पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- महाभोज – उपन्यास – लेखिका – मन्नू भंडारी
मन्नू भंडारी: जीवन परिचय
मन्नू भंडारी हिन्दी की प्रसिद्ध कथाकार हैं। उनका जन्म 3 अप्रैल 1931 को मध्य प्रदेश के भानपुरा (मंदसौर) में हुआ। उनका निधन 15 नवंबर 2021 को हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज में हिन्दी का अध्यापन किया। उनके पति राजेन्द्र यादव भी प्रसिद्ध कथाकार और ‘हंस’ पत्रिका के संपादक थे।
मन्नू भंडारी ‘नई कहानी’ आंदोलन की प्रमुख लेखिका मानी जाती हैं। उनके लेखन में स्त्री-मन, मध्यवर्गीय परिवार, टूटते रिश्ते और सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ का सच्चा चित्रण मिलता है।
प्रमुख रचनाएँ
| विधा | रचनाएँ |
|---|---|
| उपन्यास | आपका बंटी, महाभोज, एक इंच मुस्कान (राजेन्द्र यादव के साथ), स्वामी |
| कहानी संग्रह | मैं हार गई, तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है, एक प्लेट सैलाब, त्रिशंकु |
| आत्मकथा | एक कहानी यह भी |
उनकी कहानी ‘यही सच है’ पर ‘रजनीगंधा’ फ़िल्म बनी। ‘महाभोज’ का नाट्य रूपांतर भी बहुत सफल रहा और मंच पर कई बार खेला गया।
महाभोज: परिचय और शीर्षक
‘महाभोज’ हिन्दी का एक श्रेष्ठ राजनीतिक उपन्यास है। इसमें स्वतंत्र भारत की भ्रष्ट राजनीति, सत्ता की भूख, नौकरशाही और मीडिया के गठजोड़ को दिखाया गया है। उपन्यास की घटनाएँ ‘सरोहा’ नामक गाँव और वहाँ होने वाले उपचुनाव के आसपास घूमती हैं।
शीर्षक की सार्थकता: ‘महाभोज’ का अर्थ है बड़ा भोज या दावत। उपन्यास में एक गरीब युवक बिसेसर (बिसू) की लाश पड़ी है और नेता, अफ़सर, पत्रकार सब उस मौत से अपना-अपना लाभ उठाते हैं। जैसे गिद्ध लाश पर टूट पड़ते हैं, वैसे ही राजनेता बिसू की मृत्यु को वोट और सत्ता का साधन बना लेते हैं। यही ‘महाभोज’ है। इसलिए शीर्षक प्रतीकात्मक और पूरी तरह सार्थक है।
महाभोज: कथावस्तु (कथासार)
उपन्यास की शुरुआत सरोहा गाँव में बिसू की लाश मिलने से होती है। बिसू एक गरीब, जागरूक और साहसी युवक था। कुछ समय पहले गाँव में दलितों (हरिजनों) की झोंपड़ियों में आग लगाई गई थी और कई लोग जल गए थे। बिसू इस आगजनी के पीछे छिपे लोगों के विरुद्ध सबूत इकट्ठा कर रहा था। माना जाता है कि इसी कारण उसकी हत्या की गई।
इसी समय सरोहा क्षेत्र में विधानसभा का उपचुनाव होने वाला है। इसलिए बिसू की मौत तुरंत एक राजनीतिक मुद्दा बन जाती है। प्रदेश के मुख्यमंत्री दा साहब ऊपर से बहुत सरल, धार्मिक और आदर्शवादी दिखते हैं, पर भीतर से अत्यंत चतुर राजनीतिज्ञ हैं। उनकी पार्टी का उम्मीदवार लखन सिंह है। विरोधी पक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सुकुल बाबू बिसू की मौत को लेकर सरकार पर हमला करते हैं और दलितों की सहानुभूति पाना चाहते हैं।
गाँव का दबंग जोरावर आगजनी और हत्या के संदेह के घेरे में है, पर वह सत्ता पक्ष के लिए वोट जुटाने वाला आदमी है। इसलिए दा साहब उसे बचाने की चालें चलते हैं। बिसू का मित्र बिंदा सच्चाई सामने लाना चाहता है और बिसू के अधूरे काम को आगे बढ़ाता है।
पुलिस अधीक्षक सक्सेना ईमानदारी से जाँच करते हैं और सच के करीब पहुँच जाते हैं। स्थानीय अख़बार ‘मशाल’ के संपादक दत्ता बाबू शुरू में सच छापते हैं, पर बाद में सत्ता के लालच में झुक जाते हैं। दा साहब बिसू के बूढ़े पिता के प्रति सहानुभूति दिखाकर भी राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास करते हैं।
अंत में सत्ता की चालें जीत जाती हैं। सच दबा दिया जाता है, उल्टे बिंदा को ही फँसा दिया जाता है और ईमानदार अफ़सर सक्सेना पर कार्रवाई होती है। इस प्रकार उपन्यास दिखाता है कि भ्रष्ट व्यवस्था में गरीब, दलित और ईमानदार व्यक्ति सबसे अधिक पिसते हैं।
कथावस्तु की विशेषताएँ
- कथा छोटे समय में घटती है और पूरी तरह उपचुनाव पर केंद्रित है।
- एक हत्या की घटना से पूरी राजनीतिक व्यवस्था का पर्दाफ़ाश होता है।
- गाँव, राजधानी, पुलिस, अख़बार और पार्टी दफ़्तर — सभी स्तरों के दृश्य मिलते हैं।
- कथा में रहस्य, तनाव और नाटकीयता बनी रहती है।
- अंत दुखद और यथार्थवादी है; कोई बनावटी सुखांत नहीं है।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) मन्नू भंडारी के जीवन और साहित्यिक अवदान का परिचय देते हुए ‘महाभोज’ उपन्यास की कथावस्तु लिखिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) ‘महाभोज’ उपन्यास के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) मन्नू भंडारी की प्रमुख रचनाएँ
- (लघूत्तरी प्रश्न) बिसेसर (बिसू) की मृत्यु और उपचुनाव
- (लघूत्तरी प्रश्न) ‘महाभोज’ में सरोहा गाँव की आगजनी की घटना