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हिन्दी भाषा का इतिहास BAHIN T1-101

RTMNU BA Semester 1 · Hindi Language (हिन्दी भाषा) · 4 units · हर इकाई के नोट्स

UniversityRTMNU – राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर
CourseB.A. (Four Year UG Programme, NEP 2020) – Hindi Language (हिन्दी भाषा)
SemesterSemester I
Paper codeBAHIN T1-101
Paper titleहिन्दी भाषा का इतिहास
CategoryMajor T-1 · Major (DSC) – मुख्य विषय
Credits4 credits (theory, 4 घंटे प्रति सप्ताह)
Marksसैद्धांतिक परीक्षा 3 घंटे: 80 अंक + आंतरिक मूल्यांकन (CIE) 20 अंक = 100; उत्तीर्ण होने के लिए न्यूनतम 40
Syllabusas per official RTMNU NEP 2020 syllabus 2024-25 (B.A. Hindi Language Sem I to IV, लागू सत्र 2024-25 से)

इकाइयों के विषय आधिकारिक RTMNU पाठ्यक्रम के अनुसार हैं। Official RTMNU syllabus page · All RTMNU BA Hindi papers

Units

  1. 1इकाई I: हिन्दी भाषा : स्वरूप तथा विकासNotes
  2. 2इकाई II: हिन्दी की उपभाषाएँ तथा बोलियाँ - सामान्य परिचयNotes
  3. 3इकाई III: हिन्दी के विविध रूपNotes
  4. 4इकाई IV: हिन्दी शब्द भंडारNotes

RTMNU BA Sem 1 · BAHIN T1-101 · इकाई I

इकाई I: हिन्दी भाषा : स्वरूप तथा विकास

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • हिन्दी : अर्थ तथा प्रयोग
  • हिन्दी : स्वरूप तथा क्षेत्र
  • हिन्दी : उद्भव तथा विकास

हिन्दी : अर्थ तथा प्रयोग

'हिन्दी' शब्द की व्युत्पत्ति

'हिन्दी' शब्द मूल रूप से फ़ारसी भाषा का है। संस्कृत का 'सिन्धु' शब्द नदी और उसके आसपास के प्रदेश के लिए प्रयुक्त होता था। प्राचीन ईरानी (फ़ारसी) भाषा में 'स' ध्वनि 'ह' में बदल जाती थी, इसलिए 'सिन्धु' का रूप 'हिन्दु' या 'हिन्द' हो गया। 'हिन्द' में 'ईक' प्रत्यय जुड़कर 'हिन्दीक' बना और बाद में 'क' का लोप होकर 'हिन्दी' शब्द बना।

  • सिन्धु → हिन्दु → हिन्द (देश का नाम)
  • हिन्द + ईक → हिन्दीक → हिन्दी (हिन्द का, हिन्द से संबंधित)

इस प्रकार 'हिन्दी' का शाब्दिक अर्थ है - हिन्द (भारत) का या हिन्द की भाषा।

अर्थ का विकास

  • आरंभ में - ईरानी और अरबी लोग भारत की किसी भी भाषा या भारत से जुड़ी हर वस्तु को 'हिन्दी' कहते थे।
  • मध्यकाल में - अमीर ख़ुसरो ने अपनी भाषा के लिए 'हिन्दवी' और 'हिन्दी' शब्दों का प्रयोग किया। उस समय दिल्ली-मेरठ के आसपास की बोली को 'हिन्दवी', 'हिन्दुई', 'दक्खिनी', 'रेख़्ता' आदि नाम भी मिले।
  • आधुनिक काल में - 'हिन्दी' शब्द मुख्य रूप से खड़ी बोली पर आधारित मानक भाषा के लिए रूढ़ हो गया।

'हिन्दी' शब्द के प्रयोग (अर्थ के स्तर)

  1. व्यापक अर्थ - हिन्दी प्रदेश की सभी उपभाषाएँ और बोलियाँ (ब्रज, अवधी, भोजपुरी, राजस्थानी आदि) हिन्दी के अंतर्गत आती हैं।
  2. भाषा-वैज्ञानिक अर्थ - केवल पश्चिमी हिन्दी और पूर्वी हिन्दी को ही हिन्दी माना जाता है।
  3. सीमित अर्थ - खड़ी बोली पर आधारित मानक हिन्दी, जो शिक्षा, साहित्य, प्रशासन और संचार की भाषा है।
  4. संवैधानिक अर्थ - संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी संघ की राजभाषा है।
याद रखें: 'हिन्दी' शब्द फ़ारसी मूल का है, पर भाषा भारतीय आर्य परिवार की है।

हिन्दी : स्वरूप तथा क्षेत्र

हिन्दी का स्वरूप

हिन्दी एक जीवंत, लचीली और समन्वयशील भाषा है। इसका स्वरूप कई स्तरों पर दिखाई देता है -

  • परिवार - हिन्दी भारोपीय (भारत-यूरोपीय) भाषा परिवार की भारतीय आर्य शाखा की आधुनिक भाषा है।
  • लिपि - हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। यह लिपि वैज्ञानिक है - जैसा बोला जाता है, वैसा ही लिखा जाता है।
  • शब्द भंडार - इसमें तत्सम, तद्भव, देशज और विदेशी (अरबी, फ़ारसी, अंग्रेज़ी, पुर्तगाली आदि) सभी प्रकार के शब्द हैं।
  • व्याकरण - इसमें दो लिंग (पुल्लिंग, स्त्रीलिंग) और दो वचन (एकवचन, बहुवचन) हैं। वाक्य-क्रम सामान्यतः कर्ता - कर्म - क्रिया होता है।
  • रूप-विविधता - बोलचाल की हिन्दी, साहित्यिक हिन्दी, मानक हिन्दी, कार्यालयी हिन्दी, मीडिया की हिन्दी - सब इसके रूप हैं।
  • दक्खिनी, उर्दू और हिन्दुस्तानी - ये भी खड़ी बोली के ही अलग-अलग शैलीगत रूप माने जाते हैं।

हिन्दी का क्षेत्र

हिन्दी का भौगोलिक क्षेत्र बहुत विशाल है। इसे 'हिन्दी प्रदेश' या 'हिन्दी पट्टी' कहा जाता है।

क्षेत्रराज्य / प्रदेश
हिन्दी भाषी राज्यउत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली
हिन्दी जहाँ व्यापक रूप से समझी जाती हैमहाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब आदि लगभग पूरे भारत में
विदेशों मेंमॉरीशस, फ़िजी, सूरीनाम, त्रिनिदाद, गयाना, नेपाल आदि

बोलने वालों की संख्या की दृष्टि से हिन्दी विश्व की सबसे बड़ी भाषाओं में गिनी जाती है।

हिन्दी : उद्भव तथा विकास

भारतीय आर्य भाषाओं की विकास-यात्रा

हिन्दी अचानक पैदा नहीं हुई। यह संस्कृत से पालि, प्राकृत और अपभ्रंश होते हुए विकसित हुई है।

कालसमय (लगभग)भाषाएँ
प्राचीन भारतीय आर्य भाषा1500 ई.पू. - 500 ई.पू.वैदिक संस्कृत, लौकिक संस्कृत
मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषा500 ई.पू. - 1000 ई.पालि, प्राकृत, अपभ्रंश
आधुनिक भारतीय आर्य भाषा1000 ई. से अब तकहिन्दी, मराठी, बांग्ला, गुजराती, पंजाबी आदि

अपभ्रंश से हिन्दी

  • शौरसेनी अपभ्रंश से पश्चिमी हिन्दी और राजस्थानी का विकास हुआ।
  • अर्धमागधी अपभ्रंश से पूर्वी हिन्दी का विकास हुआ।
  • मागधी अपभ्रंश से बिहारी बोलियाँ विकसित हुईं।
  • अपभ्रंश और पुरानी हिन्दी के बीच की संक्रमण-भाषा को 'अवहट्ठ' कहा गया।

हिन्दी के विकास के तीन चरण

  1. आदिकाल (लगभग 1000 - 1500 ई.) - अपभ्रंश का प्रभाव अधिक। सिद्ध, नाथ, जैन और रासो साहित्य। अमीर ख़ुसरो की पहेलियाँ और मुकरियाँ खड़ी बोली का आरंभिक रूप दिखाती हैं।
  2. मध्यकाल (लगभग 1500 - 1800 ई.) - ब्रज और अवधी साहित्य की प्रमुख भाषाएँ बनीं। सूरदास ने ब्रज में और तुलसीदास व जायसी ने अवधी में रचना की। कबीर की भाषा 'सधुक्कड़ी' कहलाती है।
  3. आधुनिक काल (1800 ई. से अब तक) - खड़ी बोली गद्य और फिर पद्य की भाषा बनी। कलकत्ता के फ़ोर्ट विलियम कॉलेज (1800) में लल्लूलाल और सदल मिश्र ने गद्य रचनाएँ कीं। भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने हिन्दी गद्य को नया रूप दिया। महावीरप्रसाद द्विवेदी ने 'सरस्वती' पत्रिका द्वारा भाषा का परिष्कार और मानकीकरण किया।

स्वतंत्रता आंदोलन में हिन्दी जन-जन की भाषा बनी और 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने इसे संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया।

परीक्षा टिप: उद्भव के प्रश्न में संस्कृत → पालि → प्राकृत → अपभ्रंश → हिन्दी का क्रम तालिका के साथ लिखें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) 'हिन्दी' शब्द की व्युत्पत्ति बताते हुए उसके अर्थ और विभिन्न प्रयोगों पर प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी भाषा के उद्भव और विकास का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) हिन्दी का क्षेत्र - टिप्पणी लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) अपभ्रंश और हिन्दी का संबंध स्पष्ट कीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) हिन्दी के स्वरूप की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।

RTMNU BA Sem 1 · BAHIN T1-101 · इकाई II

इकाई II: हिन्दी की उपभाषाएँ तथा बोलियाँ - सामान्य परिचय

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • पश्चिमी हिन्दी
  • पूर्वी हिन्दी
  • राजस्थानी
  • बिहार - झारखंडी
  • पहाड़ी समुदाय

व्यापक अर्थ में हिन्दी प्रदेश में बोली जाने वाली सभी बोलियाँ हिन्दी के अंतर्गत आती हैं। भाषा-वैज्ञानिकों (जॉर्ज ग्रियर्सन, डॉ. धीरेन्द्र वर्मा आदि) ने इन्हें पाँच उपभाषाओं में बाँटा है। इन पाँच उपभाषाओं के अंतर्गत लगभग 17-18 बोलियाँ आती हैं।

उपभाषामूल अपभ्रंशप्रमुख बोलियाँ
पश्चिमी हिन्दीशौरसेनीखड़ी बोली (कौरवी), ब्रजभाषा, हरियाणवी (बाँगरू), बुंदेली, कन्नौजी
पूर्वी हिन्दीअर्धमागधीअवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी
राजस्थानीशौरसेनी (नागर)मारवाड़ी, जयपुरी (ढूँढाड़ी), मेवाती, मालवी
बिहारीमागधीभोजपुरी, मगही, मैथिली
पहाड़ीखस / शौरसेनीपश्चिमी पहाड़ी, मध्य पहाड़ी (गढ़वाली, कुमाऊँनी)

पश्चिमी हिन्दी

पश्चिमी हिन्दी का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है। इसका क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश के कुछ भागों तक फैला है। यह हिन्दी की सबसे महत्वपूर्ण उपभाषा है।

  • खड़ी बोली (कौरवी) - मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर, सहारनपुर, बिजनौर और दिल्ली के आसपास बोली जाती है। आज की मानक हिन्दी और उर्दू दोनों का आधार यही है। आधुनिक हिन्दी साहित्य की भाषा यही है।
  • ब्रजभाषा - मथुरा, आगरा, अलीगढ़ क्षेत्र की बोली। मध्यकाल में यह कृष्णभक्ति और रीतिकाल की प्रमुख काव्यभाषा रही। सूरदास, नंददास, बिहारी, घनानंद इसके प्रमुख कवि हैं।
  • हरियाणवी (बाँगरू) - हरियाणा प्रदेश की बोली।
  • बुंदेली - झाँसी, ग्वालियर, सागर आदि बुंदेलखंड क्षेत्र की बोली। लोककवि ईसुरी की फागें प्रसिद्ध हैं।
  • कन्नौजी - कन्नौज, फ़र्रुख़ाबाद, इटावा क्षेत्र की बोली। यह ब्रज के बहुत निकट है।

पूर्वी हिन्दी

पूर्वी हिन्दी का विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से हुआ। यह पश्चिमी हिन्दी और बिहारी के बीच के क्षेत्र में बोली जाती है।

  • अवधी - लखनऊ, अयोध्या, सुल्तानपुर, रायबरेली आदि अवध क्षेत्र की बोली। मध्यकाल में यह साहित्य की प्रमुख भाषा रही। तुलसीदास का 'रामचरितमानस' और मलिक मुहम्मद जायसी का 'पद्मावत' अवधी की श्रेष्ठ रचनाएँ हैं।
  • बघेली - रीवा और बघेलखंड क्षेत्र की बोली। यह अवधी से बहुत मिलती है।
  • छत्तीसगढ़ी - छत्तीसगढ़ राज्य (रायपुर, बिलासपुर आदि) की बोली। इसमें लोकगीतों और लोककथाओं की समृद्ध परंपरा है।

राजस्थानी

राजस्थानी का विकास शौरसेनी (नागर) अपभ्रंश से माना जाता है। यह राजस्थान और मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र में बोली जाती है। प्राचीन राजस्थानी को 'डिंगल' भी कहा गया।

  • मारवाड़ी - जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर क्षेत्र। यह राजस्थानी की सबसे प्रमुख बोली है। मीराबाई के पदों में राजस्थानी का प्रभाव दिखाई देता है।
  • जयपुरी (ढूँढाड़ी) - जयपुर और आसपास का क्षेत्र।
  • मेवाती - अलवर, भरतपुर और मेवात क्षेत्र।
  • मालवी - इंदौर, उज्जैन आदि मालवा क्षेत्र।

'ढोला मारू रा दूहा' राजस्थानी का प्रसिद्ध लोककाव्य है। वीरगाथाओं की परंपरा भी इसी क्षेत्र से जुड़ी है।

बिहार - झारखंडी (बिहारी)

बिहारी उपभाषा का विकास मागधी अपभ्रंश से हुआ। यह बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बोली जाती है।

  • भोजपुरी - आरा (भोजपुर), बलिया, गाज़ीपुर, वाराणसी, छपरा आदि क्षेत्र। बोलने वालों की संख्या की दृष्टि से यह बहुत बड़ी बोली है। भिखारी ठाकुर भोजपुरी लोकनाट्य के प्रसिद्ध कलाकार थे। मॉरीशस, सूरीनाम आदि देशों में भी भोजपुरी बोली जाती है।
  • मगही - पटना, गया और मगध क्षेत्र की बोली।
  • मैथिली - दरभंगा, मधुबनी, सहरसा आदि मिथिला क्षेत्र। विद्यापति की 'पदावली' मैथिली की प्रसिद्ध रचना है। अब मैथिली संविधान की आठवीं अनुसूची में एक स्वतंत्र भाषा के रूप में शामिल है।

झारखंड क्षेत्र में नागपुरी (सादरी) जैसी बोलियाँ भी प्रचलित हैं, जो संपर्क भाषा का काम करती हैं।

पहाड़ी समुदाय

पहाड़ी उपभाषा हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में बोली जाती है। इसका विकास खस अपभ्रंश से माना जाता है, जिस पर शौरसेनी का भी प्रभाव है।

  • पश्चिमी पहाड़ी - हिमाचल प्रदेश की बोलियाँ, जैसे मंडियाली, कुलुई, चंबियाली आदि।
  • मध्य पहाड़ी - उत्तराखंड की दो प्रमुख बोलियाँ - गढ़वाली (गढ़वाल क्षेत्र) और कुमाऊँनी (कुमाऊँ क्षेत्र - अल्मोड़ा, नैनीताल)।
  • पूर्वी पहाड़ी - नेपाली, जिसे ग्रियर्सन ने पहाड़ी समूह में रखा, पर इसे हिन्दी की उपभाषा नहीं माना जाता।

पहाड़ी बोलियों में लोकगीतों, लोकगाथाओं और लोकनृत्यों की समृद्ध परंपरा है।

परीक्षा टिप: उपभाषाओं के प्रश्न में पहले वर्गीकरण तालिका बनाइए, फिर प्रत्येक बोली का क्षेत्र और एक-दो प्रमुख साहित्यकार लिखिए।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी की उपभाषाओं और बोलियों का वर्गीकरण करते हुए उनका सामान्य परिचय दीजिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) पश्चिमी हिन्दी और पूर्वी हिन्दी की प्रमुख बोलियों का क्षेत्र और साहित्यिक महत्व स्पष्ट कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) ब्रजभाषा - टिप्पणी लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) अवधी - टिप्पणी लिखिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) बिहारी उपभाषा की प्रमुख बोलियाँ लिखिए।

RTMNU BA Sem 1 · BAHIN T1-101 · इकाई III

इकाई III: हिन्दी के विविध रूप

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • बोलचाल की भाषा
  • राष्ट्रभाषा
  • राजभाषा
  • संपर्क भाषा
  • संचार भाषा

एक ही भाषा अलग-अलग परिस्थितियों और प्रयोजनों में अलग-अलग रूप धारण करती है। हिन्दी भी घर की बातचीत से लेकर संसद, न्यायालय, कार्यालय और मीडिया तक अनेक रूपों में प्रयुक्त होती है। इन्हें ही हिन्दी के विविध रूप कहते हैं।

बोलचाल की भाषा

परिभाषा: दैनिक जीवन में परिवार, मित्रों और समाज के साथ सहज रूप से बातचीत के लिए जिस भाषा का प्रयोग होता है, उसे बोलचाल की भाषा कहते हैं।

विशेषताएँ

  • यह सरल, सहज और अनौपचारिक होती है।
  • इसमें व्याकरण के नियमों का कड़ाई से पालन नहीं होता।
  • इसमें स्थानीय बोलियों और अंग्रेज़ी, उर्दू आदि के शब्द खुलकर मिल जाते हैं, जैसे - 'टाइम हो गया', 'बस यार', 'चलो निकलते हैं'।
  • हाव-भाव, लहजा और उच्चारण का महत्व अधिक होता है।
  • क्षेत्र के अनुसार इसका रूप बदल जाता है - मुंबई की हिन्दी, नागपुर की हिन्दी, बिहार की हिन्दी अलग सुनाई देती है।

बोलचाल की भाषा ही किसी भाषा का जीवित आधार है। इसी से मानक भाषा को नए शब्द और नई ऊर्जा मिलती है।

राष्ट्रभाषा

परिभाषा: जो भाषा पूरे राष्ट्र की भावनाओं, संस्कृति और एकता का प्रतीक हो और देश के अधिकांश लोगों द्वारा बोली-समझी जाती हो, उसे राष्ट्रभाषा कहते हैं।

राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी

  • स्वतंत्रता आंदोलन के समय हिन्दी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा बनी।
  • स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक जैसे अहिन्दी भाषी नेताओं ने भी हिन्दी के प्रचार पर बल दिया।
  • गांधीजी की प्रेरणा से दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा (1918) और वर्धा की राष्ट्रभाषा प्रचार समिति जैसी संस्थाएँ बनीं।
  • हिन्दी भारत की सामासिक संस्कृति, लोक-परंपरा और भक्ति साहित्य की वाहक है।
याद रखें: संविधान में 'राष्ट्रभाषा' शब्द का प्रयोग नहीं है। संविधान हिन्दी को 'संघ की राजभाषा' कहता है। राष्ट्रभाषा एक भावनात्मक और सांस्कृतिक पद है।

राजभाषा

परिभाषा: जिस भाषा में किसी देश या राज्य का सरकारी कामकाज (प्रशासन, संसद, कानून, पत्राचार) होता है, उसे राजभाषा कहते हैं।

संवैधानिक प्रावधान (भाग 17, अनुच्छेद 343 से 351)

अनुच्छेदविषय
343संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी; अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप; 15 वर्ष तक अंग्रेज़ी का प्रयोग जारी
344राजभाषा के लिए आयोग और संसदीय समिति
345 - 347राज्यों की राजभाषाएँ और राज्यों के बीच पत्राचार की भाषा
348उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और कानूनों की भाषा
350शिकायत निवारण के लिए भाषा
351हिन्दी के विकास और प्रसार के लिए निदेश
  • संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। इसलिए हर वर्ष 14 सितंबर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है।
  • राजभाषा अधिनियम 1963 (संशोधन 1967) के अनुसार हिन्दी के साथ अंग्रेज़ी का प्रयोग भी जारी है।
  • राजभाषा नियम 1976 के अनुसार राज्यों को 'क', 'ख' और 'ग' क्षेत्रों में बाँटा गया है।
  • महाराष्ट्र की राजभाषा मराठी है, जबकि हिन्दी संघ की राजभाषा है।

संपर्क भाषा

परिभाषा: अलग-अलग भाषाएँ बोलने वाले लोग आपस में विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए जिस भाषा का प्रयोग करते हैं, उसे संपर्क भाषा कहते हैं।

  • भारत बहुभाषी देश है। यहाँ एक तमिल भाषी और एक पंजाबी भाषी अक्सर हिन्दी के माध्यम से बात करते हैं।
  • तीर्थयात्रा, व्यापार, रेल-यात्रा, सेना, फ़िल्म और नौकरी के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले लोग हिन्दी का प्रयोग करते हैं।
  • हिन्दी फ़िल्मों और गीतों ने हिन्दी को पूरे देश में संपर्क भाषा बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
  • संपर्क भाषा सरल होती है और उसमें अनेक भाषाओं के शब्द घुल-मिल जाते हैं।

विदेशों में बसे भारतीयों के बीच भी हिन्दी संपर्क भाषा का काम करती है। पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में हुआ था, इसलिए 10 जनवरी को 'विश्व हिन्दी दिवस' मनाया जाता है।

संचार भाषा

परिभाषा: समाचार, विचार और मनोरंजन को जनसंचार माध्यमों द्वारा बड़े जनसमूह तक पहुँचाने के लिए जिस भाषा का प्रयोग होता है, उसे संचार भाषा कहते हैं।

संचार माध्यमों में हिन्दी

  • मुद्रित माध्यम - समाचारपत्र और पत्रिकाएँ। पहला हिन्दी समाचारपत्र 'उदन्त मार्तण्ड' 30 मई 1826 को कलकत्ता से पं. जुगलकिशोर शुक्ल ने निकाला। इसी कारण 30 मई को हिन्दी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक माध्यम - रेडियो (आकाशवाणी), टेलीविज़न (दूरदर्शन और निजी चैनल), सिनेमा।
  • नव माध्यम - इंटरनेट, वेबसाइट, ब्लॉग, सोशल मीडिया, यूट्यूब और मोबाइल ऐप। यूनिकोड के कारण हिन्दी में टाइप करना और खोजना सरल हो गया है।

संचार भाषा की विशेषताएँ

  • सरल, स्पष्ट और छोटे वाक्य।
  • आम पाठक-श्रोता की समझ में आने वाले शब्द।
  • आकर्षक शीर्षक और रोचक प्रस्तुति।
  • माध्यम के अनुसार बदलाव - रेडियो के लिए सुनने योग्य, टीवी के लिए दृश्य के अनुकूल भाषा।
परीक्षा टिप: 'राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर' अक्सर पूछा जाता है - एक को भावनात्मक/सांस्कृतिक और दूसरी को संवैधानिक/प्रशासनिक बताइए।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) राजभाषा के रूप में हिन्दी की संवैधानिक स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डालिए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी के विविध रूपों का परिचय देते हुए संपर्क भाषा और संचार भाषा के रूप में हिन्दी का महत्व स्पष्ट कीजिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) बोलचाल की भाषा - टिप्पणी लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर स्पष्ट कीजिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) संचार भाषा की विशेषताएँ लिखिए।

RTMNU BA Sem 1 · BAHIN T1-101 · इकाई IV

इकाई IV: हिन्दी शब्द भंडार

पाठ्यक्रम (RTMNU Syllabus)

  • तत्सम
  • तद्भव
  • देशज

शब्द भंडार का अर्थ है - किसी भाषा में प्रयुक्त होने वाले सभी शब्दों का समूह। हिन्दी का शब्द भंडार बहुत समृद्ध है, क्योंकि इसने संस्कृत से लेकर लोकभाषाओं और विदेशी भाषाओं तक से शब्द ग्रहण किए हैं।

स्रोत (उत्पत्ति) के आधार पर शब्दों के भेद

भेदअर्थउदाहरण
तत्समसंस्कृत के शब्द, बिना बदलेअग्नि, दुग्ध, सूर्य
तद्भवसंस्कृत से बदलकर बने शब्दआग, दूध, सूरज
देशजलोक में अपने आप बने शब्दलोटा, पगड़ी, खिड़की
विदेशज (आगत)विदेशी भाषाओं से आए शब्दकिताब, स्कूल, चाबी

पाठ्यक्रम में मुख्य रूप से तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों का अध्ययन है।

तत्सम

व्युत्पत्ति: तत् + सम = उसके समान। यहाँ 'तत्' का अर्थ है संस्कृत।

परिभाषा: संस्कृत के जो शब्द बिना किसी परिवर्तन के अपने मूल रूप में हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं, उन्हें तत्सम शब्द कहते हैं।

उदाहरण

अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, सूर्य, चन्द्र, ग्राम, क्षेत्र, कर्म, धर्म, विद्या, पुस्तक, हस्त, मुख, कर्ण, दुग्ध, घृत, आम्र, मयूर, शिक्षा।

विशेषताएँ और पहचान

  • इनमें प्रायः 'क्ष', 'त्र', 'ज्ञ', 'ऋ' और 'ष' जैसे वर्ण मिलते हैं, जैसे - क्षेत्र, पत्र, ज्ञान, ऋषि, वर्षा।
  • संयुक्ताक्षरों और रेफ (र्) का अधिक प्रयोग होता है, जैसे - कर्म, धर्म, सूर्य।
  • विसर्ग वाले शब्द भी तत्सम होते हैं, जैसे - प्रातः, अतः, दुःख।
  • ये शब्द औपचारिक, साहित्यिक, शैक्षिक और कार्यालयी हिन्दी में अधिक मिलते हैं।
  • पारिभाषिक शब्दावली (जैसे - आयोग, अधिनियम, संविधान, प्रशासन) प्रायः तत्सम शब्दों से बनाई जाती है।

तद्भव

व्युत्पत्ति: तत् + भव = उससे उत्पन्न।

परिभाषा: संस्कृत के जो शब्द पालि, प्राकृत और अपभ्रंश से होते हुए समय के साथ रूप बदलकर हिन्दी में आए हैं, उन्हें तद्भव शब्द कहते हैं।

तत्सम - तद्भव तालिका

तत्समतद्भवतत्समतद्भव
अग्निआगहस्तहाथ
दुग्धदूधकर्णकान
सूर्यसूरजमुखमुँह
ग्रामगाँवअक्षिआँख
कर्मकामक्षेत्रखेत
घृतघीचन्द्रचाँद
सप्तसातउष्ट्रऊँट
दधिदहीओष्ठहोंठ

तद्भव बनने के कारण

  • उच्चारण की सुविधा - सामान्य लोग कठिन संयुक्ताक्षरों को सरल कर देते हैं (हस्त → हाथ)।
  • मुख-सुख और लोक प्रयोग - बोलते-बोलते ध्वनियाँ घिसती और बदलती हैं।
  • भाषा का स्वाभाविक विकास - प्राकृत और अपभ्रंश काल में ध्वनि-परिवर्तन हुआ।

प्रमुख ध्वनि परिवर्तन

  • 'क्ष' का 'ख' या 'छ' होना - क्षेत्र → खेत, अक्षि → आँख।
  • संयुक्त व्यंजन का सरल होना - सप्त → सात, दुग्ध → दूध।
  • अनुनासिकता आना - ग्राम → गाँव, चन्द्र → चाँद।
  • 'ष' का 'स' या 'ख' होना।

तद्भव शब्द हिन्दी की आत्मा माने जाते हैं, क्योंकि बोलचाल की हिन्दी इन्हीं से बनी है।

देशज

व्युत्पत्ति: देश + ज = देश में जन्मा।

परिभाषा: जिन शब्दों का स्रोत न संस्कृत है और न कोई विदेशी भाषा, बल्कि जो क्षेत्रीय लोकभाषाओं और जन-सामान्य की आवश्यकता से अपने आप बन गए हैं, उन्हें देशज शब्द कहते हैं।

उदाहरण

लोटा, पगड़ी, खिड़की, डिबिया, झोला, ठेठ, जूता, कटोरा, चिड़िया, तेंदुआ, गड़बड़, झंझट, खटखटाना, फुनगी, ठेस।

विशेषताएँ

  • इनकी उत्पत्ति का कोई निश्चित शास्त्रीय स्रोत नहीं मिलता।
  • कई देशज शब्द ध्वनि की नकल से बने हैं (अनुकरणात्मक), जैसे - खटखटाना, भनभनाना, गड़गड़ाहट।
  • कुछ शब्द द्रविड़ और आदिवासी (कोल, संथाल आदि) भाषाओं से भी आए माने जाते हैं।
  • ये शब्द ग्रामीण जीवन, घरेलू वस्तुओं और लोक व्यवहार से जुड़े होते हैं।
  • आचार्य हेमचंद्र ने 'देशीनाममाला' में ऐसे देशी शब्दों का संग्रह किया था।

तत्सम, तद्भव और देशज की तुलना

आधारतत्समतद्भवदेशज
स्रोतसंस्कृत (मूल रूप)संस्कृत (बदला रूप)लोकभाषा
प्रयोगसाहित्य, शास्त्र, कार्यालयबोलचाल और साहित्यबोलचाल, लोकजीवन
उदाहरणहस्तहाथलोटा

हिन्दी शब्द भंडार की समृद्धि का महत्व

  • तत्सम शब्द हिन्दी को गंभीरता, शुद्धता और ज्ञान-विज्ञान की अभिव्यक्ति की क्षमता देते हैं।
  • तद्भव शब्द हिन्दी को सहज, मधुर और जनता के निकट बनाते हैं।
  • देशज शब्द हिन्दी में लोकजीवन की मिट्टी की सुगंध और क्षेत्रीय रंग भरते हैं।
  • इन तीनों के साथ अरबी-फ़ारसी (किताब, अदालत) और अंग्रेज़ी (स्टेशन, डॉक्टर) के आगत शब्दों ने हिन्दी को आधुनिक और व्यावहारिक बनाया है।

इस प्रकार हिन्दी का शब्द भंडार उसकी लचीली और ग्रहणशील प्रकृति का प्रमाण है।

परीक्षा टिप: शब्द भंडार के प्रश्न में हर भेद की परिभाषा के साथ कम से कम 8-10 उदाहरण और एक तत्सम-तद्भव तालिका अवश्य दें।

संभावित परीक्षा प्रश्न

  1. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) हिन्दी शब्द भंडार का परिचय देते हुए तत्सम, तद्भव और देशज शब्दों को उदाहरण सहित समझाइए।
  2. (दीर्घोत्तरी प्रश्न) तद्भव शब्द किसे कहते हैं? तत्सम से तद्भव बनने की प्रक्रिया और कारणों पर प्रकाश डालिए।
  3. (लघूत्तरी प्रश्न) तत्सम शब्दों की पहचान - टिप्पणी लिखिए।
  4. (लघूत्तरी प्रश्न) देशज शब्द - उदाहरण सहित टिप्पणी लिखिए।
  5. (लघूत्तरी प्रश्न) निम्नलिखित तत्सम शब्दों के तद्भव रूप लिखिए - अग्नि, हस्त, ग्राम, दुग्ध।