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नाटक – बकरी BAHLT Major T-2-101

RTMNU BA Semester 1 · Hindi Literature (हिन्दी साहित्य) · 2 units · हर इकाई के नोट्स

UniversityRTMNU – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
CourseB.A. (Four Year UG Programme, NEP 2020) – Hindi Literature (हिन्दी साहित्य)
SemesterSemester I
Paper codeBAHLT Major T-2-101
Paper titleनाटक – बकरी
CategoryMajor T-2 · Major (DSC) – मुख्य विषय
Credits2 credits (theory, 2 घंटे प्रति सप्ताह)
Marksसैद्धांतिक परीक्षा: 40 अंक + आंतरिक मूल्यांकन (CIE) 10 अंक = 50; उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 20
Syllabusas per official RTMNU NEP 2020 syllabus 2024-25 (B.A. Hindi Literature Sem I to IV, लागू सत्र 2024-25 से)

इकाइयों के विषय आधिकारिक RTMNU पाठ्यक्रम के अनुसार हैं। Official RTMNU syllabus page · All RTMNU BA Hindi papers

Units

  1. 1इकाई I: बकरी: नाटककार परिचय, नाटक विधा और कथावस्तुNotes
  2. 2इकाई II: बकरी: चरित्र-चित्रण, उद्देश्य, व्यंग्य और रंगमंचीयताNotes

RTMNU BA Sem 1 · BAHLT Major T-2-101 · इकाई I

इकाई I: बकरी: नाटककार परिचय, नाटक विधा और कथावस्तु

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • नाटक – बकरी – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना: जीवन परिचय

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का जन्म 15 सितंबर 1927 को उत्तर प्रदेश के बस्ती ज़िले में हुआ और निधन 23 सितंबर 1983 को दिल्ली में हुआ। वे कवि, कहानीकार, नाटककार, पत्रकार और बाल-साहित्यकार थे। वे ‘तीसरा सप्तक’ के कवि थे। उन्होंने ‘दिनमान’ साप्ताहिक में काम किया और उनका स्तंभ ‘चरचे और चरखे’ बहुत लोकप्रिय था। वे बच्चों की पत्रिका ‘पराग’ के संपादक भी रहे। उनके काव्य संग्रह ‘खूँटियों पर टँगे लोग’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।

प्रमुख रचनाएँ

विधारचनाएँ
काव्यकाठ की घंटियाँ, बाँस का पुल, गर्म हवाएँ, कुआनो नदी, जंगल का दर्द, खूँटियों पर टँगे लोग
नाटकबकरी, लड़ाई, अब गरीबी हटाओ
उपन्याससोया हुआ जल, पागल कुत्तों का मसीहा
बाल-साहित्यबतूता का जूता, महँगू की टाई

उनकी रचनाओं में आम आदमी की पीड़ा, व्यवस्था के प्रति आक्रोश और तीखा राजनीतिक व्यंग्य मिलता है।

नाटक: परिभाषा और तत्व

परिभाषा: नाटक वह साहित्यिक विधा है जो रंगमंच पर अभिनेताओं द्वारा अभिनय करके दर्शकों के सामने प्रस्तुत की जाती है। इसे ‘दृश्य काव्य’ कहा जाता है, क्योंकि इसे पढ़ने के साथ-साथ देखा भी जाता है।

नाटक के प्रमुख तत्व

  1. कथावस्तु
  2. पात्र और चरित्र-चित्रण
  3. संवाद (कथोपकथन)
  4. देशकाल और वातावरण
  5. भाषा-शैली
  6. उद्देश्य
  7. अभिनेयता (रंगमंचीयता)
याद रखें: ‘बकरी’ लोकनाट्य ‘नौटंकी’ शैली में लिखा गया आधुनिक राजनीतिक व्यंग्य नाटक है। इसकी रचना 1974 में हुई, यानी आपातकाल (1975) से ठीक पहले।

नाटक की पृष्ठभूमि

स्वतंत्रता के बाद जनता को आशा थी कि गांधी जी के आदर्शों पर चलकर देश में ईमानदार शासन आएगा। पर धीरे-धीरे नेताओं ने गांधी के नाम को केवल वोट और सत्ता पाने का साधन बना लिया। सादगी, सत्य और सेवा की जगह दिखावा, भ्रष्टाचार और स्वार्थ बढ़ गया। ‘बकरी’ इसी मोहभंग की उपज है। गांधी जी के साथ बकरी का प्रसिद्ध संबंध था, इसलिए नाटककार ने बकरी को प्रतीक बनाकर गांधीवाद के दुरुपयोग पर करारा व्यंग्य किया।

बकरी: कथावस्तु (कथासार)

नाटक की शुरुआत नौटंकी की तरह सूत्रधार, गीत और नगाड़े के साथ होती है। कथा एक गरीब गाँव की है। गाँव में विपती नाम की एक गरीब स्त्री रहती है। उसकी बकरी ही उसकी एकमात्र पूँजी और सहारा है।

गाँव में तीन चालाक और स्वार्थी लोग आते हैं — दुर्जन सिंह, कर्मवीर और सत्यवीर। वे विपती की बकरी छीन लेते हैं और घोषणा करते हैं कि यह कोई साधारण बकरी नहीं, बल्कि गांधी जी की बकरी की वंशज है। भोले-भाले गाँव वाले इस बात पर विश्वास कर लेते हैं।

अब बकरी को पूज्य बना दिया जाता है। उसके नाम पर आश्रम बनाया जाता है, पूजा होती है और गाँव वालों से चंदा व चढ़ावा वसूला जाता है। ‘गांधी’ और ‘बकरी’ के नाम पर तीनों का धंधा खूब चलता है। विपती रोती-गिड़गिड़ाती है, पर उसकी कोई नहीं सुनता।

धीरे-धीरे यह धार्मिक पाखंड राजनीति में बदल जाता है। बकरी के नाम पर जनता की भावनाओं का उपयोग करके दुर्जन सिंह चुनाव लड़ता है और सत्ता प्राप्त कर लेता है। पुलिस और व्यवस्था भी इन ठगों का ही साथ देती है।

नाटक में एक युवक है, जो इस पाखंड को पहचानता है। वह गाँव वालों को समझाता है कि उनके नाम पर, गांधी के नाम पर, उन्हें ही लूटा जा रहा है। अंत में गाँव वालों में जागरूकता आती है और वे इस शोषण और पाखंड के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े होते हैं। नाटक जन-जागरण और विरोध के स्वर के साथ समाप्त होता है।

कथावस्तु की विशेषताएँ

  • सरल, छोटी और प्रतीकात्मक कथा।
  • हास्य और व्यंग्य के साथ गंभीर संदेश।
  • गीत, नगाड़ा, सूत्रधार — लोकनाट्य की पूरी छटा।
  • घटनाएँ तेज़ी से आगे बढ़ती हैं और दर्शक को बाँधे रखती हैं।
परीक्षा टिप: कथासार का क्रम — विपती की बकरी → तीन ठगों द्वारा ‘गांधी जी की बकरी’ की घोषणा → पूजा और चंदा → चुनाव और सत्ता → युवक द्वारा जागरण → जनता का विरोध।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना का परिचय देते हुए ‘बकरी’ नाटक की कथावस्तु लिखिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) नाटक के तत्वों के आधार पर ‘बकरी’ नाटक की समीक्षा कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की प्रमुख रचनाएँ
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) नाटक की परिभाषा और तत्व
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) ‘बकरी’ में ‘गांधी जी की बकरी’ का प्रसंग

RTMNU BA Sem 1 · BAHLT Major T-2-101 · इकाई II

इकाई II: बकरी: चरित्र-चित्रण, उद्देश्य, व्यंग्य और रंगमंचीयता

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • नाटक – बकरी – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

प्रमुख पात्रों का चरित्र-चित्रण

1. दुर्जन सिंह

  • नाटक का प्रमुख खलपात्र; जैसा नाम, वैसा काम।
  • चालाक, स्वार्थी और सत्ता का भूखा।
  • गांधी और बकरी के नाम का उपयोग करके जनता को ठगता है और अंत में नेता बन जाता है।
  • वह उन भ्रष्ट नेताओं का प्रतीक है जो आदर्शों का मुखौटा पहनकर जनता को लूटते हैं।

2. कर्मवीर और सत्यवीर

  • दुर्जन सिंह के साथी; उनके नाम ‘कर्म’ और ‘सत्य’ पर हैं, पर उनके काम ठीक उल्टे हैं।
  • नाटककार ने नामों में ही व्यंग्य भर दिया है।
  • वे नेता के चमचों, प्रचारकों और धर्म के ठेकेदारों के प्रतीक हैं।

3. विपती

  • गरीब, असहाय और भोली ग्रामीण स्त्री; उसका नाम ही ‘विपत्ति’ की याद दिलाता है।
  • बकरी उसकी रोज़ी-रोटी है; उसे छीनना उसके जीवन को छीनना है।
  • वह शोषित, बेबस आम जनता का प्रतीक है, जिसकी आवाज़ कोई नहीं सुनता।

4. युवक

  • पढ़ा-लिखा, जागरूक और साहसी।
  • वह पाखंड को पहचानता है और गाँव वालों को संगठित करता है।
  • वह नई पीढ़ी की चेतना, विद्रोह और परिवर्तन की आशा का प्रतीक है।

5. गाँव वाले और सिपाही

गाँव वाले भोली, अंधविश्वासी जनता हैं, जो पहले ठगी जाती है और अंत में जागती है। सिपाही उस व्यवस्था का प्रतीक है जो ताकतवर के साथ खड़ी होती है।

उद्देश्य और मूल संवेदना

  1. गांधीवाद का दुरुपयोग: गांधी के नाम पर स्वार्थ-सिद्धि का पर्दाफ़ाश।
  2. धर्म और अंधविश्वास का राजनीतिक उपयोग: बकरी की पूजा के बहाने जनता की भावनाओं का शोषण।
  3. राजनीतिक भ्रष्टाचार: चुनाव, चंदा और सत्ता का गंदा खेल।
  4. गरीब का शोषण: विपती जैसी असहाय जनता की पीड़ा।
  5. जन-जागरण: युवक के माध्यम से संगठित विरोध का संदेश।

प्रतीक-विधान

प्रतीकअर्थ
बकरीगांधीवादी आदर्श, जिन्हें नेता अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करते हैं; गरीब की पूँजी
दुर्जन सिंहभ्रष्ट नेता
कर्मवीर, सत्यवीरपाखंडी प्रचारक और चमचे
विपतीशोषित आम जनता
युवकजागृत नई पीढ़ी

बकरी: राजनीतिक व्यंग्य नाटक

‘बकरी’ का मूल स्वर व्यंग्य है। नाटक हँसाता भी है और चुभता भी है। पात्रों के नाम, बकरी की पूजा, नेताओं के भाषण और नारे — सब में व्यंग्य है। यह व्यंग्य केवल मनोरंजन नहीं करता, बल्कि दर्शक को सोचने और व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित करता है। इसलिए इसे हिन्दी के श्रेष्ठ राजनीतिक व्यंग्य नाटकों में गिना जाता है। लगभग पाँच दशक बाद भी इसका व्यंग्य उतना ही ताज़ा लगता है, क्योंकि आज भी महापुरुषों के नाम और प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग होता है। यही इस नाटक की स्थायी प्रासंगिकता है।

शीर्षक की सार्थकता

पूरा नाटक एक बकरी के इर्द-गिर्द घूमता है। वही विपती की रोज़ी है, वही ठगों का हथियार है और वही नेताओं की सत्ता की सीढ़ी बनती है। गांधी जी और उनकी बकरी का संबंध सब जानते हैं, इसलिए यह शीर्षक तुरंत गांधीवादी आदर्शों और उनके दुरुपयोग की याद दिलाता है। एक साधारण, सीधा-सादा शब्द पूरे नाटक का व्यंग्य समेट लेता है। इसलिए ‘बकरी’ शीर्षक छोटा, जिज्ञासा जगाने वाला, प्रतीकात्मक और पूर्णतः सार्थक है।

भाषा-शैली

नाटक की भाषा सरल हिन्दी है, जिसमें अवधी-भोजपुरी जैसे ग्रामीण शब्दों का रंग है। मुहावरे, लोकोक्तियाँ और नारे संवादों को जीवंत बनाते हैं। गीतों में लोकगीतों की लय है। व्यंग्यात्मक शैली नाटक की सबसे बड़ी विशेषता है।

लोकनाट्य शैली और रंगमंचीयता

  • नौटंकी शैली: उत्तर भारत के लोकनाट्य नौटंकी के तत्व — सूत्रधार, नगाड़ा, गीत, लोकधुनें।
  • गीत और संगीत: गीत कथा को आगे बढ़ाते हैं और व्यंग्य को तीखा बनाते हैं।
  • सरल मंच: बड़े मंच-सज्जा की ज़रूरत नहीं; खुले मैदान में भी खेला जा सकता है।
  • दर्शक से सीधा संवाद: सूत्रधार और पात्र सीधे दर्शकों से बात करते हैं।
  • संवाद: छोटे, चुटीले और व्यंग्यपूर्ण; भाषा बोलचाल की, ग्रामीण रंग लिए हुए।

इन विशेषताओं के कारण ‘बकरी’ अत्यंत अभिनेय नाटक है और देश भर में शहरों से लेकर गाँवों तक बहुत बार खेला गया है।

परीक्षा टिप: ‘बकरी की रंगमंचीयता’ या ‘लोकनाट्य शैली’ पर प्रश्न आए तो सूत्रधार, गीत-संगीत, सरल मंच, दर्शक से संवाद और चुटीले संवाद — ये पाँच बिंदु उदाहरण सहित लिखें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) ‘बकरी’ नाटक में निहित राजनीतिक व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) ‘बकरी’ नाटक की रंगमंचीयता और लोकनाट्य शैली पर प्रकाश डालिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) दुर्जन सिंह का चरित्र
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) विपती का चरित्र
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) ‘बकरी’ नाटक का उद्देश्य