पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)
- हिन्दी : अर्थ तथा प्रयोग
- हिन्दी : स्वरूप तथा क्षेत्र
- हिन्दी : उद्भव तथा विकास
हिन्दी : अर्थ तथा प्रयोग
'हिन्दी' शब्द की व्युत्पत्ति
'हिन्दी' शब्द मूल रूप से फ़ारसी भाषा का है। संस्कृत का 'सिन्धु' शब्द नदी और उसके आसपास के प्रदेश के लिए प्रयुक्त होता था। प्राचीन ईरानी (फ़ारसी) भाषा में 'स' ध्वनि 'ह' में बदल जाती थी, इसलिए 'सिन्धु' का रूप 'हिन्दु' या 'हिन्द' हो गया। 'हिन्द' में 'ईक' प्रत्यय जुड़कर 'हिन्दीक' बना और बाद में 'क' का लोप होकर 'हिन्दी' शब्द बना।
- सिन्धु → हिन्दु → हिन्द (देश का नाम)
- हिन्द + ईक → हिन्दीक → हिन्दी (हिन्द का, हिन्द से संबंधित)
इस प्रकार 'हिन्दी' का शाब्दिक अर्थ है - हिन्द (भारत) का या हिन्द की भाषा।
अर्थ का विकास
- आरंभ में - ईरानी और अरबी लोग भारत की किसी भी भाषा या भारत से जुड़ी हर वस्तु को 'हिन्दी' कहते थे।
- मध्यकाल में - अमीर ख़ुसरो ने अपनी भाषा के लिए 'हिन्दवी' और 'हिन्दी' शब्दों का प्रयोग किया। उस समय दिल्ली-मेरठ के आसपास की बोली को 'हिन्दवी', 'हिन्दुई', 'दक्खिनी', 'रेख़्ता' आदि नाम भी मिले।
- आधुनिक काल में - 'हिन्दी' शब्द मुख्य रूप से खड़ी बोली पर आधारित मानक भाषा के लिए रूढ़ हो गया।
'हिन्दी' शब्द के प्रयोग (अर्थ के स्तर)
- व्यापक अर्थ - हिन्दी प्रदेश की सभी उपभाषाएँ और बोलियाँ (ब्रज, अवधी, भोजपुरी, राजस्थानी आदि) हिन्दी के अंतर्गत आती हैं।
- भाषा-वैज्ञानिक अर्थ - केवल पश्चिमी हिन्दी और पूर्वी हिन्दी को ही हिन्दी माना जाता है।
- सीमित अर्थ - खड़ी बोली पर आधारित मानक हिन्दी, जो शिक्षा, साहित्य, प्रशासन और संचार की भाषा है।
- संवैधानिक अर्थ - संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी संघ की राजभाषा है।
हिन्दी : स्वरूप तथा क्षेत्र
हिन्दी का स्वरूप
हिन्दी एक जीवंत, लचीली और समन्वयशील भाषा है। इसका स्वरूप कई स्तरों पर दिखाई देता है -
- परिवार - हिन्दी भारोपीय (भारत-यूरोपीय) भाषा परिवार की भारतीय आर्य शाखा की आधुनिक भाषा है।
- लिपि - हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। यह लिपि वैज्ञानिक है - जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा जाता है।
- शब्द भंडार - इसमें तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी (अरबी, फ़ारसी, अंग्रेज़ी, पुर्तगाली आदि) सभी प्रकार के शब्द हैं।
- व्याकरण - इसमें दो लिंग (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग) और दो वचन (एकवचन, बहुवचन) हैं। वाक्य-क्रम सामान्यतः कर्ता - कर्म - क्रिया होता है।
- रूप-विविधता - बोलचाल की हिन्दी, साहित्यिक हिन्दी, मानक हिन्दी, कार्यालयी हिन्दी, मीडिया की हिन्दी - सब इसके रूप हैं।
- दक्खिनी, उर्दू और हिन्दुस्तानी - ये भी खड़ी बोली के ही अलग-अलग शैलीगत रूप माने जाते हैं।
हिन्दी का क्षेत्र
हिन्दी का भौगोलिक क्षेत्र बहुत विशाल है। इसे 'हिन्दी प्रदेश' या 'हिन्दी पट्टी' कहा जाता है।
| क्षेत्र | राज्य / प्रदेश |
|---|---|
| हिन्दी भाषी राज्य | उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली |
| हिन्दी जहाँ व्यापक रूप से समझी जाती है | महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब आदि लगभग पूरे भारत में |
| विदेशों में | मॉरीशस, फ़िजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद, गयाना, नेपाल आदि |
बोलने वालों की संख्या की दृष्टि से हिन्दी विश्व की सबसे बड़ी भाषाओं में गिनी जाती है।
हिन्दी : उद्भव तथा विकास
भारतीय आर्य भाषाओं की विकास-यात्रा
हिन्दी अचानक पैदा नहीं हुई। यह संस्कृत से पालि, प्राकृत और अपभ्रंश होते हुए विकसित हुई है।
| काल | समय (लगभग) | भाषाएँ |
|---|---|---|
| प्राचीन भारतीय आर्य भाषा | 1500 ई.पू. - 500 ई.पू. | वैदिक संस्कृत, लौकिक संस्कृत |
| मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषा | 500 ई.पू. - 1000 ई. | पालि, प्राकृत, अपभ्रंश |
| आधुनिक भारतीय आर्य भाषा | 1000 ई. से अब तक | हिन्दी, मराठी, बांग्ला, गुजराती, पंजाबी आदि |
अपभ्रंश से हिन्दी
- शौरसेनी अपभ्रंश से पश्चिमी हिन्दी और राजस्थानी का विकास हुआ।
- अर्धमागधी अपभ्रंश से पूर्वी हिन्दी का विकास हुआ।
- मागधी अपभ्रंश से बिहारी बोलियाँ विकसित हुईं।
- अपभ्रंश और पुरानी हिन्दी के बीच की संक्रमण-भाषा को 'अवहट्ठ' कहा गया।
हिन्दी के विकास के तीन चरण
- आदिकाल (लगभग 1000 - 1500 ई.) - अपभ्रंश का प्रभाव अधिक। सिद्ध, नाथ, जैन और रासो साहित्य। अमीर ख़ुसरो की पहेलियाँ और मुकरियाँ खड़ी बोली का आरंभिक रूप दिखाती हैं।
- मध्यकाल (लगभग 1500 - 1800 ई.) - ब्रज और अवधी साहित्य की प्रमुख भाषाएँ बनीं। सूरदास ने ब्रज में और तुलसीदास व जायसी ने अवधी में रचना की। कबीर की भाषा 'सधुक्कड़ी' कहलाती है।
- आधुनिक काल (1800 ई. से अब तक) - खड़ी बोली गद्य और फिर पद्य की भाषा बनी। कलकत्ता के फ़ोर्ट विलियम कॉलेज (1800) में लल्लूलाल और सदल मिश्र ने गद्य रचनाएँ कीं। भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने हिन्दी गद्य को नया रूप दिया। महावीरप्रसाद द्विवेदी ने 'सरस्वती' पत्रिका द्वारा भाषा का परिष्कार और मानकीकरण किया।
स्वतंत्रता आंदोलन में हिन्दी जन-जन की भाषा बनी और 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने इसे संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया।
संभावित परीक्षा प्रश्न
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'हिन्दी' शब्द की व्युत्पत्ति बताते हुए उसके अर्थ और विभिन्न प्रयोगों पर प्रकाश डालिए।
- (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी भाषा के उद्भव और विकास का विस्तार से वर्णन कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) हिन्दी का क्षेत्र - टिप्पणी लिखिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) अपभ्रंश और हिन्दी का संबंध स्पष्ट कीजिए।
- (लघूत्तरी प्रश्न) हिन्दी के स्वरूप की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।