पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- संधि
- समास
- रस
- छंद
- अलंकार
- शुद्ध लेखन
संधि
परिभाषा: दो निकटवर्ती वर्णों के मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है, उसे संधि कहते हैं। जैसे - विद्या + आलय = विद्यालय। संधि को अलग करना 'संधि-विच्छेद' कहलाता है।
| भेद | उपभेद / नियम | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वर संधि | दीर्घ | विद्या + आलय = विद्यालय |
| स्वर संधि | गुण | देव + इन्द्र = देवेन्द्र |
| स्वर संधि | वृद्धि | सदा + एव = सदैव |
| स्वर संधि | यण | इति + आदि = इत्यादि |
| स्वर संधि | अयादि | ने + अन = नयन |
| व्यंजन संधि | व्यंजन का स्वर या व्यंजन से मेल | जगत् + ईश = जगदीश, सत् + जन = सज्जन |
| विसर्ग संधि | विसर्ग का स्वर या व्यंजन से मेल | निः + चल = निश्चल, मनः + योग = मनोयोग |
समास
परिभाषा: दो या अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया संक्षिप्त शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं। बने हुए शब्द को 'समस्त पद' और उसे तोड़ने को 'समास-विग्रह' कहते हैं।
| समास | पहचान | उदाहरण (विग्रह) |
|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पहला पद अव्यय और प्रधान | यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार), प्रतिदिन |
| तत्पुरुष | दूसरा पद प्रधान, कारक-चिह्न लुप्त | राजपुत्र (राजा का पुत्र), रसोईघर |
| कर्मधारय | विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय | नीलकमल (नीला है जो कमल), चरणकमल |
| द्विगु | पहला पद संख्यावाचक | त्रिभुवन (तीन भुवनों का समूह), चौराहा |
| द्वंद्व | दोनों पद प्रधान | माता-पिता (माता और पिता) |
| बहुव्रीहि | कोई अन्य पद प्रधान | दशानन (दस हैं आनन जिसके - रावण), लंबोदर |
रस
परिभाषा: काव्य को पढ़ने, सुनने या नाटक देखने से हृदय में जो आनंद उत्पन्न होता है, उसे रस कहते हैं। रस को 'काव्य की आत्मा' कहा गया है। भरतमुनि ने 'नाट्यशास्त्र' में बताया कि विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है।
रस के अंग
- स्थायी भाव - मन में स्थायी रूप से रहने वाला भाव (जैसे रति, क्रोध)।
- विभाव - भाव जगाने का कारण। आलंबन (जिसके कारण भाव जागे) और उद्दीपन (जो भाव को बढ़ाए)।
- अनुभाव - भाव जागने पर शरीर की चेष्टाएँ, जैसे आँसू, कंपन।
- संचारी (व्यभिचारी) भाव - थोड़ी देर के लिए आने वाले भाव। इनकी संख्या 33 मानी गई है।
| रस | स्थायी भाव | रस | स्थायी भाव |
|---|---|---|---|
| श्रृंगार | रति | भयानक | भय |
| हास्य | हास | वीभत्स | जुगुप्सा |
| करुण | शोक | अद्भुत | विस्मय |
| रौद्र | क्रोध | शांत | निर्वेद |
| वीर | उत्साह | वात्सल्य | वत्सलता |
भक्ति रस को भी बाद में मान्यता मिली, जिसका स्थायी भाव ईश्वर-विषयक रति है।
छंद
परिभाषा: वर्ण, मात्रा, यति, गति और तुक के नियमों में बँधी रचना को छंद कहते हैं। छंद से कविता में लय और संगीत आता है।
- मात्रा - लघु (।) की एक और गुरु (ऽ) की दो मात्राएँ।
- चरण - छंद की पंक्ति का भाग; यति - पढ़ते समय विराम; तुक - चरणों के अंत की ध्वनि-समानता।
- भेद - मात्रिक छंद (मात्राओं की गिनती) और वर्णिक छंद (वर्णों की गिनती)।
| छंद | प्रकार | नियम |
|---|---|---|
| दोहा | मात्रिक | विषम चरण 13, सम चरण 11 मात्राएँ |
| सोरठा | मात्रिक | दोहे का उल्टा - विषम 11, सम 13 |
| चौपाई | मात्रिक | प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ |
| रोला | मात्रिक | प्रत्येक पंक्ति में 24 मात्राएँ (11 - 13) |
| कुंडलिया | मात्रिक | एक दोहा और एक रोला मिलकर |
| सवैया | वर्णिक | प्रत्येक चरण में 22 से 26 वर्ण |
अलंकार
परिभाषा: काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्वों को अलंकार कहते हैं। जैसे आभूषण शरीर को सजाते हैं, वैसे अलंकार काव्य को।
शब्दालंकार (शब्द से चमत्कार)
- अनुप्रास - एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति। जैसे - 'चारु चंद्र की चंचल किरणें' (च की आवृत्ति)।
- यमक - एक शब्द बार-बार आए, पर अर्थ अलग हो। जैसे - 'कनक कनक' (सोना और धतूरा)।
- श्लेष - एक शब्द के एक साथ अनेक अर्थ। जैसे - 'पानी' (चमक, सम्मान, जल)।
अर्थालंकार (अर्थ से चमत्कार)
- उपमा - समानता बताना; वाचक शब्द सा, सम, सरिस, समान। जैसे - मुख चंद्रमा के समान सुंदर है।
- रूपक - उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप। जैसे - चरण-कमल।
- उत्प्रेक्षा - उपमेय में उपमान की संभावना; वाचक शब्द मानो, मनु, जनु। जैसे - उसका मुख मानो चाँद हो।
- अतिशयोक्ति - बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना।
शुद्ध लेखन
भाषा को वर्तनी (spelling) और व्याकरण के नियमों के अनुसार लिखना शुद्ध लेखन है। केंद्रीय हिन्दी निदेशालय ने मानक वर्तनी के नियम तय किए हैं।
| अशुद्ध | शुद्ध | अशुद्ध | शुद्ध |
|---|---|---|---|
| परिक्षा | परीक्षा | उज्वल | उज्ज्वल |
| अत्याधिक | अत्यधिक | आशिर्वाद | आशीर्वाद |
| कवियत्री | कवयित्री | व्यवहारिक | व्यावहारिक |
| इतिहासिक | ऐतिहासिक | श्रीमति | श्रीमती |
वाक्य संबंधी अशुद्धियाँ
- मेरे को घर जाना है। → मुझे घर जाना है।
- उसने मुझे पुस्तक दिया। → उसने मुझे पुस्तक दी।
- कृपया करके बैठिए। → कृपया बैठिए।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) संधि किसे कहते हैं? संधि के भेदों को उदाहरण सहित समझाइए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) रस की परिभाषा देते हुए रस के अंगों और प्रमुख रसों का परिचय दीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) समास के भेद उदाहरण सहित लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) दोहा और चौपाई छंद के लक्षण लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) उपमा और रूपक अलंकार में अंतर स्पष्ट कीजिए।