्ट्रीय-सांस्कृतिक चेतना – भारत के गौरवशाली अतीत का गान।
  • इतिवृत्तात्मकता – कविता में वर्णन और कथा की प्रधानता; कुछ नीरसता।
  • उपेक्षित पात्रों के प्रति सहानुभूति – जैसे उर्मिला, यशोधरा।

प्रमुख रचनाकार और रचनाएँ

  • मैथिलीशरण गुप्त – भारत-भारती, साकेत, यशोधरा।
  • अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ – प्रियप्रवास (खड़ी बोली का पहला महाकाव्य माना जाता है)।
  • श्रीधर पाठक, रामनरेश त्रिपाठी (पथिक), नाथूराम शर्मा ‘शंकर’।

छायावाद युग [सामान्य परिचय]

छायावाद हिन्दी कविता का स्वर्ण युग माना जाता है। इसमें द्विवेदी युग की स्थूलता और इतिवृत्तात्मकता के स्थान पर सूक्ष्म भाव, कल्पना और सौंदर्य आए। छायावाद के चार स्तंभ – जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा।

प्रमुख विशेषताएँ

  • व्यक्तिवाद और आत्माभिव्यक्ति – कवि के निजी सुख-दुःख।
  • प्रकृति-चित्रण – प्रकृति पर मानवीय भावों का आरोप (मानवीकरण)।
  • प्रेम और सौंदर्य – सूक्ष्म और मानसिक सौंदर्य।
  • रहस्यवाद – अज्ञात सत्ता के प्रति जिज्ञासा, विशेषकर महादेवी में।
  • राष्ट्रीय और मानवतावादी स्वर।
  • भाषा – संस्कृतनिष्ठ, कोमल, लाक्षणिक, चित्रात्मक खड़ी बोली; प्रतीक और बिंब; मुक्त छंद (निराला)।

प्रमुख रचनाएँ

कविप्रमुख रचनाएँ
जयशंकर प्रसादकामायनी, आँसू, लहर
सुमित्रानंदन पंतपल्लव, गुंजन, ग्राम्या
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’परिमल, अनामिका, राम की शक्तिपूजा
महादेवी वर्मानीहार, रश्मि, नीरजा, यामा

छायावाद ने सिद्ध कर दिया कि खड़ी बोली में भी ब्रजभाषा जैसी मधुरता और कोमलता लाई जा सकती है। इसके बाद प्रगतिवाद, प्रयोगवाद और नई कविता में खड़ी बोली ही एकमात्र काव्य-भाषा रही।

याद रखें: भारतेन्दु युग – गद्य में खड़ी बोली; द्विवेदी युग – कविता में खड़ी बोली की स्थापना; छायावाद – खड़ी बोली का कलात्मक उत्कर्ष।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) भारतेन्दु युग की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करते हुए खड़ी बोली के विकास में इस युग के योगदान पर प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) द्विवेदी युग और छायावाद युग की प्रवृत्तियों की तुलना करते हुए खड़ी बोली हिन्दी के विकास को स्पष्ट कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी का खड़ी बोली के परिष्कार में योगदान लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) छायावाद के चार स्तंभ और उनकी प्रमुख रचनाएँ बताइए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए – खड़ी बोली का आरंभिक गद्य।

RTMNU BA Sem 2 · BAHIN Minor T1-102 · इकाई II

इकाई II: खड़ी बोली गद्य : निबंध

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • हजारीप्रसाद द्विवेदी – कुटज
  • विद्यानिवास मिश्र – मेरे राम का मुकुट भीग रहा है
  • नामवर सिंह – गपशप

इस इकाई में खड़ी बोली हिन्दी गद्य की प्रमुख विधा निबंध के तीन श्रेष्ठ उदाहरण हैं। तीनों निबंध ललित निबंध की श्रेणी में आते हैं – जिनमें लेखक का व्यक्तित्व, आत्मीयता, विचार और भाषा का सौंदर्य एक साथ मिलता है।

हजारीप्रसाद द्विवेदी – कुटज

लेखक परिचय

आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी (1907–1979) हिन्दी के प्रसिद्ध निबंधकार, उपन्यासकार और आलोचक थे। उनका जन्म बलिया (उत्तर प्रदेश) ज़िले में हुआ। वे शांतिनिकेतन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय और पंजाब विश्वविद्यालय से जुड़े रहे। प्रमुख रचनाएँ – उपन्यास: बाणभट्ट की आत्मकथा, चारुचंद्रलेख, पुनर्नवा, अनामदास का पोथा; निबंध-संग्रह: अशोक के फूल, कल्पलता, कुटज, आलोक पर्व; आलोचना: कबीर, हिन्दी साहित्य की भूमिका।

निबंध का सार

‘कुटज’ हिमालय की सूखी, पथरीली पहाड़ियों पर उगने वाला एक छोटा-सा पौधा है। जहाँ पानी नहीं, छाया नहीं, वहाँ भी यह हरा-भरा रहता है और फूल खिलाता है। लेखक इस पौधे के नाम पर विचार करते हैं, संस्कृत साहित्य में उसकी चर्चा याद करते हैं – कालिदास के ‘मेघदूत’ में यक्ष ने मेघ का स्वागत कुटज के फूलों से किया था। फिर लेखक कुटज के स्वभाव से जीवन का दर्शन निकालते हैं।

मूल संदेश / उद्देश्य

  • जिजीविषा – कठिन परिस्थितियों में भी जीने की प्रबल इच्छा।
  • स्वाभिमान – कुटज किसी के आगे झुकता नहीं, किसी से कुछ माँगता नहीं।
  • अनासक्ति – सुख-दुःख में समान रहना; परिस्थिति का दास न बनना।
  • मनुष्य को भी कुटज की तरह संघर्ष में मुस्कुराते हुए जीना चाहिए।

भाषा-शैली

संस्कृतनिष्ठ, पर प्रवाहपूर्ण खड़ी बोली; बीच-बीच में बोलचाल के शब्द और हल्का व्यंग्य; विचारात्मक, भावात्मक और आत्मीय शैली; सांस्कृतिक संदर्भों की भरमार।

विद्यानिवास मिश्र – मेरे राम का मुकुट भीग रहा है

लेखक परिचय

पंडित विद्यानिवास मिश्र (1926–2005) ललित निबंध के श्रेष्ठ लेखक थे। उनका जन्म गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) ज़िले में हुआ। वे संस्कृत के विद्वान और लोक-संस्कृति के मर्मज्ञ थे। प्रमुख निबंध-संग्रह – छितवन की छाँह, तुम चंदन हम पानी, आँगन का पंछी और बनजारा मन, मेरे राम का मुकुट भीग रहा है।

निबंध का सार

निबंध एक घरेलू घटना से शुरू होता है। घर के बच्चे रात में एक कार्यक्रम देखने गए हैं और देर रात तक नहीं लौटे। लेखक और उनकी पत्नी जागकर उनकी प्रतीक्षा करते हैं, मन में तरह-तरह की आशंकाएँ उठती हैं। इसी चिंता में लेखक को एक लोकगीत याद आता है, जिसमें माता कौशल्या वन में गए राम, लक्ष्मण और सीता के लिए चिंतित हैं कि वर्षा में राम का मुकुट, लक्ष्मण का पटुका और सीता का सिंदूर भीग रहा होगा।

लेखक इस गीत के माध्यम से बताते हैं कि हर युग के माता-पिता की चिंता एक-सी होती है। प्रतीक्षा करने वाले का दुःख, जाने वाले को महसूस नहीं होता। अंत में यह व्यक्तिगत चिंता एक व्यापक प्रश्न बन जाती है – आज के समाज में भी ‘राम’ अर्थात आदर्श और सद्गुण संकट में हैं, उनका मुकुट आज भी भीग रहा है।

मूल संवेदना

  • पारिवारिक ममता और वात्सल्य।
  • लोक-संस्कृति और लोकगीतों की जीवंतता।
  • पुरानी और नई पीढ़ी के बीच संवेदना का अंतर।
  • व्यक्तिगत अनुभव से सार्वभौमिक सत्य तक की यात्रा।

भाषा-शैली

आत्मीय, भावुक और काव्यात्मक भाषा; संस्कृत और भोजपुरी लोकभाषा का सुंदर मेल; संस्मरणात्मक और विचारात्मक शैली।

नामवर सिंह – गपशप

लेखक परिचय

डॉ. नामवर सिंह (1926–2019) हिन्दी के सबसे प्रसिद्ध आलोचकों में से एक थे। उनका जन्म वाराणसी क्षेत्र के जीयनपुर गाँव (अब चंदौली ज़िला) में हुआ। वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली में प्रोफ़ेसर रहे और ‘आलोचना’ पत्रिका के संपादक भी रहे। प्रमुख रचनाएँ – छायावाद, कविता के नए प्रतिमान, दूसरी परंपरा की खोज, कहानी: नई कहानी, इतिहास और आलोचना। आरंभिक दौर में उन्होंने ललित निबंध भी लिखे।

निबंध का भाव

‘गपशप’ में लेखक मनुष्य की बातचीत करने की स्वाभाविक प्रवृत्ति पर हल्के-फुल्के ढंग से विचार करते हैं। गपशप वह अनौपचारिक बातचीत है जिसमें कोई निश्चित विषय या उद्देश्य नहीं होता – बात से बात निकलती चली जाती है। लेखक इसे जीवन का रस मानते हैं: इसमें मन हल्का होता है, संबंध गहरे होते हैं और थकान दूर होती है। साथ ही वे औपचारिक, बनावटी बातचीत और गपशप की सहजता का अंतर भी दिखाते हैं।

मुख्य बिंदु

  • गपशप मनुष्य की सामाजिकता की पहचान है।
  • अच्छी गपशप भी एक कला है – इसमें हास्य, चुटकी और आत्मीयता होती है।
  • गपशप में निंदा और समय की बर्बादी से बचना चाहिए।
  • आधुनिक व्यस्त जीवन में खुली, सहज बातचीत कम होती जा रही है।

भाषा-शैली

सरल, चुटीली, बोलचाल की खड़ी बोली; उर्दू और देशज शब्दों का प्रयोग; व्यंग्य-विनोद और आत्मीय शैली।

परीक्षा टिप: निबंध के प्रश्न में – लेखक परिचय, निबंध का सार (अपने शब्दों में), उद्देश्य/संदेश और भाषा-शैली – चारों भाग अवश्य लिखें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) ‘कुटज’ निबंध का सार लिखते हुए उसके मूल संदेश पर प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) ‘मेरे राम का मुकुट भीग रहा है’ निबंध की मूल संवेदना और भाषा-शैली का विवेचन कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का साहित्यिक परिचय दीजिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) ‘गपशप’ निबंध का भाव स्पष्ट कीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) टिप्पणी लिखिए – ललित निबंध।